शेर, सियार और मूर्ख गधे की कहानी (पंचतंत्र): बिना कान और दिल वाला गधा, बच्चों के लिए सरल हिंदी में

अपडेट: 6 मिनट में पढ़ें
Sher siyar aur gadha ki kahani: गाँव के पास चालाक सियार भूखे गधे को जंगल की तरफ़ इशारा करके बहला रहा है
चालाक सियार ने हरी घास का लालच देकर गधे को बहलाया

Sher siyar aur gadha ki kahani पंचतंत्र की एक सीख भरी कहानी है। इसमें एक भूखा शेर, एक चालाक सियार और एक भोला गधा है। गधा एक बार ख़तरे से बचकर भाग निकलता है, पर सियार की मीठी बातों में आकर दोबारा उसी ख़तरे में लौट आता है। यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि एक बार धोखा खाने के बाद भी सबक न सीखना सबसे बड़ी मूर्खता है। नीचे यह कहानी बहुत आसान हिंदी में लिखी है।

बातजानकारी
पढ़ने का समय4 मिनट
किस उम्र के बच्चों के लिए6 से 10 साल
कहानी के पात्रबूढ़ा शेर, चालाक सियार और भोला गधा
सीखएक बार धोखा खाओ, तो सबक ज़रूर सीखो

Sher Siyar Aur Gadha Ki Kahani: शेर, सियार और मूर्ख गधे की कहानी

एक जंगल में एक शेर रहता था। एक बार हाथी से लड़ाई में वह बुरी तरह घायल हो गया। अब वह दौड़कर शिकार नहीं कर पाता था, और कई दिनों से भूखा था।

शेर के साथ एक सियार भी रहता था। शेर जो शिकार करता, उसमें से बचा खाना सियार को मिल जाता था। अब शेर भूखा था, तो सियार भी भूखा था।

सियार की चाल

शेर ने सियार से कहा: “मैं दौड़ नहीं सकता। तुम किसी जानवर को बहला फुसलाकर मेरे पास ले आओ। मैं उसे यहीं पकड़ लूँगा।”

सियार जंगल से बाहर निकला। पास के गाँव में उसे एक दुबला पतला गधा दिखा, जो एक धोबी का था। धोबी उससे दिन भर कपड़ों का भारी बोझ ढुलवाता था, और खाने को बहुत कम देता था।

सियार ने मीठी आवाज़ में कहा: “मामा जी, आप कितने कमज़ोर हो गए हैं! जंगल में चलिए। वहाँ एक ऐसी जगह है जहाँ हरी हरी घास का मैदान है, ठंडा पानी है, और कोई बोझ नहीं ढुलवाता। आप वहाँ आराम से मोटे ताज़े हो जाएँगे।”

भूखा गधा हरी घास के लालच में आ गया और सियार के साथ चल पड़ा।

पहली बार गधा बच निकला

सियार गधे को शेर के पास ले आया। शेर ने झाड़ियों के पीछे से छलाँग लगाई, पर वह घायल और कमज़ोर था। उसका पंजा गधे को ठीक से पकड़ नहीं पाया।

गधा डर के मारे “ढेंचू ढेंचू” करता हुआ सरपट भागा और सीधा गाँव पहुँच गया।

घायल शेर का झपट्टा चूक गया और गधा डरकर भागा, पास में हैरान सियार
घायल शेर का झपट्टा चूक गया, और गधा बचकर भाग निकला

सियार की दूसरी चाल

शेर ने सियार से कहा: “किसी तरह उसे एक बार और ले आओ। इस बार मैं तैयार रहूँगा।”

सियार फिर गाँव गया। गधे ने उसे देखते ही कहा: “तुम मुझे कहाँ ले गए थे? वहाँ तो कोई ख़तरनाक जानवर मुझ पर झपटा!”

सियार ज़ोर से हँसा और बोला: “अरे मामा जी, आप डर गए! वह ख़तरनाक जानवर नहीं था। वह तो एक सुंदर गधी थी, जो आपको देखकर ख़ुशी से गले मिलने दौड़ी थी। आप भाग आए, तो बेचारी बहुत दुखी है। चलिए, वह आपका इंतज़ार कर रही है।”

भोला गधा सियार की बातों में फिर से आ गया। उसने सोचा भी नहीं कि उसने अपनी आँखों से क्या देखा था। वह दोबारा सियार के साथ जंगल चल पड़ा।

दोबारा वही ग़लती

इस बार शेर पूरी तरह तैयार बैठा था। जैसे ही गधा पास आया, शेर ने उसे पकड़ लिया। भोले गधे की यह आख़िरी भूल साबित हुई।

बाद में शेर ने सियार से पूछा: “हैरानी की बात है, वह गधा एक बार बचकर भागने के बाद दोबारा कैसे आ गया?”

