चतुर खरगोश और शेर की कहानी (पंचतंत्र): बच्चों के लिए सरल हिंदी में, सीख के साथ

Chatur khargosh aur sher ki kahani: छोटा खरगोश बड़े शेर को जंगल में कुएँ की तरफ़ ले जाता हुआ
छोटा सा खरगोश बड़े शेर को कुएँ की तरफ़ ले चला

Chatur khargosh aur sher ki kahani पंचतंत्र की बहुत मशहूर कहानी है। इसमें एक छोटा सा खरगोश अपनी समझदारी से बड़े और ताक़तवर शेर को हरा देता है। यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि बुद्धि, ताक़त से भी बड़ी होती है। नीचे यह कहानी बहुत आसान हिंदी में लिखी है।

बातजानकारी
पढ़ने का समय4 मिनट
किस उम्र के बच्चों के लिए4 से 10 साल
कहानी के पात्रशेर, छोटा खरगोश और जंगल के जानवर
सीखबुद्धि ताक़त से बड़ी होती है

Chatur Khargosh Aur Sher Ki Kahani: चतुर खरगोश और शेर की कहानी

एक घने जंगल में एक बहुत बड़ा और ताक़तवर शेर रहता था। उसका नाम था भासुरक। वह बहुत घमंडी था। वह रोज़ बिना वजह बहुत सारे जानवरों को मार देता था। जंगल के सब जानवर उससे डरे रहते थे।

एक दिन जंगल के सब जानवर इकट्ठा हुए। हिरण, खरगोश, भालू, बंदर, सब परेशान थे। उन्होंने सोचा: “अगर शेर ऐसे ही करता रहा, तो एक दिन जंगल में कोई नहीं बचेगा।”

सबने मिलकर एक उपाय सोचा। वे शेर के पास गए और हाथ जोड़कर बोले: “महाराज, आप रोज़ इतने जानवर क्यों मारते हैं? हम आपसे वादा करते हैं कि हर दिन हम में से एक जानवर ख़ुद आपके पास भोजन के लिए आ जाएगा। आपको शिकार के लिए दौड़ना भी नहीं पड़ेगा।”

शेर ने सोचा, यह तो अच्छी बात है। उसने कहा: “ठीक है। पर याद रखना, अगर किसी दिन कोई नहीं आया, तो मैं सबको मार डालूँगा।”

खरगोश की बारी

अब रोज़ एक जानवर शेर के पास जाने लगा। कुछ दिन बाद एक छोटे से खरगोश की बारी आई। खरगोश बहुत छोटा था, पर बहुत समझदार था।

खरगोश ने सोचा: “मरना तो है ही, तो क्यों न कोई तरकीब लगाई जाए? शायद मेरे साथ साथ सब जानवर बच जाएँ।”

खरगोश जानबूझकर बहुत धीरे धीरे चला। रास्ते में उसे एक पुराना, गहरा कुआँ दिखा। उसमें झाँककर उसने अपनी परछाईं देखी। तभी उसके दिमाग़ में एक बढ़िया तरकीब आई।

दूसरा शेर!

खरगोश शाम को शेर के पास पहुँचा। शेर भूख और ग़ुस्से से लाल हो रहा था। वह दहाड़ा: “इतनी देर क्यों लगाई? और इतना छोटा सा खरगोश! तुझसे मेरा पेट कैसे भरेगा?”

खरगोश ने डरने का नाटक करते हुए कहा: “महाराज, मेरी कोई ग़लती नहीं है। हम पाँच खरगोश आपके लिए आ रहे थे। रास्ते में एक दूसरा शेर मिल गया। उसने चार खरगोश खा लिए। वह कह रहा था कि इस जंगल का असली राजा वही है, आप नहीं। मैं बड़ी मुश्किल से भागकर आपको बताने आया हूँ।”

यह सुनकर शेर ग़ुस्से से पागल हो गया। वह ज़ोर से दहाड़ा: “क्या! मेरे जंगल में दूसरा राजा? मुझे अभी उसके पास ले चलो। मैं उसे सबक़ सिखाऊँगा!”

