रात को नींद क्यों नहीं आती? विदुर नीति के 4 कारण और आज रात का एक नियम

रात को नींद क्यों नहीं आती? महाभारत में यही हाल राजा धृतराष्ट्र का था। नींद नहीं आई तो उन्होंने आधी रात को महात्मा विदुर को बुलाया। विदुर ने कोई इलाज नहीं बताया: न मंत्र, न उपाय, न सोने का कोई तरीक़ा। उन्होंने बस चार तरह के लोग गिना दिए जिनकी नींद रात में उड़ जाती है।

पहली बार पढ़ने पर लगता है कि सवाल टाल दिया गया। पर यही उनका जवाब था, और शायद सबसे ईमानदार जवाब। विदुर के हिसाब से नींद ठीक नहीं की जाती। जो चीज़ नींद खा रही है, वो ठीक की जाती है।

विषय सूची

छोटा जवाब: विदुर के अनुसार इन 4 की नींद उड़ती है

  1. कमज़ोर, जिसने किसी ताक़तवर से बैर ले लिया हो
  2. हृतस्व: जिसका अपना कुछ छिन गया हो
  3. कामी: जिसके मन में कोई चाह अधूरी अटकी हो
  4. चोर: जिसके पास कुछ ऐसा है जो उसका नहीं, और ये बात सिर्फ़ वो जानता है
अभियुक्तं बलवता दुर्बलं हीनसाधनम्।
हृतस्वं कामिनं चोरमाविशन्ति प्रजागराः॥

अर्थ: जिस कमज़ोर और साधनहीन पर किसी बलवान ने चढ़ाई कर दी हो, जिसका सब कुछ छिन गया हो, जो कामी हो और जो चोर हो, इन्हें रात में जागने का रोग पकड़ लेता है। (महाभारत, उद्योग पर्व, प्रजागर पर्व, अध्याय 33, श्लोक 13)

पूरा वीडियो: रात को नींद क्यों नहीं आती? विदुर ने इलाज नहीं बताया, 4 लोग गिनाए (SanatanSci)

यह बात महाभारत में कहाँ है

यह हिस्सा महाभारत के उद्योग पर्व से आता है, और उस हिस्से का नाम ही प्रजागर पर्व है। प्रजागर यानी जागते रह जाना। युद्ध से पहले की वो रात, जब धृतराष्ट्र बेचैन थे और विदुर उन्हें रात भर समझाते रहे। विदुर नीति के ज़्यादातर वचन इसी बातचीत से निकले हैं।

नीचे चारों हालतें एक एक करके हैं। पढ़ते हुए पहचानते चलिए कि आप इनमें से किसके सबसे पास हैं। आख़िर में विदुर की एक और सूची है, जो बताती है कि रात के उन घंटों में आप ख़ुद क्या बन जाते हैं। वो इन चारों से भी ज़्यादा काम की है।

पहला: वो कमज़ोर, जिसने ताक़तवर से बैर ले लिया

विदुर की गिनती यहीं से शुरू होती है। वो आदमी जिसने लड़ाई तो छेड़ दी, पर जिसके पास लड़ने का सामान नहीं है।

इसे आज की शक्ल में देखिए। दफ़्तर में किसी बड़े पद वाले से ठन गई। या ज़मीन के मामले में ऐसे आदमी से उलझ गए जिसकी पहुँच आपसे कहीं ऊपर है। दिन में काम चलता रहता है, पर रात को दिमाग़ वही एक दृश्य बार-बार चलाता है: अब वो क्या करेगा?

इसमें थकाने वाली चीज़ ये है कि जो होने वाला है वो आपके हाथ में नहीं है, और जो आपके हाथ में है वो आप रात को कर नहीं सकते। विदुर यहाँ कोई दिलासा नहीं देते। वो बस इतना बता देते हैं कि यह हालत नींद छीन लेती है।

तो अगर आपकी रातें किसी एक आदमी के अगले क़दम के इंतज़ार में कट रही हैं, तो कारण नींद में नहीं है। कारण उस अधूरी लड़ाई में है।

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दूसरा: हृतस्व, जिसका अपना कुछ छिन गया

श्लोक में शब्द आया है हृतस्व। हृत यानी छीना हुआ, स्व यानी अपना। जिसका अपना कुछ चला गया।

यहाँ बहुत बारीक बात है। विदुर ने यह नहीं कहा कि जिसके पास कुछ नहीं है। ग़रीबी और छिन जाना, ये दो अलग बातें हैं। जिसके पास कभी कुछ था ही नहीं, वो सो जाता है। पर जिसके हाथ से कुछ निकल गया, उसकी नींद उसी के साथ चली जाती है। यही फ़र्क़ बताता है कि दुख किस चीज़ से पैदा होता है।

आज यह नौकरी जाने में दिखता है, कारोबार डूबने में दिखता है, किसी अपने के चले जाने में दिखता है। और सबसे ज़्यादा उस बात में दिखता है जो कभी हुई ही नहीं: वो मौक़ा जो हाथ से निकल गया।

