
Gauri Ganesh pujan vidhi यानी गणेश अम्बिका पूजन हर शुभ काम की पहली पूजा है। शादी, गृह प्रवेश, मुंडन, नवरात्र, शिवरात्रि, सत्यनारायण कथा, दीपावली पूजन, रुद्राभिषेक या कोई भी अनुष्ठान, सबसे पहले भगवान गणेश और माँ गौरी की पूजा होती है, फिर कलश, नवग्रह और मुख्य देवता की। इस पेज पर गौरी गणेश पूजन की संपूर्ण विधि वैदिक मंत्रों सहित दी गई है: आचमन और पवित्री धारण, स्वस्त्ययन, पूरा संकल्प, ध्यान, आवाहन, प्राण प्रतिष्ठा, पंचामृत के पाँच अलग स्नान, वस्त्र से दक्षिणा, आरती, विशेषार्घ्य और प्रार्थना तक।
पूरी विधि और मंत्र गीता प्रेस, गोरखपुर की “नित्यकर्म पूजाप्रकाश” (विशिष्ट पूजा प्रकरण, “गणपति और गौरी की पूजा”) से लिए गए हैं, जिसमें हर वैदिक मंत्र के साथ यजुर्वेद का संदर्भ भी दिया है। गणेश और गौरी वंदना के मंत्र पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की “कर्मकाण्ड भास्कर” से भी मिलाए गए हैं।
छोटा जवाब: गौरी गणेश पूजन में पहले आचमन, पवित्रीकरण और स्वस्त्ययन होता है, फिर संकल्प। इसके बाद गणेश जी और गौरी जी का ध्यान, आवाहन (गौरी को गणेश जी की दाहिनी ओर) और प्रतिष्ठा करके पाद्य, अर्घ्य, आचमन, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, पंचामृत, गंधोदक और शुद्ध जल से स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, अक्षत, फूल, दूर्वा, सिंदूर, अबीर, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, ताम्बूल, दक्षिणा, आरती, पुष्पांजलि, प्रदक्षिणा, विशेषार्घ्य और प्रार्थना की जाती है। हर उपचार का नाम मंत्र है: “ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः”।
विषय सूची
गौरी गणेश पूजन: एक नज़र में
| बात | जानकारी |
|---|---|
| किसकी पूजा | भगवान गणेश और माँ गौरी (अम्बिका, पार्वती) |
| कब होती है | विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत, नवरात्र, शिवरात्रि, दीपावली, सत्यनारायण, रुद्राभिषेक और हर अनुष्ठान की शुरुआत में |
| प्रतिमा न हो तो | सुपारी पर मौली लपेटकर अक्षत पर रखें |
| गौरी कहाँ | गणेश जी की दाहिनी ओर |
| मुख्य नाम मंत्र | ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः |
| मुख किस ओर | पूर्व की ओर मुख करके आसन पर बैठें |
| पूजा के बाद | कलश स्थापन, पुण्याहवाचन, नवग्रह पूजन और फिर मुख्य देवता की पूजा |
| स्रोत | नित्यकर्म पूजाप्रकाश (गीता प्रेस), कर्मकाण्ड भास्कर |
गौरी गणेश की पूजा सबसे पहले क्यों
नित्यकर्म पूजाप्रकाश के अनुसार किसी भी यज्ञ, उत्सव या अनुष्ठान, जैसे नवरात्र पूजन, शिवरात्रि पर शिव पूजन, पार्थिव पूजन, रुद्राभिषेक, सत्यनारायण पूजन या दीपावली पूजन में, शुरुआत में स्वस्तिवाचन, पुण्याहवाचन, गणेश, कलश, नवग्रह और रक्षा विधान किए जाते हैं, और उसके बाद प्रधान देवता की पूजा होती है।
कर्मकाण्ड भास्कर में गणेश जी को विवेक के प्रतीक, विघ्नों का नाश करने वाले प्रथम पूज्य और माँ गौरी को श्रद्धा, निर्विकारिता और पवित्रता की प्रतीक मातृशक्ति कहा गया है। यानी हर शुभ काम विवेक और श्रद्धा, दोनों के साथ शुरू हो।
देव पूजन में पहले वेद मंत्र, फिर आगम (पुराण) मंत्र और बाद में नाम मंत्र का उच्चारण किया जाता है। जिन्हें वेद मंत्र न आते हों, वे पुराण के श्लोक पढ़ें, और जो इनका भी शुद्ध उच्चारण न कर सकें, वे केवल नाम मंत्र से पूजा करें। इस लेख में हर उपचार में तीनों दिए गए हैं।
गौरी गणेश पूजन सामग्री सूची
| सामग्री | किस काम में |
|---|---|
| गणेश जी और गौरी जी की मूर्ति, या दो साबुत सुपारी | आवाहन के लिए |
| मौली (कलावा, लाल धागा) | सुपारी पर लपेटने, वस्त्र और उपवस्त्र के लिए |
