शेयर मार्केट में कितने सेक्टर होते हैं? NSE के आधिकारिक वर्गीकरण (Industry Classification) के अनुसार भारत में लिस्टेड कंपनियों को 12 मैक्रो इकोनॉमिक सेक्टर और उनके अंदर 22 सेक्टर में बाँटा जाता है। इससे आगे इन्हें 59 इंडस्ट्री और 197 बेसिक इंडस्ट्री में बाँटा गया है। यानी सवाल का सीधा जवाब: मोटे तौर पर 12, और थोड़ा विस्तार से 22 सेक्टर।
छोटा जवाब: सेक्टर का मतलब है एक जैसे कारोबार करने वाली कंपनियों का समूह, जैसे बैंक और फ़ाइनेंस, IT, दवा (हेल्थकेयर), FMCG, ऑटो, ऊर्जा। हर कंपनी को उसी सेक्टर में रखा जाता है जहाँ से उसकी आधी से ज़्यादा कमाई आती है। सेक्टर समझने से आप अपने निवेश में विविधता ला सकते हैं और एक ही तरह के जोखिम में सारा पैसा फँसने से बचते हैं।
मुख्य बातें
- NSE का ढाँचा: 12 मैक्रो सेक्टर → 22 सेक्टर → 59 इंडस्ट्री → 197 बेसिक इंडस्ट्री।
- 2022 से NSE और BSE एक साझा वर्गीकरण ढाँचा इस्तेमाल करते हैं।
- कंपनी का सेक्टर उसकी कमाई के सबसे बड़े हिस्से (50% से ज़्यादा) से तय होता है।
- हर सेक्टर का अलग सेक्टोरल इंडेक्स होता है, जैसे Nifty Bank, Nifty IT, Nifty Pharma।
- सेक्टर और सेगमेंट अलग हैं: सेगमेंट का मतलब है बाज़ार का हिस्सा, जैसे कैश या F&O।
विषय सूची
सेक्टर क्या है?
सेक्टर यानी अर्थव्यवस्था का वह हिस्सा जिसमें एक जैसा कारोबार करने वाली कंपनियाँ आती हैं। जैसे सारे बैंक, NBFC और बीमा कंपनियाँ “फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़” में, और दवा व अस्पताल वाली कंपनियाँ “हेल्थकेयर” में। एक सेक्टर की कंपनियों पर अक्सर एक जैसी ख़बरों का असर पड़ता है, जैसे ब्याज दर बदलने का असर बैंकों पर, या कच्चे तेल के भाव का असर ऊर्जा कंपनियों पर।
NSE का 4 स्तर वाला वर्गीकरण

- मैक्रो इकोनॉमिक सेक्टर (12): सबसे बड़ा स्तर, जैसे “कमोडिटीज़” या “फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़”।
- सेक्टर (22): उसके अंदर का समूह, जैसे कमोडिटीज़ के अंदर “मेटल्स एंड माइनिंग”।
- इंडस्ट्री (59): और बारीक, जैसे “फ़ेरस मेटल्स”।
- बेसिक इंडस्ट्री (197): कंपनी का असली मुख्य कारोबार, जैसे “आयरन एंड स्टील”।
नोट: मार्च 2022 में जब NSE और BSE ने यह साझा ढाँचा शुरू किया, तब इंडस्ट्री 58 और बेसिक इंडस्ट्री 200 थीं। बाद के बदलावों के बाद NSE की वेबसाइट पर अब 59 और 197 दिखती हैं, इसलिए पुराने लेखों में आपको अलग गिनती मिल सकती है।
12 मैक्रो सेक्टर और उनके 22 सेक्टर

| मैक्रो सेक्टर | इसके अंदर के सेक्टर | उदाहरण के तौर पर क्या आता है |
|---|---|---|
| कमोडिटीज़ | केमिकल्स; कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स; मेटल्स एंड माइनिंग; फ़ॉरेस्ट मटेरियल्स | रसायन, सीमेंट, स्टील, एल्युमिनियम, काग़ज़ |
| कंज़्यूमर डिस्क्रेशनरी | ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट; कंज़्यूमर ड्यूरेबल्स; टेक्सटाइल्स; मीडिया, एंटरटेनमेंट और पब्लिकेशन; रियल्टी; कंज़्यूमर सर्विसेज़ | गाड़ियाँ, घरेलू उपकरण, कपड़े, मनोरंजन, रियल एस्टेट, होटल |
| एनर्जी | ऑयल, गैस और कंज़्यूमेबल फ़्यूल्स | तेल रिफ़ाइनरी, गैस, कोयला |
| फ़ास्ट मूविंग कंज़्यूमर गुड्स | FMCG | साबुन, बिस्कुट, खाने पीने का रोज़ का सामान |
| फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ | फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ | बैंक, NBFC, बीमा, ब्रोकिंग |
| हेल्थकेयर | हेल्थकेयर | दवा कंपनियाँ, अस्पताल, जाँच केंद्र |
| इंडस्ट्रियल्स | कंस्ट्रक्शन; कैपिटल गुड्स | इंफ़्रा प्रोजेक्ट, मशीनें, रक्षा उपकरण |
| इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी | इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी | IT सेवाएँ, सॉफ़्टवेयर |
| सर्विसेज़ | सर्विसेज़ | इंजीनियरिंग सेवाएँ, लॉजिस्टिक्स, कमर्शियल सेवाएँ |
| टेलीकम्युनिकेशन | टेलीकम्युनिकेशन | मोबाइल और इंटरनेट सेवाएँ |
| यूटिलिटीज़ | पावर; यूटिलिटीज़ | बिजली बनाना और बाँटना, पानी, गैस वितरण |
| डाइवर्सिफ़ाइड | डाइवर्सिफ़ाइड | कई अलग कारोबार वाली कंपनियाँ |
सेक्टोरल इंडेक्स क्या हैं?
हर बड़े सेक्टर के प्रदर्शन को मापने के लिए NSE (Nifty Indices) और BSE सेक्टोरल इंडेक्स बनाते हैं। इनसे पता चलता है कि पूरा सेक्टर ऊपर जा रहा है या नीचे। कुछ प्रमुख उदाहरण:
| सेक्टर | NSE का इंडेक्स (उदाहरण) |
|---|---|
| बैंक | Nifty Bank, Nifty PSU Bank, Nifty Private Bank |
| फ़ाइनेंस | Nifty Financial Services |
| IT | Nifty IT |
| दवा और स्वास्थ्य | Nifty Pharma, Nifty Healthcare |
| ऑटो | Nifty Auto |
| FMCG | Nifty FMCG |
| मेटल | Nifty Metal |
| रियल एस्टेट | Nifty Realty |
| ऊर्जा | Nifty Energy, Nifty Oil & Gas |
| मीडिया | Nifty Media |
इंडेक्स की ताज़ा सूची और उनमें शामिल कंपनियाँ niftyindices.com पर देखी जा सकती हैं।
साइक्लिकल और डिफ़ेंसिव सेक्टर
सारे सेक्टर अर्थव्यवस्था के उतार चढ़ाव पर एक जैसा व्यवहार नहीं करते:

