बंदर और लकड़ी के खूँटे की कहानी (पंचतंत्र): नटखट बंदर की सीख, बच्चों के लिए सरल हिंदी में

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Bandar aur khunta ki kahani: मंदिर बनने की जगह पर आधे चिरे लट्ठे पर उछलते बंदर, बीच में फँसा लकड़ी का खूँटा
मंदिर बनने की जगह पर बंदरों की टोली और बीच में फँसा खूँटा

Bandar aur khunta ki kahani पंचतंत्र की सबसे पहली कहानियों में से एक है। इसमें एक नटखट बंदर ऐसे काम में हाथ डाल देता है जिसके बारे में उसे कुछ पता ही नहीं, और ख़ुद मुसीबत में फँस जाता है। यह कहानी बच्चों को हँसाते हुए सिखाती है कि बिना समझे दूसरों के काम में दख़ल नहीं देना चाहिए। नीचे यह कहानी बहुत आसान हिंदी में लिखी है।

बातजानकारी
पढ़ने का समय3 मिनट
किस उम्र के बच्चों के लिए4 से 9 साल
कहानी के पात्रनटखट बंदर, बंदरों की टोली, बढ़ई (लकड़ी का काम करने वाले)
सीखजिस काम की समझ न हो, उसमें टाँग मत अड़ाओ

Bandar Aur Khunta Ki Kahani: बंदर और लकड़ी के खूँटे की कहानी

एक नगर के पास एक सेठ जी एक सुंदर मंदिर बनवा रहे थे। वहाँ बहुत से बढ़ई काम करते थे। बढ़ई लकड़ी काटकर दरवाज़े, खंभे और खिड़कियाँ बनाते थे।

एक दिन एक बढ़ई लकड़ी का एक बहुत बड़ा लट्ठा आरी से बीच से चीर रहा था। आधा लट्ठा चिर चुका था। तभी दोपहर के खाने का समय हो गया।

बीच में फँसा खूँटा

बढ़ई ने सोचा: “अगर मैं ऐसे ही छोड़ दूँ, तो लट्ठे के दोनों हिस्से वापस जुड़ जाएँगे और फिर से चीरना मुश्किल होगा।” इसलिए उसने चिरे हुए हिस्से के बीच में लकड़ी का एक मोटा खूँटा (कील) फँसा दिया, ताकि दरार खुली रहे।

फिर सब बढ़ई खाना खाने चले गए।

बंदरों की टोली आई

थोड़ी देर बाद पास के पेड़ों से बंदरों की एक टोली वहाँ आ गई। बंदर इधर उधर कूदने लगे, लकड़ियों पर उछलने लगे और औज़ारों को उलट पलट करने लगे।

उनमें एक बंदर बहुत ही नटखट था। उसकी आदत थी कि जो चीज़ दिखे, उसे छूकर, खींचकर देखना। उसकी नज़र उस लट्ठे पर पड़ी, जिसके बीच में खूँटा फँसा था।

नटखट बंदर की शरारत

नटखट बंदर उछलकर लट्ठे के ऊपर बैठ गया। उसके दोनों पैर और लंबी पूँछ लट्ठे की खुली दरार के बीच लटक गए। उसने सोचा: “यह लकड़ी का टुकड़ा यहाँ क्यों फँसा है? चलो, इसे निकालकर देखता हूँ!”

बाक़ी बंदरों ने कहा: “अरे, इसे मत छेड़ो! हमें नहीं पता यह क्यों लगा है।” पर नटखट बंदर ने किसी की नहीं सुनी।

उसने दोनों हाथों से खूँटा पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा। “हूँ… हूँ… हूँ!” आख़िर में पूरी ताक़त लगाकर उसने खूँटा खींच लिया।

लट्ठे पर बैठकर दोनों हाथों से खूँटा खींचता नटखट बंदर
नटखट बंदर ने दोस्तों की बात नहीं मानी और खूँटा खींचने लगा

पूँछ दब गई!

जैसे ही खूँटा बाहर निकला, लट्ठे के दोनों हिस्से “खट्टाक” से आपस में जुड़ गए। बंदर की पूँछ और पैर उनके बीच बुरी तरह दब गए!

