ब्राह्मणी और नेवला की कहानी (पंचतंत्र): बच्चों के लिए सरल हिंदी में, सीख के साथ

अपडेट: 6 मिनट में पढ़ें
Brahmani aur nevla ki kahani: गाँव के घर में पालने में सोते बच्चे के पास पहरा देता नेवला, दरवाज़े के पास काला साँप
सोते बच्चे की रक्षा करता वफ़ादार नेवला

Brahmani aur nevla ki kahani पंचतंत्र की एक भावुक कहानी है। इसमें एक माँ बिना पूरी बात जाने ग़ुस्से में एक ऐसा काम कर बैठती है, जिस पर उसे ज़िंदगी भर पछतावा होता है। यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि कोई भी काम करने से पहले अच्छी तरह सोच लेना चाहिए। नीचे यह कहानी बहुत आसान हिंदी में लिखी है।

बातजानकारी
पढ़ने का समय4 मिनट
किस उम्र के बच्चों के लिए5 से 10 साल
कहानी के पात्रब्राह्मण, ब्राह्मणी, उनका छोटा बेटा, नेवला और एक साँप
सीखबिना सोचे समझे कोई काम मत करो

Brahmani Aur Nevla Ki Kahani: ब्राह्मणी और नेवला की कहानी

एक गाँव में एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी रहते थे। ब्राह्मण की पत्नी को सब ब्राह्मणी कहते थे। कुछ समय बाद उनके घर एक प्यारे से बेटे का जन्म हुआ। दोनों बहुत ख़ुश थे।

उन्हीं दिनों उनके घर के पास एक छोटा सा नेवला भी आ गया। उसकी माँ नहीं थी। ब्राह्मणी को उस पर दया आ गई। उसने सोचा: “मैं इस नेवले को भी अपने बेटे की तरह पालूँगी।”

बेटा और नेवला

ब्राह्मणी रोज़ अपने बेटे के साथ नेवले को भी दूध पिलाती, उसे नहलाती और प्यार करती। नेवला भी घर का एक सदस्य बन गया। वह दिन भर बच्चे के पास खेलता रहता।

पर ब्राह्मणी के मन में एक छोटा सा डर हमेशा रहता था। वह सोचती: “नेवला आख़िर एक जंगली जानवर है। कहीं किसी दिन यह मेरे बेटे को काट न ले।”

ब्राह्मणी पानी भरने गई

एक दिन ब्राह्मणी को कुएँ से पानी लाना था। उसने अपने पति से कहा: “मैं पानी भरने जा रही हूँ। आप घर पर ही रहना और बेटे का ध्यान रखना। उसे नेवले के साथ अकेला मत छोड़ना।”

यह कहकर ब्राह्मणी घड़ा लेकर चली गई। थोड़ी देर बाद ब्राह्मण को भिक्षा माँगने का ख़याल आया। उसने सोचा: “बच्चा तो सो रहा है, मैं जल्दी लौट आऊँगा।” और वह भी घर से निकल गया। अब घर में सिर्फ़ सोता हुआ बच्चा और नेवला थे।

काला साँप आया

तभी घर के एक कोने से एक बड़ा काला साँप निकला। वह धीरे धीरे बच्चे के पालने की तरफ़ बढ़ने लगा।

नेवले ने साँप को देख लिया। वह समझ गया कि उसके छोटे भाई पर बड़ा ख़तरा है। नेवला बिना डरे साँप पर टूट पड़ा। दोनों में ज़ोरदार लड़ाई हुई। आख़िर में नेवले ने साँप को मार दिया और उसके टुकड़े टुकड़े कर दिए। बच्चा सुरक्षित सोता रहा।

ब्राह्मणी की बड़ी भूल

लड़ाई में नेवले का मुँह और पंजे ख़ून से लाल हो गए थे। वह बहुत ख़ुश था। वह दौड़कर दरवाज़े पर गया, ताकि ब्राह्मणी को अपना बहादुरी का काम दिखा सके।

उसी समय ब्राह्मणी पानी का भरा घड़ा लेकर लौटी। उसने नेवले का ख़ून से सना मुँह देखा और घबरा गई। उसने सोचा: “हाय! इस नेवले ने मेरे बेटे को खा लिया!”

