₹12 लाख तक की आय टैक्स-फ़्री कैसे है? रिबेट का पूरा गणित, ₹12.75 लाख की शर्त और मार्जिनल रिलीफ़ (2026-27)

अपडेट: 8 मिनट में पढ़ें

₹12 लाख तक की आय पर टैक्स इसलिए नहीं लगता, क्योंकि नई टैक्स व्यवस्था में स्लैब से जो ₹60,000 टैक्स बनता है, वह पूरा रिबेट में माफ़ हो जाता है। 12 lakh tax free kaise होता है, इसका यही सीधा गणित है। नौकरी करने वालों को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलता है, इसलिए उनके लिए यह सीमा ₹12.75 लाख की सैलरी तक पहुँच जाती है।

मुख्य बातें

  • ₹12 लाख टैक्स-फ़्री स्लैब नहीं है, यह रिबेट का कमाल है। असली छूट की सीमा ₹4 लाख ही है।
  • सैलरी वालों के लिए सीमा ₹12.75 लाख है। फ़्रीलांसर या दुकानदार के लिए ₹12 लाख ही है।
  • सीमा से ₹1 भी ऊपर गए तो रिबेट नहीं मिलती, लेकिन मार्जिनल रिलीफ़ आपको बड़े झटके से बचा लेती है।
  • शेयर और म्यूचुअल फ़ंड के मुनाफ़े पर यह रिबेट नहीं चलती, यहीं लोग सबसे ज़्यादा ग़लती करते हैं।
  • यह सब सिर्फ़ नई व्यवस्था में है। पुरानी व्यवस्था में रिबेट ₹5 लाख की आय तक ही है।

विषय सूची

12 Lakh Tax Free Kaise: ₹12 लाख पर टैक्स शून्य कैसे बनता है

पहले यह समझ लीजिए कि ₹12 लाख की आय पर भी स्लैब के हिसाब से टैक्स बनता है। टैक्स ईयर 2026-27 की नई व्यवस्था में हिसाब कुछ ऐसा होता है।

आय का हिस्सादरइस हिस्से का टैक्स
₹0 से ₹4 लाखशून्य₹0
₹4 से ₹8 लाख5%₹20,000
₹8 से ₹12 लाख10%₹40,000
कुल₹60,000

अब इनकम टैक्स क़ानून की रिबेट वाली धारा (पहले 87A, अब धारा 156) कहती है कि अगर आपकी कुल आय ₹12 लाख से ज़्यादा नहीं है, तो ₹60,000 तक का टैक्स माफ़ है। यानी ₹60,000 का टैक्स बना और ₹60,000 की ही रिबेट मिल गई, तो देना कुछ नहीं पड़ा।

12 lakh tax free kaise: स्लैब से बना ₹60,000 टैक्स रिबेट से शून्य हो जाता है
इन्फ़ोग्राफ़िक: ₹12 लाख पर टैक्स शून्य कैसे? (Storyshala)

इसीलिए “₹12 लाख तक कोई टैक्स नहीं” वाली बात आधी सच है। अगर आय ₹12 लाख से ऊपर गई, तो हिसाब फिर ₹4 लाख के बाद से ही शुरू होता है, ₹12 लाख के बाद से नहीं।

सैलरी वालों की ₹12.75 लाख वाली शर्त

नौकरी करने वालों को अपनी सैलरी में से ₹75,000 सीधे घटाने की छूट मिलती है, इसे स्टैंडर्ड डिडक्शन कहते हैं। इसके लिए न कोई बिल चाहिए, न कोई निवेश। इसलिए ₹12.75 लाख की सैलरी में से ₹75,000 घटाने पर टैक्स वाली आय ₹12 लाख बचती है और टैक्स शून्य हो जाता है।

जिनकी आय सैलरी से नहीं है, जैसे फ़्रीलांसर, दुकानदार या कंसल्टेंट, उन्हें यह ₹75,000 नहीं मिलता। उनके लिए सीमा ₹12 लाख ही रहती है।

₹12 लाख से थोड़ा ऊपर गए तो क्या होगा: मार्जिनल रिलीफ़

मान लीजिए किसी की आय ₹12 लाख से सिर्फ़ ₹10,000 ज़्यादा है। अब रिबेट नहीं मिलेगी और स्लैब से ₹61,500 का टैक्स बनेगा। यह तो बड़ी नाइंसाफ़ी होती कि ₹10,000 ज़्यादा कमाने पर ₹61,500 देने पड़ें, इसलिए क़ानून में मार्जिनल रिलीफ़ रखी गई है। इसका नियम बहुत सीधा है कि आपका टैक्स उस रक़म से ज़्यादा नहीं होगा, जितनी आपकी आय ₹12 लाख से ऊपर गई है।

टैक्स वाली आयस्लैब से टैक्सरिलीफ़ के बाद टैक्स4% सेस के साथ कुल
₹12,00,000₹60,000₹0₹0
₹12,10,000₹61,500₹10,000₹10,400
₹12,25,000₹63,750₹25,000₹26,000
₹12,50,000₹67,500₹50,000₹52,000
₹12,70,000₹70,500₹70,000₹72,800
₹13,00,000₹75,000रिलीफ़ नहीं₹78,000

