Attitude Is Everything Book Summary in Hindi में आज हम जेफ़ केलर (Jeff Keller) की मशहूर किताब “Attitude Is Everything” के सभी 12 सबक़ आसान भाषा में समझेंगे। किताब का एक ही संदेश है: आपकी ज़िंदगी में क्या होता है, उससे ज़्यादा ज़रूरी है कि आप उसे किस नज़रिए (Attitude) से देखते हैं और उसके बाद क्या करते हैं।
छोटा जवाब: Attitude Is Everything तीन हिस्सों में है: सोच (सफलता मन से शुरू होती है), शब्द (अपनी बोली पर ध्यान दें) और कर्म (भगवान उनकी मदद करता है जो ख़ुद कदम उठाते हैं)। इसके 12 सबक़ हैं: नज़रिया दुनिया की खिड़की है, आप एक चुंबक हैं, सफलता की तस्वीर बनाएँ, पक्का इरादा करें, समस्या को अवसर बनाएँ, शब्दों से रास्ता बनाएँ, “कैसे हो?” का जवाब बदलें, शिकायत बंद करें, सकारात्मक लोगों का साथ, डर का सामना, असफल होने से न डरें, और रिश्ते बनाना।

विषय सूची
लेखक जेफ़ केलर की कहानी
जेफ़ केलर बचपन से वकील बनना चाहते थे। उन्होंने लॉ की पढ़ाई की, वकालत शुरू की, शादी भी हो गई। सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा था। पर कुछ साल बाद उन्हें महसूस हुआ कि यह काम उन्हें ख़ुशी नहीं दे रहा। ज़िंदगी बेमतलब लगने लगी और वे उदास रहने लगे।
एक रात, जब नींद नहीं आ रही थी, उन्होंने टीवी पर एक प्रोग्राम का विज्ञापन देखा, जो अवचेतन मन की मान्यताओं (Subconscious Beliefs) को बदलने के बारे में था। उन्होंने वह प्रोग्राम मँगाया, ध्यान से सीखा, और फिर सफलता और इंसानी व्यवहार पर सैकड़ों किताबें पढ़ डालीं।
जैसे जैसे उन्होंने नकारात्मक नज़रिया छोड़कर सकारात्मक नज़रिया अपनाया, उनकी ज़िंदगी में बड़े बदलाव आने लगे। वकालत के साथ वे प्रेरक भाषण देने लगे, और लगभग 10 साल वकालत करने के बाद उन्होंने पूरी तरह मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक का काम चुन लिया। उनकी यह किताब पहली बार 1999 में छपी और दुनिया भर में पढ़ी गई।
किताब के 12 सबक़ एक नज़र में
| हिस्सा | सबक़ | एक लाइन में |
|---|---|---|
| सोच | 1. नज़रिया दुनिया की खिड़की है | गंदी खिड़की से अच्छा नज़ारा भी बुरा दिखता है |
| सोच | 2. आप एक इंसानी चुंबक हैं | जैसा सोचते हैं, वैसा खींचते हैं |
| सोच | 3. सफलता की तस्वीर बनाएँ | मन की फ़िल्म पहले, असली नतीजा बाद में |
| सोच | 4. पक्का इरादा पहाड़ हिला देता है | “कोशिश करूँगा” नहीं, “करके रहूँगा” |
| सोच | 5. समस्या को अवसर बनाएँ | हर मुश्किल में एक बीज छिपा है |
| शब्द | 6. शब्द रास्ता बनाते हैं | जो कहते हैं, उसे निभाना पड़ता है |
| शब्द | 7. “कैसे हो?” का जवाब | “बस चल रहा है” की जगह “बहुत बढ़िया!” |
| शब्द | 8. शिकायत बंद करें | शिकायत समस्या नहीं, दर्द बढ़ाती है |
| कर्म | 9. सकारात्मक लोगों का साथ | संगत से ही रंगत आती है |
