Top 50 Chanakya Niti in Hindi – आचार्य चाणक्य के ५० अनमोल वचन

Top 50 Chanakya Niti in Hindi – आचार्य चाणक्य के ५० अनमोल वचन

आचार्य चाणक्य ऐसे महान विभूति थे, जिन्होंने अपनी विद्वत्ता पांडित्य और क्षमताओं के बलबूते पर भारतीय इतिहास की दिशा को बदल दिया। आचार्य चाणक्य कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में भी विश्वविख्यात हुए। वे प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने भारतीय राजनीति में कूटनीतिक जोड़-तोड़, दांव-पेंचों व चतुराई भरी चालों का सफलतापूर्वक प्रयोग किया और दूसरों के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत किया। वर्षों पूर्व बनाये गए इन सिद्धांतों एवं नीतियों को आज भी प्रासंगिक माना जाता है। अपने जीवन के खट्टे कड़वे अनुभवों को उन्होंने चाणक्य नीति संग्रह में समाहित किया। ऐसे ही सर्वश्रेष्ठ अनमोल वचनों को इस लेख में संगृहीत किया गया है। आशा है ये आपके जीवन को एक नयी दिशा देने में सहायक होंगे।

Top 50 Chanakya Niti in Hindi
Top 50 Chanakya Niti in Hindi

तो चलिये शुरू करते है पहली नीति से

“जिस व्यक्ति के पास विद्या नहीं है, तप नहीं है, दान वीरता नहीं है, शील, गुण और धर्म नहीं है वह इस धरती पर भार है। क्योंकि वह हिरण की तरह हमेशा घास चरने में ही लगा रहता है। वह निरर्थक जीवन जीता है और भोजन करने और भौतिक सुख में लिप्त जानवर की भांति ही मर जाता है।” ~ Chanakya Niti


“जो मनुष्य जन्म लेकर भी धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों में से किसी एक को भी प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील नहीं रहता और ना ही किसी एक की प्राप्ति के लिए कार्य करता है या प्रयास करता है, उस व्यक्ति का जन्म लेना अकारण ही साबित होता है। ऐसा मनुष्य मानव शरीर लेकर भी केवल मरने के लिए ही पैदा होता है।” ~ Chanakya Niti


“जब तक मनुष्य शरीर स्वस्थ है, उसे किसी प्रकार का रोग नहीं है और मृत्यु उसके नज़दीक नहीं है, तब तक वह अपने हित और पुण्य आदि कर्म करके अपना यह जीवन संवार सकता है क्योंकि प्राणों का अंत हो जाने पर वह कुछ भी करने में असमर्थ रहेगा। इसलिए मनुष्य को उस समय का समुचित उपयोग करते हुए धर्म कार्य अवश्य करने चाहिए।”~ Chanakya Niti


“यदि इस पृथ्वी पर कुछ स्थाई है तो वह है सत्य। सच के अलावा बाक़ी सब कुछ मिथ्या है। सारी पृथ्वी, सारी सृष्टि, केवल और केवल सत्य पर ही आधारित है। मनुष्य को सदा सच का ही सहारा लेना चाहिए। वह केवल सच के बल पर ही जीवन के हर क्षेत्र में विजय पा सकता है। झूठ का सहारा लेकर वह कभी भी आगे बढ़ नहीं सकता।” ~ Chanakya Niti


“मनुष्य के सुनने पर बहुत कुछ निर्भर करता है। जैसी बातें वह सुनता है, उसके मन पर वैसा ही प्रभाव होता है। श्रवण शक्ति ही मनुष्य के नजरिए को बदलती है, सुनकर ही धर्म का ज्ञान प्राप्त किया जाता है, सुनकर ही वह मोक्ष को प्राप्त करने की प्रेरणा पाता है अर्थात सब कुछ मनुष्य के सुनने पर निर्भर करता है।” ~ Chanakya Niti


“मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है, क्योंकि उसके कर्मों के द्वारा ही उसकी नियति निर्मित हो जाती है। कर्मों के कारण ही वह मनुष्य योनि में पैदा होता है या संसार में भटकता रहता है। कर्मों के द्वारा ही वह मुक्त भी हो सकता है इसलिए मनुष्य को अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए।” ~ Chanakya Niti


“आत्मा को शरीर से अलग करके नहीं देखा जा सकता, क्योंकि शरीर में ही आत्मा का वास होता है। आत्मा को केवल चिंतन के द्वारा जाना जा सकता है, समझा जा सकता है। जिस प्रकार फूल में ख़ुशबू, तिलों में तेल, लकड़ी में अग्नि, दूध में घी और गन्ने में गुड़ समाया रहता है, वह बाहर से दिखाई नहीं देता। उसी प्रकार शरीर में आत्मा वास करती है लेकिन दिखाई नहीं देती। इसे केवल चिंतन के द्वारा ही समझा जा सकता है।” ~ Chanakya Niti


