बुरे समय में क्या करें: मुश्किल हालात से निकलने के 12 उपाय (How to Deal with Difficult Situation in Hindi)

अपडेट: 13 मिनट में पढ़ें

बुरे समय में क्या करें, यह सवाल ज़िंदगी में कभी न कभी हर किसी के सामने आता है। नौकरी चली जाए, पैसों की तंगी हो, कोई अपना धोखा दे दे, बीमारी आ जाए या मेहनत के बाद भी असफलता मिले, तब मन घबरा जाता है और समझ नहीं आता कि करें तो क्या करें। इस लेख (How to Deal with Difficult Situation in Hindi) में सुधीर दीक्षित की किताब “अमीरों के 5 नियम” की सीख, दुनिया के सफल लोगों के उदाहरण और भगवद गीता की बात के साथ, मुश्किल समय से निकलने के 12 आज़माए हुए उपाय एक जगह दिए गए हैं।

छोटा जवाब: बुरे समय में सबसे पहले घबराहट में कोई बड़ा फ़ैसला न लें। शांत होकर देखें कि क्या आपके हाथ में है और क्या नहीं, किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें, और हर दिन एक छोटा कदम उठाएँ। याद रखें कि बुरा समय स्थायी नहीं होता, और इतिहास के लगभग हर सफल व्यक्ति ने किसी न किसी बड़े बुरे दौर को पार किया है।

विषय सूची

बुरे समय से निकलने के 12 उपाय: एक नज़र में

उपायएक लाइन में
1. समस्या को अवसर की तरह देखेंहर मुश्किल में कोई नया रास्ता छिपा होता है
2. नज़रिया सकारात्मक रखेंघबराया दिमाग़ हल नहीं सोच पाता
3. पुरानी सफलताएँ याद करेंआत्मविश्वास पिछली जीतों की याद से आता है
4. हर समस्या को इम्तहान मानेंमुश्किलें बताती हैं कि कहाँ सुधार चाहिए
5. लक्ष्य पर ध्यान रखेंनज़र लक्ष्य पर हो तो बाधाएँ छोटी दिखती हैं
6. मुश्किल में छिपा अवसर पहचानेंजितनी बड़ी मुश्किल, उतना बड़ा मौका
7. मुश्किलों के लिए पहले से तैयार रहेंपहले से सोची मुश्किल कम डराती है
8. विरोध की परवाह न करेंहर नए काम का विरोध होता ही है
9. बहाने न बनाएँउम्र, पैसा या बीमारी बहाना नहीं है
10. अपने सपने पर यकीन रखेंयकीन मज़बूत हो तो मुश्किल छोटी लगती है
11. जो हाथ में है, उस पर ध्यान देंजो बदल नहीं सकते, उस पर ऊर्जा न गँवाएँ
12. मदद माँगने में शर्म न करेंसही समय पर ली गई मदद आधी मुश्किल हल कर देती है

बुरा समय आते ही सबसे पहले क्या करें

जब अचानक कोई बड़ी मुसीबत आती है, तो पहले 24 से 48 घंटे सबसे मुश्किल होते हैं। इन दिनों में ये पाँच काम करें:

  1. रुकें और साँस लें: घबराहट में दिमाग़ सबसे बुरा सोचता है। 5 मिनट धीमी और गहरी साँस लें। इससे मन थोड़ा शांत होता है और सोचने की ताक़त लौटती है।
  2. कोई बड़ा फ़ैसला तुरंत न लें: नौकरी छोड़ना, कोई रिश्ता तोड़ना, बड़ा कर्ज़ लेना या कोई संपत्ति बेचना, ये फ़ैसले मन शांत होने तक टाल दें।
  3. किसी अपने से बात करें: परिवार, दोस्त या किसी भरोसेमंद बड़े से अपनी बात कहें। बोलने से ही आधा बोझ हल्का हो जाता है।
  4. काग़ज़ पर लिखें: क्या हुआ, सबसे बुरा क्या हो सकता है, और अभी आप क्या कर सकते हैं। लिखते ही डर साफ़ और छोटा दिखने लगता है।
  5. नींद और खाना न छोड़ें: थका और भूखा शरीर हर मुश्किल को बड़ा दिखाता है। मुश्किल समय में शरीर का ध्यान सबसे ज़रूरी है।

