बगुला और केकड़ा की कहानी (पंचतंत्र): बच्चों के लिए सरल हिंदी में, सीख के साथ

Bagula aur kekda ki kahani: तालाब के किनारे एक टाँग पर उदास खड़ा बगुला, पानी से झाँकती मछलियाँ और पत्थर पर बैठा केकड़ा
बूढ़ा बगुला उदास होने का नाटक करता था, और मछलियाँ उसकी बातों में आ गईं

Bagula aur kekda ki kahani पंचतंत्र की एक मशहूर कहानी है। इसमें एक चालाक बगुला झूठ बोलकर मछलियों को धोखा देता है, पर एक समझदार केकड़ा उसकी चाल पकड़ लेता है। यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि किसी की मीठी बातों पर आँख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। नीचे यह कहानी बहुत आसान हिंदी में लिखी है।

बातजानकारी
पढ़ने का समय4 मिनट
किस उम्र के बच्चों के लिए5 से 10 साल
कहानी के पात्रबूढ़ा बगुला, मछलियाँ और केकड़ा
सीखआँख बंद करके भरोसा मत करो, सोच समझकर फ़ैसला लो

Bagula Aur Kekda Ki Kahani: बगुला और केकड़ा की कहानी

एक जंगल में एक बड़ा सा तालाब था। उसमें बहुत सारी मछलियाँ, मेंढक और एक केकड़ा रहते थे। उसी तालाब के किनारे एक बगुला भी रहता था।

बगुला अब बूढ़ा हो गया था। पहले वह झट से मछली पकड़ लेता था, पर अब उसमें उतनी फुर्ती नहीं बची थी। कई कई दिन उसे भूखा रहना पड़ता था।

बगुले की चाल

एक दिन भूखे बगुले ने एक चाल सोची। वह तालाब के किनारे एक टाँग पर खड़ा हो गया और बहुत उदास चेहरा बनाकर आँसू बहाने लगा। मछलियाँ पास से गुज़रतीं, तब भी वह उन्हें पकड़ता नहीं था।

मछलियाँ हैरान हो गईं। एक मछली ने हिम्मत करके पूछा: “बगुला दादा, आज आप हमें पकड़ क्यों नहीं रहे? और आप इतने उदास क्यों हैं?”

बगुले ने लंबी साँस लेकर कहा: “बेटा, मैंने अब मछली खाना छोड़ दिया है। पर मैं तुम सबके लिए दुखी हूँ। मैंने सुना है कि बहुत जल्दी बारह साल का सूखा पड़ने वाला है। यह तालाब पूरा सूख जाएगा, और तुम सब मर जाओगे।”

यह सुनकर सब मछलियाँ डर गईं। उन्होंने रोते हुए कहा: “दादा, अब हम क्या करें? हमें बचा लीजिए।”

बगुले ने कहा: “यहाँ से कुछ दूर पहाड़ के पीछे एक बहुत बड़ी झील है। उसमें कभी पानी नहीं सूखता। मैं रोज़ तुम में से कुछ को अपनी चोंच में उठाकर वहाँ छोड़ आऊँगा।”

रोज़ की सैर

मछलियाँ बगुले की मीठी बातों में आ गईं। अब बगुला रोज़ एक दो मछलियों को चोंच में उठाकर ले जाता। पर वह उन्हें किसी झील में नहीं छोड़ता था। वह उन्हें पहाड़ पर एक बड़ी चट्टान पर ले जाता और वहाँ बैठकर खा जाता। फिर वापस आकर कहता: “तुम्हारे दोस्त झील में बहुत मज़े से तैर रहे हैं।”

बेचारी मछलियाँ बहुत ख़ुश होतीं और अपनी बारी का इंतज़ार करतीं। बगुला रोज़ पेट भरकर खाता और मोटा होता गया।

केकड़े की बारी

एक दिन केकड़े ने कहा: “बगुला दादा, मुझे भी उस झील पर ले चलिए।” बगुले ने सोचा: “रोज़ मछली खाकर मन भर गया है। आज केकड़े का स्वाद लेता हूँ।”

बगुले ने केकड़े को अपनी पीठ पर बैठा लिया और उड़ चला। केकड़ा पहाड़ के ऊपर से नीचे देख रहा था। तभी उसे बड़ी चट्टान पर ढेर सारी मछलियों की हड्डियाँ दिखीं।

केकड़ा समझ गया: “यह बगुला झूठा है! यह कोई झील नहीं, यह तो मछलियों को खा जाता है। अब मेरी बारी है।”

Crane and crab story: पहाड़ों के ऊपर उड़ते बगुले की गर्दन को अपने पंजों से कसकर पकड़े केकड़ा
केकड़े ने समझदारी से काम लिया और बगुले की गर्दन कसकर पकड़ ली