मार्जिनल रिलीफ़ टैक्स वाली आय के लगभग ₹12,70,588 तक ही चलती है। उसके बाद आपको पूरा स्लैब वाला टैक्स देना होता है।

सैलरी के हिसाब से यही तालिका

सालाना सैलरीटैक्स वाली आयकुल टैक्स (सेस समेत)
₹12.75 लाख₹12 लाख₹0
₹12.85 लाख₹12.10 लाख₹10,400
₹13 लाख₹12.25 लाख₹26,000
₹13.25 लाख₹12.50 लाख₹52,000
₹13.45 लाख₹12.70 लाख₹72,800
₹13.75 लाख₹13 लाख₹78,000
₹15 लाख₹14.25 लाख₹97,500
12 lakh tax free kaise: ₹12.75 से ₹13.75 लाख सैलरी पर कितना टैक्स लगेगा
इन्फ़ोग्राफ़िक: सैलरी के हिसाब से कितना टैक्स (Storyshala)

एक मज़ेदार बात देखिए। ₹12.75 लाख से ₹13 लाख की सैलरी होने पर आपकी कमाई ₹25,000 बढ़ी, लेकिन टैक्स ₹26,000 बढ़ गया, क्योंकि रिलीफ़ के बाद 4% सेस अलग से लगता है। यानी इस छोटे से दायरे में सैलरी बढ़ने पर हाथ में आने वाला पैसा थोड़ा घट भी सकता है। अगर आपकी सैलरी इसी दायरे में है, तो नीचे वाला NPS का तरीक़ा आपके बहुत काम का है।

सबसे आम ग़लती: शेयर और म्यूचुअल फ़ंड का मुनाफ़ा

बहुत से लोग सोचते हैं कि कुल आय ₹12 लाख से कम है, तो शेयर के मुनाफ़े पर भी टैक्स नहीं लगेगा। ऐसा नहीं है। यह रिबेट उस आय पर नहीं मिलती जिस पर टैक्स की अलग दर लगती है, जैसे इक्विटी का शॉर्ट टर्म मुनाफ़ा (20%) और लॉन्ग टर्म मुनाफ़ा (12.5%)।

उदाहरण: नेहा की सैलरी ₹10 लाख है, तो स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्स वाली आय ₹9.25 लाख बची। उन्होंने साल के अंदर शेयर बेचकर ₹1 लाख का मुनाफ़ा भी कमाया। कुल आय ₹10.25 लाख ही है, लेकिन हिसाब ऐसा होगा।

आयटैक्स
सैलरी की ₹9.25 लाखरिबेट से शून्य
शॉर्ट टर्म मुनाफ़ा ₹1 लाख, 20% पर₹20,000
4% सेस₹800
कुल देना होगा₹20,800

पूरा हिसाब हमने शेयर और म्यूचुअल फ़ंड के मुनाफ़े पर टैक्स वाले लेख में दिया है।

आपकी स्थिति के हिसाब से क्या करें

आपकी स्थितिक्या करें
सैलरी ₹12.75 लाख तक हैनई व्यवस्था में रहिए, टैक्स शून्य है। फिर भी ITR भरिए, ताकि कटा हुआ TDS वापस मिल सके
सैलरी ₹12.75 से ₹13.75 लाख के बीच हैकंपनी से NPS वाला विकल्प पूछिए, इससे टैक्स वाली आय ₹12 लाख तक आ सकती है
फ़्रीलांसर या दुकानदार हैंआपकी सीमा ₹12 लाख है। ख़र्च ठीक से दर्ज रखिए, क्योंकि मुनाफ़े पर ही टैक्स लगता है
शेयर या फ़ंड भी बेचते हैंइस मुनाफ़े का टैक्स अलग जोड़िए, इस पर रिबेट नहीं मिलेगी
HRA और होम लोन की बड़ी छूट हैनई या पुरानी टैक्स व्यवस्था वाला हिसाब एक बार ज़रूर देखिए

NPS से ₹12 लाख के नीचे कैसे आएँ

अगर कंपनी आपकी सैलरी का कुछ हिस्सा NPS में डालती है, तो बेसिक सैलरी के 14% तक की यह रक़म नई व्यवस्था में भी टैक्स वाली आय से घट जाती है। मान लीजिए सैलरी ₹13 लाख है और बेसिक ₹5.2 लाख है, तो कंपनी ₹72,800 तक NPS में डाल सकती है। सैलरी में से सिर्फ़ ₹25,000 NPS में डालने से ही टैक्स वाली आय ₹12 लाख पर आ जाएगी और ₹26,000 का टैक्स बच जाएगा। बस याद रखिए कि NPS का पैसा आमतौर पर 60 साल की उम्र तक बंद रहता है। ऐसे ही वैध तरीक़े हमने नई व्यवस्था में टैक्स कैसे बचाएँ में बताए हैं।