| कर्म | 10. डर का सामना करें | डर से भागने पर वह बढ़ता है |
| कर्म | 11. असफल होने से न डरें | हर “ना” अगली “हाँ” के क़रीब ले जाती है |
| कर्म | 12. रिश्ते बनाएँ | पहले दें, फिर पाने की उम्मीद करें |
हिस्सा 1: सफलता मन से शुरू होती है
सबक़ 1: आपका नज़रिया दुनिया के लिए आपकी खिड़की है
घर के बाहर कितना भी सुंदर नज़ारा हो, अगर खिड़की का शीशा गंदा है, तो सब कुछ धुँधला और बुरा दिखेगा। हम सब दुनिया को अपने नज़रिए की खिड़की से देखते हैं। खिड़की साफ़, तो दुनिया साफ़।
एक छोटे बच्चे को देखिए, जो चलना सीख रहा है। वह गिरता है, तो क्या करता है? वह फ़र्श को दोष नहीं देता, माता पिता पर उँगली नहीं उठाता, हार नहीं मानता। वह मुस्कुराता है, फिर खड़ा होता है, और तब तक कोशिश करता है जब तक चलना न सीख ले। उसकी खिड़की बिलकुल साफ़ है।
पर बड़े होते होते खिड़की पर धूल जमने लगती है: कम नंबर पर डाँट, दूसरों से तुलना, बार बार की रोक टोक, ताने और असफलताएँ। धीरे धीरे हम ख़ुद पर भरोसा और सकारात्मक नज़रिया खो देते हैं।
अच्छी ख़बर: खिड़की फिर से साफ़ की जा सकती है। नज़रिया जन्म से तय नहीं होता, यह एक चुनाव है, जो हम हर दिन करते हैं।
सबक़ 2: आप एक इंसानी चुंबक हैं
जेफ़ केलर सफलता की कुंजी को छह अंग्रेज़ी शब्दों में बताते हैं: “We become what we think about.” यानी हम वही बन जाते हैं, जिसके बारे में लगातार सोचते हैं।
अगर आप किसी लक्ष्य के बारे में लगातार सोचते हैं, तो आप अनजाने में उसकी ओर कदम बढ़ाने लगते हैं, उससे जुड़े लोग, जानकारी और मौक़े पहचानने लगते हैं। इसीलिए वे कहते हैं, आप एक चुंबक की तरह हैं।
मान लीजिए दो लोग साल में ₹10 लाख कमाना चाहते हैं। एक सोचता है, “मैं यह कमा सकता हूँ, बस रास्ता ढूँढना है।” दूसरा सोचता है, “कमाना तो चाहिए, पर मुझसे कहाँ होगा।” पहला व्यक्ति रास्ते खोजता है, दूसरा बहाने। चुंबक दोनों हैं, बस एक अवसर खींच रहा है और दूसरा निराशा।
असफलता सड़क के स्पीड ब्रेकर जैसी है, जो सिर्फ़ यह परखने आती है कि आपको अपने सपने की कितनी चाह है। नकारात्मक नज़रिए से यही स्पीड ब्रेकर पहाड़ लगने लगता है।
सबक़ 3: अपनी सफलता की तस्वीर बनाएँ
एक इंटरव्यू में मशहूर गायिका सेलीन डियोन से पूछा गया कि क्या उन्होंने शुरुआत में सोचा था कि उनके करोड़ों रिकॉर्ड बिकेंगे और वे हज़ारों लोगों के सामने गाएँगी। उन्होंने कहा, इसमें कुछ भी हैरानी वाला नहीं, क्योंकि यह सब उन्होंने 5 साल की उम्र में ही मन में देख लिया था।
बहुत से लोग सभा में बोलने से डरते हैं। कई सर्वे में यह लोगों के सबसे बड़े डरों में आता है। ऐसे लोग बोलने का सोचते ही मन में ख़ुद को घबराए हुए, भूलते हुए और हँसी का पात्र बनते देखते हैं। यही तस्वीरें बार बार दोहराने से डर और गहरा होता है।
