12 rules of life by Jordan Peterson book summary in Hindi

12 rules of life by Jordan Peterson book summary in Hindi

दोस्तों आज में आपसे Jordan Peterson (जॉर्डन पीटरसन) की  बुक 12 rules of life book summary in Hindi by Jordan Peterson (12 रूल्स ऑफ़ लाइफ  की समरी) शेयर करने जा रहा हूँ  जिससे आप सीखेंगे कि अपने लाइफ को ऑर्गेनाइज्ड कैसे  करें, अपने प्रोब्लेम्स या परेशानी से कैसे दूर रहे और खुद के अकेलेपन से कैसे बचें। तो  बिना किसी देरी की करते है काम की बात

12 rules of life book summary in Hindi by Jordan Peterson

12 rules of life book summary in hindi

नियम 1 कंधे तानकर सीधे खड़े हों

विषय सूची

ऑथर कहते है कि जब आप सीधे खड़े होकर गहरी साँस लेंगे तो आप अच्छा महसूस करेंगे। इसलिए अपने सिर को ऊँचा रखें इसे झुकाएँ नहीं और स्माइल करें।  जब आप ऐसा करते है तो आपके बॉडी में सेरोटोनिन का लेवल बढ़ाता है। सेरोटोनिन एक  हैप्पी हॉर्मोन है जो आपके नसों को आराम देता है और आपके इम्युनिटी को मजबूत करता है जिससे की आपको अच्छे-अच्छे विचार यानी कि थॉट्स आते है। 

आईये इस एक एक्साम्पल से समझते है।  लॉबस्टर यानी केकड़े समुद्र की गहराई में सर्वाइव करने के लिए बहुत संघर्ष करता है। जब केकड़े लड़ाई करता है और वह जीत जाता है तब वो अपने आपको और बढ़ा दिखता और उसके बॉडी में केमिकल होता सेरोटोनिन जो रिलीज़ हो जाता है और अगर कोई केकड़ा हार जाता है तो वह और छोटा हो जाता है जिससे उनके अंदर सेरोटोनिन का लेवल कम हो जाता है।  इसलिए एक अच्छी पोस्चर वाला केकड़ा अपने एरिया का विनर होता है। वो आसानी से अपने शिकार को फँसा सकता है वहीँ दूसरी और, एक झुका हुआ केकड़ा हमेशा एक लूजर होता है। उसके बॉडी में सेरोटोनिन का लेवल कम होता है। इंसान भी  इस पहलु में बिलकुल केकड़े की तरह ही होते हैं इसलिए ख़ुद को लूज़र मत समझिए। अच्छे मौकों आपको तभी मिलेंगे जब आप पॉजिटिव होंगे और पॉजिटिव बांटें सोचेंगे। तो आज से ही तन कर चलना शुरू कर दीजिये और  अपने बॉडी में सेरोटोनिन का लेवल बढाईये। 

नियम 2 स्वंय को उस व्यक्ति की तरह देखें, जिसकी मदद करना आपके जिम्मेदारी है

जब हमारा कोई फॅमिली मेंबर बीमार पढ़ जाता है तो हम उनका कितना ध्यान रखते हैं।  हम उन्हें डॉक्टर के पास ले जाते हैं, उन्हें समय पर दवाई देते हैं और हर वो चीज करते है जिससे वो जल्दी से जल्दी ठीक हो जाये। लेकिन जब हम खुद बीमार होते है तो आपना ध्यान नहीं रखते, समय पर डॉक्टर के पास नहीं जाते और अगर डॉक्टर के पास चले भी गए तो समय पर दवाई नहीं खाते।  दोस्तों आपको ख़ुद से भी उतना ही प्यार करना चाहिए जितना आप अपने परिवार से करते हैं। अगर आप खुद पर कंट्रोल करना और डिसिप्लिन में रहना सीख लेते है तो जरा सोचिये आपकी जिंदगी कितनी बदल जाएगी और आप कितना ऑर्गनाइज्ड हो जायेंगे।  अगर आप स्वस्थ्य और खुश होंगे तो इसका पॉजिटिव असर आपके लाइफ के हर पहलु पर पड़ेगा जिससे आप ज्यादा प्रोडक्टिव हो जायेंगे तो इसलिए आज से ही खुद का परवाह करना और अपना ध्यान रखना शुरू कर दें।

