स्टॉप लॉस क्या है? स्टॉप लॉस (Stop Loss) एक पहले से लगाया गया ऑर्डर है, जो भाव एक तय स्तर तक गिरते ही आपका शेयर अपने आप बेच देता है, ताकि नुकसान एक सीमा से आगे न बढ़े। इसका सीधा मतलब है: “नुकसान रोको”। जैसे गाड़ी में ब्रेक, वैसे ही ट्रेडिंग में स्टॉप लॉस।
छोटा जवाब: स्टॉप लॉस ऑर्डर में दो क़ीमतें होती हैं: ट्रिगर प्राइस (जिस भाव पर ऑर्डर जागता है) और लिमिट प्राइस (जिस भाव तक बेचने को आप तैयार हैं)। भारत में ज़्यादातर ब्रोकर SL (स्टॉप लॉस लिमिट) ऑर्डर देते हैं। NSE ने 27 सितंबर 2021 से इंडेक्स और स्टॉक ऑप्शंस में SL-M (मार्केट) ऑर्डर बंद कर दिए हैं, और कई ब्रोकर दूसरे सेगमेंट में भी SL-M नहीं देते।
मुख्य बातें
- स्टॉप लॉस = भाव तय स्तर तक गिरे तो अपने आप बेचने का ऑर्डर।
- ट्रिगर प्राइस पर ऑर्डर एक्सचेंज में जाता है; लिमिट प्राइस वह न्यूनतम भाव है जिस पर बिकेगा।
- SL ऑर्डर में ट्रिगर और लिमिट के बीच थोड़ा फ़ासला रखें, वरना तेज़ गिरावट में ऑर्डर अधूरा रह सकता है।
- स्टॉप लॉस सपोर्ट के थोड़ा नीचे या पूँजी के 1% जोखिम के हिसाब से लगाएँ।
- स्टॉप लॉस को नीचे खिसकाना सबसे बड़ी ग़लती है; ऊपर (ट्रेलिंग) खिसकाना सही है।
विषय सूची
स्टॉप लॉस का मतलब, एक उदाहरण से
मान लीजिए आपने कोई शेयर ₹500 में ख़रीदा और तय किया कि ₹490 से नीचे गया तो आप निकल जाएँगे:
- आप ट्रिगर प्राइस ₹490 और लिमिट प्राइस ₹488 के साथ SL सेल ऑर्डर लगाते हैं।
- जब तक भाव ₹490 से ऊपर है, ऑर्डर ब्रोकर के पास सोया रहता है।
- भाव ₹490 छूते ही ऑर्डर एक्सचेंज में चला जाता है और ₹488 या उससे बेहतर भाव पर बिकता है।
- आपका नुकसान लगभग ₹10 से ₹12 प्रति शेयर पर रुक जाता है, चाहे भाव बाद में ₹450 तक क्यों न गिरे।
ट्रिगर प्राइस का मतलब (SL Trigger Price Meaning)
ट्रिगर प्राइस वह भाव है जिस पर आपका स्टॉप लॉस ऑर्डर सक्रिय (एक्टिव) होता है। ट्रिगर से पहले ऑर्डर बाज़ार में दिखता ही नहीं।
- बेचने (सेल) के स्टॉप लॉस में: ट्रिगर प्राइस ≥ लिमिट प्राइस। जैसे ट्रिगर ₹490, लिमिट ₹488।
- ख़रीदने (बाय) के स्टॉप लॉस में (शॉर्ट सेल करने वालों के लिए): ट्रिगर प्राइस ≤ लिमिट प्राइस। जैसे ट्रिगर ₹510, लिमिट ₹512।
SL और SL-M ऑर्डर में अंतर

SL-M क्यों बंद हुआ: बहुत कम कारोबार वाले कॉन्ट्रैक्ट में SL-M ऑर्डर बिना भाव सुरक्षा के बहुत ख़राब भाव पर भर जाते थे। इसलिए NSE ने 27 सितंबर 2021 से इंडेक्स और स्टॉक ऑप्शंस में SL-M ऑर्डर बंद कर दिए, और BSE ने 9 अक्टूबर 2023 से अपने सभी सेगमेंट में SL-M बंद किए। कई ब्रोकर अब NSE के दूसरे सेगमेंट में भी SL-M नहीं देते, इसलिए अपने ब्रोकर का नियम ज़रूर देखें।
स्टॉप लॉस के और प्रकार
- ट्रेलिंग स्टॉप लॉस: भाव आपके पक्ष में बढ़े तो स्टॉप लॉस भी उसी के साथ ऊपर खिसकता है, पर नीचे कभी नहीं। इससे मुनाफ़ा भी बचता है।
- GTT (Good Till Triggered): कई ब्रोकर यह सुविधा देते हैं, जिसमें डिलीवरी वाले शेयर पर स्टॉप लॉस या टारगेट लंबे समय तक (ब्रोकर की तय अवधि तक) लगा रह सकता है। सामान्य SL ऑर्डर अक्सर उसी दिन तक ही रहता है।
- मानसिक स्टॉप लॉस: स्तर तय करके ख़ुद बेचना। यह सबसे कमज़ोर तरीका है, क्योंकि घबराहट और उम्मीद में लोग अक्सर बेचते नहीं।
स्टॉप लॉस कहाँ लगाएँ: 4 तरीके

