
Tenali ram ki kahaniyan दक्षिण भारत से निकली, पर आज पूरे देश में सुनाई जाने वाली लोककथाएँ हैं। इनमें तेनालीराम कभी राजा की पहेली सुलझाते हैं, कभी किसी ठग को उसी की चाल में फँसा देते हैं, और कभी चोरों से अपना बग़ीचा सिंचवा लेते हैं। बच्चों को ये कहानियाँ इसलिए पसंद आती हैं क्योंकि इनमें ताक़त नहीं, दिमाग़ जीतता है। नीचे सभी कहानियाँ बहुत आसान हिंदी में दी गई हैं।
विषय सूची
Tenali Ram Ki Kahaniyan: पूरी सूची
| कहानी | कहानी में क्या होता है | सीख |
|---|---|---|
| काली माँ का वरदान | रात के मंदिर में डरने के बजाय हँस पड़ा लड़का विकटकवि बन जाता है | डर के समय भी शांत दिमाग़ रास्ता निकाल लेता है |
| तेनालीराम और बिल्ली | राजा के मुफ़्त दूध वाले हुक्म का लोग ग़लत फ़ायदा उठाते हैं | नियम वही अच्छा, जिसे लोग सच में निभा सकें |
| तीन गुड़ियों की परीक्षा | एक पतले तार से तीन एक जैसी गुड़ियों का फ़र्क़ निकलता है | अच्छा इंसान वह है जो सुनी हुई बात सँभालकर रखे |
| चोरों ने सींचा बग़ीचा | चोर रातभर कुआँ ख़ाली करते हैं और बग़ीचा सिंच जाता है | लालच में इंसान बिना सोचे मेहनत कर बैठता है |
| कुएँ का झगड़ा | ज़मींदार कहता है कुआँ बेचा था, पानी नहीं | चालाकी से हक़ छीनोगे, तो वही उल्टी पड़ेगी |
नई कहानियाँ यहाँ जुड़ती रहेंगी। बच्चों के लिए अकबर बीरबल की कहानियाँ और पंचतंत्र की सभी कहानियाँ भी पढ़िए।
तेनालीराम कौन थे?
बच्चे यह सबसे ज़्यादा पूछते हैं, और जवाब दिलचस्प है: तेनालीराम कोई काल्पनिक पात्र नहीं थे, वे सच में हुए थे।
| बात | जानकारी |
|---|---|
| असली नाम | तेनाली रामकृष्ण (तेनाली रामलिंग भी कहा जाता है) |
| कब | सोलहवीं सदी |
| कहाँ के | तेनाली, विजयनगर साम्राज्य (आज का आंध्र प्रदेश) |
| किसके दरबार में | राजा कृष्णदेव राय, शासन 1509 से 1529 |
| दरबार में दर्जा | अष्टदिग्गज, यानी आठ सबसे बड़े कवियों में से एक |
| उपाधि | विकटकवि, यानी हँसाने वाला कवि |
| किताबें | पांडुरंग महात्म्यम् और उद्भटाराध्य चरितमु |
तेनालीराम सिर्फ़ मज़ाक़िया आदमी नहीं थे, वे तेलुगु के बड़े कवि थे। उनकी किताब पांडुरंग महात्म्यम् को तेलुगु की पाँच महान काव्य रचनाओं में गिना जाता है।
विकटकवि शब्द की एक मज़ेदार बात: इसे उल्टा पढ़िए, तो भी विकटकवि ही बनता है।
एक बात ईमानदारी से बता दें: उनके जन्म और मृत्यु का साल अलग अलग किताबों में अलग अलग मिलता है, इसलिए हमने कोई पक्की तारीख़ नहीं लिखी, सिर्फ़ सदी बताई है। (तेनाली राम, विकिपीडिया)
ये कहानियाँ कहाँ से आईं?
यह बात साफ़ समझ लेनी चाहिए, और बच्चों को भी बतानी चाहिए:
तेनालीराम असली थे, पर उनकी चतुराई वाली ये कहानियाँ लोककथाएँ हैं।
ये कहानियाँ किसी एक किताब में एक साथ नहीं लिखी गईं। ये सदियों तक गाँव गाँव, दादी नानी के मुँह से बच्चों तक पहुँचती रहीं। इसीलिए एक ही कहानी अलग अलग किताबों में थोड़ी अलग मिलती है: कहीं नाम बदल जाते हैं, कहीं गिनती, कहीं आख़िर अलग होता है।
हमने हर कहानी में वही रूप लिया है जो बच्चों के लिए सबसे सरल और सबसे ज़्यादा सुनाया जाता है, और जहाँ कहानी के कई रूप हैं, वहाँ यह बात लिख भी दी है।
राजा कृष्णदेव राय कौन थे?