| अक्षत (साबुत चावल), रोली, कुमकुम | आसन, तिलक |
| पान के पत्ते | सुपारी रखने, ताम्बूल के लिए |
| जल से भरा कलश, लोटा, पंचपात्र, आचमनी | आचमन, स्नान |
| कुश (पवित्री) | पवित्री धारण |
| दूध, दही, घी, शहद, शक्कर | पाँच अलग स्नान और पंचामृत |
| चंदन (मलयगिरि), इत्र | चंदन, गंधोदक |
| वस्त्र या मौली, यज्ञोपवीत (जनेऊ) | वस्त्र, यज्ञोपवीत |
| फूल, फूलमाला, लाल फूल | पुष्प, पुष्पांजलि |
| दूर्वा (दूब) | गणेश जी को विशेष |
| सिंदूर, अबीर, गुलाल, हल्दी | सिंदूर और सुगंधित द्रव्य |
| धूप, घी का दीपक, कपूर | धूप, दीप, आरती |
| नैवेद्य (मोदक या लड्डू), मौसमी फल | भोग |
| लौंग, इलायची, सुपारी | ताम्बूल |
| दक्षिणा (सिक्का) | दक्षिणा |
| ताँबे का पात्र | विशेषार्घ्य |
पूजा का सामान एक साथ लेना हो तो पूजा सामग्री किट और कलावा मौली जैसी चीज़ें आसानी से मिल जाती हैं। पूरी विधि की किताब चाहिए तो गीता प्रेस की नित्यकर्म पूजाप्रकाश रखें।
सुपारी से गौरी गणेश कैसे बनाएँ
- चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ और एक पात्र या थाली में अक्षत से अष्टदल कमल (आठ पंखुड़ियों का कमल) बनाएँ।
- दो साबुत सुपारी लें और उन पर मौली लपेट दें।
- यदि गणेश और अम्बिका की मूर्ति न हो, तो एक सुपारी गणेश जी के रूप में अक्षत पर रखें।
- दूसरी सुपारी गणेश जी की दाहिनी ओर गौरी जी के रूप में रखें, क्योंकि पूजा विधि में गौरी जी का आवाहन गणेश जी की दाहिनी ओर बताया गया है।
- चाहें तो दोनों के नीचे पान का पत्ता रख सकते हैं।

पूजा की शुरुआत: आचमन, पवित्री और पवित्रीकरण
पूजा के पात्रों को उनकी जगह रखकर पूर्व की ओर मुख करके आसन पर बैठें।
आचमन: तीन बार जल पिएँ और हर बार बोलें:
ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः।
फिर दाहिने हाथ के अँगूठे के मूल भाग से “ॐ हृषीकेशाय नमः, ॐ गोविन्दाय नमः” कहते हुए होंठ पोंछें और हाथ धो लें।
पवित्री धारण: कुश की पवित्री इस मंत्र से धारण करें:
पवित्रे स्थो वैष्णव्यौ सवितुर्वः प्रसव उत्पुनाम्यच्छिद्रेण पवित्रेण सूर्यस्य रश्मिभिः। तस्य ते पवित्रपते पवित्रपूतस्य यत्कामः पुने तच्छकेयम्।
इसके बाद प्राणायाम करें (तीन बार गहरी साँस लें और धीरे छोड़ें)।
पवित्रीकरण: बाएँ हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ से अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर छिड़कें:
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु।
स्वस्त्ययन (स्वस्तिवाचन)
अब हाथ में अक्षत और फूल लेकर स्वस्त्ययन पढ़ें। पूरा स्वस्त्ययन शुक्ल यजुर्वेद (25.14 से 25.23) से है। इसके मुख्य मंत्र:
ॐ आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः। देवा नो यथा सदमिद् वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे दिवे॥
स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥
भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः। स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेमहि देवहितं यदायुः॥
शांति पाठ (शुक्ल यजुर्वेद 36.17):
ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ यतो यतः समीहसे ततो नो अभयं कुरु। शं नः कुरु प्रजाभ्योऽभयं नः पशुभ्यः॥ सुशान्तिर्भवतु॥ (36.22)
अर्थ: हर दिशा से शुभ और कल्याणकारी विचार हमारे पास आएँ। इंद्र, पूषा, गरुड़ और बृहस्पति हमारा कल्याण करें। हम कानों से शुभ सुनें, आँखों से शुभ देखें। आकाश, अंतरिक्ष, पृथ्वी, जल, औषधियाँ, वनस्पतियाँ और सब कुछ शांत हो, और वह शांति हमें मिले।
देवताओं को नमस्कार:
