Happy thoughts in Hindi: जीवन भर खुश रहना है तो ये 5 विचार नियम जान लो

दोस्तों इस लेख (Happy thoughts in Hindi: जीवन भर खुश रहना है तो ये 5 विचार नियम जान लो) के माध्यम से में आपसे सरश्री की बुक आपकी कामयाबी का रहस्य से Power of Happy Thoughts in Hindi आपसे साझा करूँगा। जिससे आप जानेगे कि जो Happy thoughts (हॅपी थॉट्‌स) में रहता है, वह समस्या को समस्या करके नहीं देखता। वह अपने जीवन को शांतिपूर्ण अनुभवों, आशावादी शब्दों तथा सत्यात्मक विचारों से भर देता है। तो चलिए शुरू करते है।

Happy thoughts in Hindi

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जीवन भर खुश रहना है तो ये 5 विचार नियम जान लो 

किसी भी वस्तु का भौतिक निर्माण होने से पहले उसका वैचारिक निर्माण होता है

अगर आप दूसरों को गौर से देखेंगे तो आप पाएँगे कि दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। पहले वे जो जिंदगी के मालिक होते हैं और दूसरे वे जिनकी जिंदगी मालिक होती है। कुछ सफल हैं, कुछ असफल। कुछ विकसित हैं, कुछ अविकसित। विकसित लोगों के बारे में लगता है कि उन्हें कुछ नियम अथवा ताकत की जानकारी है। भले ही वे नियम उन्हें शाब्दिक तौर पर पता न हों परंतु वे उन्हें अपने जीवन में इस्तेमाल करते हैं।

उदाहरणतः वे यह जानते हैं कि जिस चीज पर हम ध्यान देते हैं, वह बढ़ती है। दूसरी तरफ ऐसे लोग हैं, जो इस तरह से जीते हैं जैसे कि हर पल, दिन के चौबीसों घंटे सज़ा हों। तीसरी श्रेणी भी है, जिसमें लोग पूरी तरह से दुःखी तो नहीं हैं परंतु पूरी तरह से सुखी भी नहीं हैं। ऐसा क्यों है? एक ऐसा सिद्धांत है, जो लोगों में यह फर्क लाता है। यह सिद्धांत (Happy Thoughts in Hindi) कहता है कि ‘विश्व में किसी भी वस्तु का भौतिक निर्माण होने से पहले उसका वैचारिक निर्माण होता है।

आइए इसे एक उदाहरण से समझें

फ्रान्स में एक कैदी को फाँसी की सजा सुनाई गई। कुछ डॉक्टर, जो मनोवैज्ञानिक मन पर प्रयोग कर रहे थे, उन्होंने कोर्ट में अपील करके, उस कैदी को अपने वैज्ञानिक प्रयोग से मारने की मंजूरी ले ली। कैदी को एक पलंग पर लिटाकर, उसे उसकी मौत का तरीका बताया गया। उससे कहा गया कि धीरे-धीरे हम तुम्हारे शरीर से सारा खून निकालने वाले हैं। शरीर से एक बड़ी बोतल भर खून निकलने पर तुम्हें पसीना आने लगेगा। दूसरी बोतल निकलने पर तुम कमजोरी महसूस करोगे। तीसरी बोतल निकालने के साथ तुम्हारी आँखों के आगे अंधेरा छा जाएगा। चौथी बोतल पर तुम्हारी इंद्रियाँ काम करना बंद कर देंगी, तुम पर बेहोशी छाने लगेगी, फिर धीरे-धीरे खून निकलते रहने से अंत में तुम्हारी मौत हो जाएगी।  

इस तरह कैदी को यह यकीन दिलाया गया कि उसके शरीर से एक-एक बोतल खून निकाला जा रहा है। हर बोतल के साथ उसने बिलकुल वही महसूस किया, जो उसे बताया गया था। अंत में उसकी मौत हो गई। इस उदाहरण से आपको लग सकता है कि इसमें आश्चर्य की क्या बात है, यदि किसी इंसान के शरीर से खून निकाला जाए तो उसकी मौत निश्चित है।

जबकि सच तो यह है कि उस कैदी के शरीर से सिर्फ एक ही बोतल खून निकाला गया था। वैज्ञानिकों ने पलंग के नीचे एक और पाइप जोड़ रखा था। कैदी को पाइप से टब में पानी गिरने की आवाज सुनाई दे रही थी, जिसे वह खून के टपकने की आवाज समझ रहा था। इसके फलस्वरूप उसके मन में यही विचार चल रहे थे कि मेरे शरीर से खून बाहर टपक रहा है, मैं मर रहा हूँ। वह कैदी यह दोहराता रहा और धीरे-धीरे मर गया।

जो विचार होश और जोश में किए जाते हैं, वे हकीकत में बदलते हैं

इंसान शेखचिल्ली की तरह विचारों की भीड़ में भटकता रहता है। इस तरह विचारों के शोरगुल में कई बार वह अपने ही विचारों के विरुद्ध सोचने लगता है। नतीजन उसे कोई परिणाम नहीं मिलता। जिस इंसान को जीवन में कोई फल नहीं मिल रहा हो, उसे इस बात पर मनन करना चाहिए कि मेरे विचार एक-दूसरे को कहाँ पर काट रहे हैं?