नियम 3 जो लोग आपका भला चाहते है, उन्हें अपना दोस्त बना लें

अगर कोई ऐसा इंसान आपका दोस्त है, जिससे दोस्ती करने के लिए आप  कभी किसी और को नहीं कहेंगे, तो भला आपने खुद उसे अपना दोस्त क्यों बना रखा है?  इसलिए आपको ऐसे लोगों को दोस्त बनाना चाहिए  जो चीज़ों को बेहतर बनाना चाहते हों, जो आपके लक्ष्य को पाने में मदद करता हो और अगर आप कुछ गलत करते हो तो आपको डांटने और सही राश्ते पर चलने के लिए कह सकने का हिम्मत रखता हो। आईये इसे एक एक्साम्पल से समझते है। ऑथर कहते है कि उनका एक दोस्त था एड जो बहुत इंटेलीजेंट और स्मार्ट था। वो दोनों साथ में पार्टी करते थे। ऑथर ने कॉलेज में एडमिशन ले लिया लेकिन एड नशा करने लगा था। वो ऐसे दोस्तों के साथ समय बिताने लगा जो कॉलेज बीच में ही छोड़ चुके थे।  एक दिन, ऑथर ने एड को अपने घर बुलाया लेकिन एड अकेले नहीं  उसके साथ उसका दोस्त कार्ल भी साथ में आया था।  ऑथर उन्हें देखते ही समझ गए कि वो दोनों नशे में चूर हैं।  आखिर, ऑथर एड को एकांत में ले गए और उन्हें वहाँ से जाने के लिए कहा। ऐसे लोगों के साथ रहना जो नशा करते हैं, आलसी हैं और लाइफ में जिनका कोई पर्पस नहीं है, बहुत दुःख की बात है। लेकिन आप किसके साथ दोस्ती रखना चाहते है ये सिर्फ़ आपकी चॉइस है। इसलिए दोस्तों  लाइफ में लक्ष्य का होना बहुत ज़रूरी है अपने अंदर विनम्रता लाएँ और ज़रा साहस दिखाएँ। अपनी निर्णय क्षमता का इस्तेमाल करें और स्वयं को ऐसे लोगों से बचाये जो गलत रिश्ते पर चल रहा हो और लोगों से जुड़ें जो लोग आपका हित चाहते हैं, और उन्हें अपना दोस्त बना लें।

12 rules of life by Jordan Peterson book summary in Hindi

नियम 4 अपनी तुलना अपने पिछले कल से करें न कि दूसरें से

ऑथर कहते है की आप भले ही किसी स्किल में महारथी हो पर आपको कोई न कोई ऐसा आदमी जरूर मिल जायेगा जिसके सामने आप अक्षम नजर आएंगे  इसलिए अगर आप एक गिटारिस्ट हैं तो ख़ुद को जिमि पेज से कम्पेयर मत कीजिये औरअगर आप शेफ हैं तो ख़ुद को मास्टर शेफ गॉर्डन रामसे से कम्पेयर मत कीजिये। आप के पास अपने एक यूनिक स्किल्स हैं इसलिए आप उनसे अलग हैं उनसे कम नहीं। आप ख़ुद में एक यूनिक इंसान हैं और बिलकुल आपके जैसा इस पूरी दुनिया में दूसरा कोई इंसान नहीं है इसलिए आप जैसे हैं ख़ुद को वैसे एक्सेप्ट करें। आपके जो हुनर हैं उन्हें बेहतर कीजिये। दोस्तों अगर आप दूसरों की नक़ल करेंगे तो ना उनके जैसा बन पाएँगे और ना आपकी ख़ुद की कोई अलग पहचान बन पाएगी।  इसलिए ख़ुद को दूसरों से कम्पेयर करने की बजाय आप कल क्या थे उससे ख़ुद को कम्पेयर करें ऐसा करने पर ही आप असल में फ़र्क देख पाएँगे। हर दिन ख़ुद को कल से अच्छा बनाने की कोशिश करें इससे आपको सच में ख़ुद पर प्राउड फील होने लगेगा। अपने आप को दूसरों से कम्पेयर करना आपको नेगेटिव बना देगा आपके आत्म विश्वास को कम कर देगा इसलिए आपका लक्ष्य ख़ुद को कल से भी एक बेहतर इंसान बनाने का होना चाहिए। 

