बुरे समय में क्या करें | How to Deal with Difficult Situation in Hindi

दोस्तों इस लेख (How to Deal with Difficult Situation in Hindi) के माध्यम से में आपसे Sudhir Dixit की बुक Amiron ke 5 Niyam से बुरे समय से निपटने के लिए 5 Tips (बुरे समय में क्या करें) आपसे शेयर करूँगा। जिससे आप अपनी लाइफ में आने वाली परेशानियों को कम कर पाएंगे। और बेहतर ज़िंदगी का आनंद उठा पाएंगे, तो चलिए शुरू करते है पहले टिप्स से।

समस्याओं को अवसर के रूप में देखें :

यदि आपके सामने कोई समस्या आती है, तो उसे चुनौती मानें। कर्नल सैंडर्स के सामने ऐसी समस्या आई कि उनका सारा कारोबार चौपट हो गया और उन्हें नए सिरे से काम खोजना पड़ा।  तभी उनके मन में  KFC फ्रैंचाइज़ी बनाने का Idea आया और वे अमीर बने। अगर उनका कारोबार चौपट नहीं होता, तो शायद  कभी भी वो  KFC फ्रैंचाइज़ी नहीं बना पते।

जब डेविट वैलेस के मन में रीडर्स डाइजेस्ट प्रकाशित पब्लिश करने का idea आया, तो उन्होंने कई  प्रकाशकों (Publishers) को इसके सैंपल भेजे, लेकिन सभी ने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया और कहा की इस तरह की पत्रिका (magazine) सफल नहीं हो सकती।  डेविट वैलेस इस बात से निराश तो हुए, लेकिन बाद में उनको पता चला कि यह उनके लिए अच्छा हुआ, क्योंकि यदि कोई दूसरा प्रकाशक (Publishers) यह  पत्रिका (magazine) छपता, तो वैलेस को इतना पैसा, नाम तथा लोकप्रियता (Popularity) नहीं मिल पाती।

दोस्तों इन 2 एक्साम्पल से हमें यही सिख मिलता है की हमें समस्या को अवसर के रूप में देखना चाहिए और समस्या को एक चुनौती मान कर डट कर इसका सामना करना चाहिए

बुरे समय में क्या करें

Bure-waqt-me-kya-karen

How to Deal with Difficult Situation in Hindi

अपने नजरिए को Positive (सकारात्मक) रखें :

यदि आपका नजरिया  नकारात्मक (Negative)  होगा, तो आप मुश्किलों को देखकर घबरा जाएंगे, और आपका दिमाग उनसे उबरने के उपाय नहीं सोच पाएगा। दूसरी ओर, यदि आपका नजरिया सकारात्मक (Positive) होगा , तो आप मुश्किलों को स्वाभाविक (Natural) मानेंगे और उनसे उबरने के उपाय सोचेंगे।

 आइये इसे एक उदारहण से समझते है

इंगवार कॉम्परेड के सामने एक बड़ी समस्या आ गई थी, जब उनके लिए फर्नीचर बनाने वाली संस्थाओं (Company)  ने उन्हें सामान सप्लाई करना बंद कर दिया था।  यदि कम्परेड का नजरिया नकारात्मक (Negative) होता , तो वे अफ़सोस करते रहते, लेकिन उन्होंने सकारात्मक (Positive) नजरिया से इस मुश्किल से उबरने का विकल्प खोजा और खुद फर्नीचर बनाने लगे।  बाद में जाकर पता चला की खुद फर्नीचर बनाना ही वह चीज थी,  जिससे आईकिया  कंपनी को सबसे ज्यादा लाभ हुआ और यह इसके अनूठे ब्रांड की बुनियाद बनी।

अपनी पुराणी सफलताओं को याद करें :

आत्मविश्वास और कुछ नहीं, बल्कि पिछली सफलताओं की स्मृति (Memory) है।  जब आप कोई छोटी सफलता पा लेते हैं, तो इससे आपको अगले पायदान पर पहुँचाने का आत्मविश्वास (Self-Confidence) मिल जाता है। जब भी मुश्किलें सामने आएँ, तो अपनी पुराणी सफलताओं  को याद करें, क्योंकि पुरानी सफलतायें आपको यकीन दिलाती हैं कि आप पहले भी मुश्किलों से उबर चुके हैं और इस बार भी ऐसा ही होगा। 

