नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 क्या है? यह 1961 के पुराने इनकम टैक्स क़ानून की जगह आया नया क़ानून है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू है। इसमें टैक्स की दरें और स्लैब नहीं बदले, बल्कि क़ानून को छोटा और आसान बनाया गया: “पिछला वर्ष” और “आकलन वर्ष” की जगह अब एक ही “टैक्स ईयर”, धाराओं के नए नंबर (जैसे 80C अब धारा 123, 87A अब धारा 156), और फ़ॉर्मों के नए नंबर (फ़ॉर्म 16 अब फ़ॉर्म 130)। नौकरीपेशा के लिए सबसे ज़रूरी बात: 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 की कमाई इसी नए क़ानून से चलेगी।
मुख्य बातें
- संसद से अगस्त 2025 में पास, राष्ट्रपति की मंज़ूरी 21 अगस्त 2025, लागू 1 अप्रैल 2026।
- 536 धाराएँ, 23 अध्याय, 16 अनुसूचियाँ; बहुत से नियम लंबे प्रावधानों की जगह तालिकाओं में।
- टैक्स स्लैब, स्टैंडर्ड डिडक्शन (नई व्यवस्था में ₹75,000) और ₹12 लाख तक टैक्स शून्य वाली रिबेट वैसी ही; बजट 2026 ने स्लैब नहीं बदले।
- नियम भी नए: Income-tax Rules, 2026 (अधिसूचना 20 मार्च 2026), 1 अप्रैल 2026 से।
- FY 2025-26 (31 मार्च 2026 तक) की कमाई का हिसाब और ITR पुराने 1961 के क़ानून से ही होगा।
विषय सूची
नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 क्यों लाया गया
1961 का क़ानून 60 साल से ज़्यादा पुराना था। हर बजट में नई धाराएँ जुड़ती गईं (80C, 80CCD, 115BAC जैसे नंबर इसी वजह से हैं), और प्रावधानों के अंदर प्रावधान (“provided that…”) से इसे पढ़ना मुश्किल हो गया था। नए क़ानून का मक़सद: वही टैक्स, पर कम शब्द, साफ़ भाषा, तालिकाएँ और नया क्रम, ताकि विवाद और मुक़दमे कम हों।

“टैक्स ईयर” क्या है
अब तक दो शब्द चलते थे: पिछला वर्ष (Previous Year), यानी जिस साल कमाई हुई, और आकलन वर्ष (Assessment Year), यानी उसके अगले साल, जब उस कमाई पर टैक्स का हिसाब और ITR होता था। आम लोग अक्सर इन दोनों में उलझ जाते थे। नए क़ानून में सिर्फ़ एक शब्द है: टैक्स ईयर, यानी 1 अप्रैल से 31 मार्च का वही साल जिसमें कमाई हुई।

धाराओं के नए नंबर: पुरानी से नई
रोज़ काम आने वाली धाराएँ (पुराना नंबर से नया नंबर):
| काम | 1961 Act (पुरानी धारा) | 2025 Act (नई धारा) |
|---|---|---|
| सैलरी पर स्टैंडर्ड डिडक्शन | 16(ia) | 19 |
| होम लोन ब्याज (मकान की आय) | 24(b) | 22 |
| LIC, PPF, ELSS, बच्चों की फ़ीस | 80C | 123 (अनुसूची XV के साथ) |
| NPS में योगदान | 80CCD | 124 |
| हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम | 80D | 126 |
| एजुकेशन लोन ब्याज | 80E | 129 |
| दान | 80G | 133 |
| बचत और जमा के ब्याज पर छूट | 80TTA, 80TTB | 153 |
| ₹12 लाख तक टैक्स शून्य वाली रिबेट | 87A | 156 |
| नई टैक्स व्यवस्था | 115BAC | 202 |
| ITR भरना | 139 | 263 |
| सैलरी पर TDS | 192 | 392 |
| बाक़ी TDS (FD ब्याज, किराया आदि) | 193 से 196D | 393 (एक तालिका में) |
| घर बेचकर दूसरा घर (कैपिटल गेन छूट) | 54 | 82 |
| कैपिटल गेन बॉन्ड | 54EC | 85 |