How to Deal with Difficult Situation in Hindi: 12 उपाय विस्तार से

1. समस्याओं को अवसर के रूप में देखें

अगर आपके सामने कोई समस्या आती है, तो उसे चुनौती मानें। कर्नल हारलैंड सैंडर्स का कारोबार उस समय चौपट हो गया, जब उनकी उम्र 60 साल पार कर चुकी थी। उनके रेस्टोरेंट के सामने से हाईवे हट गया और ग्राहक आने बंद हो गए। उन्होंने हार मानने की जगह अपनी चिकन की रेसिपी लेकर दूसरे रेस्टोरेंट वालों के पास जाना शुरू किया। यहीं से KFC की शुरुआत हुई।

जब डेविट वैलेस के मन में रीडर्स डाइजेस्ट पत्रिका निकालने का विचार आया, तो उन्होंने कई प्रकाशकों को इसके नमूने भेजे, पर सबने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया। वैलेस निराश तो हुए, पर उन्होंने ख़ुद ही पत्रिका छापनी शुरू कर दी। बाद में उन्हें समझ आया कि यह उनके लिए अच्छा ही हुआ, क्योंकि अगर कोई दूसरा प्रकाशक इसे छापता, तो पत्रिका का मुनाफ़ा और मालिकाना हक़ उनके पास नहीं रहता।

सीख: समस्या को अवसर की तरह देखें और उसे चुनौती मानकर डटकर सामना करें।

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2. अपना नज़रिया सकारात्मक रखें

अगर आपका नज़रिया नकारात्मक होगा, तो आप मुश्किलें देखकर घबरा जाएँगे, और आपका दिमाग़ उनसे निकलने के उपाय नहीं सोच पाएगा। दूसरी ओर, अगर आपका नज़रिया सकारात्मक है, तो आपका दिमाग़ मुश्किल में भी रास्ता ढूँढने लगता है।

आईकिया (IKEA) कंपनी के संस्थापक इंगवार कैम्प्राड के सामने एक बड़ी समस्या आई, जब फ़र्नीचर बनाने वाली कंपनियों ने दबाव में आकर उन्हें सामान देना बंद कर दिया। कैम्प्राड चाहते तो दुकान बंद कर देते, पर उन्होंने ख़ुद फ़र्नीचर डिज़ाइन करना शुरू कर दिया। बाद में पता चला कि ख़ुद फ़र्नीचर बनाना ही वह चीज़ थी, जिससे आईकिया को सबसे ज़्यादा फ़ायदा हुआ, और यही उसके अनोखे ब्रांड की बुनियाद बनी।

सकारात्मक नज़रिए का मतलब यह नहीं कि मुश्किल को नज़रअंदाज़ करें। इसका मतलब है यह मानना कि “हालात बुरे हैं, पर मैं कुछ न कुछ कर सकता हूँ।”

3. अपनी पुरानी सफलताओं को याद करें

आत्मविश्वास और कुछ नहीं, बल्कि पिछली सफलताओं की याद है। जब आप कोई छोटी सफलता पा लेते हैं, तो उससे अगली सीढ़ी चढ़ने का भरोसा मिलता है।

जब वॉल्ट डिज़्नी डिज़्नीलैंड बना रहे थे, तब उनकी बहुत आलोचना हो रही थी और किसी को इसके सफल होने की उम्मीद नहीं थी। पर डिज़्नी को आलोचना का अनुभव था। वे पहले भी लोगों के मज़ाक़ के बावजूद कई बार सफल हो चुके थे। उसी याद ने उन्हें डटे रहने की ताक़त दी।

आज ही करें: अपनी ज़िंदगी की 5 ऐसी मुश्किलें लिखें, जिनसे आप पहले निकल चुके हैं। यह सूची बताएगी कि आप जितना सोचते हैं, उससे कहीं ज़्यादा मज़बूत हैं।

4. हर समस्या को इम्तहान मानें

समस्याएँ आने पर ही पता चलता है कि हमें अपने सपने पर कितना भरोसा है। जिस व्यक्ति का सपना कमज़ोर होता है, वह समस्या आते ही घुटने टेक देता है।

समस्याएँ एक संकेत की तरह भी काम करती हैं। वे बताती हैं कि आप में कहाँ कमी है, जिसे दूर करना ज़रूरी है। आइंस्टीन से जुड़ी एक प्रसिद्ध बात है कि जिन समस्याओं का हम सामना करते हैं, उन्हें सोच के उसी स्तर पर नहीं सुलझाया जा सकता, जिस पर हमने उन्हें पैदा किया था। यानी मुश्किल हल करने के लिए हमें ख़ुद को बेहतर बनाना पड़ता है।

5. लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें

हेनरी फ़ोर्ड से जुड़ी एक बात बहुत मशहूर है: “बाधाएँ वे डरावनी चीज़ें हैं, जो आपको तब दिखती हैं, जब आप लक्ष्य से नज़र हटा लेते हैं।” लक्ष्य पर नज़र रखने वाला व्यक्ति अर्जुन की तरह होता है, जिसे चिड़िया की आँख के सिवा कुछ नहीं दिखता।

थॉमस एडिसन बल्ब बनाने की कोशिश में हज़ारों बार असफल हुए। कोई दूसरा होता तो हार मान लेता, पर एडिसन को लगन थी। उनसे जुड़ी बात मशहूर है कि उन्होंने कहा था, “मैं असफल नहीं हुआ, मैंने बस ऐसे हज़ारों तरीके खोजे जो काम नहीं करते।” आख़िर में वे सफल हुए।

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6. मुश्किलों में छिपा अवसर पहचानें

हर समस्या में उसका हल छिपा होता है, और हर मुश्किल में एक अवसर। अगर आप ग़रीब परिवार में पैदा हुए हैं, तो इसमें मेहनत से आगे बढ़ने का अवसर छिपा है। अगर आपकी नौकरी चली गई है, तो इसमें कोई नया हुनर सीखने या अपना काम शुरू करने का अवसर छिपा हो सकता है।

इसका मतलब यह है कि मुश्किलें जितनी ज़्यादा होंगी, अवसर भी उतने ही ज़्यादा होंगे। बिना मुश्किल वाले रास्ते पर चलकर बड़ी सफलता पाना लगभग असंभव है।

7. मुश्किलों के लिए पहले से तैयार रहें

मुश्किलों का सामना करने के लिए पहले से तैयार रहें। हो सके तो पहले ही अनुमान लगा लें कि आपके रास्ते में कैसी मुश्किलें आ सकती हैं और आप उन्हें कैसे संभालेंगे।

व्यावहारिक तैयारी:

  • कम से कम 3 से 6 महीने के ख़र्च जितना इमरजेंसी फ़ंड बनाएँ।
  • परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा और कमाने वाले सदस्य के लिए टर्म बीमा रखें।
  • अपने काम के अलावा एक ऐसा हुनर रखें, जिससे ज़रूरत पड़ने पर कमाई हो सके।
  • ज़रूरी काग़ज़ात (आधार, बैंक, बीमा) एक जगह संभालकर रखें।

8. विरोध की परवाह न करें

सफल लोग विरोध की परवाह नहीं करते। वे चुपचाप अपनी मंज़िल की तरफ़ चलते रहते हैं, क्योंकि उन्हें भरोसा होता है कि उनका सपना पूरा होगा। इस दुनिया का दस्तूर ही ऐसा है कि हर नए या बड़े काम का विरोध होता है। इसलिए विरोध से घबराएँ नहीं, अपने सपने पर भरोसा रखें और सकारात्मक मन से आगे बढ़ते रहें।

और पढ़ें: अगर जीवन में सफल होना है तो ऐसे सोचें

9. उम्र, ग़रीबी या बीमारी का बहाना न बनाएँ

मुश्किलों से जूझते समय कभी हार न मानें, और असफलता के लिए बहाना न बनाएँ। कभी यह न कहें कि आप इसलिए असफल हुए, क्योंकि आपकी उम्र ज़्यादा थी, आप ग़रीब थे या आप कम पढ़े लिखे थे।

अगर आप बहाने बनाते हैं, तो समझिए आपने पहले ही हार मान ली है। याद रखें, हारलैंड सैंडर्स ने बुढ़ापे में सफलता पाई, और मैकडॉनल्ड्स को दुनिया भर में फैलाने वाले रे क्रॉक ने 50 साल से ज़्यादा की उम्र में, कई बीमारियों से जूझते हुए यह काम शुरू किया। अगर ये लोग मुश्किलों के बाद सफल हो सकते हैं, तो आप क्यों नहीं?