एक इंसान सोचता है, मेरे घर में शांति हो जाए तो कितना अच्छा होगा। उसका यह विचार काम करने लगता है और उसके फल को देने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है। मगर दूसरे ही दिन वह सोचने लगता है, इस घर में शांति संभव ही नहीं है। न तो मेरी पत्नी सुधरनेवाली है, न ही मेरा भाई। ये लोग कभी नहीं सुधर सकते। उसके ऐसे विचार उसके पहले विचार को काट देते हैं कि अगर सामनेवाला नहीं सुधरेगा तो घर में शांति कैसे आएगी! उस इंसान को पता ही नहीं चलता कि उसने अपने इस नकारात्मक विचार से अपना कितना बड़ा नुकसान कर दिया।

इसलिए हमेशा सकारात्मक विचारों को (Happy Thoughts) बढ़ावा दें और बोलते वक्त सकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल करें ताकि आपका फोकस अच्छी बातों पर, अच्छी चीजों पर जाए। इस सूत्र का इस्तेमाल करने के दो आसान कदम हैं। पहला- स्पष्टता से और होश में सोचें। इसके लिए जो भी नकारात्मक धारणाएँ आपके मन में हों, उन्हें त्याग दें। दूसरा- अपने अंदर की हर नकारात्मक भावना को त्याग दें और जो आपको चाहिए, उसके लिए सकारात्मक भावना रखें।

उस पर ध्यान दें जो आप चाहते हैं, न कि उस पर जो आप नहीं चाहते

ज्यादातर लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि उन्हें अपने जीवन में क्या नहीं चाहिए बजाए इसके कि उन्हें क्या चाहिए। इसलिए अंत में उन्हें वे ही चीजें मिलती हैं, जो उन्हें नहीं चाहिए।

आपको अपने जीवन में जो चाहिए, जैसे लोग आप देखना चाहते हैं, उन पर फोकस करें जैसे- मैं अपने जीवन में ऐसे लोगों को देखना चाहता हूँ,  जिन्हें देखकर मुझे अपने लक्ष्य की याद आए। ऐसा न कहें कि अरे यह इंसान मेरे जीवन से कब जाएगा, मैं तो इसे देखना ही नहीं चाहता, मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है। ऐसी वक्यो से नकारात्मक विचारों को शक्ति मिलती है। यदि आप चाहते हैं कि happy thought आपके हित में काम करें तो आपको सदैव सकारात्मक विचारों को शक्ति देनी चाहिए।

याद रखें जिस भी नकारात्मक चीज को आप टोकोगे, वह टिकेगी। इसलिए तीसरा सूत्र कहता है, उस पर ध्यान दें जो आप चाहते हैं, न कि जो आप नहीं चाहते।

आईये इसे एक उदाहरण से समझते है – एक इंसान घर में मटका लाया था। वह मटका बड़ा था, ज्यादा जगह लेता था। वह जब भी उस मटके को देखता तो उसके मन में विचार आता कि यह ज्यादा बड़ा है, ज्यादा जगह खा रहा है। फिर एक दिन वह मटका टूट गया।

आप उससे पूछें, ‘क्या तुम चाहते थे कि यह मटका टूट जाए?’ वह बोलेगा, ‘मैं क्यों चाहूँगा कि मेरा नुकसान हो।’ मगर उसके अंदर जो इच्छा थी कि छोटा मटका होता तो अच्छा होता। फिर दो दिन के बाद उसके घर छोटा मटका आ जाता है। जीवन में जो चाहिए, उस पर अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए, आपको जो चाहिए उसके बारे में होश में निरंतरता से विचार करें।

दुनिया वैसी नहीं है, जैसी आपको दिखती है, दुनिया वैसी है, जैसे आप दुनिया के बारे में विचार रखते हैं