अपना टैक्स 4 स्टेप में निकालिए

  1. सालभर की कुल सैलरी लीजिए और उसमें से ₹75,000 घटाइए।
  2. बैंक का ब्याज और किराए जैसी बाक़ी आय जोड़िए।
  3. रक़म ₹12 लाख तक है तो टैक्स शून्य है। ऊपर है तो स्लैब से टैक्स निकालिए और मार्जिनल रिलीफ़ वाला नियम लगाइए।
  4. शेयर और फ़ंड का मुनाफ़ा अलग से जोड़िए और आख़िर में 4% सेस लगाइए।

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ध्यान रखिए

टैक्स शून्य होने का मतलब यह नहीं कि ITR नहीं भरनी। अगर बैंक या कंपनी ने TDS काटा है, तो वह पैसा ITR भरने पर ही वापस मिलता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या ₹12 लाख तक की आय पर बिल्कुल टैक्स नहीं लगता?

नई टैक्स व्यवस्था में ₹12 लाख तक की सामान्य आय पर टैक्स शून्य हो जाता है, क्योंकि ₹60,000 तक की रिबेट मिलती है। शेयर और फ़ंड के मुनाफ़े पर यह रिबेट नहीं चलती।

12 lakh salary par kitna tax lagta hai?

नई व्यवस्था में ₹12 लाख की सैलरी पर टैक्स शून्य है। ₹75,000 घटाने के बाद टैक्स वाली आय ₹11.25 लाख बचती है, जो सीमा के अंदर है।

₹13 लाख की सैलरी पर कितना टैक्स लगेगा?

₹75,000 घटाने पर टैक्स वाली आय ₹12.25 लाख होगी। मार्जिनल रिलीफ़ के बाद टैक्स ₹25,000 और 4% सेस मिलाकर ₹26,000 बनेगा।

क्या पुरानी व्यवस्था में भी ₹12 लाख तक टैक्स शून्य है?

नहीं, पुरानी व्यवस्था में रिबेट सिर्फ़ ₹5 लाख तक की टैक्स वाली आय पर मिलती है।

मार्जिनल रिलीफ़ कितनी आय तक मिलती है?

नई व्यवस्था में टैक्स वाली आय के लगभग ₹12,70,588 तक। उसके बाद पूरा स्लैब वाला टैक्स लगता है।

क्या NRI को यह रिबेट मिलती है?

नहीं, यह रिबेट सिर्फ़ भारत के निवासी व्यक्तियों के लिए है।

टैक्स शून्य है तो क्या ITR भरना ज़रूरी है?

क़ानूनी शर्तें आय और लेन-देन पर निर्भर करती हैं, लेकिन TDS वापस लेने और आगे लोन या वीज़ा के काग़ज़ के लिए ITR भरना समझदारी है।

12 lakh tax free kab se lagu hua?

1 अप्रैल 2025 से, यानी वित्त वर्ष 2025-26 से। बजट 2025 में नई व्यवस्था की रिबेट ₹60,000 की गई थी, और टैक्स ईयर 2026-27 में नए क़ानून के साथ भी यही जारी है।

क्या कारोबार या फ़्रीलांस की आय पर भी ₹12 लाख तक टैक्स शून्य है?

हाँ, नई व्यवस्था में कुल आय ₹12 लाख तक हो तो टैक्स शून्य है। बस इन्हें ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन नहीं मिलता, इसलिए सीमा ₹12.75 लाख नहीं, ₹12 लाख ही है।

स्रोत (7 नवंबर 2026 को जाँचे गए)

यह लेख जानकारी के लिए है, टैक्स सलाह नहीं। अपनी आय के हिसाब से आयकर विभाग का कैलकुलेटर देखिए या CA से बात कीजिए।

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S.K. Choudhary
लेखक: S.K. ChoudharyMBA (Finance) · 18 साल का बैंक, टैक्स और हिसाब किताब का अनुभव। इस लेख के नियम और आँकड़े सरकारी स्रोतों से जाँचे गए हैं। ग़लती दिखे तो बताएँ: skchoudharyac@gmail.com · लेखक के बारे में
Disclaimer: यह लेख सिर्फ़ जानकारी और समझ बढ़ाने के लिए है; यह निवेश, टैक्स, लोन या क़ानूनी सलाह नहीं है। ब्याज दरें, शुल्क और नियम समय के साथ बदलते हैं, इसलिए कोई भी फ़ैसला लेने से पहले बैंक, SEBI पंजीकृत सलाहकार या CA से अपनी स्थिति के हिसाब से पुष्टि करें। Storyshala किसी बैंक, कार्ड, बीमा या निवेश उत्पाद की सिफ़ारिश नहीं करता। शेयर बाज़ार और म्यूचुअल फ़ंड में निवेश बाज़ार के जोखिम के अधीन है। लेख में दिए कुछ Amazon लिंक एफ़िलिएट हो सकते हैं; उनसे ख़रीदने पर आपको कोई अतिरिक्त ख़र्च नहीं होता।
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