“अपने मन की बात को कभी भी किसी से साझा नहीं करना चाहिए, हमेशा अपने मन की बात अपने ही मन में रखनी चाहिए और बाद में गुप्त ढंग से उस कार्य को अंजाम देना चाहिए। इसी से व्यक्ति को सफलता प्राप्त हो सकती है। गुप्त विचार को लोगों के साथ साझा करने पर आप कभी भी योजना किए गए कार्य में सफलता नहीं पा सकते।” ~ Chanakya Niti


“अपनी पुत्री का विवाह हमेशा अपने से ऊंचे कुल में करना चाहिए। पुत्र को हर अवस्था में उच्च शिक्षा दिलवानी चाहिए। शत्रु को हमेशा उलझन में फंसा कर रखना चाहिए। मित्रो को धार्मिक कार्यों की तरफ़ उन्मुख करना चाहिए। योग्य व्यक्ति ये सब कार्य करके अपना जीवन सुखी बनाते हैं।” ~ Chanakya Niti


“मूर्ख व्यक्ति से हमेशा दूर रहना चाहिए। क्योंकि वह दो पैरों वाले जानवर के समान हैं। उसके साथ व्यवहार से हमेशा आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। वह कभी भी आपको किसी मुश्किल में डाल सकता है कभी भी कुछ भी बोल सकता है। इसलिए मूर्खों को संग कभी भी नहीं करना चाहिए।” ~ Chanakya Niti


“अंधे कई प्रकार के होते हैं। कुछ लोग जन्म से अंधे होते हैं और आंखों से देखने में असमर्थ होते हैं। कुछ अंधे ऐसे भी होते हैं जिनके आंखें तो होती हैं, लेकिन उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता जैसे, कामवासना में अंधे हो गए व्यक्ति को कुछ नहीं सूझता। लालची व्यक्ति को लोभ में पड़कर कोई दोष नहीं दिखाई देता। इस कारण ऐसे लोगों को भी अंधे की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि कामांध और मदांध व्यक्ति आँख रहते हुए भी अंधे ही हैं।” – Chanakya Neeti


“लोगों की प्रवृत्ति को ध्यान में रखकर उन्हें वश में किया जा सकता है। लालची व्यक्ति को धन से वश में किया जा सकता है। अहंकारी व्यक्ति को हाथ जोड़कर वश में किया जा सकता है। मूर्ख व्यक्ति को मनमानी करने की छूट देकर और विद्वान को सच बोलकर वश में किया जा सकता है यानी मनुष्य की प्रवृत्ति के अनुसार व्यवहार करके उन्हें अपने अनुकूल बनाया जा सकता है।” – Chanakya Neeti


“अपनी शक्ति के जरिए, अपने सामर्थ्य के अनुसार मनुष्य कोई भी काम कर सकता है और उसके लिए कोई भी काम दुर्लभ नहीं है। व्यापारी के लिए कोई भी देश दूर नहीं होता, वह कहीं भी जाकर व्यापार कर सकता है। विद्वान के लिए कोई भी देश परदेश नहीं होता और जो मीठा बोलने वाले होते हैं, उनके लिए कोई पराया नहीं होता वे मीठा बोल कर सब को अपने वश में कर ही लेते हैं।” – Chanakya Neeti


“जिस प्रकार मछली केवल देखकर, कछुवी ध्यान लगाकर और पक्षी केवल स्पर्श करके ही अपने बच्चों को पालते हैं, उसी प्रकार सज्जनों की संगति से ही सब लोग सुख पाते हैं और विकास की ओर अग्रसर होते हैं।” – Chanakya Neeti

“विद्या को कामधेनु गाय के समान गुणवान माना गया है। यह अनायास फल देने वाली होती है। यह विदेश में एक भाई के समान सहारा देती है। यह एक प्रकार का ऐसा गुप्त धन है जिसका सदैव संचय करते रहना चाहिए। विद्या ही सर्वश्रेष्ठ आभूषण है, मित्र है, सखा, है बंधु है।” – Chanakya Neeti


“नीचे कुल की सेवा करना, गंदा खराब भोजन करना, क्लेश करने वाली स्त्री, बेवकूफ़ बेटा, विधवा स्त्री और गंदा पड़ोस, यह सब मनुष्य के लिए सदैव हानिकारक होते हैं और हमेशा उसे दुखी और मानसिक रूप से चिंतित रखते हैं। इन सब के कारण मनुष्य दारुण दुख पाता है।” – Chanakya Neeti


“संसार के दुखों से मनुष्य को तीन ही स्थानों पर कुछ आराम महसूस होता है वह हैं, अपनी संतान के पास, अपनी पत्नी के पास और सज्जन पुरुषों के साथ।: – Chanakya Neeti


