तेनालीराम और कुएँ का झगड़ा: कुआँ बेचा या पानी भी? पूरी कहानी और सीख

अपडेट: 6 मिनट में पढ़ें
Tenali ram kuan ka jhagda: खेत में कुएँ के पास झगड़ते किसान और ज़मींदार
कुएँ के पास झगड़ते किसान और ज़मींदार

Tenali ram kuan ka jhagda तेनालीराम की उन कहानियों में से है, जिनमें चालाकी करने वाला ख़ुद अपने जाल में फँस जाता है। एक किसान पूरी जमा पूँजी लगाकर कुआँ ख़रीदता है, और बेचने वाला अगले ही दिन कहता है कि कुआँ बेचा था, पानी नहीं। तेनालीराम का फ़ैसला सुनकर पूरा दरबार हँस पड़ता है। नीचे पूरी कहानी बहुत आसान हिंदी में लिखी है।

बातजानकारी
पढ़ने का समय3 मिनट
किस उम्र के बच्चों के लिए7 से 12 साल
कहानी के पात्रराजा कृष्णदेव राय, तेनालीराम, एक किसान और एक ज़मींदार
सीखचालाकी से किसी का हक़ छीनोगे, तो वही चालाकी तुम पर उल्टी पड़ेगी

Tenali Ram Kuan Ka Jhagda: कुएँ के झगड़े की कहानी

एक गाँव में एक ग़रीब किसान रहता था। उसके खेत में पानी की बड़ी दिक़्क़त थी।

पास के ज़मींदार के खेत में एक पुराना कुआँ था। किसान ने उससे कहा, “यह कुआँ मुझे बेच दीजिए।”

ज़मींदार ने मुँहमाँगी क़ीमत बताई। किसान ने अपनी सारी जमा पूँजी देकर कुआँ ख़रीद लिया। काग़ज़ भी बन गए।

अगली सुबह की चालाकी

अगली सुबह किसान ख़ुशी ख़ुशी बाल्टी लेकर कुएँ पर पहुँचा।

ज़मींदार वहीं खड़ा था। उसने हाथ उठाकर रोक दिया और बोला:

“रुको। मैंने तुम्हें कुआँ बेचा है, पानी नहीं। कुआँ तुम्हारा है, पर उसमें जो पानी है वह अब भी मेरा है। अगर पानी चाहिए तो अलग से पैसे दो।”

किसान हक्का बक्का रह गया। उसके पास तो अब एक पैसा भी नहीं बचा था।

उसने बहुत मिन्नतें कीं, पर ज़मींदार टस से मस नहीं हुआ।

दरबार में फ़रियाद

हारकर किसान राजा कृष्णदेव राय के दरबार पहुँचा और रोते हुए पूरी बात बताई।

राजा ने ज़मींदार को बुलवाया। ज़मींदार ने काग़ज़ दिखाकर कहा, “हुज़ूर, काग़ज़ में साफ़ लिखा है कि कुआँ बेचा गया। पानी का तो कहीं ज़िक्र ही नहीं।”

राजा सोच में पड़ गए। बात तो काग़ज़ के हिसाब से ठीक लग रही थी।

उन्होंने तेनालीराम की तरफ़ देखा।

तेनालीराम का फ़ैसला

तेनालीराम आगे आए और ज़मींदार से पूछा, “तो आपका कहना है कि कुआँ किसान का है और पानी आपका?”

ज़मींदार ने गर्व से कहा, “जी हाँ, बिल्कुल।”

तेनालीराम ने कहा:

“ठीक है। तब तो बात और भी साफ़ है। जब कुआँ किसान का है, तो आपने अपना पानी किसान के कुएँ में क्यों रख छोड़ा है? यह तो किराए की जगह हुई।

या तो आप आज ही अपना सारा पानी कुएँ से निकालकर ले जाइए, या फिर किसान को रोज़ का किराया दीजिए कि आपका पानी उसके कुएँ में पड़ा हुआ है।”

दरबार में हँसी फूट पड़ी।

ज़मींदार का चेहरा उतर गया। न वह पानी निकाल सकता था, न रोज़ किराया दे सकता था। उसने हाथ जोड़कर माफ़ी माँगी और कह दिया कि कुआँ और पानी, दोनों किसान के हैं।

राजा ने तेनालीराम की बहुत तारीफ़ की।

tenali ram kuan ka jhagda की सीख

दूसरे का हक़ छीनने के लिए की गई चालाकी अक्सर ख़ुद पर ही उल्टी पड़ जाती है। और जो बात सुनने में बहुत होशियारी वाली लगे, उसे उल्टा करके देखो, तो उसकी कमज़ोरी दिख जाती है।