नियम 5 अपने बच्चों को ऐसा कुछ न करने दें, जिससे आप उन्हें नापसंद करने लगें

ऑथर कहते है की एक तीन साल का बच्चा एक भीड़भाड़ वाले एयरपोर्ट पर अपने पेरेंट्स के पीछे -पीछे चल रहा था।  जो बहुत शरारत कर रहा था। वह सबके सामने ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रहा था। उसके माता पिता उसे अनदेखा कर रहे थे और वो बहुत शर्मिदा भी हो रहे थे लेकिन बस आगे चलते जा रहे थे। बच्चा अपने पेरेंट्स के पीछे पीछे चल रहा था वो सिर्फ़ उनका ध्यान अपनी ओर करने की कोशिश कर रहा था। हो सकता है कि उसे कुछ चाहिए था। लेकिन क्योंकि उसके पेरेंट्स उस पर ध्यान नहीं दे रहे थे। अगर उसका  पेरेंट्स एक बार रुक कर उससे बात करते तो प्रॉब्लम वही सोल्व हो जाती वो बच्चा शैतानी करना और चिल्लाना बंद कर देता। इसलिए दोस्तों बच्चे को सही और गलत के बारे में सिखाना आपकी ज़िम्मेदारी है। शांत और ज़िम्मेदार पेरेंट्स एक डिसीपीलिंड बच्चे को बड़ा करते हैं क्योकि वो अपने बच्चे को नई चीज़ें सीखने और जानने के लिए खुला छोड़ देते है और साथ ही उनके लिए लिमिट भी सेट करते है और अगर बच्चा कुछ गलत करता है तो उसे तुरंत रोकतें।  ऐसा करने से वो बच्चा सही और गलत में फर्क करना सीख जाता है इसलिए दोस्तों अपने अपने बच्चे के साथ समय बिताएँ। उसे इस बात का एहसास कराएँ कि आप उसे प्यार करते हैं और वो आपके लिए इम्पोर्टेन्ट हैं।  उन्हें मारने, डाँटने या सज़ा देने से आप ये कभी हासिल नहीं कर पाएँगे बल्कि वो आपसे दूर होते चले जाएँगे।

12 rules of life by Jordan Peterson book summary in Hindi

नियम 6 दुनिया की आलोचना करने से पहले अपना घर संभालें

 क्या आपने उन सभी मौकों का पूरा लाभ उठाया है, जो आपको दिए गए? क्या आप अपनी नौकरी या कॅरियर में कड़ी मेहनत कर रहे हैं?  क्या आप अपने जीवन-साथी और बच्चों से सम्मानजनक व्यवहार करते हैं? क्या आप ऐसी आदतों के गुलाम हैं, जो आपके स्वास्थ्य और हितों के लिए सही नहीं है?  क्या आप अपने जीवन में सुधार ला पाए? अगर इसका जवाब न है, तो अब ज़रा ये कोशिश करके देखिए : वह कार्य करना बंद कर दीजिए, जिसके बारे में आप जानते हैं कि वह गलत है। इसकी शुरुआत आज से ही कीजिए। अपने जीवन में बस वही करें, जिसके बारे में बात करते समय आपको गर्व महसूस हो। दुनिया की आलोचना करने से पहले अपना घर सँभालें

आईये इसे एक एक्जाम्पल से समझते है।  एंटोन चेखॉव के पिता को शराब पीने की आदत थी।  वो नशे की हालत में रोज़ अपने बच्चों को मारते थे। उनका परिवार गरीब था और वे एक छोटे से मकान में रहते थे। एंटोन के भाई बिलकुल अपने पिता की तरह हो गए थे। लेकिन एंटोन ने बहुत मेहनत की और पढाई में ध्यान लगाया जिससे उसको स्कालरशिप मिल गया।  उन्होंने ख़ुद पर अपने माहौल का असर नहीं होने दिया। अपनी सोच को पॉजिटिव रखते हुए एंटोन ने एक बहुत अच्छी मिसाल पेश किया उन्होंने अपने भाइयों को भी बदलने के लिए एनकरेज किया, अपने घर के माहौल को बदला और आगे चल कर एंटोन बहुत सक्सेसफुल लेखक बने। आज भी उनके बुक्स ना जाने कितने लोगों को इंस्पिरेशन दे रहे हैं। .