श्रीमन्महागणाधिपतये नमः। लक्ष्मीनारायणाभ्यां नमः। उमामहेश्वराभ्यां नमः। वाणीहिरण्यगर्भाभ्यां नमः। शचीपुरन्दराभ्यां नमः। मातृपितृचरणकमलेभ्यो नमः। इष्टदेवताभ्यो नमः। कुलदेवताभ्यो नमः। ग्रामदेवताभ्यो नमः। वास्तुदेवताभ्यो नमः। स्थानदेवताभ्यो नमः। सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः। सर्वेभ्यो ब्राह्मणेभ्यो नमः। ॐ सिद्धिबुद्धिसहिताय श्रीमन्महागणाधिपतये नमः।
मंगल श्लोक:
सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः। लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः॥ धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः। द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि॥ विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा। संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते॥ शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥ अभीप्सितार्थसिद्ध्यर्थं पूजितो यः सुरासुरैः। सर्वविघ्नहरस्तस्मै गणाधिपतये नमः॥ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ सर्वदा सर्वकार्येषु नास्ति तेषाममङ्गलम्। येषां हृदिस्थो भगवान् मङ्गलायतनं हरिः॥ वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
श्रीगणेशाम्बिकाभ्यां नमः।
हाथ में लिए अक्षत और फूल गणेश अम्बिका पर चढ़ा दें।
अर्थ (मुख्य श्लोकों का): गणेश जी के बारह नाम पढ़ने या सुनने वाले को विद्या, विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा और संकट में कोई विघ्न नहीं आता। श्वेत वस्त्र वाले, चंद्रमा जैसे उज्ज्वल, चार भुजा वाले, प्रसन्नमुख भगवान का सब विघ्नों की शांति के लिए ध्यान करें। सब मंगलों की मंगल, सब कामनाएँ पूरी करने वाली, शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली गौरी नारायणी को नमस्कार। हे वक्रतुंड, मेरे सब कामों को सदा निर्विघ्न करें।
गौरी गणेश पूजन का संकल्प (पूरा प्रारूप)
दाहिने हाथ में जल, अक्षत और द्रव्य (सिक्का) लेकर संकल्प करें। खाली जगह (…..) पर अपनी जानकारी भरें।
(क) निष्काम संकल्प:
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे आर्यावर्तैकदेशे ….. नगरे/ग्रामे/क्षेत्रे ….. वैक्रमाब्दे ….. संवत्सरे ….. मासे ….. शुक्ल/कृष्णपक्षे ….. तिथौ ….. वासरे ….. प्रातः/सायंकाले ….. गोत्रः ….. शर्मा/वर्मा/गुप्तः अहं ममोपात्तदुरितक्षयद्वारा श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं ….. देवस्य पूजनं करिष्ये।
(ख) सकाम संकल्प (किसी विशेष कामना के लिए, ऊपर का संकल्प “अहं” तक बोलकर):
अहं श्रुतिस्मृतिपुराणोक्तफलप्राप्त्यर्थं मम सकुटुम्बस्य सपरिवारस्य क्षेमस्थैर्यायुरारोग्यैश्वर्याभिवृद्ध्यर्थम् आधिभौतिकाधिदैविकाध्यात्मिकत्रिविधतापशमनार्थं धर्मार्थकाममोक्षफलप्राप्त्यर्थं नित्यकल्याणलाभाय भगवत्प्रीत्यर्थं ….. देवस्य पूजनं करिष्ये।
खाली जगह कैसे भरें:
| जगह | क्या बोलें | उदाहरण |
|---|---|---|
| नगरे/ग्रामे | अपने शहर या गाँव का नाम | पाटलिपुत्र नगरे, राँची नगरे |
| वैक्रमाब्दे | विक्रम संवत | 2083 (मार्च 2026 से मार्च 2027 तक) |
| मासे | हिंदू महीना | कार्तिक मासे |
| शुक्ल/कृष्णपक्षे | पक्ष | शुक्लपक्षे |
| तिथौ | तिथि | प्रतिपदा तिथौ |
| वासरे | वार | सोमवासरे, मंगलवासरे |
| गोत्रः | अपना गोत्र | कश्यपगोत्रः |
| शर्मा/वर्मा/गुप्तः | अपना नाम | रामकुमार शर्मा |
| ….. देवस्य | पूजा का नाम | गौरी गणेश पूजन में “गणेशाम्बिकयोः” |
संवत्सर का नाम, मास और तिथि उस दिन के पंचांग से देखें। संस्कृत न बोल सकें तो हिंदी में भी संकल्प कर सकते हैं: “मैं (नाम), (गोत्र) गोत्र का, आज (तिथि) को अपने परिवार के कल्याण के लिए गौरी गणेश की पूजा करता हूँ।” फिर जल भूमि पर छोड़ दें।