“संतान के बिना घर सूना होता है। भाइयों के बिना मनुष्य की राह सूनी होती है। मूर्ख का दिलो-दिमाग़ सूना होता है और निर्धन का तो सब कुछ सूना ही होता है अर्थात इस धरती पर निर्धन होना सबसे बड़ा अभिशाप है।” – Chanakya Neeti


“जिस धर्म में दया ना हो, ऐसे धर्म का त्याग उचित है। जो गुरु ज्ञानवान ना हो, ऐसे गुरु का त्याग उचित है। क्रूर, लड़ाकू और क्लेश करने वाली पत्नी का त्याग उचित है। स्नेह ना करने वाले भाइयों का त्याग उचित है, क्योंकि इन सब से दूर ना रहने पर व्यक्ति का जीवन नर्क के समान होता है।” – Chanakya Neeti


“सोने की परीक्षा काटकर, घिसकर, पीटकर और तपा कर की जाती है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि वह खरा है या खोटा है। उसी प्रकार शील, त्याग, गुण और आचार आदि से मनुष्य को परखा जाता है कि वास्तव में वह क्या है?” ~ Chankya Niti Hindi


“विपरीत स्वभाव वाले दो व्यक्तियों में कभी भी आपस में दोस्ती नहीं हो सकती। यदि ऐसा होता है तो यह मात्र दिखावा है। क्योंकि सांप की नेवले से, बकरी की बाघ से, हाथी की चींटी से और शेरनी की कुत्ते से, दोस्ती कभी भी नहीं हो सकती। उसी प्रकार सज्जन और दुर्जन में भी दोस्ती होना असंभव है। यदि ऐसा होता है या आपको दिखाई देता है, तो यह केवल दिखावा भर है।” ~ Chankya Niti Hindi


“संगत का असर अवश्य होता है। चाहे वह अच्छा हो या बुरा हो। उसी प्रकार जैसे आपके दोस्त हैं वैसे ही आपका भी व्यवहार बनता जाता है। समय पाकर आपके व्यवहार में भी वे सभी गुण या अवगुण आ जाते हैं जो आपके दोस्तों में हैं। इसलिए सदैव सोच समझकर दोस्त बनाने चाहिए।” ~ Chankya Niti Hindi


“यदि मनुष्य को संसार सागर से पार जाना है और मुक्ति चाहिए, तो उसे हर प्रकार के व्यसनों को छोड़ देना चाहिए और काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ इत्यादि सभी बुराइयों का त्याग कर देना चाहिए। ईश्वर की प्राप्ति का एक ही रास्ता है, जो पवित्रता और सत्य का है। ईश्वर को पाने के लिए मनुष्य को दया, सरलता, पवित्रता, सच्चाई और क्षमा का रास्ता अपनाना चाहिए। इस रास्ते पर चलने से ही मुक्ति प्राप्त हो सकती है।” ~ Chankya Niti Hindi


“मनुष्य को जब परमात्मा का ज्ञान हो जाता है, उसके मन से अभिमान नष्ट हो जाता है, तो वह मोह माया से परे हो जाता है। ऐसी स्थिति में वह जहाँ कहीं भी बैठे, वहीं समाधिस्थ हो सकता है। अर्थात ऐसा मनुष्य, जो परमात्मा का ज्ञान प्राप्त कर लेता है, वह किसी भी अवस्था में जीवन यापन कर सकता है।” ~ Chankya Niti Hindi


“अपनी इच्छाओं के अनुरूप, किसी को भी सुख नहीं मिलता। संसार में सब कुछ विधि के विधान के अधीन है। सर्वत्र कामदेव का साम्राज्य है इसलिए मनुष्य को जो मिले, उसी में संतोष कर स्वयं को सुखी मानना चाहिए।” ~ Chankya Niti Hindi


“जीवन में पांच व्यक्ति पिता के समान माने गए हैं। यज्ञोपवीत संस्कार कराने वाला, विद्या देने वाला, संकट में जान की रक्षा करने वाला, जन्मदाता और अन्नदाता। इस संसार में इन पांच व्यक्तियों का हमेशा ऋणी रहना चाहिए।” ~ Chankya Niti Hindi


“मनुष्य को अपने पांच ज्ञानेंद्रियाँ आंख, कान, नाक, जीभ, त्वचा और 5 कर्मेंद्रियों हाथ, पैर, मुख, लिंग, गुदा इनको वश में रखना चाहिए। रूप, रस, गन्ध और स्पर्श पर जिसने विजय प्राप्त कर ली वह अपने इसी कार्य के द्वारा संसार को वश में रख सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि मनुष्य को काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ से सदैव दूर रहना चाहिए और संयमित होकर जीवन व्यतीत करना चाहिए।” ~ Chankya Niti Hindi