कृष्णदेव राय विजयनगर साम्राज्य के सबसे मशहूर राजा थे। उनका शासन 1509 से 1529 तक रहा। उनके समय में विजयनगर कला, संगीत और साहित्य का बहुत बड़ा केंद्र बन गया था।
उनके दरबार में आठ बड़े कवियों का समूह था, जिसे अष्टदिग्गज कहा जाता था। तेनालीराम इन्हीं आठ में से एक थे। इसीलिए कहानियों में वे राजा के इतने क़रीब दिखाई देते हैं।
तेनालीराम की कहानियाँ बच्चों के लिए क्यों अच्छी हैं?
- दिमाग़ चलाना सिखाती हैं। इनमें कोई जादू नहीं होता। तेनालीराम सिर्फ़ सोचकर रास्ता निकालते हैं, और बच्चा भी साथ साथ सोचने लगता है।
- छोटी और मज़ेदार हैं। ज़्यादातर कहानियाँ तीन चार मिनट की हैं, सोने से पहले सुनाने के लिए एकदम सही।
- बिना भाषण के सीख देती हैं। बच्चा ख़ुद समझ जाता है कि लालच, चालाकी या बिना सोचे काम करना क्यों ठीक नहीं।
- हँसी के साथ आती हैं। तेनालीराम की हर कहानी के आख़िर में दरबार हँसता है, और बच्चा भी।
- इतिहास से जोड़ती हैं। बच्चा विजयनगर, कृष्णदेव राय और अष्टदिग्गज के बारे में खेल खेल में जान जाता है।
बच्चों को ये कहानियाँ कैसे सुनाएँ
- कहानी बीच में रोककर पूछिए, “अब तेनालीराम क्या करेंगे?” बच्चा ख़ुद जवाब सोचेगा, यही सबसे बड़ा फ़ायदा है।
- राजा और तेनालीराम की आवाज़ें अलग अलग बनाइए।
- कहानी के बाद एक ही सवाल पूछिए, “सबसे अच्छी बात क्या लगी?” लंबा उपदेश मत दीजिए।
- हर कहानी के साथ दिए “5 लाइन में छोटी कहानी” वाले हिस्से का इस्तेमाल स्कूल के होमवर्क में किया जा सकता है।
- बच्चे को ज़रूर बताइए कि तेनालीराम एक असली कवि थे, पर ये कहानियाँ लोककथाएँ हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तेनालीराम का असली नाम क्या था?
उनका असली नाम तेनाली रामकृष्ण था। उन्हें तेनाली रामलिंग भी कहा जाता है। वे तेनाली के रहने वाले थे, इसलिए तेनालीराम कहलाए।
तेनालीराम किस राजा के दरबार में थे?
वे विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेव राय के दरबार में थे, जिनका शासन 1509 से 1529 तक रहा।
विकटकवि का क्या मतलब है?
विकटकवि का मतलब है हँसाने वाला कवि। मज़े की बात यह है कि इस शब्द को उल्टा पढ़ें, तो भी विकटकवि ही बनता है।
क्या तेनालीराम की कहानियाँ सच में हुई थीं?
तेनालीराम असली इंसान थे, पर चतुराई वाली ये कहानियाँ लोककथाएँ हैं, जो सदियों तक मुँह ज़बानी चलती रहीं। इन्हें इतिहास नहीं माना जाता।
अष्टदिग्गज किसे कहते हैं?
राजा कृष्णदेव राय के दरबार के आठ सबसे बड़े कवियों के समूह को अष्टदिग्गज कहा जाता था। तेनालीराम उन्हीं में से एक थे।
ये कहानियाँ किस उम्र के बच्चों के लिए हैं?
ज़्यादातर कहानियाँ 6 से 12 साल के बच्चों के लिए हैं। हर कहानी के ऊपर उसकी उम्र लिखी है।
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बच्चों के लिए तेनालीराम की किताब
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