As a Man Thinketh Book Summary in Hindi: जैसा विचार वैसा जीवन, James Allen की किताब के 7 अध्याय

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As a Man Thinketh Book Summary in Hindi में आज हम जेम्स एलन (James Allen) की छोटी सी पर बहुत गहरी किताब “As a Man Thinketh” की पूरी सीख आसान भाषा में समझेंगे। हिंदी में इसका भाव है: “जैसा विचार, वैसा जीवन।” यह किताब बताती है कि हमारे विचार हमारे चरित्र, हमारी परिस्थितियों, हमारे स्वास्थ्य और हमारी सफलता को किस तरह गढ़ते हैं।

छोटा जवाब: As a Man Thinketh का मूल संदेश है कि इंसान वैसा ही बनता है जैसा वह लगातार सोचता है। विचार बीज हैं, कर्म पौधे हैं, और परिस्थितियाँ फल। इसलिए जीवन बदलना है, तो पहले विचार बदलने होंगे। किताब के 7 अध्याय हैं: विचार और चरित्र, विचार और परिस्थितियाँ, विचार और स्वास्थ्य, विचार और उद्देश्य, उपलब्धि में विचार की भूमिका, सपने और आदर्श, और शांति।

विषय सूची

किताब के बारे में ज़रूरी जानकारी

बातजानकारी
किताब का नामAs a Man Thinketh
लेखकजेम्स एलन (James Allen, 1864 से 1912), इंग्लैंड
पहली बार छपी1903
अध्याय7
आकारबहुत छोटी, एक बैठक में पढ़ी जा सकती है
नाम कहाँ से आयाबाइबल की एक पंक्ति (Proverbs 23:7): “जैसा वह अपने मन में सोचता है, वैसा ही वह है”
किस पर असर डालाआगे की लगभग हर सेल्फ़ हेल्प किताब, जैसे Napoleon Hill और Earl Nightingale की सोच

7 अध्याय एक नज़र में

अध्यायमूल बात
1. विचार और चरित्रइंसान का चरित्र उसके सभी विचारों का जोड़ है
2. विचार और परिस्थितियाँमन एक बगीचा है, जो बोएँगे वही उगेगा
3. विचार और स्वास्थ्यशरीर मन का सेवक है
4. विचार और उद्देश्यबिना उद्देश्य के विचार भटकते हैं, डर और चिंता लाते हैं
5. उपलब्धि में विचार की भूमिकाजो कुछ मिलता है या नहीं मिलता, वह अपने विचारों का नतीजा है
6. सपने और आदर्शआज का सपना कल की हक़ीक़त का बीज है
7. शांतिशांत मन ही सबसे बड़ी ताक़त है

As a Man Thinketh Book Summary in Hindi: सभी 7 अध्याय विस्तार से

1. जैसे विचार, वैसा चरित्र

जेम्स एलन कहते हैं कि इंसान वाकई वैसा ही होता है, जैसा वह सोचता है। उसका चरित्र उसके सभी विचारों का कुल जोड़ होता है। इसलिए अगर आप अपना जीवन बदलना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने विचारों को बदलना होगा।

इसे एक उदाहरण से समझिए। विचार बीज की तरह होते हैं, और इन बीजों से जो पौधे निकलते हैं, वे हमारे कर्म हैं। हमारे विचार हमारे हर कर्म पर असर डालते हैं, फिर चाहे वह कर्म सोच समझकर किया गया हो या अचानक हो गया हो। और हर कर्म का फल, सुख या दुख, उसी बीज से आता है।

इंसान अपने मन में जिन विचारों के बीज बोता है, वह उन्हीं के अनुसार मीठी या कड़वी फ़सल काटता है। अगर आपने करेले के बीज बोए हैं, तो आम की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? जैसे विचार, वैसा चरित्र, और जैसा चरित्र, वैसी परिस्थितियाँ।