1% नियम के साथ स्टॉप लॉस का हिसाब

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स्टॉप लॉस के फ़ायदे और सीमाएँ
| फ़ायदे | सीमाएँ |
|---|---|
| बड़ा नुकसान रुकता है | गैप डाउन (अगले दिन बहुत नीचे खुलना) में तय भाव से नीचे बिक सकता है |
| भावनाओं की जगह अनुशासन | SL लिमिट ऑर्डर तेज़ गिरावट में न भरे, ऐसा हो सकता है |
| हर समय स्क्रीन देखने की ज़रूरत नहीं | बहुत पास लगाया तो छोटी हलचल में भी बिक जाएगा |
| पूँजी बची रहती है, अगले मौक़े के लिए | लंबे निवेश में बार बार स्टॉप लॉस से अच्छे शेयर छूट सकते हैं |
स्टॉप लॉस की 5 आम ग़लतियाँ
- स्टॉप लॉस लगाया ही नहीं, ख़ासकर इंट्राडे और F&O में।
- भाव पास आते ही स्टॉप लॉस नीचे खिसका देना, “थोड़ा और रुकते हैं” के चक्कर में।
- बहुत पास स्टॉप लॉस, जो रोज़ की सामान्य हलचल में ही लग जाए।
- ट्रिगर और लिमिट एक ही भाव पर, जिससे तेज़ गिरावट में ऑर्डर अधूरा रह जाता है।
- गोल नंबर पर स्टॉप लॉस (जैसे ठीक ₹500), जहाँ बहुत से लोगों के ऑर्डर होते हैं; थोड़ा नीचे रखें।
स्टॉप लॉस कैसे लगाएँ (ब्रोकर ऐप में आम तरीका)
- शेयर चुनें और Sell दबाएँ।
- ऑर्डर टाइप में SL चुनें (उपलब्ध हो तो GTT भी देख सकते हैं)।
- ट्रिगर प्राइस डालें, जैसे ₹490।
- लिमिट प्राइस डालें, ट्रिगर से थोड़ा नीचे, जैसे ₹488।
- मात्रा और प्रोडक्ट (इंट्राडे या डिलीवरी) जाँचकर ऑर्डर लगाएँ और ऑर्डर बुक में देख लें कि ऑर्डर “trigger pending” में है।
अलग ब्रोकर के ऐप में नाम थोड़े अलग हो सकते हैं; अपने ब्रोकर की मदद वाले पेज पर तरीका ज़रूर पढ़ें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
स्टॉप लॉस का मतलब क्या है?
स्टॉप लॉस का मतलब है “नुकसान रोकना”। यह एक पहले से लगाया गया ऑर्डर है जो भाव तय स्तर तक गिरते ही शेयर अपने आप बेच देता है।
SL ट्रिगर प्राइस का मतलब क्या है?
ट्रिगर प्राइस वह भाव है जिस पर स्टॉप लॉस ऑर्डर सक्रिय होकर एक्सचेंज में जाता है। उसके बाद ऑर्डर लिमिट प्राइस या बेहतर भाव पर भरता है।
SL और SL-M में क्या अंतर है?
SL में ट्रिगर और लिमिट प्राइस दोनों होते हैं, जिससे भाव पर नियंत्रण रहता है। SL-M में सिर्फ़ ट्रिगर होता है और बाज़ार भाव पर बिकता है। NSE ऑप्शंस में SL-M 27 सितंबर 2021 से बंद है।
स्टॉप लॉस कितना लगाना चाहिए?
कोई एक नियम नहीं है। आम तरीका है स्टॉप लॉस चार्ट के सपोर्ट से थोड़ा नीचे रखना और शेयरों की संख्या ऐसे तय करना कि कुल पूँजी का 1% से ज़्यादा जोखिम न हो।
ट्रेलिंग स्टॉप लॉस क्या है?
ट्रेलिंग स्टॉप लॉस में भाव आपके पक्ष में बढ़ने पर स्टॉप लॉस भी ऊपर खिसकाया जाता है, पर नीचे कभी नहीं। इससे कमाया हुआ मुनाफ़ा बचता है।
क्या स्टॉप लॉस हमेशा उसी भाव पर लगता है?
नहीं। गैप डाउन या बहुत तेज़ गिरावट में भाव ट्रिगर से नीचे निकल सकता है। SL लिमिट ऑर्डर तब अधूरा रह सकता है और SL-M ख़राब भाव पर भर सकता है।
क्या लंबे निवेश में भी स्टॉप लॉस लगाना चाहिए?
लंबे निवेश में फ़ैसला अक्सर कंपनी के कारोबार के आधार पर होता है, रोज़ के भाव पर नहीं। फिर भी अपनी जोखिम सीमा पहले से तय रखना अच्छा है; ट्रेडिंग में स्टॉप लॉस ज़रूरी है।
स्रोत (15 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए)
- NSE सर्कुलर 71/2021: ऑप्शंस में SL-M ऑर्डर बंद (PDF)
- BSE का SL-M बंद करने का फ़ैसला (9 अक्टूबर 2023): Stocko की रिपोर्ट और Tradejini सहायता पेज
- Zerodha: स्टॉप लॉस ऑर्डर कैसे काम करते हैं
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ज़रूरी सूचना: यह लेख केवल शिक्षा और सामान्य जानकारी के लिए है, ट्रेडिंग या निवेश की सलाह नहीं। ऑर्डर के प्रकार और नियम एक्सचेंज और ब्रोकर के हिसाब से बदल सकते हैं। ट्रेडिंग में नुकसान का जोखिम है।
नोट: इस लेख में Amazon के affiliate लिंक हैं। इनसे ख़रीदारी करने पर Storyshala को छोटा कमीशन मिलता है, आपके लिए क़ीमत नहीं बदलती।






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