रेशियो एनालिसिस क्या है? रेशियो एनालिसिस (अनुपात विश्लेषण) कंपनी के वित्तीय विवरणों (बैलेंस शीट, मुनाफ़ा और नुकसान खाता, कैश फ़्लो) की दो संख्याओं को आपस में भाग देकर अनुपात (रेशियो) निकालने और उनसे कंपनी की सेहत परखने का तरीका है। इससे चार सवालों के जवाब मिलते हैं: कंपनी कितना कमा रही है, छोटे बिल चुका पाएगी या नहीं, उस पर क़र्ज़ कितना है, और अपनी संपत्ति का कितना अच्छा इस्तेमाल कर रही है।
मुख्य बातें
- “रेशियो” का हिंदी अर्थ अनुपात है: एक संख्या को दूसरी से भाग देना, जैसे मुनाफ़ा ÷ बिक्री।
- 4 मुख्य प्रकार: लाभप्रदता, नक़दी (लिक्विडिटी), क़र्ज़ (सॉल्वेंसी) और कुशलता (एक्टिविटी)।
- सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले: ROE, नेट प्रॉफ़िट मार्जिन, करंट रेशियो, डेट इक्विटी रेशियो, इंटरेस्ट कवरेज।
- रेशियो अकेले कुछ नहीं बताता: उसे उसी उद्योग की कंपनियों से और कंपनी के पिछले 5 साल से मिलाएँ।
- शेयर के भाव से जुड़े रेशियो (P/E, P/B) अलग गिने जाते हैं: स्टॉक वैल्यूएशन क्या है।
विषय सूची
रेशियो एनालिसिस क्या है और इससे क्या पता चलता है
किसी कंपनी का मुनाफ़ा ₹100 करोड़ है, यह अकेले कुछ नहीं बताता। अगर बिक्री ₹500 करोड़ थी, तो हर ₹100 की बिक्री पर ₹20 मुनाफ़ा (20% मार्जिन); अगर बिक्री ₹5,000 करोड़ थी, तो सिर्फ़ ₹2। रेशियो एनालिसिस क्या है, इसका सार यही है: संख्याओं को जोड़कर देखना, ताकि अलग अलग आकार की कंपनियों की तुलना हो सके।
रेशियो एनालिसिस का इस्तेमाल निवेशक (शेयर ख़रीदने से पहले), बैंक (क़र्ज़ देने से पहले) और कंपनी का प्रबंधन (अपनी कमज़ोरी पकड़ने के लिए) तीनों करते हैं। यह फ़ंडामेंटल एनालिसिस का सबसे अहम औज़ार है।
रेशियो एनालिसिस के प्रकार