Gauri Ganesh Pujan Vidhi: ध्यान, आवाहन और प्रतिष्ठा
पूजा में जो वस्तु न हो, उसके लिए “मनसा परिकल्प्य समर्पयामि” कहें, जैसे आभूषण न हो तो “आभूषणं मनसा परिकल्प्य समर्पयामि”।
1. गणेश जी का ध्यान
हाथ में अक्षत लेकर ध्यान करें:
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
अर्थ: गज के मुख वाले, भूतगणों से सेवित, कैथ और जामुन के फल प्रेम से खाने वाले, उमा के पुत्र, शोक का नाश करने वाले विघ्नेश्वर के चरण कमलों को मैं नमस्कार करता हूँ।
2. गौरी जी का ध्यान
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः। नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्॥
श्रीगणेशाम्बिकाभ्यां नमः, ध्यानं समर्पयामि।
अर्थ: देवी को, महादेवी को, शिवा को सदा नमस्कार है। प्रकृति रूपा, कल्याणी देवी को हम नियम से प्रणाम करते हैं।
3. गणेश जी का आवाहन
वैदिक मंत्र (यजुर्वेद 23.19):
ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे प्रियाणां त्वा प्रियपतिं हवामहे निधीनां त्वा निधिपतिं हवामहे वसो मम। आहमजानि गर्भधमा त्वमजासि गर्भधम्॥
पौराणिक श्लोक:
एह्येहि हेरम्ब महेशपुत्र समस्तविघ्नौघविनाशदक्ष। माङ्गल्यपूजाप्रथमप्रधान गृहाण पूजां भगवन् नमस्ते॥
नाम मंत्र: ॐ भूर्भुवः स्वः सिद्धिबुद्धिसहिताय गणपतये नमः, गणपतिमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि च।
हाथ के अक्षत गणेश जी पर चढ़ा दें।
अर्थ: हे गणों के स्वामी, प्रियों के प्रिय, निधियों के निधिपति, हम आपका आवाहन करते हैं। हे हेरम्ब, महेश के पुत्र, सब विघ्नों का नाश करने में कुशल, मंगल पूजा में सबसे पहले पूजे जाने वाले भगवान, पधारिए और पूजा स्वीकार कीजिए।
4. गौरी जी का आवाहन (गणेश जी की दाहिनी ओर)
फिर अक्षत लेकर गणेश जी की दाहिनी ओर गौरी जी का आवाहन करें:
वैदिक मंत्र (शुक्ल यजुर्वेद 23.18):
ॐ अम्बे अम्बिकेऽम्बालिके न मा नयति कश्चन। ससस्त्यश्वकः सुभद्रिकां काम्पीलवासिनीम्॥
पौराणिक श्लोक:
हेमाद्रितनयां देवीं वरदां शङ्करप्रियाम्। लम्बोदरस्य जननीं गौरीमावाहयाम्यहम्॥
नाम मंत्र: ॐ भूर्भुवः स्वः गौर्यै नमः, गौरीमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि च।
अर्थ: हिमालय की पुत्री, वर देने वाली, भगवान शंकर की प्रिया और लम्बोदर गणेश की माता गौरी का मैं आवाहन करता हूँ।
5. प्राण प्रतिष्ठा
वैदिक मंत्र (यजुर्वेद 2.13):
ॐ मनो जूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमं तनोत्वरिष्टं यज्ञं समिमं दधातु। विश्वे देवास इह मादयन्तामो३म्प्रतिष्ठ॥
अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणाः क्षरन्तु च। अस्यै देवत्वमर्चायै मामहेति च कश्चन॥
गणेशाम्बिके सुप्रतिष्ठिते वरदे भवेताम्।
प्रतिष्ठापूर्वकम् आसनार्थे अक्षतान् समर्पयामि गणेशाम्बिकाभ्यां नमः। (आसन के लिए अक्षत चढ़ाएँ।)
अर्थ: इस प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठित हों, और इसमें देवत्व स्थापित हो। हे गणेश और अम्बिका, आप भली भाँति प्रतिष्ठित होकर वर देने वाले हों।
गौरी गणेश षोडशोपचार पूजन: सभी उपचारों के मंत्र
हर उपचार में पहले वैदिक मंत्र, फिर पौराणिक श्लोक और फिर नाम मंत्र दिया है। समय कम हो तो केवल नाम मंत्र बोलकर भी वह वस्तु चढ़ा सकते हैं।
पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान और पुनराचमन
ॐ देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेऽश्विनोर्बाहुभ्यां पूष्णो हस्ताभ्याम्॥ (यजुर्वेद 1.10)
एतानि पाद्यार्घ्याचमनीयस्नानीयपुनराचमनीयानि समर्पयामि गणेशाम्बिकाभ्यां नमः। (इतना कहकर जल चढ़ा दें।)
दुग्ध स्नान (दूध से)