एलन यह भी कहते हैं कि इंसान अपने विचारों का मालिक है। अच्छे चरित्र का कोई संयोग या किस्मत नहीं होती, वह लंबे समय तक सही विचारों को पालने का नतीजा है। इसी तरह बुरा चरित्र भी लंबे समय तक बुरे विचारों को जगह देने का नतीजा है।

2. जैसे विचार, वैसी परिस्थितियाँ

इंसान का मन एक बगीचे जैसा है। अगर उसकी ठीक से देखभाल की जाए, तो उसमें फूल और फल उगते हैं। अगर देखभाल न की जाए, तो उसमें घास फूस और झाड़ियाँ अपने आप उग आती हैं, और एक दिन पूरे बगीचे पर क़ब्ज़ा कर लेती हैं। माली की तरह हमें भी ग़लत विचारों की खरपतवार निकालनी होती है और अच्छे विचारों के पौधे लगाने होते हैं।

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एलन की एक बड़ी बात यह है कि परिस्थितियाँ इंसान को बनाती नहीं, उसे उजागर करती हैं। मुश्किल हालात हमें वह दिखाते हैं जो पहले से हमारे अंदर है।

आपने देखा होगा, कुछ लोग हमेशा शिकायत करते रहते हैं: काम ठीक नहीं चल रहा, पैसे कम हैं, लोग साथ नहीं देते। वहीं कुछ लोग वैसी ही परिस्थितियों में भी हल ढूँढते रहते हैं और उनके रिश्ते भी अच्छे होते हैं। फ़र्क़ परिस्थिति का नहीं, सोच का है।

एलन एक और गहरी बात कहते हैं: लोग अपनी परिस्थितियाँ तो सुधारना चाहते हैं, पर ख़ुद को सुधारने को तैयार नहीं होते, इसलिए बँधे रहते हैं। अगर आप अपनी परिस्थितियों से संतुष्ट नहीं हैं, तो यह संकेत है कि विचारों को बदलने की ज़रूरत है।

3. जैसे विचार, वैसा स्वास्थ्य

एलन कहते हैं कि शरीर मन का सेवक है। वह मन के आदेश मानता है, चाहे वे सोच समझकर दिए गए हों या अनजाने में। डर, चिंता, ईर्ष्या और ग़ुस्से के विचार शरीर को कमज़ोर करते हैं, और ख़ुशी, सद्भावना और शांति के विचार उसे ताक़त देते हैं।

आज का विज्ञान भी मानता है कि मन और शरीर गहराई से जुड़े हैं। हमारा दिमाग़ शरीर के वज़न का सिर्फ़ 2% है, फिर भी शरीर की लगभग 20% ऊर्जा इस्तेमाल करता है। लगातार चिंता और तनाव में शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन ज़्यादा बनते हैं, जिनका असर नींद, पाचन, इम्युनिटी और दिल पर पड़ता है।

एलन लिखते हैं कि अगर आप शरीर की रक्षा करना चाहते हैं, तो अपने मन पर पहरा बिठाइए। अगर शरीर को सुंदर बनाना है, तो मन को सुंदर बनाइए। जैसे हवा और धूप के बिना घर स्वस्थ नहीं रहता, वैसे ही ख़ुशी, सद्इच्छा और शांति के विचारों के बिना शरीर तेजस्वी और चेहरा शांत नहीं हो सकता।

4. उद्देश्य से जुड़े विचार ही सफलता दिलाते हैं

जब तक विचारों को किसी उद्देश्य से न जोड़ा जाए, तब तक कोई बड़ी उपलब्धि नहीं मिलती। जिनके जीवन में कोई उद्देश्य नहीं होता, वे जल्दी डर, चिंता, शिकायत और आत्म दया के शिकार हो जाते हैं।

एलन सलाह देते हैं:

  1. एक उद्देश्य तय करें, और उसे अपने विचारों का केंद्र बनाएँ।
  2. अगर अभी कोई बड़ा उद्देश्य नहीं दिखता, तो जो काम सामने है, उसे पूरी ईमानदारी और लगन से करें। इसी से एकाग्रता और इच्छा शक्ति बनती है, जो आगे बड़े उद्देश्य में काम आती है।
  3. सीधा रास्ता तय करें और दाएँ बाएँ न भटकें। जैसे ताँगे के घोड़े की आँखों के अगल बगल पट्टी लगाई जाती है ताकि वह सिर्फ़ सामने देखे, वैसे ही लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए ध्यान भटकाने वाली चीज़ों से बचें।
  4. शंका और डर को बाहर निकालें। एलन के अनुसार शंका और डर ज्ञान के सबसे बड़े दुश्मन हैं। जो इन्हें जीत लेता है, उसने असफलता को जीत लिया।

5. विचार हर उपलब्धि की नींव हैं

इंसान जो कुछ हासिल करता है, और जो हासिल नहीं कर पाता, वह सब उसके अपने विचारों का सीधा नतीजा है। अपने विचारों और नतीजों को सिर्फ़ वह ख़ुद बदल सकता है।

एक ताक़तवर व्यक्ति किसी कमज़ोर की तब तक मदद नहीं कर सकता, जब तक कमज़ोर व्यक्ति ख़ुद मदद न चाहे। और तब भी, कमज़ोर को ख़ुद ही मज़बूत बनना पड़ता है। कोई भी इंसान अपने विचारों को ऊपर उठाकर ही ऊपर उठ सकता है।

एलन यहाँ त्याग की बात भी करते हैं: बिना त्याग के कोई उपलब्धि नहीं मिलती। जितना बड़ा लक्ष्य, उतना बड़ा त्याग। मोहल्ले की दौड़ जीतने के लिए थोड़ा अभ्यास काफ़ी है, शहर की दौड़ के लिए ज़्यादा, और ओलंपिक के लिए हर दिन का अनुशासन और बहुत सी चीज़ों का त्याग। आसान जीवन के लालच में न आएँ, बड़ा लक्ष्य रखें।

6. हर सपना सुखद भविष्य का बीज है

एलन कहते हैं कि सपने देखने वाले ही दुनिया के रक्षक हैं। आज की हर बड़ी चीज़ कभी किसी का सपना थी। कोलंबस ने एक नई दुनिया का सपना देखा, और उसे खोज लिया। कोपरनिकस ने कहीं बड़े ब्रह्मांड का सपना देखा, और उसे दुनिया के सामने रखा।

आप जैसे सपने देखते हैं, वैसे ही बनते हैं। आपका सपना इस बात का वादा है कि एक दिन आप क्या बनेंगे। एलन लिखते हैं कि आप हमेशा उसी की ओर झुकेंगे, जिससे आप मन ही मन सबसे ज़्यादा प्रेम करते हैं, और आपको वही मिलेगा जिसके आप लायक बनेंगे, न कम, न ज़्यादा।

वे यह भी कहते हैं कि लोग सफल व्यक्ति को देखकर “किस्मत” कहते हैं, पर उसके पीछे के संघर्ष, त्याग और विश्वास को नहीं देखते। जिसे वे किस्मत कहते हैं, वह असल में लंबी मेहनत और सपने पर टिके रहने का नतीजा है।

सफलता के विचार सोचेंगे, तो सफलता की ओर बढ़ेंगे। असफलता के विचार सोचेंगे, तो वहीं अटके रहेंगे। जब सोचने का चुनाव हमारे हाथ में है, तो क्यों न अच्छे विचार चुनें?