सियार हँसा और बोला: “महाराज, अगर उसके पास सुनकर समझने वाले कान होते और सोचने वाला दिल होता, तो वह एक बार भागकर दोबारा यहाँ क्यों आता?”

कहानी की सीख

एक बार धोखा खाओ, तो उससे सबक ज़रूर सीखो। मीठी बातें और लालच देने वालों से सावधान रहो, और अपनी आँखों से देखे सच पर भरोसा करो।

5 लाइन में छोटी कहानी

  1. एक घायल शेर शिकार नहीं कर पाता था, तो उसने सियार से किसी जानवर को लाने को कहा।
  2. सियार हरी घास का लालच देकर धोबी के भूखे गधे को जंगल ले आया।
  3. शेर ने झपट्टा मारा, पर गधा बचकर गाँव भाग गया।
  4. सियार ने झूठ बोला कि वह ख़तरनाक जानवर नहीं, एक गधी थी, और गधा फिर से जंगल आ गया।
  5. इस बार शेर ने उसे पकड़ लिया। सीख: एक बार धोखा खाकर भी सबक न सीखना सबसे बड़ी मूर्खता है।

कठिन शब्दों के अर्थ

शब्दअर्थ
घायलजिसे चोट लगी हो
बहलाना फुसलानामीठी बातों से किसी को अपनी बात मनवाना
धोबीकपड़े धोने का काम करने वाला
लालचकिसी चीज़ को पाने की बहुत ज़्यादा इच्छा
भोलाजो आसानी से दूसरों की बात मान ले
सबककिसी घटना से मिली सीख

यह कहानी पंचतंत्र में कहाँ आती है?

यह कहानी पंचतंत्र के चौथे भाग लब्धप्रणाशम् से है, यानी “हाथ आई चीज़ खो देना”। इसी भाग की मुख्य कहानी बंदर और मगरमच्छ है, और यह कहानी उसी के बीच आती है। मूल पंचतंत्र में शेर के नहाने जाते समय सियार चुपके से गधे के कान और दिल खा लेता है, और शेर के पूछने पर यही जवाब देता है; बच्चों के लिए हमने वह हिस्सा नहीं लिखा, पर सियार का मशहूर जवाब और सीख वही रखी है। पंचतंत्र की कहानियाँ आचार्य विष्णु शर्मा ने राजा अमरशक्ति के तीन राजकुमारों को खेल खेल में समझदारी सिखाने के लिए सुनाई थीं। पूरी जानकारी और सभी कहानियाँ यहाँ हैं: पंचतंत्र की सभी कहानियाँ।

बच्चों के लिए सवाल जवाब

शेर ख़ुद शिकार क्यों नहीं कर पा रहा था?

वह हाथी से लड़ाई में घायल हो गया था और दौड़ नहीं पाता था।

सियार ने गधे को क्या लालच दिया?

उसने कहा कि जंगल में हरी हरी घास, ठंडा पानी और आराम है, कोई बोझ नहीं ढुलवाता।

गधा पहली बार कैसे बचा?

घायल शेर का पंजा उसे ठीक से पकड़ नहीं पाया, और गधा डरकर गाँव भाग गया।

सियार ने दूसरी बार कौन सा झूठ बोला?

उसने कहा कि गधे पर झपटने वाला ख़तरनाक जानवर नहीं, बल्कि एक गधी थी जो उससे गले मिलने आई थी।

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

एक बार धोखा खाने के बाद सबक सीखना चाहिए, और लालच देने वालों की मीठी बातों में नहीं आना चाहिए।

बच्चों को कहानी सुनाने का आसान तरीका

  • “ढेंचू ढेंचू” वाले हिस्से पर बच्चे के साथ गधे की आवाज़ निकालें।
  • सियार की दूसरी बात सुनाने से पहले रुककर पूछें: “क्या गधे को फिर से जाना चाहिए?” बच्चे ज़ोर से “नहीं!” बोलेंगे।
  • बच्चे को समझाएँ कि कोई अनजान आदमी चॉकलेट या खिलौने का लालच दे, तो उसके साथ कभी नहीं जाना चाहिए।

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