
Tenali ram aur chor तेनालीराम की सबसे मज़ेदार कहानियों में से एक है। दो चोर उनके घर चोरी करने आते हैं, पर सुबह होते होते वे चोरी तो कर ही नहीं पाते, उल्टा तेनालीराम का पूरा बग़ीचा सींच देते हैं। और यह सब तेनालीराम ने सिर्फ़ एक बात ज़ोर से बोलकर करवाया। नीचे पूरी कहानी बहुत आसान हिंदी में लिखी है।
| बात | जानकारी |
|---|---|
| पढ़ने का समय | 3 मिनट |
| किस उम्र के बच्चों के लिए | 6 से 12 साल |
| कहानी के पात्र | तेनालीराम, उनकी पत्नी और दो चोर |
| सीख | लालच में इंसान बिना सोचे मेहनत कर बैठता है |
विषय सूची
Tenali Ram Aur Chor: तेनालीराम और चोर की कहानी
एक रात तेनालीराम अपने घर की खिड़की के पास बैठे थे। बाहर अँधेरा था।
तभी उन्हें दीवार के पीछे कुछ आहट सुनाई दी। उन्होंने ध्यान से देखा तो दो आदमी झाड़ियों में छिपे बैठे थे। उनकी फुसफुसाहट से साफ़ था कि वे रात को घर में चोरी करने की तैयारी में हैं।
तेनालीराम की ज़ोर से बोली बात
तेनालीराम ने शोर नहीं मचाया। उन्होंने चोरों को भगाया भी नहीं।
उन्होंने अपनी पत्नी को बुलाया और जान बूझकर इतनी ज़ोर से बात करने लगे कि बाहर बैठे चोरों को हर शब्द सुनाई दे:
“सुनो, आजकल गाँव में चोरियाँ बहुत हो रही हैं। घर में गहनों और सोने की पेटी रखना ठीक नहीं है। मैंने सोचा है कि उसे पीछे वाले कुएँ में डाल देता हूँ। वहाँ किसी का ध्यान नहीं जाएगा।”
पत्नी समझ गईं कि बात कुछ और है। उन्होंने भी ऊँची आवाज़ में कहा, “हाँ जी, यही ठीक रहेगा।”
फिर तेनालीराम ने एक भारी पेटी उठाई, आँगन पार किया, और कुएँ के पास जाकर उसे धड़ाम से पानी में गिरा दिया। छपाक की आवाज़ दूर तक गई।
इसके बाद घर के दीपक बुझ गए।
चोरों की रातभर की मेहनत
झाड़ियों में बैठे चोर ख़ुशी से उछल पड़े। एक ने कहा, “घर में घुसने की ज़रूरत ही नहीं। पेटी तो कुएँ में है। बस पानी निकालो और पेटी उठा लो।”
दोनों चोर कुएँ पर पहुँच गए। एक बाल्टी बाँधकर पानी खींचने लगा, दूसरा उसे खेत की तरफ़ उड़ेलने लगा।
बाल्टी पर बाल्टी। घंटे पर घंटे। कुआँ गहरा था और पानी ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा था।
सारा पानी तेनालीराम के बग़ीचे और खेत में जा रहा था। ज़मीन भीगती गई, क्यारियाँ भरती गईं।
सुबह का उजाला होने लगा। कुआँ लगभग ख़ाली हो चुका था। चोरों ने नीचे उतरकर देखा, तो वहाँ एक पुरानी पेटी पड़ी थी। उन्होंने काँपते हाथों से ढक्कन खोला।
अंदर सोना नहीं था। अंदर बस पत्थर और मिट्टी भरी हुई थी।

सुबह का धन्यवाद
तभी तेनालीराम बाहर आए, आराम से अंगड़ाई ली और बोले:
“वाह भाइयो, बहुत बहुत धन्यवाद! मुझे अपना बग़ीचा सींचने के लिए चार मज़दूर लगाने पड़ते, और पूरा दिन लगता। आप दोनों ने रातोंरात यह काम कर दिया। बताइए, मज़दूरी कितनी दूँ?”
