एकादशी व्रत कथा: 2026 और 2027 की सभी एकादशी, तारीख़ और कथा

Ekadashi vrat katha: दीये और फूलों से सजी पूजा की थाली
एकादशी: भगवान विष्णु का व्रत, हर महीने दो बार

Ekadashi vrat katha हर एकादशी पर अलग होती है। हर महीने दो एकादशी आती हैं, एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में, यानी साल में 24 एकादशी। हर एकादशी का अपना नाम, अपना महत्व और अपनी कथा है। ये सभी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित हैं।

इस पेज पर आपको एक ही जगह मिलेगा: अगली सभी एकादशी की तारीख़ें (अक्टूबर 2026 से दिसंबर 2027 तक), सभी 24 एकादशी की कथा संक्षेप में, और एकादशी व्रत की विधि, नियम और पारण का तरीका। हर एकादशी पर कथा पढ़ने के लिए इस पेज को बुकमार्क कर लीजिए।

विषय सूची

एकादशी 2026 और 2027: सभी तारीख़ें

ये तारीख़ें द्रिक पंचांग (नई दिल्ली) के अनुसार हैं। जहाँ वैष्णव परंपरा की एकादशी अगले दिन है, वहाँ वह तारीख़ भी लिखी है।

तारीख़एकादशीमास और पक्ष
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026पापांकुशा एकादशीआश्विन शुक्ल
गुरुवार, 5 नवंबर 2026रमा एकादशीकार्तिक कृष्ण
शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 (वैष्णव 21 नवंबर)देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशीकार्तिक शुक्ल
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026उत्पन्ना एकादशीमार्गशीर्ष कृष्ण
रविवार, 20 दिसंबर 2026मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती)मार्गशीर्ष शुक्ल
रविवार, 3 जनवरी 2027सफला एकादशीपौष कृष्ण
सोमवार, 18 जनवरी 2027 (वैष्णव 19 जनवरी)पौष पुत्रदा एकादशीपौष शुक्ल
मंगलवार, 2 फ़रवरी 2027षटतिला एकादशीमाघ कृष्ण
बुधवार, 17 फ़रवरी 2027जया एकादशीमाघ शुक्ल
गुरुवार, 4 मार्च 2027विजया एकादशीफाल्गुन कृष्ण
गुरुवार, 18 मार्च 2027आमलकी एकादशीफाल्गुन शुक्ल
शुक्रवार, 2 अप्रैल 2027पापमोचनी एकादशीचैत्र कृष्ण
शनिवार, 17 अप्रैल 2027कामदा एकादशीचैत्र शुक्ल
रविवार, 2 मई 2027वरूथिनी एकादशीवैशाख कृष्ण
रविवार, 16 मई 2027मोहिनी एकादशीवैशाख शुक्ल
मंगलवार, 1 जून 2027अपरा एकादशीज्येष्ठ कृष्ण
सोमवार, 14 जून 2027निर्जला एकादशीज्येष्ठ शुक्ल
बुधवार, 30 जून 2027योगिनी एकादशीआषाढ़ कृष्ण
बुधवार, 14 जुलाई 2027देवशयनी एकादशीआषाढ़ शुक्ल
गुरुवार, 29 जुलाई 2027 (वैष्णव 30 जुलाई)कामिका एकादशीश्रावण कृष्ण
गुरुवार, 12 अगस्त 2027श्रावण पुत्रदा एकादशीश्रावण शुक्ल
शनिवार, 28 अगस्त 2027अजा एकादशीभाद्रपद कृष्ण
शनिवार, 11 सितंबर 2027परिवर्तिनी (पार्श्व) एकादशीभाद्रपद शुक्ल
रविवार, 26 सितंबर 2027इंदिरा एकादशीआश्विन कृष्ण
सोमवार, 11 अक्टूबर 2027पापांकुशा एकादशीआश्विन शुक्ल
सोमवार, 25 अक्टूबर 2027 (वैष्णव 26 अक्टूबर)रमा एकादशीकार्तिक कृष्ण
बुधवार, 10 नवंबर 2027देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशीकार्तिक शुक्ल
बुधवार, 24 नवंबर 2027उत्पन्ना एकादशीमार्गशीर्ष कृष्ण
गुरुवार, 9 दिसंबर 2027मोक्षदा एकादशी (गीता जयंती)मार्गशीर्ष शुक्ल
गुरुवार, 23 दिसंबर 2027सफला एकादशीपौष कृष्ण