7. शांत विचार, शांत जीवन

किताब का आख़िरी अध्याय शांति (Serenity) पर है। एलन के अनुसार मन की शांति ज्ञान के सबसे सुंदर रत्नों में से एक है। जैसे मोती पाने के लिए गोताखोर को गहरे पानी में उतरना पड़ता है, वैसे ही यह रत्न भी लंबे आत्म नियंत्रण और धैर्य से मिलता है।

इंसान जितना शांत होता है, उसकी सफलता, उसका प्रभाव और भलाई करने की उसकी ताक़त उतनी ही बढ़ती है। एक साधारण व्यापारी भी अगर ज़्यादा आत्म नियंत्रण और शांति सीख ले, तो उसका व्यापार बढ़ेगा, क्योंकि लोग हमेशा शांत और भरोसेमंद व्यक्ति के साथ काम करना पसंद करते हैं।

एलन जीवन की तुलना समुद्र से करते हैं: तूफ़ान आएँगे, पर मन रूपी नाव का कप्तान अगर जागा हुआ है, तो वह पार निकल जाएगा। उनका संदेश है: “शांत रहो, संयम रखो, मन के मालिक बनो।”

As a Man Thinketh और भगवद गीता

भारतीय पाठकों को यह किताब बहुत अपनी सी लगती है, क्योंकि इसकी कई बातें हमारे शास्त्रों में पहले से हैं:

As a Man Thinkethभारतीय दर्शन में
इंसान वैसा ही है जैसा सोचता हैगीता 6.5: “उद्धरेदात्मनात्मानं”, अपना उद्धार ख़ुद करो, मन ही मित्र और मन ही शत्रु
विचार बीज, कर्म फलकर्म सिद्धांत: जैसा बोओगे वैसा काटोगे
शरीर मन का सेवकयोग दर्शन: मन शांत तो शरीर स्वस्थ
शांति सबसे बड़ा रत्नगीता 2.66: “अशान्तस्य कुतः सुखम्”, अशांत को सुख कहाँ

7 दिन का “मन का बगीचा” अभ्यास

दिनअभ्यास
पहला दिनपूरे दिन के 3 नकारात्मक विचार लिखें, जो बार बार आते हैं
दूसरा दिनहर नकारात्मक विचार के सामने उसका सकारात्मक और सच्चा रूप लिखें
तीसरा दिनएक दिन बिना शिकायत के बिताने का संकल्प लें
चौथा दिनअपना एक उद्देश्य एक वाक्य में लिखें
पाँचवाँ दिनउस उद्देश्य के लिए एक त्याग तय करें (जैसे 1 घंटा फ़ोन कम)
छठा दिन5 साल बाद के अपने जीवन का सपना विस्तार से लिखें
सातवाँ दिन15 मिनट मौन बैठें, ग़ुस्सा आने पर 10 तक गिनकर जवाब दें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

As a Man Thinketh किताब के लेखक कौन हैं?

इसके लेखक इंग्लैंड के लेखक जेम्स एलन (James Allen) हैं। यह किताब 1903 में छपी थी।

As a Man Thinketh का हिंदी में मतलब क्या है?

इसका भाव है “जैसा मनुष्य सोचता है” या “जैसा विचार वैसा जीवन”। यह नाम बाइबल की पंक्ति “जैसा वह अपने मन में सोचता है, वैसा ही वह है” से लिया गया है।

As a Man Thinketh में कितने अध्याय हैं?

7 अध्याय: विचार और चरित्र, विचार और परिस्थितियाँ, विचार और स्वास्थ्य, विचार और उद्देश्य, उपलब्धि में विचार, सपने और आदर्श, और शांति।

इस किताब की सबसे बड़ी सीख क्या है?

हमारी परिस्थितियाँ, हमारा चरित्र और हमारा स्वास्थ्य हमारे लगातार चलने वाले विचारों का नतीजा हैं। विचार बदलने से ही जीवन बदलता है।

क्या यह किताब हिंदी में मिलती है?

हाँ, यह “जैसा मनुष्य सोचता है” जैसे नामों से कई प्रकाशकों ने हिंदी में छापी है।

क्या सिर्फ़ अच्छा सोचने से सब कुछ मिल जाता है?

नहीं। एलन ख़ुद उद्देश्य, एकाग्रता, त्याग और मेहनत पर ज़ोर देते हैं। अच्छे विचार सही कर्म की नींव हैं, कर्म का विकल्प नहीं।

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