ॐ पयः पृथिव्यां पय ओषधीषु पयो दिव्यन्तरिक्षे पयो धाः। पयस्वतीः प्रदिशः सन्तु मह्यम्॥ (यजुर्वेद 18.36)
कामधेनुसमुद्भूतं सर्वेषां जीवनं परम्। पावनं यज्ञहेतुश्च पयः स्नानार्थमर्पितम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, पयःस्नानं समर्पयामि।
दधि स्नान (दही से)
ॐ दधिक्राव्णो अकारिषं जिष्णोरश्वस्य वाजिनः। सुरभि नो मुखा करत्प्र ण आयूंषि तारिषत्॥ (यजुर्वेद 23.32)
पयसस्तु समुद्भूतं मधुराम्लं शशिप्रभम्। दध्यानीतं मया देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, दधिस्नानं समर्पयामि।
घृत स्नान (घी से)
ॐ घृतं मिमिक्षे घृतमस्य योनिर्घृते श्रितो घृतम्वस्य धाम। अनुष्वधमा वह मादयस्व स्वाहाकृतं वृषभ वक्षि हव्यम्॥ (यजुर्वेद 17.88)
नवनीतसमुत्पन्नं सर्वसंतोषकारकम्। घृतं तुभ्यं प्रदास्यामि स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, घृतस्नानं समर्पयामि।
मधु स्नान (शहद से)
ॐ मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः। माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥ मधु नक्तमुतोषसो मधुमत्पार्थिवं रजः। मधु द्यौरस्तु नः पिता॥ (यजुर्वेद 13.27, 28)
पुष्परेणुसमुद्भूतं सुस्वादु मधुरं मधु। तेजः पुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, मधुस्नानं समर्पयामि।
शर्करा स्नान (शक्कर से)
ॐ अपां रसमुद्वयसं सूर्ये सन्तं समाहितम्। अपां रसस्य यो रसस्तं वो गृह्णाम्युत्तममुपयामगृहीतोऽसीन्द्राय त्वा जुष्टं गृह्णाम्येष ते योनिरिन्द्राय त्वा जुष्टतमम्॥ (यजुर्वेद 9.3)
इक्षुरससमुद्भूतां शर्करां पुष्टिदां शुभाम्। मलापहारिकां दिव्यां स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, शर्करास्नानं समर्पयामि।
पंचामृत स्नान
ॐ पञ्च नद्यः सरस्वतीमपि यन्ति सस्रोतसः। सरस्वती तु पञ्चधा सो देशेऽभवत्सरित्॥ (यजुर्वेद 34.11)
पञ्चामृतं मयानीतं पयो दधि घृतं मधु। शर्करया समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, पञ्चामृतस्नानं समर्पयामि।
गंधोदक स्नान (चंदन मिले जल से)
ॐ अंशुना ते अंशुः पृच्यतां परुषा परुः। गन्धस्ते सोममवतु मदाय रसो अच्युतः॥ (यजुर्वेद 20.27)
मलयाचलसम्भूतचन्दनेन विनिःसृतम्। इदं गन्धोदकस्नानं कुङ्कुमाक्तं च गृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, गन्धोदकस्नानं समर्पयामि।
शुद्धोदक स्नान (शुद्ध जल से)
ॐ शुद्धवालः सर्वशुद्धवालो मणिवालस्त आश्विनाः। श्येतः श्येताक्षोऽरुणस्ते रुद्राय पशुपतये कर्णा यामा अवलिप्ता रौद्रा नभोरूपाः पार्जन्याः॥ (यजुर्वेद 24.3)
गङ्गा च यमुना चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदा सिन्धुकावेरी स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि। फिर शुद्धोदकस्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि।
वस्त्र
ॐ युवा सुवासाः परिवीत आगात् स उ श्रेयान् भवति जायमानः। तं धीरासः कवय उन्नयन्ति स्वाध्यो मनसा देवयन्तः॥ (ऋग्वेद 3.8.4)
शीतवातोष्णसंत्राणं लज्जाया रक्षणं परम्। देहालङ्करणं वस्त्रमतः शान्तिं प्रयच्छ मे॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, वस्त्रं समर्पयामि। फिर वस्त्रान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि।
उपवस्त्र
ॐ सुजातो ज्योतिषा सह शर्म वरूथमाऽसदत्स्वः। वासो अग्ने विश्वरूपं सं व्ययस्व विभावसो॥ (यजुर्वेद 11.40)
यस्याभावेन शास्त्रोक्तं कर्म किञ्चिन्न सिध्यति। उपवस्त्रं प्रयच्छामि सर्वकर्मोपकारकम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, उपवस्त्रं समर्पयामि। (उपवस्त्र न हो तो रक्तसूत्र यानी मौली चढ़ाएँ।) फिर उपवस्त्रान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि।
यज्ञोपवीत (जनेऊ)
ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्। आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥ यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्य त्वा यज्ञोपवीतेनोपनह्यामि। नवभिस्तन्तुभिर्युक्तं त्रिगुणं देवतामयम्। उपवीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वर॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, यज्ञोपवीतं समर्पयामि। फिर यज्ञोपवीतान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि।
चंदन
ॐ त्वां गन्धर्वा अखनंस्त्वामिन्द्रस्त्वां बृहस्पतिः। त्वामोषधे सोमो राजा विद्वान् यक्ष्मादमुच्यत॥ (यजुर्वेद 12.98)
श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्। विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, चन्दनानुलेपनं समर्पयामि।
अक्षत
ॐ अक्षन्नमीमदन्त ह्यव प्रिया अधूषत। अस्तोषत स्वभानवो विप्रा नविष्ठया मती योजा न्विन्द्र ते हरी॥ (यजुर्वेद 3.51)
अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुङ्कुमाक्ताः सुशोभिताः। मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वर॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, अक्षतान् समर्पयामि।
पुष्पमाला
ॐ ओषधीः प्रति मोदध्वं पुष्पवतीः प्रसूवरीः। अश्वा इव सजित्वरीर्वीरुधः पारयिष्णवः॥ (यजुर्वेद 12.77)
माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो। मयाहृतानि पुष्पाणि पूजार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, पुष्पमालां समर्पयामि।
दूर्वा (गणेश जी को विशेष)
ॐ काण्डात्काण्डात्प्ररोहन्ती परुषः परुषस्परि। एवा नो दूर्वे प्र तनु सहस्रेण शतेन च॥ (यजुर्वेद 13.20)
दूर्वाङ्कुरान् सुहरितानमृतान् मङ्गलप्रदान्। आनीतांस्तव पूजार्थं गृहाण गणनायक॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, दूर्वाङ्कुरान् समर्पयामि।
सिंदूर
ॐ सिन्धोरिव प्राध्वने शूघनासो वातप्रमियः पतयन्ति यह्वाः। घृतस्य धारा अरुषो न वाजी काष्ठा भिन्दन्नूर्मिभिः पिन्वमानः॥ (यजुर्वेद 17.95)
सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, सिन्दूरं समर्पयामि।
अबीर, गुलाल और सुगंधित द्रव्य
ॐ अहिरिव भोगैः पर्येति बाहुं ज्याया हेतिं परिबाधमानः। हस्तघ्नो विश्वा वयुनानि विद्वान् पुमान् पुमांसं परि पातु विश्वतः॥ (यजुर्वेद 29.51)
अबीरं च गुलालं च हरिद्रादिसमन्वितम्। नाना परिमलं द्रव्यं गृहाण परमेश्वर॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, नानापरिमलद्रव्याणि समर्पयामि।
फिर इसी वैदिक मंत्र के साथ सुगंधित द्रव्य (इत्र) चढ़ाएँ:
दिव्यगन्धसमायुक्तं महापरिमलाद्भुतम्। गन्धद्रव्यमिदं भक्त्या दत्तं वै परिगृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, सुगन्धिद्रव्यं समर्पयामि।
धूप
ॐ धूरसि धूर्व धूर्वन्तं धूर्व तं योऽस्मान् धूर्वति तं धूर्व यं वयं धूर्वामः। देवानामसि वह्नितमं सस्नितमं पप्रितमं जुष्टतमं देवहूतमम्॥ (यजुर्वेद 1.8)
वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः। आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, धूपमाघ्रापयामि। (धूप दिखाएँ।)
दीप
ॐ अग्निर्ज्योतिर्ज्योतिरग्निः स्वाहा सूर्यो ज्योतिर्ज्योतिः सूर्यः स्वाहा। अग्निर्वर्चो ज्योतिर्वर्चः स्वाहा सूर्यो वर्चो ज्योतिर्वर्चः स्वाहा॥ ज्योतिः सूर्यः सूर्यो ज्योतिः स्वाहा॥ (यजुर्वेद 3.9)
साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया। दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम्॥ भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने। त्राहि मां निरयाद् घोराद् दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, दीपं दर्शयामि। (दीपक दिखाएँ।)