10. अपने सपने पर यकीन रखें

जब आप अपने सपने पर यकीन रखते हैं, तो मुश्किलें छोटी नज़र आने लगती हैं। जब आपका ध्यान सपने पर होता है, तो आपको मुश्किल नहीं, उसके पार का रास्ता दिखता है। रोज़ सुबह 2 मिनट अपने लक्ष्य के बारे में सोचें और कल्पना करें कि वह पूरा हो गया है। यह आदत बुरे समय में आपको टूटने नहीं देती।

11. जो आपके हाथ में है, सिर्फ़ उस पर ध्यान दें

बुरे समय में सबसे ज़्यादा ताक़त उन बातों पर ख़र्च होती है, जिन्हें हम बदल नहीं सकते: दूसरों का व्यवहार, बीता हुआ कल, या बाज़ार के हालात। एक काग़ज़ पर दो हिस्से बनाइए:

जो मेरे हाथ में हैजो मेरे हाथ में नहीं है
मेरी मेहनत, मेरा व्यवहार, मेरा अगला कदमदूसरे लोग क्या सोचते हैं
ख़र्च कम करना, नया हुनर सीखनाबीती हुई घटना
सेहत, नींद, खानाअर्थव्यवस्था, मौसम, क़िस्मत

अपनी पूरी ऊर्जा पहले हिस्से पर लगाइए। यही बात भगवद गीता भी सिखाती है: “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”, यानी तुम्हारा अधिकार कर्म पर है, फल पर नहीं।

12. मदद माँगने में शर्म न करें

बहुत से लोग बुरे समय में चुप रहकर सब अकेले झेलते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि मदद माँगना कमज़ोरी है। सच इसका उल्टा है। सही समय पर परिवार, दोस्त, गुरु, डॉक्टर या किसी जानकार से ली गई सलाह आधी मुश्किल हल कर देती है। पैसों की परेशानी हो तो किसी भरोसेमंद वित्तीय सलाहकार से, क़ानूनी परेशानी हो तो वकील से, और मन बहुत भारी हो तो डॉक्टर या काउंसलर से ज़रूर बात करें।

बुरे समय के बारे में भगवद गीता क्या कहती है

भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाया कि सुख और दुख मौसम की तरह आते जाते हैं:

मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः। आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत॥ (गीता 2.14)

अर्थ: हे कुंतीपुत्र, सर्दी गर्मी और सुख दुख देने वाले अनुभव आते जाते रहते हैं, ये स्थायी नहीं हैं। हे भारत, इन्हें धैर्य से सहन करो।

यानी बुरा समय भी वैसे ही बीत जाएगा, जैसे अच्छा समय बीत जाता है। गीता के ऐसे ही श्लोक अर्थ सहित यहाँ पढ़ें: भगवद गीता के 15 सबक।

अलग अलग बुरे हालात में क्या करें

हालातसबसे पहले क्या करें
नौकरी चली गईख़र्च तुरंत कम करें, इमरजेंसी फ़ंड का हिसाब लगाएँ, रोज़ 2 से 3 घंटे नई नौकरी खोजने और 1 घंटा नया हुनर सीखने में लगाएँ
पैसों की तंगी या कर्ज़सारे कर्ज़ों की सूची बनाएँ, सबसे महँगे ब्याज वाला पहले चुकाएँ, नया कर्ज़ लेकर पुराना न चुकाएँ, बैंक से बात करके किस्त बदलवाने का रास्ता पूछें
किसी अपने ने धोखा दियातुरंत बदला लेने या बड़ा फ़ैसला करने से बचें, भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें, और आगे के लिए सीमा तय करें
परीक्षा या करियर में असफलताग़लती का ईमानदारी से विश्लेषण करें, अगली कोशिश की योजना बनाएँ, और याद रखें कि एक परीक्षा ज़िंदगी तय नहीं करती
बीमारीडॉक्टर की सलाह पूरी मानें, परिवार को साथ रखें, और जितना हो सके दिनचर्या नियमित रखें
किसी अपने का जानादुख को दबाएँ नहीं, रोना और बात करना ठीक है, ज़रूरी काम परिवार में बाँटें, और ख़ुद को समय दें

