
Diwali Lakshmi puja vidhi अगर आप पहली बार घर पर ख़ुद करने जा रहे हैं, तो यह पेज आपके लिए है। इसमें पूजा का पूरा क्रम एक-एक कदम में लिखा है: तैयारी से लेकर दीपदान तक। साथ में दिवाली पर सुनी जाने वाली लक्ष्मी जी की कथा, पूजा सामग्री की पूरी सूची, और 2026 में दिवाली के पाँचों दिन की तारीख भी है।
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विषय सूची
दिवाली 2026: पाँचों दिन की तारीख
| दिन | त्योहार | तारीख |
|---|---|---|
| पहला | धनतेरस | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 |
| दूसरा | नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) | 7 या 8 नवंबर 2026 (पंचांगों में मतभेद) |
| तीसरा | दिवाली, लक्ष्मी पूजा | रविवार, 8 नवंबर 2026 |
| चौथा | गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) | सोमवार, 9 नवंबर 2026 |
| पाँचवाँ | भाई दूज | मंगलवार, 10 नवंबर 2026 |
छोटी दिवाली की तारीख पर पंचांग एकमत नहीं हैं, क्योंकि कुछ पंचांग सूर्योदय से पहले की तिथि देखते हैं और कुछ मध्यरात्रि की। अपने क्षेत्र का पंचांग देखकर तारीख तय करें।
लक्ष्मी पूजा का समय: लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर की शाम प्रदोष काल में की जाती है, और कई परिवार इसके लिए स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) का समय चुनते हैं। यह समय हर शहर में थोड़ा अलग होता है, इसलिए अपने शहर का मुहूर्त स्थानीय पंचांग से देख लें।
दिवाली की कथा: लक्ष्मी जी और साहूकार की बेटी

एक गाँव में एक साहूकार रहता था। उसकी बेटी रोज़ सुबह पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाने जाती थी। उस पीपल पर लक्ष्मी जी का वास था।
एक दिन लक्ष्मी जी उसके सामने प्रकट हुईं और बोलीं: “मैं तुमसे मित्रता करना चाहती हूँ।” लड़की ने विनम्रता से कहा कि वह पहले अपने पिता से पूछेगी। पिता ने ख़ुशी से हाँ कह दी, और दोनों सहेलियाँ बन गईं।
कुछ दिन बाद लक्ष्मी जी अपनी सहेली को अपने घर ले गईं। वहाँ उन्होंने उसका दिल खोलकर स्वागत किया और तरह-तरह के पकवान खिलाए। विदा करते समय लक्ष्मी जी ने पूछा: “अब तुम मुझे अपने घर कब बुलाओगी?”
लड़की ने न्योता तो दे दिया, पर घर लौटकर वह उदास हो गई। उसका घर साधारण था, और वह सोचने लगी कि इतनी बड़ी सहेली का स्वागत कैसे करेगी।
पिता ने बेटी की उदासी का कारण पूछा, फिर उसे समझाया: “चिंता मत कर। घर को साफ़ कर, मिट्टी से चौका लीप, चार बत्तियों वाला दीपक जला और लक्ष्मी जी का नाम लेकर बैठ जा।”
बेटी ने वैसा ही किया। तभी एक चील उड़ती हुई आई और किसी रानी का कीमती नौलखा हार उसके सामने गिरा गई। उस हार से बेटी ने सोने की चौकी बनवाई और अच्छे भोजन की तैयारी की।
कुछ ही देर में लक्ष्मी जी, श्री गणेश के साथ, उसके घर पधारीं। बेटी ने दोनों को सोने की चौकी पर बिठाया और पूरे मन से उनकी सेवा की। उसके प्रेम से लक्ष्मी जी बहुत प्रसन्न हुईं, और उस दिन के बाद साहूकार के घर कभी धन की कमी नहीं हुई।
कथा की सीख: लक्ष्मी जी साफ़-सुथरे, रोशन घर में और सच्चे मन से किए गए स्वागत से प्रसन्न होती हैं। इसीलिए दिवाली से पहले घर की सफ़ाई होती है, दीपक जलते हैं, और लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा होती है।
दिवाली क्यों मनाते हैं?
- श्रीराम की अयोध्या वापसी: रामायण की परंपरा के अनुसार चौदह वर्ष के वनवास के बाद श्रीराम कार्तिक अमावस्या को अयोध्या लौटे, और अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया।
- लक्ष्मी पूजन: मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या की रात लक्ष्मी जी घर-घर आती हैं और जहाँ सफ़ाई, रोशनी और श्रद्धा हो, वहाँ ठहरती हैं।
- नरकासुर पर विजय: छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी) श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की याद में मनाई जाती है।
पूजा से पहले घर की तैयारी

- सफ़ाई: पूजा से पहले पूरे घर की सफ़ाई करें, ख़ासकर मुख्य द्वार और पूजा की जगह।
- रंगोली: मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएँ। कई घरों में लक्ष्मी जी के छोटे पदचिह्न भी बनाए जाते हैं, जो घर के अंदर की ओर जाते हैं।
- तोरण: दरवाज़े पर आम या अशोक के पत्तों का या फूलों का तोरण लगाएँ।
- स्नान और वस्त्र: शाम को स्नान करके साफ़ या नए कपड़े पहनें।
Diwali Lakshmi Puja Vidhi: घर पर पूजा का पूरा क्रम

