
Neela siyar ki kahani पंचतंत्र की एक मज़ेदार कहानी है। इसमें एक सियार गलती से नीले रंग में रंग जाता है और सबको धोखा देकर जंगल का राजा बन बैठता है। पर एक दिन उसका सच सबके सामने आ जाता है। यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि झूठ ज़्यादा दिन नहीं छिपता। नीचे यह कहानी बहुत आसान हिंदी में लिखी है।
| बात | जानकारी |
|---|---|
| पढ़ने का समय | 4 मिनट |
| किस उम्र के बच्चों के लिए | 4 से 10 साल |
| कहानी के पात्र | सियार, शेर, बाघ, हाथी और जंगल के जानवर |
| सीख | झूठ और दिखावा ज़्यादा दिन नहीं चलता |
विषय सूची
Neela Siyar Ki Kahani: नीला सियार की कहानी
एक जंगल में एक सियार रहता था। उसका नाम था चंडरव। एक दिन उसे जंगल में खाने को कुछ नहीं मिला। भूख से परेशान होकर वह रात को खाने की तलाश में पास के एक शहर में चला गया।
शहर की गलियों में घूमते ही कुत्तों ने उसे देख लिया। कुत्ते ज़ोर ज़ोर से भौंकते हुए उसके पीछे दौड़ पड़े। सियार डरकर इधर उधर भागने लगा।
नीले रंग का टब
भागते भागते सियार एक रंगरेज़ के घर में घुस गया। रंगरेज़ कपड़े रंगने का काम करता था। उसके आँगन में नीले रंग से भरा एक बड़ा टब रखा था। अंधेरे में सियार को टब दिखा नहीं, और वह छपाक से उसमें गिर पड़ा।

कुत्ते उसे ढूँढते ढूँढते आगे निकल गए। थोड़ी देर बाद सियार टब से बाहर निकला। उसने अपने आप को देखा तो हैरान रह गया। उसका पूरा शरीर चमकीले नीले रंग का हो गया था! वह चुपचाप जंगल की तरफ़ भाग गया।
जंगल का नया राजा
जंगल में पहुँचते ही बाक़ी जानवरों ने उसे देखा। ऐसा अनोखा नीला जानवर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। शेर, बाघ, हाथी, हिरण, सब डर गए और सोचने लगे: “यह कौन सा जानवर है? कहीं यह कोई जादुई जानवर तो नहीं?”
सियार ने उनका डर देखा और उसके मन में एक चाल आई। उसने भारी आवाज़ में कहा: “डरो मत! मुझे स्वयं ब्रह्मा जी ने भेजा है। उन्होंने कहा है कि मैं इस जंगल का राजा बनूँ और तुम सबकी रक्षा करूँ। मेरा नाम ककुद्रुम है।”
सब जानवर उसकी बातों में आ गए। उन्होंने सिर झुकाकर उसे अपना राजा मान लिया। सियार ने शेर को अपना मंत्री बना दिया, बाघ को अपना पहरेदार, और हाथी को द्वारपाल। सब जानवर रोज़ उसके लिए अच्छा अच्छा खाना लाने लगे।
पर सियार को डर था कि दूसरे सियार उसे पहचान लेंगे। इसलिए उसने जंगल के सारे सियारों को जंगल से बाहर भगा दिया।
पोल खुल गई
नीला सियार कई दिन तक राजा बनकर मज़े से रहा। एक रात चाँदनी में वह अपने दरबार में बैठा था। तभी दूर से सियारों के झुंड की आवाज़ आई: “हुआँ, हुआँ, हुआँ!”
वह आवाज़ सुनते ही नीले सियार से रहा नहीं गया। वह अपनी आदत भूल न सका। ख़ुशी में वह भी ज़ोर से चिल्ला पड़ा: “हुआँ, हुआँ, हुआँ!”
