
Bandar aur magarmach ki kahani पंचतंत्र की सबसे मशहूर कहानियों में से एक है। यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि मुसीबत में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि दिमाग़ से काम लेना चाहिए। नीचे यह कहानी बहुत आसान हिंदी में लिखी है, ताकि बच्चे ख़ुद पढ़ सकें और माता पिता इसे सोते समय सुना सकें।
| बात | जानकारी |
|---|---|
| पढ़ने का समय | 4 मिनट |
| किस उम्र के बच्चों के लिए | 4 से 10 साल |
| कहानी के पात्र | बंदर, मगरमच्छ और मगरमच्छ की पत्नी |
| सीख | मुसीबत में घबराओ मत, दिमाग़ से काम लो |
विषय सूची
Bandar Aur Magarmach Ki Kahani: बंदर और मगरमच्छ की कहानी
एक बड़ी नदी के किनारे जामुन का एक बहुत बड़ा पेड़ था। उस पेड़ पर ढेर सारे मीठे मीठे जामुन लगते थे। उसी पेड़ पर एक बंदर रहता था। बंदर दिन भर जामुन खाता, डालियों पर कूदता और ख़ुश रहता।
एक दिन नदी में से एक मगरमच्छ धीरे धीरे तैरता हुआ आया। वह बहुत थका हुआ था और उसे भूख भी लगी थी। वह पेड़ के नीचे आकर आराम करने लगा।
बंदर ने उसे देखा और पूछा: “मगरमच्छ भाई, तुम बहुत थके हुए लग रहे हो। क्या तुम्हें भूख लगी है? लो, ये मीठे जामुन खाओ।”
बंदर ने ऊपर से कुछ जामुन नीचे गिरा दिए। मगरमच्छ ने जामुन खाए। उसे जामुन बहुत मीठे लगे। उसने कहा: “धन्यवाद दोस्त! ऐसे मीठे फल मैंने पहले कभी नहीं खाए।”
उस दिन से दोनों पक्के दोस्त बन गए। मगरमच्छ रोज़ पेड़ के पास आता। बंदर उसे जामुन खिलाता, और दोनों घंटों बातें करते।
मगरमच्छ की पत्नी की ज़िद
एक दिन बंदर ने कहा: “दोस्त, ये कुछ जामुन अपनी पत्नी के लिए भी ले जाओ।” मगरमच्छ जामुन लेकर घर गया। उसकी पत्नी ने जामुन खाए और बोली: “वाह! ये तो बहुत मीठे हैं। जो बंदर रोज़ इतने मीठे जामुन खाता है, उसका दिल तो और भी मीठा होगा। मुझे उस बंदर का दिल खाना है!”
मगरमच्छ घबरा गया। उसने कहा: “नहीं नहीं, वह मेरा सबसे अच्छा दोस्त है। मैं उसके साथ ऐसा नहीं कर सकता।”
पर पत्नी ज़िद पर अड़ गई। वह बोली: “अगर तुम मुझे बंदर का दिल नहीं लाकर दोगे, तो मैं खाना पीना छोड़ दूँगी।”
बेचारा मगरमच्छ बहुत दुखी हुआ। आख़िर में उसने पत्नी की बात मान ली।
नदी के बीच में
अगले दिन मगरमच्छ पेड़ के पास गया और बोला: “दोस्त, मेरी पत्नी तुमसे मिलना चाहती है। उसने तुम्हें खाने पर बुलाया है। चलो, मेरी पीठ पर बैठ जाओ, मैं तुम्हें अपने घर ले चलता हूँ।”

बंदर बहुत ख़ुश हुआ। वह कूदकर मगरमच्छ की पीठ पर बैठ गया। मगरमच्छ तैरने लगा। जब वे नदी के बीच में पहुँचे, जहाँ पानी बहुत गहरा था, तब मगरमच्छ ने सोचा कि अब तो बंदर कहीं भाग नहीं सकता।
उसने कहा: “दोस्त, सच बताऊँ? मेरी पत्नी तुम्हारा दिल खाना चाहती है। इसीलिए मैं तुम्हें ले जा रहा हूँ।”
यह सुनकर बंदर डर गया। चारों तरफ़ गहरा पानी था, और उसे तैरना भी नहीं आता था। पर बंदर ने घबराने की जगह जल्दी से सोचा।
फिर उसने मुस्कुराकर कहा: “अरे दोस्त! यह बात तुमने पहले क्यों नहीं बताई? मैं तो अपना दिल पेड़ पर ही छोड़ आया हूँ। हम बंदर अपना दिल हमेशा पेड़ के खोखले में सँभालकर रखते हैं। चलो, जल्दी वापस चलो। मैं दिल लेकर आता हूँ, फिर भाभी को दे देना।”
बंदर की चतुराई
मगरमच्छ बंदर की बात मान गया। वह मुड़ा और वापस पेड़ की तरफ़ तैरने लगा।
जैसे ही वे किनारे पहुँचे, बंदर एक छलाँग में पेड़ पर चढ़ गया और सबसे ऊँची डाली पर जाकर बैठ गया।
मगरमच्छ ने आवाज़ लगाई: “दोस्त, जल्दी अपना दिल लेकर आओ!”