इसके बजाय मन में यह तस्वीर बनाएँ: आप आत्मविश्वास से बोल रहे हैं, लोग ध्यान से सुन रहे हैं, आपकी बात पर मुस्कुरा रहे हैं, अंत में तालियाँ बज रही हैं, और लोग बधाई देने आ रहे हैं।
ध्यान रखें: मन की तस्वीरें रातों रात सच नहीं होतीं। पर धैर्य से रोज़ ऐसी तस्वीरों पर ध्यान देने से आप अपने आप ऐसे काम करने लगते हैं, जो सपने को सच करने में मदद करते हैं: तैयारी, अभ्यास और हिम्मत।
सबक़ 4: पक्का इरादा करें, पहाड़ हिल जाएँगे
अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया के बेंजामिन रोल ने 67 साल की उम्र में लॉ की पढ़ाई पूरी की। वकालत शुरू करने के लिए उन्हें कठिन बार परीक्षा (Bar Exam) पास करनी थी। पहली बार फ़ेल हुए। दूसरी बार भी। फिर तीसरी, चौथी, और तेरहवीं बार भी। यह परीक्षा साल में सिर्फ़ 2 बार होती है, यानी तेरहवीं असफलता तक वे 73 साल के हो चुके थे।
ज़्यादातर लोग बहुत पहले हार मान लेते, पर उन्होंने चौदहवीं बार परीक्षा दी और पास हो गए। 74 साल की उम्र में उन्हें वकालत की अनुमति मिली।
जेफ़ केलर कहते हैं कि “मैं कोशिश करूँगा” और “मैं करके रहूँगा” में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है। कोशिश करने वाला पहली मुश्किल पर रुक जाता है, पक्का इरादा करने वाला रास्ता बदलता है, पर रुकता नहीं।
अभ्यास: एक लक्ष्य चुनें जो आपके लिए सच में ज़रूरी है। उसे लिखें, उसकी तारीख़ तय करें, और लिखें: “मैं यह करके रहूँगा, चाहे जितनी बार कोशिश करनी पड़े।”
सबक़ 5: समस्याओं को अवसरों में बदलें
डेव ब्रूनो एक मेडिकल उपकरण कंपनी में नेशनल सेल्स मैनेजर थे। 1984 में उनकी नौकरी चली गई। उसी बेरोज़गारी के दौरान एक रात उनकी कार सड़क से उतरकर बुरी तरह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। फेफड़े, पसलियाँ, दिल और लिवर बुरी तरह घायल हुए। तीन दिन वे लाइफ़ सपोर्ट पर ज़िंदगी और मौत के बीच रहे, फिर चमत्कारिक रूप से बच गए।
अस्पताल में उन्हें लगा कि उन्हें दूसरा मौक़ा मिला है। उन्होंने तय किया कि वे प्रेरक विचारों (Quotes) को लोगों तक पहुँचाने का काम करेंगे। घर लौटे तो भारी मेडिकल बिलों के कारण दिवालिया होना पड़ा, घर छिन गया। फिर भी उन्होंने सपना नहीं छोड़ा। अगले कुछ साल ऐसी नौकरियाँ कीं, जिनमें मार्केटिंग और प्रिंटिंग सीख सकें।
फिर एक दिन विचार आया: इन प्रेरक विचारों को क्रेडिट कार्ड जैसे सुनहरे धातु के कार्ड पर छापें, ताकि लोग उन्हें बटुए में रख सकें। उन्होंने इसे “Success Gold Card” नाम दिया। अस्पताल छोड़ने के 5 साल बाद उन्होंने पहला कार्ड बेचा, और आगे चलकर लाखों कार्ड बिके। एक दुर्घटना, एक बड़े अवसर का दरवाज़ा बन गई।
अभ्यास: अपनी किसी मौजूदा समस्या के लिए लिखें: “इस समस्या में अच्छा क्या छिपा हो सकता है? इससे मैं क्या सीख सकता हूँ?”