बंदर दर्द से ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगा: “बचाओ! बचाओ!” बाक़ी बंदर डरकर भाग गए। बेचारा नटखट बंदर बहुत देर तक वहीं दबा रोता रहा। जब बढ़ई खाना खाकर लौटे, तब जाकर उसकी जान छूटी, पर तब तक उसे बहुत चोट लग चुकी थी।

उस दिन के बाद नटखट बंदर ने कभी किसी अनजानी चीज़ से छेड़छाड़ नहीं की।

कहानी की सीख

जिस काम के बारे में पता न हो, उसमें बिना समझे दख़ल मत दो। बड़ों और दोस्तों की बात सुनो, और कोई भी अनजानी चीज़ छूने से पहले सोचो।

5 लाइन में छोटी कहानी

  1. एक बढ़ई ने आधे चिरे लट्ठे के बीच लकड़ी का खूँटा फँसाया और खाना खाने चला गया।
  2. वहाँ बंदरों की टोली आई और उछल कूद करने लगी।
  3. एक नटखट बंदर लट्ठे पर बैठ गया, उसकी पूँछ और पैर दरार में लटक गए।
  4. उसने दोस्तों की बात नहीं मानी और खूँटा खींच दिया, जिससे लट्ठा बंद हो गया और वह दब गया।
  5. उसे बहुत चोट लगी। सीख: जिस काम की समझ न हो, उसमें टाँग मत अड़ाओ।

कठिन शब्दों के अर्थ

शब्दअर्थ
बढ़ईलकड़ी का सामान बनाने वाला कारीगर
लट्ठापेड़ के तने का बड़ा, मोटा टुकड़ा
खूँटालकड़ी का मोटा, नुकीला टुकड़ा, जिसे किसी जगह फँसाया जाता है
चीरनाआरी से लकड़ी को लंबाई में काटना
नटखटशरारती
दख़ल देनाकिसी और के काम में बिना पूछे हाथ डालना

यह कहानी पंचतंत्र में कहाँ आती है?

यह पंचतंत्र के पहले भाग मित्रभेद की सबसे पहली छोटी कहानी है। इसे दो सियार भाइयों में से करटक अपने भाई दमनक को सुनाता है, जब दमनक बिना वजह शेर के मामलों में दख़ल देना चाहता है। मूल पंचतंत्र में बंदर का अंत बहुत बुरा होता है; बच्चों के लिए हमने यहाँ उसे सिर्फ़ चोट लगने तक रखा है, सीख वही है। पंचतंत्र की कहानियाँ आचार्य विष्णु शर्मा ने राजा अमरशक्ति के तीन राजकुमारों को खेल खेल में समझदारी सिखाने के लिए सुनाई थीं। पूरी जानकारी और सभी कहानियाँ यहाँ हैं: पंचतंत्र की सभी कहानियाँ।

बच्चों के लिए सवाल जवाब

बढ़ई ने लट्ठे के बीच खूँटा क्यों फँसाया?

ताकि खाना खाकर लौटने तक लट्ठे की दरार खुली रहे और दोनों हिस्से वापस न जुड़ें।

बाक़ी बंदरों ने नटखट बंदर से क्या कहा?

उन्होंने कहा कि इसे मत छेड़ो, क्योंकि हमें नहीं पता यह क्यों लगा है।

खूँटा निकलते ही क्या हुआ?

लट्ठे के दोनों हिस्से आपस में जुड़ गए और बंदर की पूँछ और पैर उनके बीच दब गए।

नटखट बंदर की सबसे बड़ी ग़लती क्या थी?

उसने बिना समझे एक अनजानी चीज़ से छेड़छाड़ की और दोस्तों की बात भी नहीं मानी।

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

जिस काम की समझ न हो, उसमें दख़ल नहीं देना चाहिए, और बड़ों की बात सुननी चाहिए।

बच्चों को कहानी सुनाने का आसान तरीका

  • दो किताबों के बीच एक पेंसिल फँसाकर दिखाएँ, फिर पेंसिल निकालें तो किताबें बंद हो जाती हैं। बच्चा तुरंत समझ जाएगा कि बंदर के साथ क्या हुआ।
  • “खट्टाक” वाले हिस्से पर ताली बजाएँ, बच्चे इसे बहुत पसंद करते हैं।
  • बच्चे को बताएँ कि घर में बिजली के तार, गैस या मशीनें भी ऐसी ही चीज़ें हैं, जिन्हें बिना पूछे नहीं छूना चाहिए।

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