शेयर मार्केट में कितने सेक्टर होते हैं? NSE के 12 मैक्रो सेक्टर, 22 सेक्टर, सेक्टोरल इंडेक्स और सेक्टर से निवेश का सही तरीका (How Many Sectors in Stock Market)

अपडेट: 6 मिनट में पढ़ें

शेयर मार्केट में कितने सेक्टर होते हैं? NSE के आधिकारिक वर्गीकरण (Industry Classification) के अनुसार भारत में लिस्टेड कंपनियों को 12 मैक्रो इकोनॉमिक सेक्टर और उनके अंदर 22 सेक्टर में बाँटा जाता है। इससे आगे इन्हें 59 इंडस्ट्री और 197 बेसिक इंडस्ट्री में बाँटा गया है। यानी सवाल का सीधा जवाब: मोटे तौर पर 12, और थोड़ा विस्तार से 22 सेक्टर।

छोटा जवाब: सेक्टर का मतलब है एक जैसे कारोबार करने वाली कंपनियों का समूह, जैसे बैंक और फ़ाइनेंस, IT, दवा (हेल्थकेयर), FMCG, ऑटो, ऊर्जा। हर कंपनी को उसी सेक्टर में रखा जाता है जहाँ से उसकी आधी से ज़्यादा कमाई आती है। सेक्टर समझने से आप अपने निवेश में विविधता ला सकते हैं और एक ही तरह के जोखिम में सारा पैसा फँसने से बचते हैं।

मुख्य बातें

  • NSE का ढाँचा: 12 मैक्रो सेक्टर → 22 सेक्टर → 59 इंडस्ट्री → 197 बेसिक इंडस्ट्री।
  • 2022 से NSE और BSE एक साझा वर्गीकरण ढाँचा इस्तेमाल करते हैं।
  • कंपनी का सेक्टर उसकी कमाई के सबसे बड़े हिस्से (50% से ज़्यादा) से तय होता है।
  • हर सेक्टर का अलग सेक्टोरल इंडेक्स होता है, जैसे Nifty Bank, Nifty IT, Nifty Pharma।
  • सेक्टर और सेगमेंट अलग हैं: सेगमेंट का मतलब है बाज़ार का हिस्सा, जैसे कैश या F&O।

सेक्टर क्या है?

सेक्टर यानी अर्थव्यवस्था का वह हिस्सा जिसमें एक जैसा कारोबार करने वाली कंपनियाँ आती हैं। जैसे सारे बैंक, NBFC और बीमा कंपनियाँ “फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़” में, और दवा व अस्पताल वाली कंपनियाँ “हेल्थकेयर” में। एक सेक्टर की कंपनियों पर अक्सर एक जैसी ख़बरों का असर पड़ता है, जैसे ब्याज दर बदलने का असर बैंकों पर, या कच्चे तेल के भाव का असर ऊर्जा कंपनियों पर।

NSE का 4 स्तर वाला वर्गीकरण

शेयर मार्केट में कितने सेक्टर होते हैं: NSE वर्गीकरण में 12 मैक्रो इकोनॉमिक सेक्टर, 22 सेक्टर, 59 इंडस्ट्री, 197 बेसिक इंडस्ट्री
इन्फ़ोग्राफ़िक: NSE का वर्गीकरण: 4 स्तर (Storyshala)
  1. मैक्रो इकोनॉमिक सेक्टर (12): सबसे बड़ा स्तर, जैसे “कमोडिटीज़” या “फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़”।
  2. सेक्टर (22): उसके अंदर का समूह, जैसे कमोडिटीज़ के अंदर “मेटल्स एंड माइनिंग”।
  3. इंडस्ट्री (59): और बारीक, जैसे “फ़ेरस मेटल्स”।
  4. बेसिक इंडस्ट्री (197): कंपनी का असली मुख्य कारोबार, जैसे “आयरन एंड स्टील”।

नोट: मार्च 2022 में जब NSE और BSE ने यह साझा ढाँचा शुरू किया, तब इंडस्ट्री 58 और बेसिक इंडस्ट्री 200 थीं। बाद के बदलावों के बाद NSE की वेबसाइट पर अब 59 और 197 दिखती हैं, इसलिए पुराने लेखों में आपको अलग गिनती मिल सकती है।