मास के नाम उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार हैं। एकादशी तिथि कभी कभी दो दिन में फैली होती है, इसलिए अपने शहर का स्थानीय पंचांग भी ज़रूर देख लें।

एकादशी व्रत विधि (क्रम से)

  1. दशमी की रात से तैयारी: एकादशी से एक दिन पहले (दशमी को) सूर्यास्त के बाद हल्का सात्विक भोजन कीजिए और चावल न खाइए।
  2. सुबह का संकल्प: एकादशी की सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लीजिए।
  3. पूजा: विष्णु जी को पीले फूल, फल, तुलसी दल, धूप और दीपक अर्पित कीजिए। तुलसी के पत्ते एक दिन पहले तोड़कर रख लीजिए, क्योंकि एकादशी को तुलसी तोड़ना वर्जित माना जाता है।
  4. कथा: उस एकादशी की कथा पढ़िए या सुनिए। नीचे सभी 24 एकादशी की कथा दी गई है।
  5. व्रत: अपनी सेहत के अनुसार निर्जला, केवल जल, या फलाहार व्रत रखिए।
  6. रात्रि जागरण: हो सके तो रात में भजन कीर्तन कीजिए या विष्णु सहस्रनाम पढ़िए।
  7. पारण: अगले दिन (द्वादशी को) सूर्योदय के बाद, पारण के तय समय में व्रत खोलिए। पहले किसी ज़रूरतमंद को भोजन या दान दीजिए।
फूलों के साथ तुलसी का पौधा
एकादशी की पूजा में तुलसी दल ज़रूरी है, पर पत्ते एक दिन पहले तोड़ लें

एकादशी व्रत के नियम: क्या खाएँ, क्या न खाएँ

  • न खाएँ: चावल, गेहूँ, दालें, प्याज़, लहसुन, मांस और नशे की चीज़ें।
  • खा सकते हैं (फलाहार): फल, दूध, दही, मेवे, साबूदाना, सिंघाड़े या कुट्टू का आटा, आलू, शकरकंद, सेंधा नमक।
  • व्यवहार: झूठ, क्रोध, निंदा और किसी का दिल दुखाने से बचिए। व्रत सिर्फ़ खाने का नहीं, मन का भी होता है।
  • सेहत: गर्भवती, बीमार, बुज़ुर्ग और दवा लेने वाले लोग निर्जला व्रत न करें, फलाहार व्रत रखें।
फलों से भरी थाली
एकादशी का फलाहार: फल, दूध और मेवे

सभी 24 एकादशी की कथा (संक्षेप में)

परंपरा में उत्पन्ना एकादशी को पहली एकादशी माना जाता है, क्योंकि इसी दिन एकादशी देवी प्रकट हुई थीं। इसलिए कथाएँ यहाँ उसी क्रम से दी गई हैं।

1. उत्पन्ना एकादशी (मार्गशीर्ष कृष्ण)

सतयुग में मुर नाम के दैत्य ने देवताओं को हरा दिया था। भगवान विष्णु ने उससे लंबा युद्ध किया और फिर बदरिकाश्रम की एक गुफा में विश्राम करने लगे। मुर उन्हें सोता देख मारने आया, तभी विष्णु जी के शरीर से एक तेजस्वी कन्या प्रकट हुई, जिसने मुर का वध कर दिया। विष्णु जी ने उसका नाम एकादशी रखा और वरदान दिया कि जो इस दिन व्रत करेगा, उसके पाप नष्ट होंगे।

2. मोक्षदा एकादशी (मार्गशीर्ष शुक्ल)

गोकुल नगर के राजा वैखानस ने सपने में देखा कि उनके पिता नरक में कष्ट भोग रहे हैं। पर्वत मुनि ने बताया कि यह पिता के पिछले कर्मों का फल है, और उपाय के रूप में मोक्षदा एकादशी का व्रत करने को कहा। राजा ने व्रत करके उसका पुण्य पिता को अर्पित किया, जिससे उनके पिता को मुक्ति मिली। इसी दिन श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था, इसलिए यह गीता जयंती भी है।

3. सफला एकादशी (पौष कृष्ण)

