तीन मछलियों की कहानी (पंचतंत्र): पहले सोचने वाली, मौक़े पर सोचने वाली और “जो होगा देखा जाएगा” वाली मछली

अपडेट: 6 मिनट में पढ़ें
Teen machhliyon ki kahani: तालाब में बातें करती तीन मछलियाँ और किनारे पर जाल लिए दो मछुआरे
तालाब में तीन सहेली मछलियाँ, किनारे पर जाल लिए मछुआरे

Teen machhliyon ki kahani पंचतंत्र की एक बहुत समझदारी भरी कहानी है। एक तालाब में तीन मछलियाँ रहती थीं, और तीनों का सोचने का तरीका अलग था। एक दिन जब मछुआरे तालाब पर आने की बात करते हैं, तो तीनों अलग अलग तरह से फ़ैसला लेती हैं, और तीनों का नतीजा भी अलग होता है। यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि ख़तरा दिखे तो पहले से तैयारी करनी चाहिए। नीचे यह कहानी बहुत आसान हिंदी में लिखी है।

बातजानकारी
पढ़ने का समय4 मिनट
किस उम्र के बच्चों के लिए5 से 10 साल
कहानी के पात्रतीन मछलियाँ: अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्य; दो मछुआरे
सीखआने वाले ख़तरे को पहले से समझो और तैयारी करो

Teen Machhliyon Ki Kahani: तीन मछलियों की कहानी

एक बड़े से तालाब में बहुत सारी मछलियाँ रहती थीं। उनमें तीन मछलियाँ आपस में पक्की सहेलियाँ थीं। तीनों के नाम उनके स्वभाव जैसे थे।

पहली का नाम था अनागतविधाता, यानी “जो आने वाली मुसीबत का पहले से इंतज़ाम कर ले”। दूसरी का नाम था प्रत्युत्पन्नमति, यानी “जो मुसीबत आने पर तुरंत दिमाग़ लगा ले”। और तीसरी का नाम था यद्भविष्य, यानी “जो होगा, देखा जाएगा”।

मछुआरों की बात

एक शाम दो मछुआरे तालाब के किनारे से गुज़र रहे थे। उन्होंने पानी में ढेर सारी मछलियाँ देखीं। एक मछुआरे ने कहा: “अरे वाह! इस तालाब में तो बहुत मछलियाँ हैं। कल सुबह हम जाल लेकर यहीं आएँगे।”

तीनों मछलियों ने यह बात सुन ली।

तीन मछलियाँ, तीन फ़ैसले

अनागतविधाता ने तुरंत कहा: “सहेलियो, ख़तरा आने वाला है। हमें आज रात ही यह तालाब छोड़ देना चाहिए। पास की छोटी नहर से हम दूसरे तालाब में जा सकते हैं।”

प्रत्युत्पन्नमति बोली: “मुझे अभी अपना घर छोड़ने का मन नहीं है। मछुआरे आए तो मैं उसी समय कोई तरकीब सोच लूँगी।”

यद्भविष्य हँसकर बोली: “अरे, तुम दोनों बेकार डर रही हो। मछुआरे तो बस बोल गए हैं, शायद आएँ ही नहीं। और आ भी गए, तो जो होगा देखा जाएगा। मैं तो यहीं आराम से रहूँगी।”

अनागतविधाता ने दोनों को बहुत समझाया, पर वे नहीं मानीं। आख़िर वह उसी रात नहर के रास्ते दूसरे तालाब में चली गई।

अगली सुबह

सुबह होते ही मछुआरे जाल लेकर आ गए। उन्होंने तालाब में जाल फेंका, और ढेर सारी मछलियाँ उसमें फँस गईं। प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्य भी जाल में आ गईं।

प्रत्युत्पन्नमति ने तुरंत दिमाग़ लगाया। वह जाल में बिल्कुल सीधी लेट गई और ऐसे दिखाया जैसे वह मरी हुई हो। मछुआरों ने उसे देखा और सोचा: “यह तो मरी हुई है, किसी काम की नहीं।” उन्होंने उसे उठाकर किनारे की तरफ़ फेंक दिया। जैसे ही वह पानी के पास गिरी, वह झट से फिसलकर पानी में चली गई और तैरकर दूर निकल गई।

नहर से दूसरे तालाब जाती मछली और जाल में मरी होने का नाटक करती मछली
एक मछली पहले ही नहर से निकल गई, दूसरी ने जाल में मरी होने का नाटक किया