“ऐसा व्यक्ति, जो सदैव मैले कुचैले वस्त्र धारण करता है, दांत साफ़ नहीं रखता, नित्य स्नान नहीं करता, बहुत अधिक भोजन करता है, कटु वचन बोलता है और सूर्योदय और सूर्यास्त के समय तक निद्रा मग्न रहता है, ऐसे व्यक्ति का साथ लक्ष्मी छोड़ देती है।” ~ Chankya Niti Hindi


“मनुष्य जीवन सीमित है लेकिन इसमें बहुत सारी समस्याएँ हैं। बहुत-सी बाधाएँ हैं, परंतु इसके बावजूद भी विद्वान पुरुष सार ग्रहण करते हैं। जिस प्रकार, शास्त्र अनगिनत हैं और विद्या प्राप्त करने की कोई सीमा नहीं है उसी प्रकार केवल सार ग्रहण करना ही विद्वानों का कार्य है! बिलकुल वैसे ही, जैसे हंस जल से केवल दूध ग्रहण कर लेते हैं।” ~ Chankya Niti Hindi


Chanakya Niti full in Hindi

“जिस देश में आदर सत्कार ना हो, आजीविका का कोई साधन ना हो, भाई बंधु या मित्र ना हों। विद्या पाने का कोई साधन ना हो, ऐसे स्थान पर कभी भी नहीं रहना चाहिए। ऐसे स्थान पर रहने वाला व्यक्ति हमेशा दुःख प्राप्त करता है।” ~ Chanakya Thoughts


“ऐसे लोगों से कभी भी मित्रता नहीं करनी चाहिए, जिनमें आजीविका, भय, लज्जा, चतुराई और त्याग ये पांच प्रकार के गुण न हों, ऐसे लोगों से मित्रता नहीं करनी चाहिए। क्योंकि ऐसी मित्रता खतरनाक साबित हो सकती है।” ~ Chanakya Thoughts


“यदि विष में भी अमृत है तो ऐसे विष का सेवन कर लेना चाहिए। यदि अपवित्र स्थान पर भी स्वर्ण गिरा हुआ है तो उसे उठा लेना चाहिए। नीच व्यक्ति के पास यदि विद्या है, तो उसे ग्रहण कर लेना चाहिए। अगर दरिद्र परिवार से भी अपने कुल गोत्र से सुशील लड़की है तो उससे विवाह कर लेना चाहिए।” ~ Chanakya Thoughts


“कोयल देखने में सुंदर नहीं होती परंतु उसकी वाणी सबको मधुर लगती है और यही उसकी खूबसूरती है। उसी प्रकार स्त्री की सर्वोच्च सुंदरता उसका पतिव्रत धर्म है। पुरुष का सौंदर्य उसकी विद्या, उसके गुण और उसका क्षमा करने का स्वभाव होता है। कहने का अर्थ यह है कि किसी व्यक्ति के गुण ही शोभायमान होते हैं और यही उसका सबसे बड़ा सौंदर्य है।” ~ Chanakya Thoughts


“अपने परिवार की रक्षा के लिए स्वयं का बलिदान कर देना चाहिए, गाँव की रक्षा करने के लिए अपने परिवार का भी बलिदान दे देना चाहिए और देश की रक्षा करने के लिए पूरे गाँव को भी बलिदान करने में संकोच नहीं करना चाहिए।” ~ Chanakya Thoughts


“अत्यंत सुंदर होने के कारण ही सीता का हरण हुआ था। अत्यंत गर्व के कारण ही रावण मारा गया था। अत्यधिक दान करने के कारण ही बलि को बंधन में रहना पड़ा था। इसलिए यह अटल तथ्य है कि अति हमेशा वर्जित है यानी हर किसी चीज की अति नुकसानदेह होती है।” ~ Chanakya Thoughts


“तीर्थ स्थानों पर जाकर, स्नान करते वक्त, पापों का प्रायश्चित करके मन को शुद्ध किया जा सकता है। लेकिन यदि मन में पाप ही पाप भरे हुए हैं, तो सैकड़ों तीर्थ स्थानों पर जाकर स्नान करके प्रायश्चित करने पर भी मनुष्य का मन पवित्र नहीं हो सकता। बिलकुल वैसे ही जैसे कि शराब का पात्र जला दिए जाने पर भी शुद्ध नहीं माना जा सकता।” ~ Chanakya Thoughts


“ऐसे मनुष्य का जीवन व्यर्थ है, जो भजन कीर्तन में लिप्त नहीं होता। श्री हरि की आराधना नहीं करता, राधा के प्रेम का गुणगान नहीं करता और पवित्र गीता को न ही पढ़ता है, ना सुनता है।” ~ Chanakya Thoughts