ध्यान दें: धाराओं की यह सूची हमने कई प्रकाशित मिलान सूचियों से जाँची है। कुछ कम इस्तेमाल होने वाली धाराओं पर स्रोतों में अंतर है, इसलिए रिटर्न या क़ानूनी काम में आयकर विभाग की आधिकारिक सामग्री या अपने CA से मिलान ज़रूर करें।
फ़ॉर्मों के नए नंबर
| काम | पुराना फ़ॉर्म | नया फ़ॉर्म |
|---|---|---|
| सैलरी का TDS सर्टिफ़िकेट (कंपनी देती है) | फ़ॉर्म 16 | फ़ॉर्म 130 |
| सैलरी के अलावा TDS सर्टिफ़िकेट (FD ब्याज आदि) | फ़ॉर्म 16A | फ़ॉर्म 131 |
| टैक्स क्रेडिट का सालाना ब्यौरा | फ़ॉर्म 26AS | फ़ॉर्म 168 |
नौकरीपेशा के लिए मतलब: टैक्स ईयर 2026-27 की सैलरी का TDS सर्टिफ़िकेट (जो जून 2027 के आसपास मिलेगा) “फ़ॉर्म 130” नाम से आ सकता है। काम वही है: कितनी सैलरी, कितना TDS कटा।
क्या बदला और क्या नहीं

टैक्स ईयर 2026-27 के स्लैब (नई व्यवस्था, डिफ़ॉल्ट)
| आय (स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद) | टैक्स दर |
|---|---|
| ₹4 लाख तक | शून्य |
| ₹4 लाख से ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 लाख से ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 लाख से ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 लाख से ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 लाख से ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से ऊपर | 30% |
रिबेट (अब धारा 156) से ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स शून्य; सैलरी वालों को ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलाकर ₹12.75 लाख तक। टैक्स पर 4% सेस अलग। रिबेट शेयर से हुए अल्पकालिक मुनाफ़े जैसी “विशेष दर” वाली आय पर नहीं मिलती।
पुरानी व्यवस्था (80C, HRA, होम लोन जैसी छूट वाली) भी चालू है: ₹2.5 लाख तक शून्य, ₹2.5 से 5 लाख 5%, ₹5 से 10 लाख 20%, ₹10 लाख से ऊपर 30%, और ₹5 लाख तक की आय पर रिबेट। कौन सी व्यवस्था आपके लिए सही है, यह पूरा हिसाब यहाँ: नई या पुरानी टैक्स व्यवस्था, कौन सी चुनें।
आपकी स्थिति के हिसाब से क्या असर
स्थिति 1: नौकरीपेशा
टैक्स का हिसाब वही। फ़र्क सिर्फ़ कागज़ों पर: कंपनी के “निवेश घोषणा” फ़ॉर्म में 80C की जगह धारा 123 लिखा दिख सकता है, और साल के अंत में फ़ॉर्म 16 की जगह फ़ॉर्म 130। पुरानी व्यवस्था चुननी हो, तो कंपनी को साल की शुरुआत में बताएँ, वरना TDS नई व्यवस्था से कटेगा।
स्थिति 2: पेंशनर और वरिष्ठ नागरिक
पेंशन पर स्टैंडर्ड डिडक्शन और FD ब्याज पर छूट (पुरानी 80TTB, अब धारा 153) जारी हैं। FD पर TDS न कटवाने वाले फ़ॉर्म 15G/15H के नए नंबर और नियम बैंक से ज़रूर पूछें, क्योंकि फ़ॉर्मों के नाम बदल रहे हैं।
स्थिति 3: छोटे दुकानदार, फ़्रीलांसर
अनुमानित आय (presumptive) वाली योजना, यानी पुरानी 44AD और 44ADA, नए क़ानून में भी है (ज़्यादातर सूचियों में धारा 58)। सीमा और दरें अपने CA से टैक्स ईयर 2026-27 के हिसाब से पक्की करें।
स्थिति 4: शेयर और म्यूचुअल फ़ंड के निवेशक
कैपिटल गेन की दरें (लंबी अवधि 12.5% और ₹1.25 लाख तक छूट, कम अवधि 20%, शेयर और इक्विटी फ़ंड पर) वैसी ही चल रही हैं; सिर्फ़ धाराओं के नंबर बदले। बजट 2026 के मुताबिक़ टैक्स ईयर 2026-27 से कंपनी के बायबैक से मिला पैसा शेयरधारक के हाथ में कैपिटल गेन माना जाएगा। बायबैक क्या है: शेयर बायबैक क्या है।
FY 2025-26 का ITR किस क़ानून से भरेंगे

