गीदड़ और ढोल की कहानी (पंचतंत्र): आवाज़ से डरने वाला गीदड़, बच्चों के लिए सरल हिंदी में

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Geedad aur dhol ki kahani: झाड़ी के पीछे छिपकर पेड़ के नीचे पड़े पुराने ढोल को देखता भूखा गीदड़
झाड़ी के पीछे छिपकर ढोल को देखता डरा हुआ गीदड़

Geedad aur dhol ki kahani पंचतंत्र की एक छोटी और मज़ेदार कहानी है। इसमें एक भूखा गीदड़ जंगल में एक अजीब सी “ढम ढम” आवाज़ सुनकर बहुत डर जाता है। उसे लगता है कि कोई बहुत बड़ा जानवर है। पर जब वह हिम्मत करके पास जाता है, तो सच कुछ और ही निकलता है। यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि सिर्फ़ आवाज़ सुनकर डरना नहीं चाहिए, पहले सच जान लेना चाहिए। नीचे यह कहानी बहुत आसान हिंदी में लिखी है।

बातजानकारी
पढ़ने का समय3 मिनट
किस उम्र के बच्चों के लिए4 से 10 साल
कहानी के पात्रभूखा गीदड़ गोमायु और एक पुराना ढोल
सीखबिना देखे और समझे किसी चीज़ से मत डरो

Geedad Aur Dhol Ki Kahani: गीदड़ और ढोल की कहानी

एक जंगल में गोमायु नाम का एक गीदड़ रहता था। एक बार उसे कई दिनों तक कुछ खाने को नहीं मिला। भूख से परेशान होकर वह खाने की तलाश में जंगल से बाहर निकल पड़ा।

सुनसान मैदान

चलते चलते वह एक बड़े खुले मैदान में पहुँचा। बहुत पहले यहाँ दो राजाओं की सेनाओं में लड़ाई हुई थी। अब वहाँ कोई नहीं था, बस टूटी फूटी चीज़ें पड़ी थीं।

तभी गीदड़ को एक तेज़ आवाज़ सुनाई दी: “ढम! ढम! ढम!”

गीदड़ डर के मारे काँप उठा। उसने सोचा: “बाप रे! यह ज़रूर कोई बहुत बड़ा और ख़तरनाक जानवर है। इसकी आवाज़ ही इतनी भारी है, तो यह ख़ुद कितना बड़ा होगा! मुझे यहाँ से भाग जाना चाहिए।”

डर और हिम्मत

वह भागने ही वाला था कि रुक गया। उसने सोचा: “मैं तो भूखा हूँ। भाग जाऊँगा तो भी भूखा रहूँगा। और बिना देखे भागना भी ठीक नहीं। जिसे मैंने देखा ही नहीं, उससे इतना डरना क्या? पहले छिपकर देखता हूँ कि यह है क्या।”

गीदड़ धीरे धीरे, झाड़ियों के पीछे छिपते हुए आवाज़ की तरफ़ बढ़ा। “ढम! ढम!” आवाज़ बार बार आ रही थी।

सच सामने आया

पास जाकर उसने देखा कि एक पेड़ के नीचे लड़ाई का एक बड़ा सा पुराना ढोल पड़ा है। जब हवा चलती, तो पेड़ की एक डाल हिलकर ढोल पर लगती, और ढोल बज उठता: “ढम! ढम!”

गीदड़ को अपने डर पर हँसी आ गई। “अरे! तो यह था वह बड़ा जानवर!”

खोखला ढोल

फिर गीदड़ ने सोचा: “इतना बड़ा ढोल है, इसके अंदर ज़रूर कुछ खाने को भरा होगा।” उसने अपने दाँतों से ढोल का चमड़ा फाड़ा और अंदर झाँका। पर अंदर कुछ नहीं था, बस ख़ाली लकड़ी और हवा!