हस्तप्रक्षालन: “ॐ हृषीकेशाय नमः” कहकर हाथ धो लें।
नैवेद्य (भोग)
नैवेद्य पर जल छिड़ककर उसे चंदन और फूल से ढकें, फिर जल से चौकोर घेरा बनाकर भगवान के आगे रखें।
ॐ नाभ्या आसीदन्तरिक्षं शीर्ष्णो द्यौः समवर्तत। पद्भ्यां भूमिर्दिशः श्रोत्रात्तथा लोकाँ२ अकल्पयन्॥ (यजुर्वेद 31.13)
ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा। ॐ प्राणाय स्वाहा। ॐ अपानाय स्वाहा। ॐ समानाय स्वाहा। ॐ उदानाय स्वाहा। ॐ व्यानाय स्वाहा। ॐ अमृतापिधानमसि स्वाहा।
शर्कराखण्डखाद्यानि दधिक्षीरघृतानि च। आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, नैवेद्यं निवेदयामि। फिर नैवेद्यान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि।
ऋतुफल
ॐ याः फलिनीर्या अफला अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः। बृहस्पतिप्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्वंहसः॥ (यजुर्वेद 12.89)
इदं फलं मया देव स्थापितं पुरतस्तव। तेन मे सफलावाप्तिर्भवेज्जन्मनि जन्मनि॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, ऋतुफलानि समर्पयामि। फिर फलान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि।
उत्तरापोशन: उत्तरापोऽशनार्थे जलं समर्पयामि। गणेशाम्बिकाभ्यां नमः। (जल दें।)
करोद्वर्तन (हाथों में चंदन)
ॐ अंशुना ते अंशुः पृच्यतां परुषा परुः। गन्धस्ते सोममवतु मदाय रसो अच्युतः॥ (यजुर्वेद 20.27)
चन्दनं मलयोद्भूतं कस्तूर्यादिसमन्वितम्। करोद्वर्तनकं देव गृहाण परमेश्वर॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, करोद्वर्तनकं चन्दनं समर्पयामि।
ताम्बूल (पान)
ॐ यत्पुरुषेण हविषा देवा यज्ञमतन्वत। वसन्तोऽस्यासीदाज्यं ग्रीष्म इध्मः शरद्धविः॥ (यजुर्वेद 31.14)
पूगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतम्। एलादिचूर्णसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, मुखवासार्थम् एलालवंगपूगीफलसहितं ताम्बूलं समर्पयामि। (इलायची, लौंग और सुपारी के साथ पान चढ़ाएँ।)
दक्षिणा
ॐ हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्। स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम॥ (यजुर्वेद 13.4)
हिरण्यगर्भगर्भस्थं हेमबीजं विभावसोः। अनन्तपुण्यफलदमतः शान्तिं प्रयच्छ मे॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, कृतायाः पूजायाः साद्गुण्यार्थे द्रव्यदक्षिणां समर्पयामि।
आरती
ॐ इदं हविः प्रजननं मे अस्तु दशवीरं सर्वगणं स्वस्तये। आत्मसनि प्रजासनि पशुसनि लोकसन्यभयसनि। अग्निः प्रजां बहुलां मे करोत्वन्नं पयो रेतो अस्मासु धत्त॥ (यजुर्वेद 19.48)
ॐ आ रात्रि पार्थिवं रजः पितुरप्रायि धामभिः। दिवः सदांसि बृहती वि तिष्ठस आ त्वेषं वर्तते तमः॥ (यजुर्वेद 34.32)
कदलीगर्भसम्भूतं कर्पूरं तु प्रदीपितम्। आरार्तिकमहं कुर्वे पश्य मे वरदो भव॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, आरार्तिकं समर्पयामि। (कपूर से आरती करें और आरती के बाद जल गिरा दें। इसके साथ गणेश जी की प्रचलित आरती भी गा सकते हैं।)
पुष्पांजलि
ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्। ते ह नाकं महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः॥ (यजुर्वेद 31.16)
फिर गणेश आवाहन का “ॐ गणानां त्वा…” और गौरी आवाहन का “ॐ अम्बे अम्बिके…” मंत्र दोबारा पढ़ें।
नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालोद्भवानि च। पुष्पाञ्जलिर्मया दत्तो गृहाण परमेश्वर॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, पुष्पाञ्जलिं समर्पयामि।
प्रदक्षिणा