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नियम 7 वह हासिल करने की कोशिश करें, जो अर्थपूर्ण हो, न कि वह जो सुविधाजनक हो

मोमेंट में मजे करने के बजाय अपनी फ्यूचर और पूरी लाइफ के बारें में सोचें और ये देखो की आपका पैशन क्या है।  आप किस लिए जीते है, आपका सच क्या है, और उसे फॉलो करना स्टार्ट करें। अपने आप से पूछें की आप इस दुनिया को कैसे बेहतर बना सकते है और आपको आज ऐसा  करना है जो आपको फ्यूचर में काम आये। जब आप किसी मकसद को पूरा करने में अपनी लाइफ लगाएँगे तब आप देखेंगे कि आप ज़्यादा ऑर्गेनाइज्ड हो गए हैं। 

नियम 8  हमेशा सच बोलेन या कम से कम झूठ न बोले

ऑथर कहते है की एक समय था जब वो अपनी वाइफ के साथ एक छोटे से अपार्टमेंट में रेंट पर रहा करते थे उसका मकान मालिक डेनिस थे जिसे शराब पिने की लत थी। वो अपने काम के समय को छोड़कर पूरा दिन नशे में धुत रहता था कई बार तो वो सिर्फ़ दो ही दिन में बीयर की 60 बोतल पी जाता था। वह अपने सारे पैसे शराब में उड़ा देता था जब कभी उसके पैसे और शराब ख़त्म हो जाते तो वह ऑथर का दरवाज़ा खटखटा देता था चाहे आधी रात ही क्यों न हो रहा हो और साथ में वो माइक्रोवेव, टोस्टर लेके आता था और उसे ऑथर यानि की जॉर्डन को बेचने की कोशिश करता थे। जॉर्डन ने एक दो बार उसका सामान खरीदा भी। लेकिन जॉर्डन की वाइफ का कहना था कि डेनिस को ये सब करना बंद करना होगा। जॉर्डन बहुत नर्वस थे।  वह नशे में धुत एक शराबी को कैसे समझा पाएँगे कि ये सब अब नहीं चल सकता।  फ़िर जॉर्डन ने सच बोलने का फ़ैसला किया। उन्होंने डेनिस को सीधे सीधे कह दिया कि वो कोई सामान नहीं खरीदना चाहते। उन्होंने उसे समझाया कि उसकी भलाई इसी में है कि उसे और पैसे ना दिए जाएँ। जॉर्डन ने जो हकीकत था उसे साफ़ साफ़ बता दिया। 15 सेकंड तक डेनिस जॉर्डन को देखता रहा और उसके मन को पढ़ने की कोशिश करता रहा। उसने जॉर्डन के शब्दों में सच्चाई और इमानदारी को महसूस किया  फ़िर वो मुड़ा और वह से चला गया। डेनिस ने फ़िर कभी जॉर्डन को कुछ भी बेचने की कोशिश नहीं की।

अगर आपका जीवन वैसा नहीं है, जैसा यह हो सकता है, तो सच बोलने का प्रयास कीजिए। अगर आप खुद को कमजोर, हताश, ठुकराया हुआ और उलझन में महसूस करते हैं सच बोलने का प्रयास कीजिए। झूठ से सिर्फ़ एक और प्रॉब्लम खडी हो जाती है। भले ही वो किसी की फीलिंग्स को हर्ट ना करने के लिए बोला गया हो, वो फ़िर भी झूठ ही होता है।

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नियम 9 यह मानकर चलें कि आप जिस व्यक्ति से बातचीत कर रहे हैं शायद वह कुछ ऐसा जनता हो, जो आपको न पता हो

बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें किसी ऐसे इंसान की ज़रुरत होती है जो उन्हें सुनें और समझे  क्योकि वो खुद को वो बहुत अकेला महसूस करते हैं। ऐसे लोग सिर्फ़ अपने मन की बात कहना चाहते हैं लेकिन उन्हें सुनने वाला कोई नहीं होता और अगर  ऐसा बहुत लंबे समय तक चलता रहा तो ये मानसिक रोग यानि कि डिप्रेशन का रूप ले  लेता है। अगर आप ऐसे लोगों से कुछ कहते भी नहीं, सिर्फ़ उन्हें ध्यान से सुनते हैं तो आप उनकी बहुत मदद कर सकते हैं। उसे ये जताएं कि आपको उसकी परवाह है और आप उसकी कंडीशन को समझने की कोशिश कर रहे हैं।  इसे बिना शब्दों के कम्यूनिकेट व संवाद करना कहते हैं। बोलने वाला आपके हाव भाव से समझ जाता है कि आप उसकी बात ध्यान से सुन रहे हैं या नहीं, आपको उनसे हमदर्दी है या नहीं या आप भरोसा करने लायक हैं या नहीं। अगर आप उसे कोई सलाह नहीं भी देते तो उसे बोल कर अपने  मन को हल्का कर लेने दीजिये क्योकि अक्सर ऐसे लोग ख़ुद अपने प्रॉब्लम का सोलुशन ढूंढ लेते हैं इसलिए उन्हें सिर्फ़ पूरे ध्यान से सुनें।