दिन में आदमी संभला रहता है। पर रात को वो हिसाब लगाने बैठ जाता है कि अगर वो एक फ़ैसला अलग होता तो आज क्या होता। अगर रात को आपका दिमाग़ आगे की तरफ़ नहीं, पीछे की तरफ़ दौड़ता है, तो आप यहीं खड़े हैं।

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तीसरा: कामी, जिसकी कोई चाह अटकी है

इस शब्द को अक्सर बहुत छोटा करके समझा जाता है। काम का अर्थ है चाह। तो कामी वो है जिसके मन में कोई चाह अटकी हुई है और पूरी नहीं हो रही। वो चाह किसी व्यक्ति की हो सकती है, किसी चीज़ की, या किसी पद की।

विदुर का इशारा उस बेचैनी पर है जो अधूरी चाह पैदा करती है, और आज यह शायद सबसे आम वजह है। फ़ोन रात में इसीलिए हाथ से नहीं छूटता, क्योंकि उसमें वो सब दिख रहा होता है जो अभी अपने पास नहीं है: दूसरों की तरक़्क़ी, दूसरों के घर, दूसरों की छुट्टियाँ।

अपने आप से पूछिए कि सोने से ठीक पहले आख़िरी चीज़ आपने क्या देखी थी। हर बार जब आप स्क्रीन नीचे खिसकाते हैं, चाह थोड़ी और बढ़ जाती है, और नींद थोड़ी और दूर।

विदुर चाह को बुरा नहीं कहते। वो सिर्फ़ इतना बताते हैं कि जो चाह रात तक आपके साथ बिस्तर में आ जाए, वो आपसे नींद वसूल कर रही है।

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चौथा: चोर, और वो बात जो सिर्फ़ आप जानते हैं

पहली नज़र में लगता है कि यह तो हम पर लागू ही नहीं होता। पर ज़रा ठहरिए। विदुर चोर को इस सूची में क्यों रख रहे हैं? क्योंकि चोर को डर सोने नहीं देता। उसे यह डर जगाए रखता है कि जो उसने लिया है, वो उसका नहीं है।

यह बात चोरी से कहीं आगे तक जाती है। वो श्रेय जो किसी और का था। वो बात जो छिपा ली गई। वो फ़ायदा जो किसी की क़ीमत पर मिला। आदमी दिन भर ख़ुद को समझा लेता है कि इसमें ग़लत क्या है। पर रात को कोई बहस करने वाला नहीं होता: सिर्फ़ वो होता है, और वो जानता है।

यहीं विदुर की पकड़ सबसे गहरी है। वो उस आदमी की बात नहीं कर रहे जो पकड़ा गया। वो उस आदमी की बात कर रहे हैं जिसे कोई पकड़ ही नहीं सका, और फिर भी चैन नहीं है।

अगर नींद आँख बंद करते ही टूटती है और कोई एक याद बार-बार लौटती है, तो सवाल गद्दे का नहीं है।

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रात के उन घंटों में आप ख़ुद कौन होते हैं: दस वाली सूची

विदुर ने इसी पर्व में एक और सूची दी है। उन्होंने कहा कि दस तरह के लोग धर्म को नहीं जानते, यानी दस ऐसी हालतें हैं जिनमें आदमी सही और ग़लत पहचान ही नहीं पाता।

मत्तः प्रमत्त उन्मत्तः श्रान्तः क्रुद्धो बुभुक्षितः।
त्वरमाणश्च लुब्धश्च भीतः कामी च ते दश॥

अर्थ: नशे में डूबा, असावधान, पागल, थका हुआ, क्रोधी, भूखा, जल्दबाज़, लोभी, डरा हुआ और कामी, ये दस धर्म को नहीं पहचान पाते।

अब इस सूची को रात के दो बजे पर रखकर देखिए। आप थके हुए हैं: यह पहली हालत। आप डरे हुए हैं, क्योंकि रात में हर समस्या बड़ी दिखती है: यह दूसरी। और अक्सर कहीं गहरे में नाराज़ भी हैं: यह तीसरी।

यानी रात के उन घंटों में आप इस सूची की तीन हालतों में एक साथ खड़े होते हैं, और विदुर साफ़ कहते हैं कि इन हालतों में आदमी धर्म नहीं पहचान पाता। उसी वक़्त आप अपनी ज़िंदगी के सबसे बड़े सवालों के जवाब ढूँढ़ रहे होते हैं। सबसे कमज़ोर हालत में सबसे बड़े सवाल।

एक बात साफ़ कर दें: इन दोनों सूचियों को जोड़कर देखना इस लेख का अपना निष्कर्ष है। विदुर ने इन्हें एक साथ नहीं कहा, पर दोनों उन्हीं की हैं, और एक ही पर्व में हैं।

यह हिस्सा वीडियो में 4:51 से देखिए

आज रात के लिए दो नियम

पहला नियम: रात को कोई फ़ैसला मत लीजिए। सोचिए, महसूस कीजिए, जो आना है आने दीजिए, पर कोई नतीजा मत निकालिए। उस वक़्त जो भी नतीजा निकलेगा, वो थके हुए, डरे हुए और नाराज़ आदमी का नतीजा होगा। और सुबह वो आदमी वहाँ नहीं होगा।