जब वाल्ट डिजनी डिजनीलैंड बना रहे थे, तब उनकी बहुत आलोचना हो रही थी और किसी को इसके सफल होने की संभावना नहीं दिख रही थी।  लेकिन डिजनी को आलोचना का अनुभव था; पहले भी एनिमेटेड फिल्में बनाते समय उनकी आलोचना हो चुकी थी।  यही वजह है कि उन्होंने आलोचकों के बजाय अपने स्वप्न (dream) पर भरोस किया और बाकी सब इतिहास है।

हर समस्या को इम्तहान मानें :

समस्याएँ सामने आने पर ही यह पता चलता है कि हमें अपने स्वप्न (Dream) पर कितना विश्वास है।  जिस व्यक्ति का ड्रीम कमजोर होता है , वह प्रोब्लेम्स आते ही घुटने टेक देता है , लेकिन जिस व्यक्ति का ड्रीम स्ट्रांग होता है , वह समस्या से जूझता है।

समस्याएँ  दैवीक संकेत का कार्य भी करती हैं, क्योंकि वे आपको बेहतर बनाती हैं।  वे आपको बताती हैं कि आपमें किस क्षेत्र में कमी है, जिसे  दूर करना जरुरी है। जब भी आप किसी समस्या से उबरते हैं, तो आप थोड़े विकसित हो जाते हैं, आपका कद बढ़ जाता है । अल्बर्ट आइंस्टीन की बात याद रखें, हम जिन समस्याओं का सामना करते हैं, उन्हें सोच के उसी स्तर पर नहीं सुलझाया जा सकता, जिस पर हमने उन्हें उत्पन्न किया था। ‘ जब हम समस्या को सुलझाते हैं, तो हमें सोच के अपने स्तर को ऊपर उठाना पड़ता है।

लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें :

हेनरी फोर्ड ने कहा है, ‘बाधाएँ वे डरावनी चीजें हैं, जो आपको तब दिखती हैं, जब आप लक्ष्य से निगाहें हटा लेते हैं। ‘ स्वप्नदर्शी व्यक्ति अर्जुन की तरह होते हैं, जिन्हें पेड़ नहीं दिखता, शाखाएँ नहीं दिखतीं, केवल पक्षी की आँख ही दिखती है। यही सफलता का रहस्य है। अगर लक्ष्य की राह में समस्याएँ आती हैं, तो स्वप्नदर्शी विचलित नहीं होता।  वह लगातार कोशिश करता रहता है और एक दिन उसे सफलता मिल जाती है। थॉमस एडिसन जब बिजली का बल्ब बना रहे थे, तब वे 1,000 बार असफल हुए।  कोई  दूसरा होता, तो हर मान लेता  लेकिन एडिसन में लगन थी, वे जानते थे कि किसी न किसी तरीके से, कभी न कभी वे जरूर कामयाब होंगे। और वे अंततः कामयाब हुए।  एडिसन की निगाह मुश्किलों पर नहीं, असफल प्रयासों पर नहीं, लक्ष्य पर केंद्रित थी और इसी से सारा फर्क पड़ा।

बुरे समय में क्या करें

How-to-Deal-with-Difficult-Situation-in-Hindi

How to Deal with Difficult Situation in Hindi

दोस्तों जब समस्या आती है तो हम घबरा जाते है।  हमें कुछ समझ नहीं आता की करे तो करें क्या। इसलिए दोस्तों में आपको सुधीर दीक्षित की बुक से मुश्किलों से न घबराने का 5 फार्मूला आपको शार्ट में बता रहा हूँ

मुश्किलों में अवसर छिपा होता है

हर समस्या में उसका समाधान छिपा होता है और हर मुश्किल में एक अवसर छिपा होता है।  अगर आप गरीब परिवार में पैदा हुए हैं , तो इसमें अमीर बनाने का अवसर छिपा है।  अगर आप अशिक्षित हैं,  तो आपके पास सफल होने की ज्यादा बड़ी प्रेरणा और चुनौती है।  इसका मतलब यह है कि मुश्किल जितनी ज्यादा होंगी, अवसर भी उतने ही ज्यादा होंगे।  कम मुश्किल राह पर चलकर बड़ी सफलता पाना संभव नहीं है।  वाल्ट डिजनी का नाम आज अमर है, लेकिन यह न भूलें कि सफलता पाने के लिए वे जीवन भर मुश्किलों से जूझते रहे, इसी कारण उन्हें इतनी बड़ी सफलता मिली।