केकड़ा डरा नहीं। उसने जल्दी से सोचा, और अपने मज़बूत पंजों से बगुले की गर्दन कसकर पकड़ ली। उसने कहा: “चालाक बगुले! मुझे अभी वापस तालाब पर ले चलो, वरना मैं तुम्हारी गर्दन नहीं छोड़ूँगा।”

बगुला डर गया। वह केकड़े को वापस तालाब पर ले आया। पर केकड़ा जानता था कि यह बगुला फिर किसी को धोखा देगा। उसने बगुले की गर्दन नहीं छोड़ी, और धोखेबाज़ बगुले का वहीं अंत हो गया।

सच सबको पता चला

केकड़ा तालाब में गया और सब मछलियों को सच बताया: “वह बगुला हमारे दोस्तों को झील में नहीं ले जाता था। वह उन्हें पहाड़ पर ले जाकर खा जाता था।”

मछलियों ने केकड़े को धन्यवाद दिया। उस दिन से सबने सीखा कि किसी की मीठी बातों पर बिना सोचे भरोसा नहीं करना चाहिए।

कहानी की सीख

किसी की मीठी बातों पर आँख बंद करके भरोसा मत करो। सोच समझकर फ़ैसला लो। और जो दूसरों को धोखा देता है, उसका अंत भी बुरा होता है।

5 लाइन में छोटी कहानी

  1. एक तालाब के किनारे एक बूढ़ा बगुला रहता था, जो अब मछली नहीं पकड़ पाता था।
  2. उसने मछलियों से झूठ कहा कि सूखा आने वाला है, और वह उन्हें दूसरी झील में छोड़ आएगा।
  3. बगुला रोज़ मछलियों को ले जाकर पहाड़ की चट्टान पर खा जाता था।
  4. एक दिन केकड़े ने उड़ते समय चट्टान पर मछलियों की हड्डियाँ देख लीं।
  5. केकड़े ने बगुले की गर्दन कसकर पकड़ ली और धोखेबाज़ बगुले का अंत हो गया। सीख: आँख बंद करके भरोसा मत करो।

कठिन शब्दों के अर्थ

शब्दअर्थ
फुर्तीतेज़ी से काम करने की ताक़त
चालकिसी को धोखा देने का तरीका
चट्टानबड़ा और भारी पत्थर
धोखेबाज़जो झूठ बोलकर दूसरों को ठगे
अंतख़त्म होना

यह कहानी पंचतंत्र में कहाँ आती है?

यह कहानी पंचतंत्र के पहले भाग मित्रभेद से है। इसे दमनक नाम का सियार अपने साथी करटक को सुनाता है, यह समझाने के लिए कि बुद्धि से बड़े से बड़े दुश्मन को हराया जा सकता है। पंचतंत्र की कहानियाँ आचार्य विष्णु शर्मा ने राजा अमरशक्ति के तीन राजकुमारों को खेल खेल में समझदारी सिखाने के लिए सुनाई थीं। पूरी जानकारी और सभी कहानियाँ यहाँ हैं: पंचतंत्र की सभी कहानियाँ।

बच्चों के लिए सवाल जवाब

बगुला भूखा क्यों रहता था?

बगुला बूढ़ा हो गया था, इसलिए वह पहले की तरह फुर्ती से मछली नहीं पकड़ पाता था।

बगुले ने मछलियों से क्या झूठ बोला?

बगुले ने कहा कि बारह साल का सूखा आने वाला है और वह उन्हें एक बड़ी झील में छोड़ आएगा।

केकड़े को बगुले की चाल कैसे पता चली?

उड़ते समय केकड़े ने पहाड़ की चट्टान पर मछलियों की हड्डियाँ देख लीं।

केकड़े ने अपनी जान कैसे बचाई?

केकड़े ने अपने मज़बूत पंजों से बगुले की गर्दन कसकर पकड़ ली और उसे वापस तालाब पर ले चलने को कहा।

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

किसी की मीठी बातों पर आँख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए, और मुसीबत में डरने की जगह समझदारी से काम लेना चाहिए।

बच्चों को कहानी सुनाने का आसान तरीका

  • बगुले की आवाज़ मीठी और नाटक वाली बनाकर बोलें, ताकि बच्चे समझें कि वह झूठा प्यार दिखा रहा है।
  • बीच में पूछें: “क्या तुम्हें लगता है बगुला सच बोल रहा है?”
  • कहानी के बाद बच्चे को समझाएँ कि कोई अनजान व्यक्ति मीठी बातें करके कहीं ले जाना चाहे, तो पहले मम्मी पापा से पूछना चाहिए।

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