हिस्सा 2: अपने शब्दों पर ध्यान दें
सबक़ 6: आपके शब्द रास्ता बनाते हैं
हम जो बोलते हैं, वही धीरे धीरे हमारी सोच और फिर हमारा व्यवहार बन जाता है। “मुझसे नहीं होगा”, “मेरी किस्मत ही ख़राब है” जैसे वाक्य बार बार बोलने से मन उन्हें सच मानने लगता है।
इसका एक साहसी तरीक़ा है सबके सामने ऐलान कर देना, जिसे अंग्रेज़ी में “Burning your bridges” कहते हैं, यानी लौटने का रास्ता ही बंद कर देना। मशहूर मोटिवेशनल स्पीकर ज़िग ज़िगलर ने तय किया कि वे अपना वज़न 202 पाउंड से घटाकर 165 पाउंड करेंगे। उस समय वे अपनी किताब “See You at the Top” लिख रहे थे। उन्होंने किताब में पहले ही लिख दिया कि उनका वज़न 165 पाउंड है, और छपाई के लिए हज़ारों प्रतियों का ऑर्डर दे दिया, जबकि तब उनका वज़न 202 पाउंड था। अब उनकी साख दाँव पर थी। छपाई से पहले उन्होंने 37 पाउंड वज़न घटाकर दिखाया।
यह तरीक़ा जोखिम भरा है, इसलिए इसे सिर्फ़ उन्हीं लक्ष्यों के लिए अपनाएँ, जो आपके लिए बहुत ज़रूरी हों और जिनके लिए आप किसी भी हद तक मेहनत करने को तैयार हों।
सबक़ 7: “कैसे हो?” का जवाब बदलें
दिन में कई बार कोई पूछता है, “कैसे हो?” और हम अक्सर बिना सोचे कहते हैं: “बस चल रहा है”, “ठीक ही है”, “क्या बताएँ, परेशान हैं।” जेफ़ केलर कहते हैं कि यह छोटा सा जवाब आपकी ऊर्जा और दूसरों पर आपकी छाप दोनों तय करता है।
इसकी जगह पूरे मन से कहें: “बहुत बढ़िया!”, “शानदार!”, “एकदम मस्त!” शुरू में यह अजीब लग सकता है, पर कुछ ही दिनों में आप पाएँगे कि ऐसा बोलते ही आपका मूड भी बेहतर होता है, और लोग भी आपसे मिलकर अच्छा महसूस करते हैं।
सबक़ 8: शिकायत करना बंद करें
इसका मतलब यह नहीं कि समस्याओं को अनदेखा करें। मतलब है कि शिकायत की जगह अपनी ऊर्जा समस्या सुलझाने में लगाएँ। अगर आप थके रहते हैं, तो हर किसी को थकान के बारे में बताने के बजाय व्यायाम शुरू करें या रात को जल्दी सोएँ।
शिकायत तीन तरह से आपके ख़िलाफ़ काम करती है:
- कोई सुनना नहीं चाहता: लोग आपकी बीमारी और परेशानियों की बातें बार बार नहीं सुनना चाहते, धीरे धीरे वे आपसे कतराने लगते हैं।
- दर्द बढ़ता है: बार बार शिकायत करने से आप उसी दुख को फिर से जीते हैं।
- कुछ बदलता नहीं: शिकायत ख़ुद कुछ हासिल नहीं करती, उलटे हल ढूँढने से ध्यान हटा देती है।
एक मज़ाकिया कहावत है: 90% लोगों को आपकी समस्या से कोई मतलब नहीं, और बाक़ी 10% ख़ुश होते हैं कि आपको समस्या है! इसलिए ऐसे इंसान बनें, जिसे आते देख लोग रास्ता न बदलें।
हिस्सा 3: भगवान उनकी मदद करता है जो ख़ुद कदम उठाते हैं
सबक़ 9: सकारात्मक लोगों के साथ रहें
माइक हाई स्कूल में ऐसे लड़कों के साथ रहता था, जिनका न कोई लक्ष्य था, न सपना। वे हमेशा नकारात्मक बातें करते और माइक जब भी कुछ नया करने की बात करता, उसका मज़ाक उड़ाते। माइक उनके साथ बस इसलिए था ताकि अकेला न पड़े।