1. लाभप्रदता रेशियो (Profitability Ratios)
- ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट मार्जिन: मुख्य कारोबार से कमाई; ब्याज और टैक्स से पहले का मुनाफ़ा ÷ बिक्री।
- नेट प्रॉफ़िट मार्जिन: टैक्स के बाद का मुनाफ़ा ÷ बिक्री; हर ₹100 की बिक्री पर असल में कितना बचा।
- ROA (रिटर्न ऑन एसेट्स): मुनाफ़ा ÷ कुल संपत्ति; संपत्ति से कितनी कमाई।
- ROE (रिटर्न ऑन इक्विटी): मुनाफ़ा ÷ शेयरधारकों की पूँजी; मालिकों के पैसे पर कमाई। आम तौर पर 15% से ऊपर अच्छा माना जाता है।
- EPS (अर्निंग पर शेयर): मुनाफ़ा ÷ कुल शेयर; एक शेयर के हिस्से की कमाई।
2. लिक्विडिटी रेशियो (Liquidity Ratios)
- करंट रेशियो: मौजूदा संपत्ति ÷ मौजूदा देनदारी; आम तौर पर 1.5 से 2 के आसपास आरामदेह माना जाता है।
- क्विक रेशियो: (मौजूदा संपत्ति में से माल का स्टॉक घटाकर) ÷ मौजूदा देनदारी; 1 से ऊपर ठीक।
- कैश रेशियो: नक़द और तुरंत भुनने वाला निवेश ÷ मौजूदा देनदारी; सबसे सख़्त पैमाना।
3. सॉल्वेंसी रेशियो (Solvency Ratios)
- डेट इक्विटी रेशियो: कुल क़र्ज़ ÷ शेयरधारकों की पूँजी। बैंक और NBFC को छोड़ दें, तो आम तौर पर 1 से नीचे सुरक्षित माना जाता है।
- डेट टू एसेट रेशियो: कुल क़र्ज़ ÷ कुल संपत्ति; संपत्ति का कितना हिस्सा क़र्ज़ से ख़रीदा गया।
- इंटरेस्ट कवरेज रेशियो: ब्याज और टैक्स से पहले का मुनाफ़ा ÷ ब्याज का ख़र्च; 3 से ऊपर हो, तो ब्याज चुकाना आसान।
- इक्विटी रेशियो: शेयरधारकों की पूँजी ÷ कुल संपत्ति।
4. एक्टिविटी रेशियो (Activity Ratios)
- इन्वेंटरी टर्नओवर: बेचे गए माल की लागत ÷ औसत स्टॉक; माल कितनी जल्दी बिकता है।
- डेटर टर्नओवर और डेटर डेज़: बिक्री ÷ औसत उधारी (ग्राहकों से लेना); ग्राहक कितने दिन में पैसा देते हैं।
- एसेट टर्नओवर: बिक्री ÷ कुल संपत्ति; हर ₹1 की संपत्ति से कितनी बिक्री।
- वर्किंग कैपिटल टर्नओवर: बिक्री ÷ कार्यशील पूँजी।
ज़रूरी रेशियो के फ़ॉर्मूले एक जगह
| रेशियो | फ़ॉर्मूला | क्या बताता है |
|---|---|---|
| नेट प्रॉफ़िट मार्जिन | टैक्स के बाद मुनाफ़ा ÷ बिक्री × 100 | हर ₹100 बिक्री पर बचत |
| ROE | टैक्स के बाद मुनाफ़ा ÷ शेयरधारकों की पूँजी × 100 | मालिकों के पैसे पर कमाई |
| ROA | टैक्स के बाद मुनाफ़ा ÷ कुल संपत्ति × 100 | संपत्ति से कमाई |
| EPS | टैक्स के बाद मुनाफ़ा ÷ कुल शेयर | एक शेयर की कमाई |
| करंट रेशियो | मौजूदा संपत्ति ÷ मौजूदा देनदारी | छोटे बिल चुकाने की ताक़त |
| क्विक रेशियो | (मौजूदा संपत्ति में से स्टॉक घटाकर) ÷ मौजूदा देनदारी | बिना माल बेचे बिल चुकाना |
| डेट इक्विटी रेशियो | कुल क़र्ज़ ÷ शेयरधारकों की पूँजी | क़र्ज़ का बोझ |
| इंटरेस्ट कवरेज | EBIT ÷ ब्याज का ख़र्च | ब्याज चुकाने की ताक़त |
| इन्वेंटरी टर्नओवर | बेचे माल की लागत ÷ औसत स्टॉक | माल कितनी जल्दी बिकता है |
| एसेट टर्नओवर | बिक्री ÷ कुल संपत्ति | संपत्ति का इस्तेमाल |
उदाहरण: एक कंपनी के 4 रेशियो
रेशियो एनालिसिस क्या है, यह एक हल किए उदाहरण से सबसे साफ़ होता है। मान लीजिए “कंपनी X” के आँकड़े ये हैं: बिक्री ₹1,000 करोड़, टैक्स के बाद मुनाफ़ा ₹120 करोड़, शेयरधारकों की पूँजी ₹800 करोड़, कुल क़र्ज़ ₹400 करोड़, मौजूदा संपत्ति ₹300 करोड़, मौजूदा देनदारी ₹200 करोड़।

रेशियो पढ़ने के 6 नियम

रेशियो एनालिसिस की सीमाएँ: रेशियो पिछले आँकड़ों पर बनते हैं, भविष्य नहीं बताते; अलग कंपनियाँ हिसाब के अलग तरीके अपनाती हैं; और महँगाई या एक बार की कमाई (जैसे ज़मीन बेचकर हुआ मुनाफ़ा) रेशियो को बिगाड़ सकती है। इसलिए रेशियो को कंपनी के कारोबार, प्रबंधन और भाव (वैल्यूएशन) के साथ ही पढ़ें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रेशियो एनालिसिस क्या है, एक लाइन में?
कंपनी के खातों की संख्याओं को आपस में भाग देकर अनुपात निकालना और उनसे कमाई, नक़दी, क़र्ज़ और कुशलता परखना।
“Ratio” का हिंदी में क्या अर्थ है?
अनुपात, यानी दो संख्याओं का आपसी संबंध, जो भाग देकर निकाला जाता है (जैसे 2:1 या 2)।
रेशियो निकालने का सूत्र क्या है?
रेशियो = पहली संख्या ÷ दूसरी संख्या। जैसे करंट रेशियो = मौजूदा संपत्ति ÷ मौजूदा देनदारी; ₹300 करोड़ ÷ ₹200 करोड़ = 1.5।
डेट इक्विटी रेशियो का सूत्र क्या है?
डेट इक्विटी रेशियो = कुल क़र्ज़ ÷ शेयरधारकों की पूँजी। ₹400 करोड़ क़र्ज़ और ₹800 करोड़ पूँजी पर यह 0.5 है; ज़्यादातर ग़ैर वित्तीय कंपनियों के लिए 1 से नीचे सुरक्षित माना जाता है।
वित्तीय विवरण विश्लेषण कितने प्रकार के होते हैं?
मुख्य रूप से तीन: रेशियो एनालिसिस (अनुपात), हॉरिज़ॉन्टल एनालिसिस (साल दर साल बदलाव) और वर्टिकल एनालिसिस (हर मद को बिक्री या कुल संपत्ति के प्रतिशत में देखना)। साथ में कैश फ़्लो एनालिसिस भी किया जाता है।
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