सेक्टर और सेगमेंट में अंतर
कई लोग पूछते हैं “शेयर मार्केट में कितने सेगमेंट होते हैं”। सेगमेंट और सेक्टर अलग चीज़ें हैं:
- सेक्टर = कंपनियों का कारोबार के हिसाब से समूह (जैसे IT, बैंक)।
- सेगमेंट = बाज़ार का वह हिस्सा जहाँ अलग तरह के सौदे होते हैं। मुख्य सेगमेंट हैं: इक्विटी (कैश) सेगमेंट जहाँ शेयर ख़रीदे बेचे जाते हैं, इक्विटी डेरिवेटिव्स (F&O), करेंसी डेरिवेटिव्स, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और डेट (बॉन्ड) सेगमेंट।
सेक्टर समझकर निवेश कैसे करें
- विविधता रखें: सारा पैसा एक सेक्टर में न डालें। किसी एक सेक्टर पर बुरी ख़बर आए तो पूरा पोर्टफ़ोलियो न गिरे।
- सेक्टर की बनावट समझें: बैंकों पर ब्याज दर का असर, IT पर डॉलर और विदेशी माँग का, FMCG पर गाँव और शहर की ख़रीदारी का।
- सिर्फ़ ट्रेंड देखकर न कूदें: जिस सेक्टर की चर्चा सबसे ज़्यादा हो, उसमें भाव अक्सर पहले ही चढ़ चुका होता है।
- सेक्टोरल फ़ंड में ज़्यादा जोखिम: किसी एक सेक्टर के म्यूचुअल फ़ंड या ETF में जोखिम डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड से ज़्यादा होता है।
- कंपनी भी जाँचें: अच्छे सेक्टर में भी कमज़ोर कंपनी हो सकती है; फ़ंडामेंटल एनालिसिस से जाँचें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शेयर मार्केट में कितने सेक्टर होते हैं?
NSE के वर्गीकरण के अनुसार 12 मैक्रो इकोनॉमिक सेक्टर और उनके अंदर 22 सेक्टर हैं। इन्हें आगे 59 इंडस्ट्री और 197 बेसिक इंडस्ट्री में बाँटा गया है।
सेक्टर क्या होता है?
सेक्टर एक जैसा कारोबार करने वाली कंपनियों का समूह है, जैसे बैंकिंग, IT, फ़ार्मा, ऑटो या FMCG।
किसी कंपनी का सेक्टर कैसे तय होता है?
NSE कंपनी को उस बेसिक इंडस्ट्री में रखता है जिससे उसकी कुल कमाई का 50% से ज़्यादा हिस्सा आता है।
भारत के 12 मैक्रो सेक्टर कौन से हैं?
कमोडिटीज़, कंज़्यूमर डिस्क्रेशनरी, एनर्जी, FMCG, फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़, हेल्थकेयर, इंडस्ट्रियल्स, इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, सर्विसेज़, टेलीकम्युनिकेशन, यूटिलिटीज़ और डाइवर्सिफ़ाइड।
शेयर मार्केट में कितने सेगमेंट होते हैं?
मुख्य सेगमेंट हैं: इक्विटी (कैश), इक्विटी डेरिवेटिव्स (F&O), करेंसी डेरिवेटिव्स, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और डेट सेगमेंट। सेगमेंट और सेक्टर अलग चीज़ें हैं।
डिफ़ेंसिव सेक्टर कौन से हैं?
आम तौर पर FMCG, दवा (हेल्थकेयर) और बिजली जैसे यूटिलिटी सेक्टर डिफ़ेंसिव माने जाते हैं, क्योंकि मंदी में भी इनकी माँग बनी रहती है।
स्रोत (15 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए)
- NSE Indices: Industry Classification
- NSE Indices: Industry Classification Structure (मार्च 2022, PDF)
- NSE और BSE का साझा वर्गीकरण, प्रेस रिलीज़ (मार्च 2022)
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ज़रूरी सूचना: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। सेक्टर और इंडेक्स की सूची समय के साथ बदलती है, इसलिए ताज़ा जानकारी NSE और BSE की वेबसाइट पर देखें। शेयर बाज़ार में निवेश जोखिम के अधीन है।
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