- स्थान: घर के पूजा स्थान या उत्तर, उत्तर-पूर्व दिशा की साफ़ जगह पर चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ।
- मूर्ति या चित्र: चौकी पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति या चित्र रखें। कई घरों में साथ में कुबेर जी और माँ सरस्वती की भी पूजा होती है।
- कलश: जल से भरा कलश रखें, उसमें आम के पत्ते लगाएँ और ऊपर नारियल रखें। कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएँ।
- पवित्रीकरण: थोड़ा जल लेकर अपने ऊपर, पूजा की सामग्री और पूजा की जगह पर छिड़कें।
- संकल्प: हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम लें और मन में पूजा का उद्देश्य बोलें, फिर जल चौकी के पास छोड़ दें।
- गणेश पूजन: हर पूजा की तरह सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें: तिलक, अक्षत, फूल, दूर्वा और लड्डू या मोदक का भोग। मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः।
- लक्ष्मी पूजन: लक्ष्मी जी को रोली, सिंदूर, अक्षत, कमल या लाल फूल, कमल गट्टा, खील-बताशे, मिठाई और सिक्के अर्पित करें। मंत्र: ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः।
- बही-खाता और तिजोरी पूजन: व्यापारी परिवार नए बही-खाते, कलम और तिजोरी पर रोली से स्वास्तिक बनाकर “शुभ लाभ” लिखते हैं और उनकी पूजा करते हैं।
- कथा: ऊपर दी गई लक्ष्मी जी की कथा पढ़ें या सुनाएँ।
- आरती: घी या कपूर का दीपक जलाकर “ॐ जय लक्ष्मी माता” आरती गाएँ, फिर गणेश जी की आरती करें।
- दीपदान: पूजा के दीपक से घर भर के दीये जलाएँ: मुख्य द्वार, तुलसी, रसोई, पानी रखने की जगह, आँगन और छत पर।
- प्रसाद: खील-बताशे और मिठाई का प्रसाद परिवार में बाँटें और बड़ों का आशीर्वाद लें।
पूजा का तरीका हर क्षेत्र और परिवार में थोड़ा अलग होता है। जहाँ फ़र्क हो, वहाँ अपने घर के बड़ों की रीति को ही मानें।

दिवाली पूजा सामग्री सूची
पूजा से एक दिन पहले यह सूची देखकर सारा सामान इकट्ठा कर लें:
- लक्ष्मी गणेश की मूर्ति या चित्र
- पूजा की चौकी और लाल या पीला कपड़ा
- कलश, आम के पत्ते और नारियल
- मिट्टी के दीये, घी या तेल और रुई की बाती
- रोली, सिंदूर, हल्दी, अक्षत (साबुत चावल) और कलावा
- कमल गट्टा, कमल या लाल फूल, दूर्वा
- खील-बताशे, मिठाई और फल
- चाँदी के या नए सिक्के
- धूप, अगरबत्ती और कपूर
- रंगोली के रंग और दरवाज़े का तोरण
सारा सामान अलग-अलग नहीं ख़रीदना हो तो दिवाली पूजा सामग्री की तैयार किट भी मिलती है।
दिवाली पर सावधानी
- दीयों को पर्दों, कपड़ों और काग़ज़ की सजावट से दूर रखें।
- पूजा का दीपक जलता छोड़कर घर से बाहर न जाएँ, और बच्चों को दीयों के पास अकेला न छोड़ें।
- पटाखे चलाते समय पानी की बाल्टी पास रखें, और पालतू जानवरों का ध्यान रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दिवाली 2026 कब है?
दिवाली और लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। धनतेरस 6 नवंबर को और भाई दूज 10 नवंबर को है।
लक्ष्मी पूजा किस समय करनी चाहिए?
लक्ष्मी पूजा शाम को प्रदोष काल में की जाती है, और कई परिवार स्थिर लग्न (वृषभ) का समय चुनते हैं। सही समय अपने शहर के पंचांग से देखें, क्योंकि यह हर शहर में थोड़ा अलग होता है।
दिवाली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है?
गणेश जी प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता हैं, इसलिए हर पूजा उन्हीं से शुरू होती है। मान्यता है कि धन (लक्ष्मी) के साथ बुद्धि और विवेक (गणेश) भी चाहिए, तभी धन सही काम आता है। ऊपर की कथा में भी लक्ष्मी जी गणेश जी के साथ ही आती हैं।
दिवाली पूजा में कौन से मंत्र बोलें?
गणेश जी के लिए “ॐ गं गणपतये नमः” और लक्ष्मी जी के लिए “ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः”। ये छोटे और आसान मंत्र हैं, जिन्हें पूरा परिवार साथ बोल सकता है।
छोटी दिवाली 2026 कब है?
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) की तारीख पर इस साल पंचांगों में मतभेद है: कुछ इसे 7 नवंबर बताते हैं और कुछ 8 नवंबर। अपने क्षेत्र का पंचांग देखकर तय करें।
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