नियम 10 सटीक और स्पष्ट शब्दों का उपयोग करें

जब हम अपने प्रॉब्लम को पहचान नहीं पाते तो वो धीरे धीरे और ज़्यादा बड़ी और बत्त्तर होने लगता है। अगर आप किसी प्रॉब्लम की जड़ को नहीं समझ पाए तो आप उसे कभी हल भी नहीं कर पाएँगे। यही कारण है कि हमें बहुत सोच समझ कर बोलने की ज़रुरत है।  यह मत कहिये कि सब कुछ गलत है लेकिन यह भी मत कहिये कि कुछ भी गलत नहीं है। बढ़ा चड़ा कर या कम कर के नहीं बल्कि जो प्रॉब्लम है बस वही बोलिये।  एक बार जब आप प्रॉब्लम को पहचान लेते हैं तब आपको समझ में आ जाता है कि उसे कैसे सोल्व करना है। 

नियम 11 जब बच्चे स्केटबोर्डिंग कर रहे हों तो उन्हें परेशान न करें

बहुत सरे माता पिता अपने बच्चों के प्रति ज़रुरत से ज़्यादा प्रोटेक्टिव होते हैं। वो अपने बच्चों पर कई चीज़ों की पाबंदी लगा देते हैं और वो हमेशा बीच में आकर बच्चे की प्रॉब्लम को सोल्व कर देते हैं। इसका रिजल्ट ये निकलता है कि बच्चा डरपोक और अंदर से कमजोर हो जाता है। वो अपने पेरेंट्स की मदद पर आश्रित हो जाता है और वो वो ख़ुद कोई  डिसिशन नहीं ले पाता। ऐसा अपने बच्चे के साथ ना होने दें।  अगर आपके बच्चे का अपने फ्रेंड के साथ झगड़ा हो जाता है तो उसकी बात ध्यान से सुनें लेकिन उन दोनों के बीच आप इंटरफेयर नहीं करें और ना ही आप उसकी प्रॉब्लम को हैंडल करें, ये काम उसे खुद करने दें।  इससे आपके आपके बच्चे को ख़ुद ये  पता  चलता है कि उसे क्या करना चाहिए। इससे उसमें कॉन्फिडेंस ड़ेवलप होने लगेगा और वो किसी पर आश्रित होने की बजाय प्रॉब्लम को हैंडल करना सीख जायेगा। 

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नियम 12 अगर रास्ते में कोई बिल्ली नजर आये तो उसे पाल लें

हम सब बहुत व्यस्त हैं और बस दौड़ते ही जा रहे हैं , कोई रुकना नहीं चाहता। लेकिन थोड़ा रुकना बहुत ज़रूरी है।  ज़िन्दगी की छोटी छोटी खुशियों का आनंद उठाये। हो सकता है कि घर लौटते वक़्त आपको सड़क पर एक बिल्ली दिख जाये जो खाने की तलाश कर  रही हो और इसे देख कर आपके चेहरे पर स्माइल आ जाये इसलिए रिलैक्स रहना सीखें, थोड़ा रुकना सीखें। आप कुछ देर रुक कर बिल्ली को प्यार से सहला सकते हैं। यह प्रकृति बहुत सुंदर है लेकिन यहाँ रुक कर इसे देखने का वक़्त किसी के पास नहीं है।  दोस्तों हमारी जिंदगी अस्त व्यस्त नहीं होनी चाहिए।  आप अपनी ज़िंदगी के हर पहलु  को आर्डर में  ला सकते हैं, बस  आपको अपना नज़रिया बदलने की ज़रुरत है। 

तो दोस्तों इस आर्टिकल में इस आर्टिकल में बस इतना ही आपको ये नीति कैसी लगी हमें कमेन्ट कर के जरूर बताये। अगर आप इस बुक का कम्पलीट वीडियो समरी देखना चाहते है तो ऊपर दिए लिंक से देख सकते है।

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S.K. Choudhary

नमस्कार दोस्तों, हमारे इस ब्लॉग में आपका स्वागत है, मेरा नाम है S.K. Choudhary (ऐस. के. चौधरी) और मैं एक ब्लॉगर और यूटूबर हूँ। में एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ और मेरा highest एजुकेशन MBA Finance है। मुझे पढ़ने और पढ़ाने का शोख है इसलिए में पार्ट टाइम मैं ब्लॉग लिखता हूँ और यूट्यूब के लिए बुक समरी और मोटिवेशनल वीडियो बनता हूँ।

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