दूसरा काम इससे भी छोटा है: बस पहचानिए। जब दिमाग़ चलना शुरू करे, तो उसे रोकिए मत। बस इतना देख लीजिए कि वो चारों में से किस तरफ़ जा रहा है: किसी की ताक़त की तरफ़, किसी खोई हुई चीज़ की तरफ़, किसी अधूरी चाह की तरफ़, या किसी ऐसी बात की तरफ़ जो सिर्फ़ आप जानते हैं। पहचान लीजिए, उससे लड़िए मत। जो कारण दिख जाता है, वो डराना बंद कर देता है।

यह हिस्सा वीडियो में 5:58 से देखिए

नींद न आना कमज़ोरी नहीं, एक ख़बर है

विदुर ने नींद का उपाय इसीलिए नहीं बताया। उनके हिसाब से नींद ठीक नहीं की जाती। जो चीज़ नींद खा रही है, वो ठीक की जाती है।

नींद न आने को दुश्मन मत समझिए। वो एक ख़बर है, जो मन आपको तब भेजता है जब दिन में आप उसकी नहीं सुनते।

अब आप ख़ुद देखिए: इन चारों में से कौन सा आपकी रात में आता है? ताक़तवर से बैर, खोई हुई चीज़, अधूरी चाह, या वो बात जो सिर्फ़ आप जानते हैं? चाहें तो नीचे कमेंट में सिर्फ़ नंबर लिख दीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रात को नींद क्यों नहीं आती?

विदुर नीति के अनुसार चार हालतों में नींद उड़ती है: जब किसी ताक़तवर से बैर हो, जब अपना कुछ छिन गया हो, जब कोई चाह अधूरी अटकी हो, और जब मन में कोई ऐसी बात हो जो सिर्फ़ आप जानते हैं।

विदुर ने नींद का इलाज क्यों नहीं बताया?

उनके हिसाब से नींद ठीक नहीं की जाती। जो चीज़ नींद खा रही है, वो ठीक की जाती है।

नींद न आने के बारे में विदुर का श्लोक कौन सा है?

महाभारत, उद्योग पर्व (प्रजागर पर्व), अध्याय 33, श्लोक 13: “अभियुक्तं बलवता दुर्बलं हीनसाधनम्। हृतस्वं कामिनं चोरमाविशन्ति प्रजागराः॥”

प्रजागर पर्व क्या है?

उद्योग पर्व का वो हिस्सा जिसमें नींद न आने से बेचैन धृतराष्ट्र को विदुर ने रात भर समझाया। प्रजागर का अर्थ है जागते रह जाना।

हृतस्व का अर्थ क्या है?

हृत यानी छीना हुआ, स्व यानी अपना। जिसका अपना कुछ चला गया हो।

क्या ग़रीबी और कुछ छिन जाना एक ही बात है?

नहीं। जिसके पास कभी कुछ था ही नहीं, वो सो जाता है। जिसके हाथ से कुछ निकल गया, उसकी नींद उसी के साथ चली जाती है।

कामी का मतलब क्या सिर्फ़ प्रेम है?

नहीं। काम का अर्थ है चाह। कोई भी अधूरी चाह: किसी व्यक्ति की, किसी चीज़ की या किसी पद की।

विदुर की बताई दस हालतें कौन सी हैं?

नशे में डूबा, असावधान, पागल, थका हुआ, क्रोधी, भूखा, जल्दबाज़, लोभी, डरा हुआ और कामी। इन हालतों में आदमी सही और ग़लत नहीं पहचान पाता।

रात को फ़ैसला क्यों नहीं लेना चाहिए?

क्योंकि रात दो बजे आप अक्सर उन दस में से तीन हालतों में होते हैं: थके, डरे और नाराज़। उस वक़्त का नतीजा सुबह वाला आदमी नहीं लेगा।

क्या यह चिकित्सा सलाह है?

नहीं। यह मन और व्यवहार की बात है। नींद की दिक़्क़त लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से ज़रूर मिलिए।

स्रोत

  • महाभारत, उद्योग पर्व, प्रजागर पर्व (विदुर नीति), अध्याय 33, श्लोक 13: “अभियुक्तं बलवता दुर्बलं हीनसाधनम्। हृतस्वं कामिनं चोरमाविशन्ति प्रजागराः॥”
  • उसी अध्याय से, दस हालतें: “मत्तः प्रमत्त उन्मत्तः श्रान्तः क्रुद्धो बुभुक्षितः। त्वरमाणश्च लुब्धश्च भीतः कामी च ते दश॥” (इस श्लोक की संख्या अलग अलग संस्करणों में बदलती है)

आगे पढ़िए

यह लेख SanatanSci के वीडियो पर आधारित है। ऐसे और वीडियो के लिए YouTube पर SanatanSci देखिए।

नोट: यह मन और व्यवहार की बात है, चिकित्सा सलाह नहीं। नींद न आना लगातार बना रहे तो डॉक्टर से ज़रूर मिलिए, कुछ कारण सचमुच शारीरिक होते हैं।

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