
Bandar aur baya ki kahani पंचतंत्र की एक छोटी पर बहुत काम की कहानी है। बया एक छोटी सी चिड़िया है, जो तिनकों से बहुत सुंदर, लटकता हुआ घोंसला बनाती है। एक दिन तेज़ बारिश में ठिठुरते बंदर को देखकर बया उसे भलाई के लिए एक सलाह देती है, पर बंदर को वह सलाह बुरी लग जाती है। फिर जो होता है, वह बच्चों को एक बड़ी बात सिखाता है: सलाह सोच समझकर और सही इंसान को ही देनी चाहिए। नीचे यह कहानी बहुत आसान हिंदी में लिखी है।
| बात | जानकारी |
|---|---|
| पढ़ने का समय | 3 मिनट |
| किस उम्र के बच्चों के लिए | 5 से 10 साल |
| कहानी के पात्र | बया चिड़िया और बंदर |
| सीख | बिना माँगे सलाह हर किसी को मत दो, ख़ासकर उसे जो सुनना ही न चाहे |
विषय सूची
Bandar Aur Baya Ki Kahani: बंदर और बया की कहानी
एक जंगल में एक बड़ा सा पेड़ था। उसकी एक डाल पर बया चिड़िया का घोंसला लटकता था। बया ने उसे एक एक तिनका चुनकर, बड़ी मेहनत से बुना था। घोंसला इतना मज़बूत और गोल था कि उसमें न बारिश का पानी घुसता था, न ठंडी हवा।
बारिश की ठंडी शाम
एक दिन बहुत तेज़ बारिश हुई। ठंडी हवा भी चलने लगी। बया अपने घोंसले में आराम से, गरम होकर बैठी थी।
तभी एक बंदर भीगता हुआ उसी पेड़ के नीचे आकर बैठ गया। वह पूरी तरह गीला था और ठंड से काँप रहा था। उसके दाँत किटकिटा रहे थे।
बया की सलाह
बया को बंदर पर दया आई। उसने अपने घोंसले से झाँककर कहा:
“बंदर भाई, तुम्हें देखकर मुझे बहुत दुख हो रहा है। तुम्हारे तो इंसानों जैसे हाथ पैर हैं। मैं तो छोटी सी चिड़िया हूँ, फिर भी मैंने अपनी चोंच से अपना घर बना लिया। तुम भी अपने लिए एक घर क्यों नहीं बना लेते? फिर तुम्हें बारिश में ऐसे ठिठुरना नहीं पड़ेगा।”
बंदर का ग़ुस्सा
बया ने तो भलाई के लिए कहा था, पर बंदर को यह बात बहुत बुरी लगी। उसे लगा कि एक छोटी सी चिड़िया उसे सिखा रही है और उसका मज़ाक़ उड़ा रही है।
वह ग़ुस्से में बोला: “अरे छोटी चिड़िया! तू मुझे सिखाएगी कि मुझे क्या करना चाहिए? रुक, अभी तुझे बताता हूँ!”
बंदर उछलकर पेड़ पर चढ़ा और बया के सुंदर घोंसले को खींचकर तोड़ डाला। घोंसले के तिनके बारिश में बिखर गए। बेचारी बया डरकर उड़ गई और दूसरे पेड़ की डाल पर जा बैठी। अब वह भी बारिश में भीग रही थी।

बया ने उदास होकर सोचा: “मैंने उसे भलाई के लिए समझाया था, पर जो सुनना ही न चाहे, उसे सलाह देकर मैंने अपना ही घर खो दिया।”
कहानी की सीख
सलाह हमेशा सोच समझकर देनी चाहिए। जो आपसे सलाह न माँगे और जो सुनने को तैयार न हो, उसे बिना माँगे सलाह देने से कई बार अपना ही नुक़सान हो जाता है। साथ ही, कोई भलाई के लिए कुछ कहे, तो ग़ुस्सा करने की जगह उसकी बात पर सोचना चाहिए।
5 लाइन में छोटी कहानी
- बया चिड़िया ने पेड़ पर तिनकों से एक मज़बूत घोंसला बनाया था।
- तेज़ बारिश में एक बंदर भीगकर ठंड से काँपता हुआ पेड़ के नीचे आ बैठा।
- बया ने उसे सलाह दी कि तुम्हारे हाथ पैर हैं, तुम भी अपना घर बना लो।
- बंदर को बात बुरी लगी और उसने ग़ुस्से में बया का घोंसला तोड़ दिया।
- बया बेघर हो गई। सीख: बिना माँगे सलाह हर किसी को मत दो।
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| बया | एक छोटी चिड़िया, जो तिनकों से लटकता हुआ सुंदर घोंसला बुनती है |
| घोंसला | चिड़िया का घर |
| ठिठुरना | ठंड से काँपना |
| किटकिटाना | ठंड से दाँतों का आपस में बजना |
| सलाह | किसी को भले के लिए बताई गई बात |
| बेघर | जिसका घर न रहा हो |
यह कहानी पंचतंत्र में कहाँ आती है?
यह कहानी पंचतंत्र की उन कहानियों में से है जो यह सिखाती हैं कि मूर्ख या ग़ुस्सैल व्यक्ति को बिना माँगे उपदेश नहीं देना चाहिए। कई संस्करणों में यह चौथे भाग लब्धप्रणाशम् (हाथ आई चीज़ गँवाना) में मिलती है, और कुछ किताबों में किसी दूसरे भाग में। कहीं चिड़िया का नाम सूचीमुखी मिलता है, कहीं वह बस एक छोटी चिड़िया है, और कहीं एक की जगह कई बंदर हैं। हमने बच्चों के लिए कहानी को सरल रखा है: बया सुरक्षित उड़ जाती है। पंचतंत्र की कहानियाँ आचार्य विष्णु शर्मा ने राजा अमरशक्ति के तीन राजकुमारों को खेल खेल में समझदारी सिखाने के लिए सुनाई थीं। पूरी जानकारी और सभी कहानियाँ यहाँ हैं: पंचतंत्र की सभी कहानियाँ।
बच्चों के लिए सवाल जवाब
बया का घोंसला कैसा था?
बया ने एक एक तिनका चुनकर मज़बूत, गोल और लटकता हुआ घोंसला बुना था, जिसमें बारिश का पानी नहीं घुसता था।
बंदर पेड़ के नीचे क्यों बैठा था?
तेज़ बारिश हो रही थी। बंदर पूरी तरह भीग गया था और ठंड से काँप रहा था।
बया ने बंदर को क्या सलाह दी?
बया ने कहा कि तुम्हारे तो इंसानों जैसे हाथ पैर हैं, तुम भी अपने लिए एक घर बना लो।
बंदर ने क्या किया?
बंदर को सलाह बुरी लगी। उसने ग़ुस्से में पेड़ पर चढ़कर बया का घोंसला तोड़ दिया।
इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
बिना माँगे सलाह हर किसी को नहीं देनी चाहिए, और कोई भले के लिए कुछ कहे तो ग़ुस्सा नहीं करना चाहिए।
बच्चों को कहानी सुनाने का आसान तरीका
- अगर आसपास बया का घोंसला दिखे (खेतों के पास पेड़ों पर अक्सर लटकते हैं), तो बच्चे को ज़रूर दिखाइए। असली घोंसला देखकर कहानी हमेशा याद रहेगी।
- बच्चे से दोनों तरफ़ से सोचवाइए: “बया को क्या करना चाहिए था?” और “बंदर को क्या करना चाहिए था?”
- समझाएँ कि किसी दोस्त की ग़लती बतानी हो, तो प्यार से और अकेले में बताना ज़्यादा अच्छा है।
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