कॉलेज में उसे ऐसे लोग मिले जो सीखना और कुछ हासिल करना चाहते थे। उसने उन्हीं के साथ समय बिताने का फ़ैसला किया। धीरे धीरे उसका आत्मविश्वास बढ़ा, उसने लक्ष्य बनाने शुरू किए, और आगे चलकर वह एक सफल वीडियो प्रोडक्शन कंपनी का मालिक बना।
जब लेखक ने पूछा कि उसके पुराने दोस्त क्या कर रहे हैं, तो माइक ने कहा: “वे अब भी वहीं हैं, वैसी ही नकारात्मक बातें करते हैं। अगर मैं उनके साथ रहता, तो आज भी नुक्कड़ पर बैठा होता।”
हमारे यहाँ भी कहावत है: “संगत से ही रंगत आती है।” अपने आसपास के 5 लोगों को देखिए, आपकी सोच काफ़ी हद तक उन्हीं जैसी होती जाती है।
अभ्यास: उन लोगों की सूची बनाएँ, जिनसे मिलकर आप ऊर्जा से भर जाते हैं, और जिनसे मिलकर थक जाते हैं। पहली सूची वालों के साथ समय बढ़ाएँ, दूसरी सूची वालों के साथ समय सीमित करें।
सबक़ 10: अपने डर का सामना करें और आगे बढ़ें
डॉटी बर्मन 32 साल तक न्यूयॉर्क के एक हाई स्कूल में अंग्रेज़ी पढ़ाती रहीं, जबकि 10 साल की उम्र से उनका सपना मंच पर गाने और परफ़ॉर्म करने का था। सुरक्षित नौकरी के डर से उन्होंने वह सपना टाल दिया, पर पढ़ाते हुए भी गाने लिखती और गाती रहीं, जिससे सपना ज़िंदा रहा।
1988 की गर्मियों में उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया, पर अनजान रास्ते के डर से इतनी घबरा गईं कि इस्तीफ़ा वापस ले लिया। 6 महीने बाद, जनवरी 1989 में, उन्होंने आख़िरकार डर पर क़ाबू पाया और नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने अपना लिखा हुआ म्यूज़िकल शो मंच पर पेश किया, देश भर में परफ़ॉर्म किया, और लगभग 60 साल की उम्र में अपनी म्यूज़िक CD निकाली।
डर की क़ैद से निकलने का एक ही रास्ता है: उसका सामना करना। डर से भागने पर वह बढ़ता है, सामना करने पर छोटा होता जाता है।
अभ्यास: इस हफ़्ते कोई एक काम करें जिससे आपको थोड़ा डर लगता है: किसी मीटिंग में बोलना, किसी से नई बात करना, कोई नया हुनर सीखने की क्लास जॉइन करना।
सबक़ 11: बाहर निकलिए और असफल होने से मत डरिए
दो लेखकों ने प्रेरक कहानियों का एक संग्रह तैयार किया। उन्हें लगा कि 3 महीने में प्रकाशक मिल जाएगा। पहले प्रकाशक ने मना कर दिया, दूसरे ने भी, तीसरे ने भी। कुल 33 प्रकाशकों ने मना किया। 34वें प्रकाशक ने हाँ कही। वह किताब थी “Chicken Soup for the Soul”, जिसके लेखक थे जैक कैनफ़ील्ड और मार्क विक्टर हैन्सन। आगे चलकर इस सीरीज़ की करोड़ों प्रतियाँ बिकीं।
उन्हें 33 बार “ना” सुनने के बाद भी किसने टिकाए रखा? उनका नज़रिया।
जेफ़ केलर कहते हैं कि जीवन में दौड़ने से पहले चलना, और चलने से पहले रेंगना सीखना पड़ता है। हर नया लक्ष्य अपने साथ असफलताओं का नया सेट लाता है। फ़र्क़ बस इतना है कि आप असफलता को अस्थायी रुकावट मानते हैं या आख़िरी फ़ैसला। अगर आप हर हार से सीखने का निश्चय कर लें और अंतिम लक्ष्य पर नज़र रखें, तो असफलता आख़िर में सफलता तक ही ले जाती है।