बुरे समय में क्या न करें

  • नशा, जुआ या कोई “जल्दी पैसा” वाला रास्ता न अपनाएँ। ये मुश्किल को दोगुना कर देते हैं।
  • सबसे बात करना बंद करके अकेले न बैठ जाएँ।
  • हर किसी को अपनी परेशानी न बताएँ। सिर्फ़ भरोसेमंद लोगों से बात करें।
  • दूसरों से अपनी तुलना न करें। सोशल मीडिया पर सबकी अच्छी तस्वीर ही दिखती है।
  • ग़ुस्से या दुख में कोई ऐसा फ़ैसला न लें, जिसे बाद में बदला न जा सके।

अगर मन बहुत भारी हो: अगर लगातार उदासी, नींद न आना या ख़ुद को नुकसान पहुँचाने जैसे विचार आ रहे हों, तो तुरंत किसी अपने को बताएँ और भारत सरकार की मुफ़्त हेल्पलाइन Tele MANAS (14416) पर बात करें। यह 24 घंटे, हिंदी समेत कई भाषाओं में उपलब्ध है।

बुरे समय में हिम्मत देने वाले 5 विचार

  1. “हर रात के बाद सुबह होती है, बस रात में हार नहीं माननी।”
  2. “मुश्किलें आपको तोड़ने नहीं, बनाने आती हैं।”
  3. “जो आज तुम्हें रुला रहा है, कल वही तुम्हें मज़बूत बनाने की कहानी बनेगा।”
  4. “पेड़ की जड़ें तूफ़ान में ही गहरी होती हैं।”
  5. “समय कैसा भी हो, बदलता ज़रूर है।”

मुश्किल समय में पढ़ने लायक किताबें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बुरे समय में सबसे पहले क्या करना चाहिए?

सबसे पहले शांत रहें और कोई बड़ा फ़ैसला तुरंत न लें। किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें, जो हुआ उसे काग़ज़ पर लिखें, और अपनी नींद और खाने का ध्यान रखें। फिर देखें कि क्या आपके हाथ में है और उस पर एक छोटा कदम उठाएँ।

बुरा समय कैसे जल्दी निकाले?

बुरा समय पूरी तरह हमारे हाथ में नहीं होता, पर हम उसका असर कम कर सकते हैं: रोज़ एक छोटा काम पूरा करें, जो बदल सकते हैं उस पर ध्यान दें, ख़र्च और सेहत संभालें, और सही लोगों से मदद लें।

मुश्किल समय में ख़ुद को मोटिवेट कैसे करें?

अपनी पुरानी सफलताओं की सूची बनाएँ, रोज़ एक छोटा लक्ष्य पूरा करें, सकारात्मक लोगों के साथ रहें, और ऐसे लोगों की कहानियाँ पढ़ें जो बड़ी मुश्किलों से निकले, जैसे कर्नल सैंडर्स, रे क्रॉक और वॉल्ट डिज़्नी।

क्या बुरा समय हमेशा रहता है?

नहीं। भगवद गीता (2.14) भी कहती है कि सुख और दुख मौसम की तरह आते जाते हैं, स्थायी नहीं होते। धैर्य रखें और सही दिशा में मेहनत करते रहें।

बुरे समय में क्या नहीं करना चाहिए?

नशा, जुआ, जल्दी पैसा कमाने के ग़लत रास्ते, ग़ुस्से में बड़े फ़ैसले, और सबसे कटकर अकेले रहना, इनसे बचें।

पैसों की तंगी में क्या करें?

सारे ख़र्च और कर्ज़ लिखें, ग़ैरज़रूरी ख़र्च तुरंत बंद करें, सबसे महँगे ब्याज वाला कर्ज़ पहले चुकाएँ, और नया कर्ज़ लेकर पुराना चुकाने से बचें। ज़रूरत हो तो बैंक से किस्त बदलवाने की बात करें।

“How to deal with difficult situation” किस किताब पर आधारित है?

यह लेख मुख्य रूप से सुधीर दीक्षित की किताब “अमीरों के 5 नियम” की सीख पर आधारित है, साथ में सफल लोगों के उदाहरण और भगवद गीता की बात जोड़ी गई है।

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4 thoughts on “बुरे समय में क्या करें: मुश्किल हालात से निकलने के 12 उपाय (How to Deal with Difficult Situation in Hindi)”

  1. बहुत ही सुंदर आपने विस्तृत मोटिवेट के लिए लिखा है आपके उदाहरण वाकई उचित और मार्गदर्शक है जिसके लिए हम आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं और आशा करते हैं कि आप लोग इसी तरीके से आगे भी लोगों का मार्गदर्शन करेंगे दिल से धन्यवाद

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