फटे हुए खोखले ढोल के पास बैठकर अपने डर पर हँसता गीदड़
अंदर से ख़ाली निकला ढोल, और अपने डर पर हँसता गीदड़

गीदड़ ने सिर हिलाकर कहा: “इसकी आवाज़ जितनी बड़ी थी, अंदर से यह उतना ही खोखला निकला।” फिर वह खाने की तलाश में आगे चल पड़ा, पर अब उसका डर हमेशा के लिए चला गया था।

कहानी की सीख

किसी चीज़ की आवाज़ या दिखावा देखकर डरना नहीं चाहिए। पहले हिम्मत से सच जानो। और याद रखो, जो चीज़ सबसे ज़्यादा शोर करती है, वह कई बार अंदर से खोखली होती है।

5 लाइन में छोटी कहानी

  1. एक भूखा गीदड़ खाने की तलाश में एक पुराने लड़ाई के मैदान में पहुँचा।
  2. वहाँ उसे “ढम ढम” की तेज़ आवाज़ सुनाई दी और वह डर गया।
  3. उसने भागने की जगह हिम्मत की और छिपकर पास जाकर देखा।
  4. वह आवाज़ एक पुराने ढोल की थी, जिस पर हवा से पेड़ की डाल लग रही थी।
  5. ढोल अंदर से खोखला निकला। सीख: बिना देखे मत डरो, शोर करने वाली चीज़ें अक्सर खोखली होती हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ

शब्दअर्थ
गीदड़सियार जैसा एक जंगली जानवर
ढोलबजाने का बड़ा बाजा, जिस पर चमड़ा मढ़ा होता है
सेनासैनिकों का बड़ा समूह
हिम्मतडर के बावजूद आगे बढ़ने की ताक़त
खोखलाअंदर से ख़ाली
दिखावाजो असल में है, उससे बड़ा दिखाना

यह कहानी पंचतंत्र में कहाँ आती है?

यह कहानी पंचतंत्र के पहले भाग मित्रभेद की शुरुआती कहानियों में से है। पंचतंत्र में सियार दमनक यह कहानी शेर पिंगलक को सुनाता है, जब शेर एक बैल की तेज़ आवाज़ सुनकर डर जाता है। दमनक समझाता है कि सिर्फ़ आवाज़ से डरना ठीक नहीं, पहले सच पता करना चाहिए। अलग अलग किताबों में गीदड़ का नाम और छोटी बातें थोड़ी बदल जाती हैं, पर सीख वही रहती है। पंचतंत्र की कहानियाँ आचार्य विष्णु शर्मा ने राजा अमरशक्ति के तीन राजकुमारों को खेल खेल में समझदारी सिखाने के लिए सुनाई थीं। पूरी जानकारी और सभी कहानियाँ यहाँ हैं: पंचतंत्र की सभी कहानियाँ।

बच्चों के लिए सवाल जवाब

गीदड़ जंगल से बाहर क्यों गया?

उसे कई दिनों से खाने को कुछ नहीं मिला था, इसलिए वह खाने की तलाश में निकला।

“ढम ढम” की आवाज़ कहाँ से आ रही थी?

मैदान में पड़े एक पुराने ढोल से। हवा चलने पर पेड़ की डाल ढोल पर लगती थी और वह बज उठता था।

गीदड़ ने भागने की जगह क्या किया?

उसने हिम्मत की और छिपते हुए पास जाकर देखा कि आवाज़ किस चीज़ की है।

ढोल के अंदर क्या निकला?

कुछ नहीं। ढोल अंदर से बिल्कुल खोखला था।

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

बिना देखे और समझे किसी चीज़ से डरना नहीं चाहिए, और जो चीज़ ज़्यादा शोर करती है वह कई बार अंदर से खोखली होती है।

बच्चों को कहानी सुनाने का आसान तरीका

  • कहानी सुनाते समय मेज़ या थाली पर हल्के से “ढम ढम” बजाइए। बच्चे डरेंगे नहीं, हँसेंगे और कहानी याद रखेंगे।
  • बच्चे से पूछें: “रात को कोई अजीब आवाज़ आए तो तुम क्या करोगे?” और समझाएँ कि किसी बड़े के साथ जाकर देख लेना सबसे अच्छा है।
  • कहानी के बाद एक ख़ाली डिब्बा बजाकर दिखाएँ कि ख़ाली चीज़ ज़्यादा आवाज़ करती है।

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