“हमेशा धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए क्योंकि धर्म ही सबसे बड़ी सम्पदा है, जो परलोक में भी साथ चलती है। शरीर नाशवान है। उसका एक ना एक दिन अंत होना ही है। इसलिए मनुष्य को यह प्रयत्न करना चाहिए कि वह आगे बढ़कर धार्मिक कार्यों में लिप्त हो।” ~ Chanakya Thoughts


“सज्जन के गुण किसी भी दशा में समाप्त नहीं होते। जिस प्रकार सुगंधित चंदन वृक्ष, कट जाने पर भी अपनी सुगंध नहीं छोड़ते। हाथी बूढ़ा होने पर भी चंचल रहता है। गन्ने को कोल्हू में पेरे जाने पर भी वह मिठास नहीं छोड़ते। सोना आग में तपने के बावजूद भी अपनी चमक नहीं खोता। बिल्कुल उसी प्रकार सज्जन पुरुष (खानदानी व्यक्ति) किसी भी दशा में अपने गुणों का त्याग नहीं करते।” ~ Chanakya Thoughts


“सांप के दांत में विष होता है। मक्खी के सिर में और बिच्छू की पूंछ में विष भरा रहता है परंतु कुटिल और दुष्ट व्यक्ति के सारे शरीर में ही विष व्याप्त रहता है इसलिए दुष्ट व्यक्ति से सदैव बचना चाहिए क्योंकि यह सर्वाधिक विषैला होता है।” ~ Chanakya Thoughts


“मनुष्य की इन 4 चीजों की भूख़ कभी नहीं मिट सकती। धन संपदा, जीवन, स्त्री और भोजन। इनका अधिक से अधिक भोग मनुष्य करना चाहता है, उसको जितना भी मिले, वह कम ही लगता है!” ~ Chanakya Thoughts


“अपमान से भरी ज़िन्दगी से तो मृत्यु ही बेहतर है क्योंकि मरने की पीड़ा तो क्षणभर की होती है लेकिन अपमान की पीड़ा तो जीवन भर पल-पल सताती रहती है।” ~ Chanakya ki Niti


“यह मनुष्य शरीर बेहद दुर्लभ है, इसलिए जब तक शरीर स्वस्थ है, मृत्यु दूर है, तब तक अपनी भलाई और पुण्य के कार्य कर लेना चाहिए अन्यथा प्राणों के अंत का समय आने पर कुछ भी नहीं किया जा सकेगा इसलिए समय रहते सब कुछ कर ही लेना चाहिए।” ~ Chanakya ki Niti


“मनुष्य के लिए बेहद आवश्यक है कि वह बराबर प्रश्नों का उत्तर सोचता रहे मेरा समय कैसा है? मेरा मित्र कौन है? मेरा देश कौन-सा है? मैं क्या हूँ? मेरा हानि लाभ क्या है? मुझ में क्या शक्ति है? इन सवालों के बार-बार जवाब हमें लेकर सबक लेते रहना चाहिए।” ~ Chanakya ki Niti


“भय से उस समय तक डरना चाहिए जब तक कि उससे सामना ना हो। लेकिन यदि भय सामने आ जाए तो निडर होकर उसका सामना करना चाहिए। यही पुरुष की सार्थकता है।” ~ Chanakya ki Niti


“कामवासना के समान कोई दूसरा रोग नहीं है। अज्ञानता के समान कोई शत्रु नहीं है। क्रोध से बढ़कर कोई दूसरी अग्नि नहीं है। ज्ञान से बढ़कर कोई दूसरा गुरु नहीं है यह चारों सत्य अटल हैं।” ~ Chanakya ki Niti


“मित्र चार प्रकार के होते हैं। परदेस में विद्या मित्र होती है। घर में स्त्री मित्र होती है। रोगियों के लिए औषधि मित्र होती है और मर गए व्यक्ति के लिए उसका धर्म और लिया दिया मित्र का कार्य करता है।” ~ Chanakya ki Niti


“सर्वोत्तम पत्नी के क्या लक्षण है? ऐसी स्त्री, जो पवित्र रहती है, जो चतुराई से काम लेती है, पति के समक्ष प्यार प्रकट करती है, सच बोलती है और रति क्रीड़ा में दक्ष है। ऐसी स्त्री को अपनाना सर्वोत्तम है। ऐसी स्त्री ही पतिव्रता कहलाती है।” ~ Chanakya ki Niti