चंपावती नगरी के राजा महिष्मत का बेटा लुंपक बुरे कामों में लगा रहता था, इसलिए राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया। वह जंगल में एक पीपल के पेड़ के नीचे रहने लगा। एक बार पौष कृष्ण दशमी की रात ठंड से वह बेहोश हो गया और अगले दिन, एकादशी को, कुछ खा न सका और रात भर जागता रहा। उसने जो फल इकट्ठे किए थे, वे भगवान को अर्पित कर दिए। अनजाने में हुए इस व्रत से उसका जीवन बदल गया और वह आगे चलकर एक अच्छा राजा बना।

4. पौष पुत्रदा एकादशी (पौष शुक्ल)

भद्रावती नगरी के राजा सुकेतुमान और रानी शैब्या संतान न होने से दुखी थे। एक दिन वन में उन्हें कुछ ऋषि मिले, जिन्होंने पुत्रदा एकादशी का व्रत करने को कहा। राजा और रानी ने श्रद्धा से व्रत किया, और उन्हें एक तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ।

5. षटतिला एकादशी (माघ कृष्ण)

एक ब्राह्मणी बहुत व्रत और दान करती थी, पर उसने कभी किसी को अन्न दान नहीं किया था। मृत्यु के बाद स्वर्ग में उसे एक ख़ाली कुटिया मिली। भगवान ने उसे षटतिला एकादशी का व्रत करने और तिल का छह तरह से उपयोग करने को कहा: तिल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल से तर्पण, तिल का भोजन और तिल का दान। इससे उसकी कुटिया धन धान्य से भर गई।

6. जया एकादशी (माघ शुक्ल)

इंद्र की सभा में गंधर्व माल्यवान और अप्सरा पुष्पवती एक दूसरे पर मोहित होकर ठीक से गा और नाच नहीं पाए। क्रोधित इंद्र ने उन्हें पिशाच बनने का शाप दे दिया। हिमालय पर कष्ट भोगते हुए उन्होंने माघ शुक्ल एकादशी को ठंड के कारण कुछ नहीं खाया और रात भर जागते रहे। अनजाने में हुए इस व्रत से वे शाप से मुक्त हो गए।

7. विजया एकादशी (फाल्गुन कृष्ण)

लंका पर चढ़ाई से पहले भगवान श्रीराम समुद्र किनारे इस चिंता में थे कि समुद्र कैसे पार करें। वकदाल्भ्य मुनि ने उन्हें विजया एकादशी का व्रत करने को कहा। श्रीराम ने सेना सहित यह व्रत किया, और आगे चलकर रावण पर विजय पाई। इसलिए यह एकादशी विजय दिलाने वाली मानी जाती है।

8. आमलकी एकादशी (फाल्गुन शुक्ल)

इस दिन आँवले के पेड़ की पूजा होती है, क्योंकि मान्यता है कि उसमें भगवान विष्णु का वास है। कथा के अनुसार एक शिकारी भूखा प्यासा इस एकादशी की रात मंदिर में जागरण के बीच बैठा रहा और कथा सुनता रहा। अनजाने में हुए इस व्रत के पुण्य से अगले जन्म में वह एक धर्मात्मा राजा बना।

9. पापमोचनी एकादशी (चैत्र कृष्ण)

मेधावी ऋषि वन में तपस्या कर रहे थे, तभी मंजुघोषा नाम की अप्सरा ने उनकी तपस्या भंग कर दी। बरसों बाद होश आने पर ऋषि ने क्रोध में उसे पिशाचिनी बनने का शाप दे दिया। फिर अपने पिता च्यवन ऋषि के कहने पर दोनों ने पापमोचनी एकादशी का व्रत किया, जिससे मंजुघोषा शाप से और मेधावी अपने पाप से मुक्त हुए।

10. कामदा एकादशी (चैत्र शुक्ल)

राजा पुंडरीक की सभा में गंधर्व ललित अपनी पत्नी ललिता की याद में ठीक से गा नहीं पाया, तो राजा ने उसे राक्षस बनने का शाप दे दिया। ललिता ने शृंगी ऋषि के कहने पर कामदा एकादशी का व्रत किया और उसका पुण्य पति को दिया, जिससे ललित फिर से गंधर्व बन गया। यह एकादशी मनोकामना पूरी करने वाली मानी जाती है।

11. वरूथिनी एकादशी (वैशाख कृष्ण)