5 काम जो आज ही कर लें

NiveshNote: पैसे की बात, एक मिनट में
SIP, म्यूचुअल फ़ंड, CIBIL, टैक्स और शेयर बाज़ार के आसान शॉर्ट वीडियो, Storyshala के YouTube चैनल NiveshNote पर।
सावधान: “नए क़ानून के नाम पर” फ़र्ज़ी कॉल और SMS
“नए टैक्स क़ानून में PAN अपडेट करो”, “रिफ़ंड के लिए लिंक पर क्लिक करो” जैसे संदेश ठगी हो सकते हैं। आयकर विभाग OTP, PIN या कार्ड की जानकारी नहीं माँगता। सिर्फ़ incometax.gov.in पर ख़ुद जाकर काम करें। ठगी हो जाए, तो: ऑनलाइन फ़्रॉड हो जाए तो क्या करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 क्या है?
1961 के इनकम टैक्स क़ानून की जगह आया नया क़ानून, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू है। टैक्स की दरें वही, पर भाषा आसान, धाराएँ कम (536), टैक्स ईयर का नया शब्द और धाराओं व फ़ॉर्मों के नए नंबर।
नया इनकम टैक्स एक्ट कब से लागू है?
1 अप्रैल 2026 से। यानी टैक्स ईयर 2026-27 (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027) की कमाई इसी से चलेगी।
नए एक्ट में 80C कौन सी धारा है?
धारा 123 (अनुसूची XV के साथ)। सीमा ₹1.5 लाख ही है, और यह छूट सिर्फ़ पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है।
टैक्स ईयर क्या है?
वह वित्त वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) जिसमें कमाई हुई। इसने “पिछला वर्ष” और “आकलन वर्ष” की जगह ली है।
क्या नए एक्ट से टैक्स स्लैब बदले?
नहीं। नई व्यवस्था में ₹4 लाख तक शून्य से 30% तक के वही स्लैब, ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन और ₹12 लाख तक टैक्स शून्य वाली रिबेट जारी है।
फ़ॉर्म 16 का नया नाम क्या है?
फ़ॉर्म 130। FD ब्याज जैसे दूसरे TDS का सर्टिफ़िकेट (पुराना 16A) अब फ़ॉर्म 131, और 26AS अब फ़ॉर्म 168।
2026 में भरने वाला ITR किस क़ानून से है?
FY 2025-26 (31 मार्च 2026 तक) की कमाई का ITR पुराने 1961 Act के हिसाब से। नए Act वाला पहला ITR टैक्स ईयर 2026-27 का होगा, जो 2027 में भरा जाएगा।
स्रोत (19 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए)
- Income-tax Act, 2025 (राष्ट्रपति की मंज़ूरी 21 अगस्त 2025, लागू 1 अप्रैल 2026), आयकर विभाग, incometax.gov.in
- CBDT: Income-tax Rules, 2026, अधिसूचना 22/2026, G.S.R. 198(E), 20 मार्च 2026
- ClearTax: Income Tax Act 2025, धाराओं और फ़ॉर्मों का मिलान
- TaxGuru: Income-tax Act 2025 बनाम 1961, रोज़ की धाराओं की सूची
- केंद्रीय बजट 2026-27 (1 फ़रवरी 2026): स्लैब में बदलाव नहीं
यह लेख जानकारी के लिए है, टैक्स या क़ानूनी सलाह नहीं। अपने रिटर्न और निवेश के फ़ैसले के लिए CA या आयकर विभाग की आधिकारिक सामग्री देखें।
ये भी पढ़ें
- नई या पुरानी टैक्स व्यवस्था, कौन सी चुनें
- ELSS क्या है (80C, अब धारा 123)
- सरकारी बॉन्ड क्या हैं
- म्यूचुअल फ़ंड में निवेश की पूरी गाइड
- होम लोन कैसे लें