Chanakya Niti in hindi
Chanakya Niti in hindi

“श्रेष्ठ कार्य करते हुए एक पल का भी जीवन सार्थक माना जाता है जबकि आचरण के विरुद्ध किए गए 100 साल का जीवन भी बेकार है।” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“जो मनुष्य परोपकार में संलग्न रहता है, उसके सभी कष्ट स्वतः ही मिट जाते हैं। उसे जीवन में हर क़दम पर सफलता व सुख संपत्ति प्राप्त होती है।” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“केतकी में सांप निवास करते हैं। कुमुदनी कीचड़ में पैदा होती है। गुलाब के फूल में कांटे होते हैं फिर भी ये अपनी सुगंध के ही एक गुण के कारण (इतने अधिक दुर्गुण होने के बावजूद) सबके प्रिय हैं। इसका अर्थ यह है कि मनुष्य का एक ही गुण उसके सभी दोषों को दूर कर देता है।” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“बिना बुलावे के किसी के घर जाना, बिना पूछे दान देना और दो व्यक्तियों के बीच वार्तालाप में बोल पड़ना भी अधम कार्य माने गए हैं।” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“समय अपनी गति से निरंतर चलता रहता है और ना किसी के रोके यह रुक सका है और ना ही रुकेगा! इसलिए मनुष्य को समय का मूल्य पहचानना चाहिए क्योंकि समय की कद्र करने वाला व्यक्ति ही सफल हो सकता है।” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“जिस व्यक्ति की पत्नी दुष्ट होती है, मित्र कुटिल होते हैं, बात-बात में जवाब देने वाले नौकर होते हैं, जिसके घर में विषैला सांप रहता है ऐसे व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है अर्थात ऐसा व्यक्ति कभी भी संकट में पड़ सकता है।” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“हथियार रखने वालों का, तीखे नाखूनों व सींग वाले जानवरों का, कुलटा स्त्रियों और राजकुल के लोगों पर कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि इन पर विश्वास करने पर एक न एक दिन धोखा, छल, कपट और विश्वासघात अवश्य मिलता है।” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“काम कोई भी हो, उसे पूरी शक्ति लगाकर पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए और यह सीख सिंह से लेनी चाहिए। छोटा हो या बड़ा वह पूरी शक्ति लगाकर शिकार करता है।” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“जहाँ मूर्खों की पूजा नहीं होती, जहाँ धन धान्य का भंडार सुरक्षित रहता है, जहाँ पति पत्नी में आपस में कलह क्लेश नहीं होता, ऐसी जगह पर साक्षात लक्ष्मी निवास करती है।” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“सज्जनों की संगति मिले और अच्छी बातें करने को मिले, यही संसार रूपी वृक्ष के दो ऐसे फल हैं जो जीवन को सार्थक बनाते हैं” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“जिस व्यक्ति का पुत्र उसके वश में हो, पत्नी साथ निभाने वाली हो, कटु वचन ना बोलने वाली और पतिव्रता हो तथा परिवार के सदस्य संतोषी हो, जितना मिल जाए, उसी में संतोष करके निर्वाह कर लेते हो, ऐसे परिवार को स्वर्ग के समान सुख देने वाला बताया गया है और यही परिवार सुखी और उत्तम माना गया है।” ~ Top 50 Chanakya Neeti


“संतान कच्ची मिट्टी के समान होती है, जैसा आप उसे आकार देना चाहेंगे, वैसा ही आप उसे आकार दे सकते हैं।” ~ Top 50 Chanakya Neeti


“वैरागी मनुष्य धन को तिनके के समान मानता है। इंद्रिय विजेता के सामने कितनी ही सौंदर्यवान स्त्री क्यों ना आ जाए उसे वह रिझा नहीं सकती। तपस्वी के तप में कितने हैं बाधाएँ क्यों ना आ जाए वह तप से नहीं डिगता! यह सब कुछ संयम के बल पर ही संभव है क्योंकि जिस व्यक्ति ने मन पर काबू पा लिया, वह सब कुछ पा लेता है और वही सबसे बड़ा विजेता है।” ~ Top 50 Chanakya Neeti


“दूर और पास का सम्बंध भावों से बंधा हुआ है। हर समय दूर रहने वाला व्यक्ति दूर रहकर भी पास होता है और हर समय पास रहने वाला व्यक्ति पास रहकर भी दूर ही रहता है।” ~ Top 50 Chanakya Neeti


“5 वर्ष तक अपने पुत्र को लाड़ दुलार करना चाहिए। 10 वर्ष तक उससे कठोरता का व्यवहार करना चाहिए और उसे जीवन के नियम कायदे समझाने चाहिए, उसे अनुशासन का पाठ पढ़ाना चाहिए। लेकिन जब वह 16 साल का हो जाए, तो उसके साथ मित्रता का व्यवहार करना चाहिए।” ~ Top 50 Chanakya Neeti


“यदि अपना कमाया हुआ धन आप दूसरों को सौंप देंगे और कोई भी पुस्तक बिना ज्ञान अर्जन किए, बिना उसे पढ़े ही अपने पास रखे रहने देंगे, तो ये दोनों ही समय पड़ने पर काम में नहीं आएंगे अर्थात बिना पढ़ी गई पुस्तक की विद्या और दूसरों के हाथ में सौंपा गया अपना धन समय पड़ने पर, काम नहीं आते।” ~ Top 50 Chanakya Neeti