12 मैक्रो सेक्टर और उनके 22 सेक्टर

NSE के 12 मैक्रो इकोनॉमिक सेक्टर: कमोडिटीज़, कंज़्यूमर डिस्क्रेशनरी, एनर्जी, FMCG, फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़, हेल्थकेयर, इंडस्ट्रियल्स, IT, सर्विसेज़, टेलीकॉम, यूटिलिटीज़, डाइवर्सिफ़ाइड
इन्फ़ोग्राफ़िक: NSE के 12 मैक्रो सेक्टर और उनके अंदर क्या है (Storyshala)
मैक्रो सेक्टरइसके अंदर के सेक्टरउदाहरण के तौर पर क्या आता है
कमोडिटीज़केमिकल्स; कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स; मेटल्स एंड माइनिंग; फ़ॉरेस्ट मटेरियल्सरसायन, सीमेंट, स्टील, एल्युमिनियम, काग़ज़
कंज़्यूमर डिस्क्रेशनरीऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट; कंज़्यूमर ड्यूरेबल्स; टेक्सटाइल्स; मीडिया, एंटरटेनमेंट और पब्लिकेशन; रियल्टी; कंज़्यूमर सर्विसेज़गाड़ियाँ, घरेलू उपकरण, कपड़े, मनोरंजन, रियल एस्टेट, होटल
एनर्जीऑयल, गैस और कंज़्यूमेबल फ़्यूल्सतेल रिफ़ाइनरी, गैस, कोयला
फ़ास्ट मूविंग कंज़्यूमर गुड्सFMCGसाबुन, बिस्कुट, खाने पीने का रोज़ का सामान
फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़बैंक, NBFC, बीमा, ब्रोकिंग
हेल्थकेयरहेल्थकेयरदवा कंपनियाँ, अस्पताल, जाँच केंद्र
इंडस्ट्रियल्सकंस्ट्रक्शन; कैपिटल गुड्सइंफ़्रा प्रोजेक्ट, मशीनें, रक्षा उपकरण
इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजीइन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजीIT सेवाएँ, सॉफ़्टवेयर
सर्विसेज़सर्विसेज़इंजीनियरिंग सेवाएँ, लॉजिस्टिक्स, कमर्शियल सेवाएँ
टेलीकम्युनिकेशनटेलीकम्युनिकेशनमोबाइल और इंटरनेट सेवाएँ
यूटिलिटीज़पावर; यूटिलिटीज़बिजली बनाना और बाँटना, पानी, गैस वितरण
डाइवर्सिफ़ाइडडाइवर्सिफ़ाइडकई अलग कारोबार वाली कंपनियाँ

सेक्टोरल इंडेक्स क्या हैं?

हर बड़े सेक्टर के प्रदर्शन को मापने के लिए NSE (Nifty Indices) और BSE सेक्टोरल इंडेक्स बनाते हैं। इनसे पता चलता है कि पूरा सेक्टर ऊपर जा रहा है या नीचे। कुछ प्रमुख उदाहरण:

सेक्टरNSE का इंडेक्स (उदाहरण)
बैंकNifty Bank, Nifty PSU Bank, Nifty Private Bank
फ़ाइनेंसNifty Financial Services
ITNifty IT
दवा और स्वास्थ्यNifty Pharma, Nifty Healthcare
ऑटोNifty Auto
FMCGNifty FMCG
मेटलNifty Metal
रियल एस्टेटNifty Realty
ऊर्जाNifty Energy, Nifty Oil & Gas
मीडियाNifty Media

इंडेक्स की ताज़ा सूची और उनमें शामिल कंपनियाँ niftyindices.com पर देखी जा सकती हैं।

साइक्लिकल और डिफ़ेंसिव सेक्टर

सारे सेक्टर अर्थव्यवस्था के उतार चढ़ाव पर एक जैसा व्यवहार नहीं करते:

साइक्लिकल और डिफ़ेंसिव सेक्टर में अंतर: मतलब, उदाहरण, तेज़ी और मंदी में व्यवहार
इन्फ़ोग्राफ़िक: साइक्लिकल या डिफ़ेंसिव: कौन कब चलता है? (Storyshala)

सेक्टर और सेगमेंट में अंतर

कई लोग पूछते हैं “शेयर मार्केट में कितने सेगमेंट होते हैं”। सेगमेंट और सेक्टर अलग चीज़ें हैं:

  • सेक्टर = कंपनियों का कारोबार के हिसाब से समूह (जैसे IT, बैंक)।
  • सेगमेंट = बाज़ार का वह हिस्सा जहाँ अलग तरह के सौदे होते हैं। मुख्य सेगमेंट हैं: इक्विटी (कैश) सेगमेंट जहाँ शेयर ख़रीदे बेचे जाते हैं, इक्विटी डेरिवेटिव्स (F&O), करेंसी डेरिवेटिव्स, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और डेट (बॉन्ड) सेगमेंट।