पर यद्भविष्य ने न पहले कुछ किया, न अब। वह जाल में छटपटाती रही, और मछुआरे उसे बाक़ी मछलियों के साथ अपनी टोकरी में भरकर ले गए।

कहानी की सीख

मुसीबत आने से पहले सोचने वाला सबसे सुरक्षित रहता है। मौक़े पर दिमाग़ लगाने वाला भी बच सकता है। लेकिन “जो होगा देखा जाएगा” सोचकर कुछ न करने वाला मुश्किल में फँस जाता है।

5 लाइन में छोटी कहानी

  1. एक तालाब में तीन मछलियाँ रहती थीं: अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्य।
  2. मछुआरों ने कहा कि वे कल सुबह जाल लेकर आएँगे।
  3. अनागतविधाता उसी रात दूसरे तालाब में चली गई।
  4. जाल में फँसने पर प्रत्युत्पन्नमति मरी होने का नाटक करके बच निकली।
  5. यद्भविष्य ने कुछ नहीं किया और पकड़ी गई। सीख: ख़तरा दिखे तो पहले से तैयारी करो।

तीनों मछलियों के नामों के अर्थ

नामअर्थआज के जीवन में
अनागतविधाताजो आने वाली मुसीबत का पहले से इंतज़ाम करेपरीक्षा से पहले ही रोज़ पढ़ने वाला बच्चा
प्रत्युत्पन्नमतिजो मुसीबत आने पर तुरंत अक़्ल लगाएअचानक सवाल कठिन आए तो घबराए बिना रास्ता निकालने वाला
यद्भविष्यजो सोचे “जो होगा देखा जाएगा”आख़िरी रात तक कुछ न करने वाला

कठिन शब्दों के अर्थ

शब्दअर्थ
मछुआरामछली पकड़ने वाला
जालधागों से बना बड़ा फंदा, जिससे मछली पकड़ते हैं
नहरपानी की छोटी धारा जो एक जगह से दूसरी जगह जाती है
तरकीबउपाय, तरीका
छटपटानाघबराकर इधर उधर हिलना
सुरक्षितख़तरे से बचा हुआ

यह कहानी पंचतंत्र में कहाँ आती है?

यह कहानी पंचतंत्र के पहले भाग मित्रभेद से है। कहानी के अंदर एक कहानी के रूप में यह टिटहरी (एक पक्षी) के जोड़े की बातचीत में आती है, जहाँ समझाया जाता है कि आने वाले ख़तरे को पहले से पहचानना चाहिए। तीनों मछलियों के नाम ही इस कहानी की सीख हैं। कुछ किताबों में दूसरी मछली मरी होने का नाटक करके बचती है, कुछ में किसी और तरकीब से, पर सीख वही रहती है। पंचतंत्र की कहानियाँ आचार्य विष्णु शर्मा ने राजा अमरशक्ति के तीन राजकुमारों को खेल खेल में समझदारी सिखाने के लिए सुनाई थीं। पूरी जानकारी और सभी कहानियाँ यहाँ हैं: पंचतंत्र की सभी कहानियाँ।

बच्चों के लिए सवाल जवाब

तीनों मछलियों के नाम क्या थे?

अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्य।

मछुआरों ने क्या कहा था?

उन्होंने कहा था कि इस तालाब में बहुत मछलियाँ हैं, वे कल सुबह जाल लेकर आएँगे।

अनागतविधाता ने क्या किया?

वह उसी रात नहर के रास्ते दूसरे तालाब में चली गई और पूरी तरह सुरक्षित रही।

प्रत्युत्पन्नमति जाल से कैसे बची?

वह जाल में मरी होने का नाटक करके सीधी लेट गई। मछुआरों ने उसे किनारे फेंका, तो वह फिसलकर पानी में चली गई।

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

आने वाले ख़तरे को पहले से समझकर तैयारी करनी चाहिए, और “जो होगा देखा जाएगा” सोचकर हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठना चाहिए।

बच्चों को कहानी सुनाने का आसान तरीका

  • तीनों मछलियों की आवाज़ अलग रखें: पहली समझदार, दूसरी फुर्तीली, तीसरी आलसी। बच्चे ख़ुद बताएँगे कि कौन सी मछली कौन है।
  • कहानी के बाद पूछें: “तुम्हारे स्कूल के टेस्ट में तुम कौन सी मछली बनते हो?” बच्चे हँसते हँसते तैयारी की बात समझ जाएँगे।
  • एक काग़ज़ पर तीन मछलियाँ बनवाइए और हर मछली के नीचे उसका स्वभाव लिखवाइए।

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