“मीठे वचन बोलने में कभी भी संकोच नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे कभी भी कोई नुक़सान नहीं है बल्कि मीठे वचन सुनने से सभी जीव प्रसन्न हीं होते हैं।” ~ Chanakya Anmol Vichar


“ऐसा धन, जो धर्म को त्याग करने से मिले, दुश्मन की शरण में जाने पर मिले या बहुत अधिक पीड़ा पाने पर मिले ऐसा धन, ना ही मिले तो ठीक।” ~ Chanakya Anmol Vichar


“प्रत्येक काम को करने से पहले, स्वयं से तीन सवाल करने चाहिए। यह कार्य मैं क्यों कर रहा हूँ? इस काम का क्या फल मुझे मिलेगा? और क्या इस कार्य में सफलता निश्चित है अथवा नहीं? यह सब बातें सोचने के बाद ही किसी भी कार्य को शुरू करना चाहिए।” ~ Chanakya Anmol Vichar


“प्रत्येक परिवार में कलह और क्लेश हमेशा नारी के कारण होते हैं और अमूमन सभी झगड़ों की जड़ नारी ही होती है। इसलिए संयमी एवं विवेकवान पुरुष को कभी भी स्त्री के कहने पर नहीं चलना चाहिए और अपने बुद्धि का इस्तेमाल करना चाहिए और उसी के आधार पर निर्णय करने चाहिए।” ~ Chanakya Anmol Vichar


“ऐसा व्यक्ति, जो सामने तो आपकी प्रशंसा करता है, मधुर व्यवहार करता है और आपके मन को भाने वाली बातें करता है, प्रशंसा करता है, लेकिन मौका देख कर पीठ पीछे आप की बुराइयाँ करता है आपके काम बिगाड़ देता है, ऐसे मित्र का भूलकर भी साथ नहीं देना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को मित्र मानना सर्वाधिक खतरनाक है। क्योंकि ऐसे मित्र दुश्मन से भी अधिक दुखदाई एवं खतरनाक होते हैं।” ~ Chanakya Anmol Vichar


“स्वार्थ के बल पर की हुई दोस्ती, हमेशा दुश्मनी का कारण बन जाती है। इसलिए विवेकी पुरुष को चाहिए कि वह हमेशा दोस्त बनाने से पहले उसे जांच परख ले तथा ख़ूब सोच विचार कर ले क्योंकि एक बार यदि दोस्ती गाढ़ी हो जाती है तो उसके बाद उसके परिणाम और दुष्परिणाम सामने आते हैं।” ~ Chanakya Anmol Vichar


“जो व्यक्ति पहले से ही इस बात का अनुमान लगा लेता है कि उसके परिवार के लिए क्या बेहतर है, क्या सही है, क्या ग़लत है, क्या शुभ है क्या अशुभ है और इस अनुमान के आधार पर ही वह निर्णय लेता है। वही व्यक्ति हमेशा सुखी रहता है और उसे दुखों का सामना नहीं करना पड़ता है। हर विषय पर बारीकी से विश्लेषण करके अपने परिवार के हित में निर्णय करता है। वही परिवारिक व्यक्ति कहलाता है।” ~ Chanakya Anmol Vichar


“संकोच से मैथुन करना, निरंतर संग्रह करना, सदैव चौकन्ना रहना, किसी पर भी विश्वास न करना यह बातें कौवे से सीखनी चाहिए।” ~ Chanakya Ke Anmol Vachan


“बहुत अधिक भूख लगने पर भी थोड़े में ही संतुष्ट रहना, गहरी निद्रा में भी रहते हुए चौकन्ना रहना और झटपट जाग जाना, स्वामी भक्ति और बहादुरी, सज्जनों को ये गुण कुत्ते से सीखने चाहिए।” ~ Chanakya Ke Anmol Vachan


“बहुत अधिक थक जाने पर भी बोझ ढोते रहना, गर्मी सर्दी का ख़्याल ना करना, सदैव संतोष रखना, ये तीन गुण गधे से सीखने चाहिए।” ~ Chanakya Ke Anmol Vachan


“शत्रु को पराजित करने के लिए पहले हमला नहीं करना चाहिए बल्कि पहले उससे शांत तरीके से व्यवहार करना चाहिए और यदि वह विनम्रता से नहीं माने तो बल प्रयोग करना चाहिए।” ~ Chanakya Ke Anmol Vachan