राजा मांधाता वन में तपस्या कर रहे थे, तभी एक भालू उनका पैर चबाने लगा। वे क्रोध किए बिना भगवान विष्णु को पुकारते रहे। विष्णु जी ने उनकी रक्षा की और कहा कि मथुरा में वरूथिनी एकादशी का व्रत करो। व्रत के प्रभाव से राजा का अंग फिर से ठीक हो गया।

12. मोहिनी एकादशी (वैशाख शुक्ल)

मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद इसी दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था। कथा के अनुसार धनपाल नाम के धर्मात्मा व्यापारी का बेटा धृष्टबुद्धि बुरी संगत में पड़कर सब कुछ गँवा बैठा। कौंडिन्य ऋषि के कहने पर उसने मोहिनी एकादशी का व्रत किया, और उसके पाप नष्ट हो गए।

13. अपरा एकादशी (ज्येष्ठ कृष्ण)

राजा महीध्वज की उनके छोटे भाई वज्रध्वज ने हत्या कर दी और शव पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दिया। राजा प्रेत बनकर वहीं भटकने लगे। धौम्य ऋषि ने अपरा एकादशी का व्रत करके उसका पुण्य राजा को दिया, जिससे उन्हें प्रेत योनि से मुक्ति मिली।

14. निर्जला एकादशी (ज्येष्ठ शुक्ल)

पांडवों में भीम को बहुत भूख लगती थी, इसलिए वे कोई व्रत नहीं रख पाते थे। वेदव्यास जी ने उनसे कहा कि अगर तुम साल में केवल ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का व्रत बिना पानी के रख लो, तो तुम्हें सभी 24 एकादशी का पुण्य मिलेगा। इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। यह साल का सबसे कठिन व्रत है।

15. योगिनी एकादशी (आषाढ़ कृष्ण)

कुबेर का माली हेममाली अपनी पत्नी विशालाक्षी के प्रेम में पूजा के फूल समय पर नहीं ला पाया। कुबेर ने उसे कुष्ठ रोग का शाप दे दिया। भटकते हुए वह मार्कंडेय ऋषि के आश्रम पहुँचा, जिन्होंने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने को कहा। व्रत से वह रोग से मुक्त हो गया।

16. देवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल)

इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं, और चातुर्मास शुरू होता है। कथा के अनुसार राजा मांधाता के राज्य में तीन साल तक बारिश नहीं हुई। अंगिरा ऋषि के कहने पर राजा और प्रजा ने देवशयनी एकादशी का व्रत किया, और राज्य में खूब वर्षा हुई।

17. कामिका एकादशी (श्रावण कृष्ण)

एक क्षत्रिय से झगड़े में एक ब्राह्मण की हत्या हो गई, और समाज ने उसका बहिष्कार कर दिया। एक मुनि ने उसे कामिका एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की तुलसी से पूजा करने को कहा। व्रत से उसका पाप नष्ट हुआ। इस एकादशी पर तुलसी पूजा का ख़ास महत्व है।

18. श्रावण पुत्रदा एकादशी (श्रावण शुक्ल)

महिष्मती नगरी के राजा महीजित धर्मात्मा थे, पर संतान से वंचित थे। लोमश ऋषि ने बताया कि पिछले जन्म में उन्होंने एक प्यासी गाय को पानी पीने से हटा दिया था। ऋषि के कहने पर राजा और प्रजा ने पुत्रदा एकादशी का व्रत किया, और राजा को पुत्र प्राप्त हुआ।

19. अजा एकादशी (भाद्रपद कृष्ण)

सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने अपना राज्य, पत्नी और पुत्र सब कुछ गँवा दिया और एक चांडाल के यहाँ काम करने लगे। गौतम ऋषि ने उन्हें अजा एकादशी का व्रत करने को कहा। व्रत के प्रभाव से उनके कष्ट दूर हुए और उन्हें अपना परिवार और राज्य वापस मिल गया।

20. परिवर्तिनी एकादशी (भाद्रपद शुक्ल)

मान्यता है कि इस दिन योगनिद्रा में सोए भगवान विष्णु करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी या पार्श्व एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान के वामन अवतार की पूजा होती है, जिन्होंने राजा बलि से तीन पग धरती माँगकर तीनों लोक नाप लिए थे।

21. इंदिरा एकादशी (आश्विन कृष्ण)