आपके जीवन में जो नकारात्मक हो रहा है, हो सकता है कि वह आपकी प्रार्थनाओं के कारण हो रहा हो। यदि आपने प्रार्थना की है कि ‘मैं जल्दी तरक्की प्राप्त करूँ’ तो हो सकता है आपको जीवन में ज्यादा चुनौतियाँ दी गई हैं ताकि आप जल्दी अपनी क्षमता बढ़ाकर तरक्की कर पाएँ। चुनौतियों के कारण आप पर आ रहे दबाव को आप नकारात्मक समझ सकते हैं परंतु यह नकारात्मक घटना आपके ऑर्डर के कारण आपके पास आई है। आप कुदरत को जो ऑर्डर देते हैं, कुदरत उससे कई गुना ज्यादा आपको देती है।

चौथा नियम (Happy Thoughts in Hindi) आपको सिखाता है कि दूसरों के दोषों पर ध्यान केंद्रित नहीं होना चाहिए। मान लें, आपकी शिकायत यह है कि आपका बॉस आपको हर समय दोष देता रहता है तो तत्काल किसी और विचार पर अपना ध्यान केंद्रित कर ले। उस दोष पर सोचते न रहें। यह समझ लें कि दोष आपके भीतर है इससे आपको इस बात पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी कि आप अपने जीवन में कैसा सृजन करना चाहते हैं। ये विचार फिर कई गुना बढ़कर आपकी ही दुनिया में लौटकर आनंद और शांति फैलाएंगे।

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जीवन भर खुश रहना है तो ये 5 विचार नियम जान लो 

एक इंसान पर दूसरों के विचारों का असर तब तक नहीं होता, जब तक वह उसे होने नहीं देता

किसी भी दूसरे इंसान के विचारों का आप पर असर नहीं होता। अगर आपके साथ रहनेवाला इंसान कुछ गलत सोच रहा है तो आप पर उसके विचारों का सीधा असर नहीं होता लेकिन अप्रत्यक्ष असर अवश्य होता है, जिससे आपको बचना चाहिए।

मान लें, आपके साथ रहनेवाला इंसान नकारात्मक विचारक है। ऐसे में उसकी नकारात्मक सोच का असर आप पर तब तक नहीं होगा, जब तक आप होश में हैं। यदि आप होश में हैं और उसे अपनी गाड़ी में पीछे बिठाकर ले जा रहे हैं तो उसकी नकारात्मक सोच के कारण आपका एक्सीडेंट नहीं होगा।

मगर यदि वह पीछे बैठकर लगातार नकारात्मक बातें बोल रहा है कि ‘अरे! आज-कल बहुत एक्सीडेंट होते हैं… फलाँ जगह यह एक्सीडेंट हो गया… वहाँ यह हादसा हो गया’ और आप भी बेहोशी में वही बातें सोचने लग गए, यदि आप पर उसकी नकारात्मक बातों का असर होने लगा और आपके भी वैसे विचार शुरू हो गए तो एक्सीडेंट आकर्षित होने लगेगा। जब तक आप होश में हैं तब तक कोई फर्क नहीं पड़ेगा इसलिए निश्चिंत रहें।

हर बस, हर ट्रेन में बहुत सारे नकारात्मक विचारक बैठे होते हैं लेकिन उनकी सोच महत्त्वपूर्ण नहीं होती। असल महत्त्व तो इस बात का है कि बस या ट्रेन के ड्राइवर की सोच क्या है! ड्राइवर पर उनकी सोच का असर नहीं होता इसलिए यात्रा सकुशल पूरी हो जाती है। इसी तरह आपके जीवन की बस को आपके विचार चला रहे हैं।

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विचार नियम:

विचार नियम को समझ लें, फिर नकारात्मक लोगों के साथ रहने के बावजूद आप परेशान नहीं होंगे। आपको केवल यह ध्यान रखना है कि कहीं उनकी उल्टी बातें सुन-सुनकर आपके विचारों पर तो असर नहीं हो रहा है, कहीं आप गलत दिशा में तो प्रेरित नहीं हो रहे हैं।

तो दोस्तों इस आर्टिकल (Happy thoughts in Hindi: जीवन भर खुश रहना है तो ये 5 विचार नियम जान लो) में बस इतना ही आपको ये आर्टिकल (Happy thoughts in Hindi) कैसी लगी हमें कमेन्ट कर के जरूर बताये। अगर आप इस बुक का कम्पलीट वीडियो समरी देखना चाहते है तो ऊपर दिए लिंक से देख सकते है।

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S.K. Choudhary

नमस्कार दोस्तों, हमारे इस ब्लॉग में आपका स्वागत है, मेरा नाम है S.K. Choudhary (ऐस. के. चौधरी) और मैं एक ब्लॉगर और यूटूबर हूँ। में एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ और मेरा highest एजुकेशन MBA Finance है। मुझे पढ़ने और पढ़ाने का शोख है इसलिए में पार्ट टाइम मैं ब्लॉग लिखता हूँ और यूट्यूब के लिए बुक समरी और मोटिवेशनल वीडियो बनता हूँ।

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