चोर शर्म से पानी पानी हो गए। वे भागते बने और कहते गए कि अब कभी चोरी नहीं करेंगे, क्योंकि चोरी में तो मेहनत भी ज़्यादा है और मिलता कुछ नहीं।
कहानी की सीख
लालच में इंसान बिना सोचे समझे मेहनत कर बैठता है। अगर चोरों ने एक पल रुककर सोचा होता, तो उन्हें शक होता कि कोई भरी पेटी कुएँ में क्यों फेंकेगा। और जितनी मेहनत उन्होंने चोरी में लगाई, उतनी ईमानदारी से करते तो कमाई भी हो जाती और इज़्ज़त भी।
5 लाइन में छोटी कहानी
- तेनालीराम ने देखा कि दो चोर उनके घर के बाहर छिपे हैं।
- उन्होंने ज़ोर से कहा कि गहनों की पेटी कुएँ में डाल रहा हूँ, और एक पेटी कुएँ में गिरा दी।
- चोर रातभर कुएँ से पानी खींचते रहे और सारा पानी बग़ीचे में जाता रहा।
- सुबह पेटी मिली, पर उसमें सोना नहीं, पत्थर और मिट्टी थी।
- तेनालीराम ने हँसकर उन्हें बग़ीचा सींचने के लिए धन्यवाद दिया। सीख: लालच में इंसान बिना सोचे मेहनत कर बैठता है।
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| आहट | हल्की सी आवाज़ |
| फुसफुसाहट | बहुत धीरे धीरे की गई बात |
| पेटी | सामान रखने का बड़ा डिब्बा या संदूक |
| क्यारी | बग़ीचे में पौधों के लिए बनी छोटी जगह |
| उड़ेलना | पानी एक जगह से दूसरी जगह गिराना |
| पानी पानी होना | बहुत शर्मिंदा हो जाना |
यह कहानी कहाँ से आई है?
तेनालीराम की कहानियाँ लोककथाएँ हैं, जो सदियों तक मुँह ज़बानी चलती रहीं। इस कहानी के भी कई रूप मिलते हैं: कहीं पेटी में पत्थर होते हैं, कहीं वह ख़ाली होती है, और कहीं चोर दो की जगह तीन होते हैं। तेनालीराम असली इंसान थे, वे राजा कृष्णदेव राय के दरबार के आठ बड़े कवियों में से एक थे, पर ये चतुराई वाली कहानियाँ इतिहास नहीं हैं। पूरी जानकारी यहाँ है: तेनालीराम की सभी कहानियाँ।
बच्चों के लिए सवाल जवाब
तेनालीराम ने चोरों को देखकर क्या किया?
उन्होंने शोर नहीं मचाया, बल्कि ज़ोर से यह बात कही कि गहनों की पेटी कुएँ में डाल रहे हैं।
चोरों ने रातभर क्या किया?
वे कुएँ से बाल्टी भर भरकर पानी निकालते रहे, ताकि पेटी तक पहुँच सकें।
उस पानी का क्या हुआ?
सारा पानी तेनालीराम के बग़ीचे और खेत में चला गया, जिससे पूरी ज़मीन सिंच गई।
पेटी में क्या निकला?
पेटी में सोना नहीं, बस पत्थर और मिट्टी भरी थी।
इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
लालच में इंसान बिना सोचे मेहनत कर बैठता है, और चोरी में मेहनत ज़्यादा लगती है, मिलता कुछ नहीं।
बच्चों को कहानी सुनाने का आसान तरीका
- “छपाक” वाली आवाज़ ख़ुद बनाकर सुनाइए। छोटे बच्चे इसी पर सबसे ज़्यादा हँसते हैं।
- बीच में पूछिए, “चोरों को शक क्यों नहीं हुआ?” बच्चा सोचेगा कि लालच में दिमाग़ काम करना बंद कर देता है।
- आख़िर में पूछिए, “अगर वही मेहनत वे किसी खेत में करते तो क्या होता?” यह सवाल सीख को पक्का कर देता है।
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