“यजमान से दक्षिणा प्राप्त करके ब्राह्मण, गुरु से विद्या प्राप्त कर विद्यार्थी और जंगल में आग लगने पर हिरण उसे छोड़ कर चले जाते हैं। यह दुनिया स्वार्थ से भरी है सभी अपना-अपना मतलब पूरा होते ही सम्बंध विच्छेद कर देते हैं।” ~ Chanakya Ke Anmol Vachan


“इस दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जो सदा सुखी रहे। प्रत्येक व्यक्ति कभी ना कभी बीमार होता है। किसी ना किसी दुख के अधीन जीवन व्यतीत करता है। ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है, जो संसार में सदा सुख से रह सके अर्थात इस जीवन में सुख और दुख हर व्यक्ति के जीवन के साथ जुड़ा हुआ है।” ~ Chanakya Ke Anmol Vachan


“किसी भी व्यक्ति के ख़ानदान के बारे में, उसके व्यवहार से पता लगता है। देश का पता बोली से लगता है। प्रेम का पता आदर से और शरीर का पता भोजन से लगता है।” ~ Chanakya Ke Anmol Vachan


“मनुष्य कितना ही बलवान, मनमोहक और कितने ही कुलीन परिवार से उत्पन्न क्यों ना हुआ हो, यदि वह विद्या हीन है, तो वह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई फूल, बिना सुगंध के हो अर्थात विद्याहीन मनुष्य का कोई महत्त्व नहीं है।” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“बीत चुकी बात पर व्यर्थ सोच विचार करके पश्चाताप करते रहने में समय व्यतीत करना मूर्खों का काम है। इनसे कुछ लाभ हासिल नहीं होता। व्यक्ति को भूत व भविष्य की चिंता किए बिना वर्तमान पर ही विचार और चिंतन करना चाहिए।” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“प्रत्येक जीव का अपना-अपना ही स्वभाव होता है और उसी के अनुरूप उसको ख़ुशी मिलती है। ब्राह्मण उत्तम भोजन पाकर प्रसन्न हो जाता है। बादल गरजने पर प्रसन्न हो जाते हैं। सज्जन, दूसरों को सुखी देखकर प्रसन्न होते हैं परंतु दुष्ट व कुटिल व्यक्ति हमेशा दूसरों को मुसीबत में देखकर ही प्रसन्न होते हैं। इसलिए हर एक व्यक्ति का अपना-अपना स्वभाव है, उसको वह कभी भी नहीं बदल सकता।” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“क्रोध करना, कड़वे वचन बोलना, अहंकार और घमंड करना, अपनों से दुश्मनी रखना ये चार लक्षण नरक वासियों के ही होते हैं। ऐसे लोग पृथ्वी पर राक्षस के समान हैं। हे प्रभु! इनसे हमारी रक्षा करें।” ~ Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“निम्न श्रेणी के लोग केवल धन संपदा की इच्छा रखते हैं। मध्यम श्रेणी के लोग धन के साथ-साथ इज़्ज़त भी चाहते हैं। उच्च श्रेणी के लोग केवल प्रतिष्ठा, इज़्ज़त और मान चाहते हैं और इसे ही वे असल संपत्ति मानते हैं। इसलिए यह बात निश्चित है कि धन-संपत्ति से बढ़कर इज़्ज़त और प्रतिष्ठा है।” Top 50 Chanakya Niti in Hindi


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“जो व्यक्ति जैसा सेवन करता है, वैसे ही उसकी संतान पर प्रभाव होता है। सोना आग खाने से और चमकता है जबकि दीपक अंधेरे का सेवन करता है और कालिख को जन्म देता है।” Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“यह दुनिया वास्तव में एक रैन बसेरा है! यहाँ लोग आपस में मिलते हैं साथ रहते हैं और फिर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ जाते हैं। बिलकुल वैसे ही, जैसे कि सभी प्रकार के पक्षी रात भर एक ही वृक्ष पर बैठते हैं, विश्राम करते हैं, लेकिन सुबह होते ही अपनी-अपनी दिशाओं में उड़ जाते हैं।” Top 50 Chanakya Niti in Hindi

“श्रम और संचय बेहद आवश्यक है क्योंकि एक-एक बूंद संग्रह करके घड़ा भरा जा सकता है। उसी प्रकार व्यक्ति एक-एक बूंद का ज्ञान संग्रह करके विद्वान और संपन्न हो सकता है।” Top 50 Chanakya Niti in Hindi


“इस दुनिया में महान वही है, जो स्वयं अपने बलबूते पर खड़ा है। दूसरों के सहारे जीवन जीने वाला व्यक्ति हमेशा छोटा ही रहता है, बिल्कुल वैसे ही, जैसे चंद्रमा सूर्य पर निर्भर है! इस कारण दिन में सूर्य के उदय होने पर चंद्रमा अपना तेज खो देता है।” Top 50 Chanakya Niti in Hindi

Top 50 Chanakya Niti in Hindi

Closing Remarks:

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S.K. Choudhary

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