मुश्किलों के लिए तैयार रहे

मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार रहे। हो सके तो यह अनुमान भी लगा लें कि आपकी राह में किस प्रकार की मुश्किलें आ सकती हैं और आप उन्हें पहले से कैसे दूर कर सकते हैं ।  मुश्किलों का पूर्वानुमान लगाने में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि इससे आप उनके आने पर हताश नहीं होते हैं। मुश्किलों का पूर्वानुमान लगाने के बाद सकारात्मक मानसिकता से काम  में जुटना ही सर्वश्रेष्ठ नीति है।

विरोध की परवाह न करें

सफल लोग विरोध की परवाह नहीं करते हैं। वे तो बस अपनी मंज़िल की तरफ चुपचाप चलते रहते हैं।  उन्हें यकीन होता है कि उनका सपना साकार हो जाएगा और वे मंज़िल तक पहुँच जाएँगे। अगर एप्पल कंप्यूटर बनाते समय स्टीव वोज्नियाक और स्टीव जॉब्स विरोध की परवाह करते, तो पर्सनल कंप्यूटर कभी भी नहीं बन पाया होता।  इस दुनिया का दस्तूर ही कुछ ऐसा है कि हर नए या बड़े काम का विरोध होता है, इसलिए विरोध की परवाह न करें, बल्कि अपने सपने में यकीन रखें और सकारात्मक मानसिकता से अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ाते रहें।

और पढ़ें: अगर जीवन में सफल होना है तो ऐसे सोचें

उम्र, अशिक्षा या बीमारी का बहाना न बनाएँ

मुश्किलों से जूझते समय कभी हार न मानें।  कभी असफलता के लिए बहाना न बनाएँ।  कभी यह न कहें कि आप इसलिए असफल हुए, क्योंकि आपकी उम्र ज्यादा थी, आप गरीब थे, आप कम शिक्षित थे, yaa आप बीमार थे।  अगर आप बहाने बनाते हैं , तो इसका मतलब यह है कि आप असफल हो चुके हैं।  याद रखें कि हरलेन सैंडर्स ने बुढ़ापे में सफलता पाई थी, रे क्रॉक ने बहुत सी बिमारियों के बाद सफलता पाई थी, जे. के. रोलिंग सोशल सिक्योरिटी के चेक पर गुजर-बसर करती थीं। अगर ये लोग मुश्किलों के बाद सफल हो सकते हैं, तो आप क्यों नहीं हो सकते? इसलिए बहाना न बनाएँ और मुश्किलों से जूझने में जुट जाएँ। अगर आप बिना बहाना बनाए डटे रहेंगे, तो आप अंततः सफल हो ही जाएँगे।

अपने सपने पर यकीन रखें

जब आप अपने सपने पर यक़ीन रखते हैं, तो आपको मुश्किलें छोटी नज़र आने लगती हैं।  जब आप सपने पर ध्यान केंद्रित रखते हैं, तो आपको मुश्किलें दिखती ही नहीं हैं, आपको तो अपना सपना दिखता है। अर्जुन की तरह आपको भी सिर्फ चिड़ियाँ की आँख ही दिखनी चाहिए, तभी आप सफलता का लक्ष्य वेध सकते हैं।

बुरे समय में क्या करें

How to Deal with Difficult Situation in Hindi

तो दोस्तों इस आर्टिकल (बुरे समय में क्या करें) में बस इतना ही आपको ये आर्टिकल (How to Deal with Difficult Situation in Hindi) कैसी लगी हमें कमेन्ट कर के जरूर बताये। अगर आप इस बुक का कम्पलीट वीडियो समरी देखना चाहते है तो ऊपर दिए लिंक से देख सकते है।

हमारे लेटेस्ट वीडियो को देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करना न भूले।

S.K. Choudhary

नमस्कार दोस्तों, हमारे इस ब्लॉग में आपका स्वागत है, मेरा नाम है S.K. Choudhary (ऐस. के. चौधरी) और मैं एक ब्लॉगर और यूटूबर हूँ। में एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ और मेरा highest एजुकेशन MBA Finance है। मुझे पढ़ने और पढ़ाने का शोख है इसलिए में पार्ट टाइम मैं ब्लॉग लिखता हूँ और यूट्यूब के लिए बुक समरी और मोटिवेशनल वीडियो बनता हूँ।

Leave a Comment