सेक्टर समझकर निवेश कैसे करें

  1. विविधता रखें: सारा पैसा एक सेक्टर में न डालें। किसी एक सेक्टर पर बुरी ख़बर आए तो पूरा पोर्टफ़ोलियो न गिरे।
  2. सेक्टर की बनावट समझें: बैंकों पर ब्याज दर का असर, IT पर डॉलर और विदेशी माँग का, FMCG पर गाँव और शहर की ख़रीदारी का।
  3. सिर्फ़ ट्रेंड देखकर न कूदें: जिस सेक्टर की चर्चा सबसे ज़्यादा हो, उसमें भाव अक्सर पहले ही चढ़ चुका होता है।
  4. सेक्टोरल फ़ंड में ज़्यादा जोखिम: किसी एक सेक्टर के म्यूचुअल फ़ंड या ETF में जोखिम डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड से ज़्यादा होता है।
  5. कंपनी भी जाँचें: अच्छे सेक्टर में भी कमज़ोर कंपनी हो सकती है; फ़ंडामेंटल एनालिसिस से जाँचें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शेयर मार्केट में कितने सेक्टर होते हैं?

NSE के वर्गीकरण के अनुसार 12 मैक्रो इकोनॉमिक सेक्टर और उनके अंदर 22 सेक्टर हैं। इन्हें आगे 59 इंडस्ट्री और 197 बेसिक इंडस्ट्री में बाँटा गया है।

सेक्टर क्या होता है?

सेक्टर एक जैसा कारोबार करने वाली कंपनियों का समूह है, जैसे बैंकिंग, IT, फ़ार्मा, ऑटो या FMCG।

किसी कंपनी का सेक्टर कैसे तय होता है?

NSE कंपनी को उस बेसिक इंडस्ट्री में रखता है जिससे उसकी कुल कमाई का 50% से ज़्यादा हिस्सा आता है।

भारत के 12 मैक्रो सेक्टर कौन से हैं?

कमोडिटीज़, कंज़्यूमर डिस्क्रेशनरी, एनर्जी, FMCG, फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़, हेल्थकेयर, इंडस्ट्रियल्स, इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, सर्विसेज़, टेलीकम्युनिकेशन, यूटिलिटीज़ और डाइवर्सिफ़ाइड।

शेयर मार्केट में कितने सेगमेंट होते हैं?

मुख्य सेगमेंट हैं: इक्विटी (कैश), इक्विटी डेरिवेटिव्स (F&O), करेंसी डेरिवेटिव्स, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और डेट सेगमेंट। सेगमेंट और सेक्टर अलग चीज़ें हैं।

डिफ़ेंसिव सेक्टर कौन से हैं?

आम तौर पर FMCG, दवा (हेल्थकेयर) और बिजली जैसे यूटिलिटी सेक्टर डिफ़ेंसिव माने जाते हैं, क्योंकि मंदी में भी इनकी माँग बनी रहती है।

स्रोत (15 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए)

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ज़रूरी सूचना: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। सेक्टर और इंडेक्स की सूची समय के साथ बदलती है, इसलिए ताज़ा जानकारी NSE और BSE की वेबसाइट पर देखें। शेयर बाज़ार में निवेश जोखिम के अधीन है।

नोट: इस लेख में Amazon के affiliate लिंक हैं। इनसे ख़रीदारी करने पर Storyshala को छोटा कमीशन मिलता है, आपके लिए क़ीमत नहीं बदलती।

S.K. Choudhary
लेखक: S.K. ChoudharyMBA (Finance) · 18 साल का बैंक, टैक्स और हिसाब किताब का अनुभव। इस लेख के नियम और आँकड़े सरकारी स्रोतों से जाँचे गए हैं। ग़लती दिखे तो बताएँ: skchoudharyac@gmail.com · लेखक के बारे में
Disclaimer: यह लेख सिर्फ़ जानकारी और समझ बढ़ाने के लिए है; यह निवेश, टैक्स, लोन या क़ानूनी सलाह नहीं है। ब्याज दरें, शुल्क और नियम समय के साथ बदलते हैं, इसलिए कोई भी फ़ैसला लेने से पहले बैंक, SEBI पंजीकृत सलाहकार या CA से अपनी स्थिति के हिसाब से पुष्टि करें। Storyshala किसी बैंक, कार्ड, बीमा या निवेश उत्पाद की सिफ़ारिश नहीं करता। शेयर बाज़ार और म्यूचुअल फ़ंड में निवेश बाज़ार के जोखिम के अधीन है। लेख में दिए कुछ Amazon लिंक एफ़िलिएट हो सकते हैं; उनसे ख़रीदने पर आपको कोई अतिरिक्त ख़र्च नहीं होता।
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