बस! शेर, बाघ और सब जानवर समझ गए: “अरे! यह तो एक मामूली सियार है! इसने हम सबको धोखा दिया है।”
सब जानवर ग़ुस्से से भर गए। शेर ने ज़ोर से दहाड़कर उस पर छलाँग लगाई, और धोखेबाज़ नीले सियार का खेल वहीं ख़त्म हो गया।
कहानी की सीख
झूठ और दिखावा ज़्यादा दिन नहीं चलता, एक दिन सच सामने आ ही जाता है। जैसे हो, वैसे ही रहो, और कभी अपने लोगों को धोखा देकर ख़ुद को बड़ा मत बनाओ।
5 लाइन में छोटी कहानी
- एक भूखा सियार खाने की तलाश में शहर गया, जहाँ कुत्ते उसके पीछे पड़ गए।
- भागते हुए वह एक रंगरेज़ के नीले रंग के टब में गिर गया और नीला हो गया।
- जंगल के जानवर उसे अनोखा जानवर समझकर डर गए, और उसने ख़ुद को ब्रह्मा जी का भेजा राजा बता दिया।
- एक रात दूर से सियारों की “हुआँ हुआँ” सुनकर वह भी चिल्ला पड़ा।
- सब जानवर समझ गए कि वह मामूली सियार है, और उसका झूठ पकड़ा गया। सीख: झूठ ज़्यादा दिन नहीं छिपता।
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| रंगरेज़ | कपड़े रंगने का काम करने वाला |
| अनोखा | जो पहले कभी न देखा हो |
| मंत्री | राजा को सलाह देने वाला |
| द्वारपाल | दरवाज़े पर पहरा देने वाला |
| पोल खुलना | झूठ पकड़ा जाना |
यह कहानी पंचतंत्र में कहाँ आती है?
यह कहानी पंचतंत्र के पहले भाग मित्रभेद से है। पंचतंत्र में सियार का नाम चंडरव बताया गया है, और राजा बनकर उसने अपना नाम ककुद्रुम रखा था। कई किताबों में इसे “रंगा सियार” की कहानी भी कहा जाता है। पंचतंत्र की कहानियाँ आचार्य विष्णु शर्मा ने राजा अमरशक्ति के तीन राजकुमारों को खेल खेल में समझदारी सिखाने के लिए सुनाई थीं। पूरी जानकारी और सभी कहानियाँ यहाँ हैं: पंचतंत्र की सभी कहानियाँ।
बच्चों के लिए सवाल जवाब
सियार नीला कैसे हो गया?
कुत्तों से बचकर भागते हुए सियार एक रंगरेज़ के घर में नीले रंग से भरे टब में गिर गया।
जंगल के जानवर नीले सियार से क्यों डर गए?
उन्होंने ऐसा नीला जानवर पहले कभी नहीं देखा था, इसलिए उन्हें लगा कि यह कोई अनोखा या जादुई जानवर है।
नीले सियार ने बाक़ी सियारों को जंगल से क्यों भगाया?
उसे डर था कि दूसरे सियार उसे पहचान लेंगे और उसका झूठ पकड़ा जाएगा।
नीले सियार की पोल कैसे खुली?
दूर से सियारों की “हुआँ हुआँ” सुनकर वह अपनी आदत रोक नहीं पाया और ख़ुद भी चिल्ला पड़ा।
इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
झूठ और दिखावा ज़्यादा दिन नहीं चलता। हमें जैसे हैं, वैसे ही रहना चाहिए और किसी को धोखा नहीं देना चाहिए।
बच्चों को कहानी सुनाने का आसान तरीका
- “हुआँ हुआँ” वाले हिस्से पर बच्चे के साथ मिलकर ज़ोर से आवाज़ निकालें, बच्चे इस हिस्से पर सबसे ज़्यादा हँसते हैं।
- पानी में थोड़ा नीला रंग घोलकर बच्चे को दिखाएँ कि सियार कैसे नीला हुआ होगा।
- कहानी के बाद पूछें: “अगर सियार सच बोल देता, तो क्या होता?”
पंचतंत्र की और कहानियाँ
अगली कहानी: बंदर और मगरमच्छ की कहानी
- बंदर और मगरमच्छ की कहानी
- चतुर खरगोश और शेर की कहानी
- बातूनी कछुआ और दो हंस की कहानी
- बगुला और केकड़ा की कहानी
- पंचतंत्र की सभी कहानियाँ: पूरी सूची, पंचतंत्र क्या है और इसे किसने लिखा
neela siyar ki kahani (नीला सियार की कहानी) अपने बच्चों और उनके दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर कीजिए। आपके बच्चे को कौन सी पंचतंत्र की कहानी सबसे अच्छी लगती है, कमेंट में बताइए।