Sher aur khargosh ki kahani: पानी में अपनी परछाईं देखकर ग़ुस्सा करता शेर, पास में बैठा खरगोश
शेर ने पानी में अपनी ही परछाईं को दूसरा शेर समझ लिया

कुएँ में परछाईं

खरगोश शेर को उसी पुराने कुएँ के पास ले गया और बोला: “महाराज, वह दूसरा शेर इसी कुएँ के अंदर छिपा है। आप ख़ुद देख लीजिए।”

शेर ने कुएँ में झाँका। पानी में उसे अपनी ही परछाईं दिखी। शेर को लगा कि अंदर सच में दूसरा शेर है। वह ज़ोर से दहाड़ा। कुएँ के अंदर से उसकी दहाड़ की गूँज वापस आई। शेर को लगा कि दूसरा शेर भी उसे ललकार रहा है।

बस फिर क्या था! ग़ुस्से में शेर ने उस “दूसरे शेर” पर हमला करने के लिए कुएँ में छलाँग लगा दी। कुआँ बहुत गहरा था। शेर पानी में गिर गया और फिर कभी बाहर नहीं निकल सका।

खरगोश दौड़ता हुआ जंगल में गया और सबको यह ख़ुशख़बरी सुनाई। सब जानवर ख़ुशी से नाचने लगे। उस दिन के बाद जंगल में सब जानवर बिना डर के रहने लगे, और सबने छोटे खरगोश की समझदारी की ख़ूब तारीफ़ की।

कहानी की सीख

बुद्धि ताक़त से बड़ी होती है। मुश्किल कितनी भी बड़ी हो, शांत दिमाग़ से सोचें तो रास्ता ज़रूर निकलता है। और घमंड करने वाले का अंत बुरा होता है।

पंचतंत्र में इसी कहानी के साथ एक श्लोक आता है: “बुद्धिर्यस्य बलं तस्य”, यानी जिसके पास बुद्धि है, असली बल उसी के पास है।

5 लाइन में छोटी कहानी

  1. एक जंगल में एक घमंडी शेर रोज़ बहुत से जानवरों को मार देता था।
  2. जानवरों ने तय किया कि हर दिन एक जानवर ख़ुद शेर के पास जाएगा।
  3. एक दिन छोटे खरगोश की बारी आई, और वह जानबूझकर देर से पहुँचा।
  4. उसने शेर से कहा कि जंगल में एक दूसरा शेर है, और उसे एक गहरे कुएँ के पास ले गया।
  5. शेर ने पानी में अपनी परछाईं को दूसरा शेर समझकर कुएँ में छलाँग लगा दी। सीख: बुद्धि ताक़त से बड़ी है।

कठिन शब्दों के अर्थ

शब्दअर्थ
घमंडीजो अपने आप को सबसे बड़ा समझे
तरकीबकोई काम करने का चालाक तरीका
परछाईंपानी या शीशे में दिखने वाली अपनी तस्वीर
गूँजआवाज़ का टकराकर वापस आना
ललकारनालड़ाई के लिए बुलाना

यह कहानी पंचतंत्र में कहाँ आती है?

यह कहानी पंचतंत्र के पहले भाग मित्रभेद से है। पंचतंत्र में शेर का नाम भासुरक बताया गया है। मित्रभेद की कहानियाँ करटक और दमनक नाम के दो सियार एक दूसरे को सुनाते हैं। पंचतंत्र की कहानियाँ आचार्य विष्णु शर्मा ने राजा अमरशक्ति के तीन राजकुमारों को खेल खेल में समझदारी सिखाने के लिए सुनाई थीं। पूरी जानकारी और सभी कहानियाँ यहाँ हैं: पंचतंत्र की सभी कहानियाँ।

बच्चों के लिए सवाल जवाब

जंगल के जानवर शेर से क्यों डरते थे?

क्योंकि शेर रोज़ बिना वजह बहुत सारे जानवरों को मार देता था।

खरगोश शेर के पास देर से क्यों पहुँचा?

खरगोश ने जानबूझकर देर की, ताकि शेर को ग़ुस्सा आए और वह खरगोश की बनाई कहानी पर आसानी से भरोसा कर ले।

शेर ने कुएँ में क्या देखा?

शेर ने कुएँ के पानी में अपनी ही परछाईं देखी और उसे दूसरा शेर समझ लिया।

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

बुद्धि ताक़त से बड़ी होती है, और घमंड करने वाले का अंत बुरा होता है।

शेर और खरगोश की कहानी किस किताब से है?

यह कहानी पंचतंत्र के पहले भाग “मित्रभेद” से है, जिसे आचार्य विष्णु शर्मा ने लिखा था।

बच्चों को कहानी सुनाने का आसान तरीका

  • शेर की दहाड़ ज़ोर से और खरगोश की आवाज़ धीमी और प्यारी बनाकर बोलें।
  • कुएँ वाले हिस्से से पहले रुककर पूछें: “कुएँ में शेर को क्या दिखेगा?”
  • बच्चे को पानी भरे बर्तन में अपनी परछाईं दिखाकर समझाएँ कि शेर के साथ क्या हुआ।

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