ग़ुस्से और दुख में ब्राह्मणी ने बिना कुछ देखे पानी से भरा भारी घड़ा नेवले पर पटक दिया। बेचारा नेवला वहीं मर गया।

सच सामने आया

रोती हुई ब्राह्मणी अंदर भागी। पर अंदर का नज़ारा देखकर वह हैरान रह गई। उसका बेटा पालने में आराम से सो रहा था, और पास ही एक बड़ा काला साँप टुकड़ों में पड़ा था।

ब्राह्मणी को सब समझ आ गया। नेवले ने तो उसके बेटे की जान बचाई थी! वह अपने वफ़ादार नेवले को याद करके फूट फूटकर रोने लगी। तभी ब्राह्मण भी लौट आया। ब्राह्मणी ने उससे कहा: “तुमने बेटे को अकेला क्यों छोड़ा? और मैंने भी बिना देखे यह क्या कर दिया!” दोनों को अपनी भूल पर बहुत पछतावा हुआ, पर अब कुछ नहीं हो सकता था।

नेवले को गले लगाकर पछताती ब्राह्मणी, पीछे पालने में सुरक्षित सोता बच्चा और टूटा घड़ा
सच जानकर ब्राह्मणी को अपनी भूल पर बहुत पछतावा हुआ

कहानी की सीख

कोई भी काम करने से पहले पूरी बात जान लो और अच्छी तरह सोच लो। ग़ुस्से में जल्दबाज़ी से किया गया काम बाद में बहुत पछतावा देता है।

5 लाइन में छोटी कहानी

  1. एक ब्राह्मणी ने अपने बेटे के साथ एक नेवले को भी बेटे की तरह पाला।
  2. एक दिन वह पानी भरने गई और ब्राह्मण भी बच्चे को अकेला छोड़कर चला गया।
  3. एक काला साँप बच्चे की तरफ़ आया, तो नेवले ने लड़कर उसे मार दिया।
  4. नेवले का ख़ून से सना मुँह देखकर ब्राह्मणी ने सोचा कि उसने बच्चे को काटा है, और उस पर घड़ा पटक दिया।
  5. अंदर जाकर उसने सुरक्षित बच्चा और मरा हुआ साँप देखा, और बहुत पछताई। सीख: बिना सोचे काम मत करो।

कठिन शब्दों के अर्थ

शब्दअर्थ
ब्राह्मणीब्राह्मण की पत्नी
नेवलाछोटा, फुर्तीला जानवर जो साँप से लड़ जाता है
भिक्षामाँगकर मिला खाना या दान
पालनाछोटे बच्चे का झूला वाला बिस्तर
वफ़ादारसच्चे मन से साथ निभाने वाला
पछतावाअपनी ग़लती पर दुख होना

यह कहानी पंचतंत्र में कहाँ आती है?

यह कहानी पंचतंत्र के पाँचवें भाग अपरीक्षितकारकम् से है, यानी “बिना परखे काम करने” के बारे में कहानियाँ। इस भाग की कहानियाँ बताती हैं कि बिना जाँचे और बिना सोचे काम करने का नतीजा बुरा होता है। अलग अलग किताबों में कहानी थोड़ी बदल जाती है: कहीं ब्राह्मणी घड़ा पटकती है, तो कहीं ब्राह्मण ख़ुद नेवले को मारता है, पर सीख हमेशा एक ही है। पंचतंत्र की कहानियाँ आचार्य विष्णु शर्मा ने राजा अमरशक्ति के तीन राजकुमारों को खेल खेल में समझदारी सिखाने के लिए सुनाई थीं। पूरी जानकारी और सभी कहानियाँ यहाँ हैं: पंचतंत्र की सभी कहानियाँ।

बच्चों के लिए सवाल जवाब

ब्राह्मणी ने नेवले को क्यों पाला?

नेवले की माँ नहीं थी। ब्राह्मणी को उस पर दया आई, और उसने उसे अपने बेटे की तरह पाला।

बच्चे पर कौन सा ख़तरा आया?

घर के कोने से एक बड़ा काला साँप निकला और सोते हुए बच्चे की तरफ़ बढ़ने लगा।

नेवले का मुँह ख़ून से लाल क्यों था?

क्योंकि उसने बच्चे को बचाने के लिए साँप से लड़कर उसे मार दिया था।

ब्राह्मणी से क्या भूल हुई?

उसने बिना अंदर देखे और बिना सोचे मान लिया कि नेवले ने बच्चे को काटा है, और उस पर घड़ा पटक दिया।

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

कोई भी काम करने से पहले पूरी बात जान लेनी चाहिए। ग़ुस्से में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए।

बच्चों को कहानी सुनाने का आसान तरीका

  • कहानी सुनाते समय उस जगह पर रुकें जहाँ ब्राह्मणी लौटती है, और बच्चे से पूछें: “अब ब्राह्मणी को क्या करना चाहिए?”
  • बच्चे को बताएँ कि नेवला सच में साँप से लड़ जाता है, इसलिए गाँवों में लोग इसे पसंद करते हैं।
  • कहानी के बाद अपनी ज़िंदगी का कोई छोटा सा उदाहरण बताएँ, जब जल्दबाज़ी में आपसे कोई भूल हुई हो। बच्चे ऐसी सच्ची बातें सबसे अच्छे से याद रखते हैं।

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