यह एकादशी पितृ पक्ष में आती है। महिष्मती के राजा इंद्रसेन को नारद मुनि ने बताया कि उनके पिता यमलोक में कष्ट में हैं। नारद जी के कहने पर राजा ने इंदिरा एकादशी का व्रत करके उसका पुण्य पिता को दिया, जिससे उनके पिता को उत्तम लोक मिला। इसलिए यह एकादशी पितरों की मुक्ति के लिए मानी जाती है।

22. पापांकुशा एकादशी (आश्विन शुक्ल)

विंध्य पर्वत पर क्रोधन नाम का एक बहेलिया रहता था, जिसने पूरी ज़िंदगी बुरे काम किए। जब उसे मृत्यु का डर सताने लगा, तो वह अंगिरा ऋषि की शरण में गया। ऋषि ने उसे पापांकुशा एकादशी का व्रत करने को कहा। व्रत से उसके पाप नष्ट हुए और उसे विष्णु लोक मिला। यह एकादशी पापों पर अंकुश लगाने वाली मानी जाती है।

23. रमा एकादशी (कार्तिक कृष्ण)

राजा मुचुकुंद की बेटी चंद्रभागा का विवाह शोभन नाम के राजकुमार से हुआ, जो शरीर से कमज़ोर था। रमा एकादशी के दिन राज्य के नियम के अनुसार उसने भी व्रत रखा और भूख प्यास से उसकी मृत्यु हो गई। व्रत के पुण्य से उसे मंदराचल पर्वत पर एक सुंदर राज्य मिला, जो अस्थिर था। चंद्रभागा ने अपने एकादशी व्रतों का पुण्य देकर उस राज्य को स्थिर किया, और दोनों फिर साथ रहने लगे।

24. देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी (कार्तिक शुक्ल)

इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं, और चातुर्मास समाप्त होता है। इसी दिन से विवाह जैसे शुभ काम फिर शुरू होते हैं, और कई जगह तुलसी विवाह होता है। इसकी पूरी कथा और पूजा विधि यहाँ पढ़िए: देवउठनी एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि।

अधिक मास की एकादशी: पद्मिनी और परमा

जिस साल अधिक मास (मलमास) आता है, उस साल दो एकादशी और होती हैं: पद्मिनी (कमला) एकादशी और परमा एकादशी। इसलिए ऐसे साल में 26 एकादशी हो जाती हैं। 2026 में अधिक मास था, जबकि 2027 में अधिक मास नहीं है।

मंदिर में आरती करते पुजारी
एकादशी की रात भजन कीर्तन और जागरण का बहुत महत्व है

एकादशी व्रत से जुड़ी किताबें और सामग्री

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अगली एकादशी कब है?

ऊपर दी गई तालिका में अक्टूबर 2026 से दिसंबर 2027 तक की सभी एकादशी की तारीख़ें हैं। अक्टूबर 2026 में अगली एकादशी पापांकुशा एकादशी है, जो गुरुवार, 22 अक्टूबर को है।

साल में कितनी एकादशी होती हैं?

साल में 24 एकादशी होती हैं, हर महीने दो। जिस साल अधिक मास होता है, उस साल 26 एकादशी होती हैं।

एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?

एक पौराणिक मान्यता है कि महर्षि मेधा के शरीर के अंश धरती में समाकर चावल और जौ के रूप में उगे थे, इसलिए एकादशी पर चावल और जौ नहीं खाए जाते। इसके अलावा व्रत में हल्का और सात्विक भोजन रखने की परंपरा भी इसका कारण है।

एकादशी के व्रत का पारण कब और कैसे करें?

व्रत का पारण अगले दिन, द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद तय पारण समय के भीतर किया जाता है। द्वादशी तिथि ख़त्म होने से पहले पारण कर लेना चाहिए। पारण का सही समय अपने शहर के पंचांग में देखिए।

स्मार्त और वैष्णव एकादशी में क्या फ़र्क है?

जब एकादशी तिथि दो दिन में फैली होती है, तो गृहस्थ (स्मार्त) पहले दिन व्रत रखते हैं, और वैष्णव संप्रदाय के लोग कई बार अगले दिन। इसलिए कुछ एकादशी की दो तारीख़ें दिखती हैं। आम तौर पर गृहस्थ पहली तारीख़ को व्रत रखते हैं।

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हर एकादशी पर कथा पढ़ने के लिए इस पेज को सेव कर लीजिए। आप कौन सी एकादशी का व्रत रखते हैं, कमेंट में ज़रूर बताइए।

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