5 लाइन में छोटी कहानी

  1. एक ग़रीब किसान ने अपनी सारी जमा पूँजी देकर ज़मींदार से कुआँ ख़रीदा।
  2. अगले दिन ज़मींदार ने कहा कि कुआँ बेचा था, पानी नहीं, इसलिए पानी के अलग पैसे दो।
  3. किसान राजा के दरबार में फ़रियाद लेकर पहुँचा।
  4. तेनालीराम ने कहा कि अगर पानी आपका है, तो उसे किसान के कुएँ से निकाल लीजिए या किराया दीजिए।
  5. ज़मींदार ने माफ़ी माँग ली। सीख: चालाकी से हक़ छीनोगे, तो वही चालाकी उल्टी पड़ेगी।

कठिन शब्दों के अर्थ

शब्दअर्थ
ज़मींदारबहुत सारी ज़मीन का मालिक
जमा पूँजीबचाकर रखा गया सारा पैसा
मुँहमाँगी क़ीमतजितने पैसे माँगे जाएँ, उतने
हक्का बक्काहैरान रह जाना
मिन्नतबहुत विनती करना
टस से मस न होनाबिल्कुल न मानना
फ़रियादइंसाफ़ के लिए की गई शिकायत

यह कहानी कहाँ से आई है?

तेनालीराम की कहानियाँ लोककथाएँ हैं, जो सदियों तक मुँह ज़बानी चलती रहीं। कुएँ और पानी वाला यह झगड़ा भारत की कई लोककथाओं में मिलता है, कहीं तेनालीराम के नाम से और कहीं किसी और चतुर आदमी के नाम से। तेनालीराम असली इंसान थे, वे राजा कृष्णदेव राय के दरबार के आठ बड़े कवियों में से एक थे, पर ये चतुराई वाली कहानियाँ इतिहास नहीं हैं। पूरी जानकारी यहाँ है: तेनालीराम की सभी कहानियाँ।

बच्चों के लिए सवाल जवाब

किसान ने ज़मींदार से क्या ख़रीदा था?

उसने अपनी सारी जमा पूँजी देकर ज़मींदार के खेत का पुराना कुआँ ख़रीदा था।

ज़मींदार ने अगले दिन क्या कहा?

उसने कहा कि मैंने कुआँ बेचा है, पानी नहीं, इसलिए पानी के लिए अलग पैसे देने होंगे।

तेनालीराम ने क्या फ़ैसला सुनाया?

उन्होंने कहा कि अगर पानी ज़मींदार का है, तो वह उसे किसान के कुएँ से निकाल ले जाए, या रोज़ का किराया दे।

ज़मींदार ने आख़िर में क्या किया?

वह न पानी निकाल सकता था, न किराया दे सकता था, इसलिए उसने माफ़ी माँग ली।

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

दूसरे का हक़ छीनने वाली चालाकी अक्सर ख़ुद पर ही उल्टी पड़ जाती है।

tenali ram kuan ka jhagda वाली यह कहानी किस उम्र के बच्चों के लिए है?

यह कहानी 7 से 12 साल के बच्चों के लिए है, और इसे सुनाने में सिर्फ़ तीन मिनट लगते हैं।

इस कहानी को आज की ज़िंदगी से जोड़िए

tenali ram kuan ka jhagda सिर्फ़ पुराने ज़माने की बात नहीं है। आज भी ऐसे झगड़े होते हैं, बस शक्ल बदल जाती है।

कोई चीज़ बेचकर उसका ज़रूरी हिस्सा अलग से माँगना, या काग़ज़ में एक बात लिखकर मुँह से दूसरी कहना, यह आज भी होता है। मकान बेचते समय पार्किंग अलग माँगना, या कोई सामान बेचकर उसका चार्जर अलग से बेचना, यही तो कुएँ और पानी वाली बात है।

इसीलिए बड़ों को एक आदत डालनी चाहिए: कोई भी सौदा करते समय काग़ज़ में साफ़ साफ़ लिखवाइए कि क्या क्या शामिल है। और बच्चों को यह सिखाइए कि चालाकी से पाया हुआ फ़ायदा टिकता नहीं। कुएँ के झगड़े में ज़मींदार ने चालाकी की थी, और वही चालाकी उसी पर भारी पड़ गई।

बच्चों को कहानी सुनाने का आसान तरीका

  • फ़ैसले से पहले रुककर पूछिए, “तुम होते तो क्या फ़ैसला सुनाते?” बच्चा ख़ुद तर्क लगाने लगेगा।
  • समझाइए कि तेनालीराम ने ज़मींदार की ही बात को उल्टा करके इस्तेमाल किया। यह सोचने का बहुत काम का तरीक़ा है।
  • बच्चे से पूछिए कि ज़मींदार ने किसान के साथ क्या ग़लत किया। इससे सही और ग़लत की समझ बनती है।

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tenali ram kuan ka jhagda की यह कहानी अपने बच्चों और उनके दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर कीजिए। आपके बच्चे ने क्या फ़ैसला सुनाया होता, कमेंट में बताइए।

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