बंदर ने ऊपर से कहा: “अरे मूर्ख मगरमच्छ! क्या कोई अपना दिल शरीर से बाहर रखता है? मैंने तुम्हें अपना सच्चा दोस्त समझा था, पर तुमने मुझे धोखा दिया। आज से हमारी दोस्ती ख़त्म। अब कभी मेरे पेड़ के पास मत आना।”
मगरमच्छ बहुत शर्मिंदा हुआ। उसने एक अच्छा दोस्त भी खो दिया और मीठे जामुन भी। वह सिर झुकाकर चुपचाप वापस चला गया।
कहानी की सीख
मुसीबत में घबराना नहीं चाहिए, शांत रहकर दिमाग़ से काम लेना चाहिए। और जो दोस्त को धोखा देता है, वह आख़िर में अकेला रह जाता है।
5 लाइन में छोटी कहानी
- नदी किनारे जामुन के पेड़ पर एक बंदर रहता था, जिसकी दोस्ती एक मगरमच्छ से हो गई।
- बंदर रोज़ मगरमच्छ को मीठे जामुन खिलाता था।
- मगरमच्छ की पत्नी ने बंदर का दिल खाने की ज़िद की, तो मगरमच्छ बंदर को पीठ पर बैठाकर ले चला।
- नदी के बीच सच जानकर बंदर ने कहा कि उसका दिल तो पेड़ पर रखा है।
- किनारे पहुँचते ही बंदर पेड़ पर चढ़ गया और उसकी जान बच गई। सीख: मुसीबत में दिमाग़ से काम लो।
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| ज़िद | किसी बात पर अड़ जाना |
| खोखला | पेड़ के तने के अंदर की ख़ाली जगह |
| चतुराई | समझदारी, होशियारी |
| शर्मिंदा | अपनी ग़लती पर शर्म आना |
| धोखा | भरोसा तोड़ना |
यह कहानी पंचतंत्र में कहाँ आती है?
यह कहानी पंचतंत्र के चौथे भाग लब्धप्रणाशम् से है, जिसका मतलब है “हाथ आई चीज़ का खो जाना”। मगरमच्छ के पास अच्छा दोस्त था, पर लालच और ग़लत बात मानने से उसने उसे खो दिया। पंचतंत्र में बंदर का नाम रक्तमुख और मगरमच्छ का नाम करालमुख बताया गया है। पंचतंत्र की कहानियाँ आचार्य विष्णु शर्मा ने राजा अमरशक्ति के तीन राजकुमारों को खेल खेल में समझदारी सिखाने के लिए सुनाई थीं। पूरी जानकारी और सभी कहानियाँ यहाँ हैं: पंचतंत्र की सभी कहानियाँ।
बच्चों के लिए सवाल जवाब
बंदर किस पेड़ पर रहता था?
बंदर नदी के किनारे जामुन के एक बड़े पेड़ पर रहता था।
मगरमच्छ की पत्नी क्या चाहती थी?
वह बंदर का दिल खाना चाहती थी, क्योंकि उसे लगा कि मीठे जामुन खाने वाले का दिल भी मीठा होगा।
बंदर ने अपनी जान कैसे बचाई?
बंदर ने कहा कि उसका दिल पेड़ पर रखा है। मगरमच्छ उसे वापस किनारे ले आया, और बंदर कूदकर पेड़ पर चढ़ गया।
इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
मुसीबत में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि दिमाग़ से काम लेना चाहिए। और कभी किसी दोस्त को धोखा नहीं देना चाहिए।
बंदर और मगरमच्छ की कहानी किस किताब से है?
यह कहानी पंचतंत्र से है, जिसे आचार्य विष्णु शर्मा ने लिखा था। यह पंचतंत्र के चौथे भाग “लब्धप्रणाशम्” में आती है।
बच्चों को कहानी सुनाने का आसान तरीका
- कहानी सुनाते समय बंदर और मगरमच्छ की आवाज़ बदलकर बोलें, बच्चे बहुत मज़े से सुनते हैं।
- नदी के बीच वाले हिस्से पर रुककर बच्चे से पूछें: “अब बंदर क्या करेगा?” इससे बच्चा ख़ुद सोचना सीखता है।
- कहानी के बाद पूछें: “अगर तुम बंदर की जगह होते, तो क्या करते?”
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