सबक़ 12: ऐसे रिश्ते बनाएँ जो नतीजे दें (Networking)
किताब का आख़िरी सबक़ है कि अकेले कोई बड़ा मुक़ाम नहीं पाता। नौकरी, ग्राहक, साझेदार और मौक़े, सब लोगों के ज़रिए ही आते हैं। अच्छे रिश्ते बनाने के जेफ़ केलर के सुझाव:
- पहले दें: किसी की मदद करें, कोई जानकारी या संपर्क साझा करें, बिना तुरंत बदले की उम्मीद के।
- सच्ची दिलचस्पी लें: दूसरों के काम और लक्ष्यों के बारे में पूछें और ध्यान से सुनें।
- संपर्क बनाए रखें: मिलने के बाद धन्यवाद का संदेश भेजें और समय समय पर हालचाल लेते रहें।
- भरोसेमंद बनें: जो वादा करें, समय पर निभाएँ।
21 दिन का एटीट्यूड प्लान
| दिन | अभ्यास |
|---|---|
| 1 से 7 | रोज़ सुबह 5 मिनट अपनी सफलता की तस्वीर मन में देखें, और “कैसे हो?” का जवाब “बहुत बढ़िया!” दें |
| 8 से 14 | एक भी शिकायत न करने का संकल्प, शिकायत निकले तो उसी समय एक हल भी बोलें |
| 15 से 21 | रोज़ एक छोटा डर वाला काम करें, और एक व्यक्ति की बिना स्वार्थ मदद करें |
यह किताब ख़रीदें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Attitude Is Everything किताब के लेखक कौन हैं?
इसके लेखक जेफ़ केलर (Jeff Keller) हैं, जो लगभग 10 साल वकालत करने के बाद मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक बने।
Attitude Is Everything में कितने सबक़ हैं?
12 सबक़, जो तीन हिस्सों में बँटे हैं: सोच (सफलता मन से शुरू होती है), शब्द (अपनी बोली पर ध्यान) और कर्म (जो ख़ुद कदम उठाते हैं)।
इस किताब का सबसे बड़ा संदेश क्या है?
“We become what we think about”, यानी हम वही बन जाते हैं जिसके बारे में लगातार सोचते हैं। नज़रिया जन्म से तय नहीं, यह रोज़ का चुनाव है।
सकारात्मक नज़रिया कैसे बनाएँ?
रोज़ सफलता की तस्वीर मन में देखें, शिकायत बंद करें, अपने शब्द सकारात्मक रखें, सकारात्मक लोगों के साथ रहें, और छोटे डरों का सामना करें।
क्या सिर्फ़ सकारात्मक सोच से सफलता मिल जाती है?
नहीं। किताब का तीसरा हिस्सा पूरा कर्म के बारे में है। सकारात्मक सोच शुरुआत है, पर पक्का इरादा, मेहनत और असफलता के बाद भी डटे रहना ज़रूरी है।
यह किताब किसके लिए अच्छी है?
विद्यार्थी, नौकरी या व्यापार शुरू करने वाले, और हर वह व्यक्ति जो बार बार की असफलता या नकारात्मक माहौल से थक गया है।
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इन 12 सबक़ों में से कौन सा आपकी ज़िंदगी से सबसे ज़्यादा जुड़ता है, कमेंट में ज़रूर बताइए। हमारे वीडियो देखने के लिए Storyshala YouTube चैनल से जुड़िए।
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