ॐ ये तीर्थानि प्रचरन्ति सृकाहस्ता निषङ्गिणः। तेषां सहस्रयोजनेऽव धन्वानि तन्मसि॥ (यजुर्वेद 16.61)
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च। तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, प्रदक्षिणां समर्पयामि। (गणेश जी की तीन परिक्रमा का विधान है।)
विशेषार्घ्य
ताँबे के पात्र में जल, चंदन, अक्षत, फल, फूल, दूर्वा और दक्षिणा रखकर, अर्घ्य पात्र हाथ में लेकर पढ़ें:
रक्ष रक्ष गणाध्यक्ष रक्ष त्रैलोक्यरक्षक। भक्तानामभयं कर्ता त्राता भव भवार्णवात्॥ द्वैमातुर कृपासिन्धो षाण्मातुराग्रज प्रभो। वरदस्त्वं वरं देहि वाञ्छितं वाञ्छितार्थद॥ अनेन सफलार्घ्येण वरदोऽस्तु सदा मम।
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, विशेषार्घ्यं समर्पयामि।
अर्थ: हे गणाध्यक्ष, तीनों लोकों के रक्षक, मेरी रक्षा करो। भक्तों को अभय देने वाले, संसार सागर से पार लगाओ। हे दो माताओं वाले, कृपा के सागर, कार्तिकेय के बड़े भाई, आप वर देने वाले हैं, मुझे मनचाहा वर दो। इस अर्घ्य से आप सदा मुझ पर प्रसन्न रहें।
प्रार्थना और नमस्कार
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय। नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥ भक्तार्तिनाशनपराय गणेश्वराय सर्वेश्वराय शुभदाय सुरेश्वराय। विद्याधराय विकटाय च वामनाय भक्तप्रसन्नवरदाय नमो नमस्ते॥ नमस्ते ब्रह्मरूपाय विष्णुरूपाय ते नमः। नमस्ते रुद्ररूपाय करिरूपाय ते नमः॥ विश्वरूपस्वरूपाय नमस्ते ब्रह्मचारिणे। भक्तप्रियाय देवाय नमस्तुभ्यं विनायक॥ त्वां विघ्नशत्रुदलनेति च सुन्दरेति भक्तप्रियेति सुखदेति फलप्रदेति। विद्याप्रदेत्यघहरेति च ये स्तुवन्ति तेभ्यो गणेश वरदो भव नित्यमेव॥ त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया। सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः॥
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, प्रार्थनापूर्वकं नमस्कारान् समर्पयामि। (साष्टांग नमस्कार करें।)
अर्थ: विघ्नों के ईश्वर, वर देने वाले, देवताओं के प्रिय, लम्बोदर, जगत का हित करने वाले, गजमुख, गौरी के पुत्र गणनाथ, आपको बार बार नमस्कार। जो लोग आपको विघ्न रूपी शत्रुओं का नाश करने वाला, सुंदर, भक्तों का प्रिय, सुख और फल देने वाला, विद्या देने वाला और पाप हरने वाला कहकर स्तुति करते हैं, उन्हें आप सदा वर दें। हे देवी, आप ही विष्णु की अनंत शक्ति, विश्व का बीज और परम माया हैं, आपके प्रसन्न होने पर ही मुक्ति मिलती है।
समर्पण
गणेशपूजने कर्म यन्न्यूनमधिकं कृतम्। तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्नोऽस्तु सदा मम॥
अनया पूजया गणेशाम्बिके प्रीयेताम्, न मम।
ऐसा कहकर पूरा पूजा कर्म भगवान को समर्पित कर दें और फिर से नमस्कार करें।
अर्थ: गणेश पूजन में जो कुछ कम या ज़्यादा हुआ हो, उस सबसे सर्वात्मा भगवान मुझ पर सदा प्रसन्न रहें। इस पूजा से गणेश और अम्बिका प्रसन्न हों, इसका फल मेरा नहीं, उन्हीं का है।
विसर्जन का नियम: अचल (स्थायी) प्रतिमा का विसर्जन नहीं किया जाता। जिन देवताओं का आवाहन और प्रतिष्ठा की गई हो (जैसे सुपारी में), उनका पूजा के अंत में विसर्जन करना चाहिए।
आसान गौरी गणेश पूजा (नाम मंत्र से, 10 मिनट)
वैदिक मंत्र पढ़ना कठिन हो, तो यह छोटा क्रम भी पूरी श्रद्धा से किया जा सकता है:
| क्रम | क्या करें | बोलें |
|---|---|---|
| 1 | आचमन और पवित्रीकरण | ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः; ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु |
| 2 | संकल्प | हिंदी में अपना नाम, गोत्र और उद्देश्य बोलें |
| 3 | ध्यान | वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ |
| 4 | गणेश आवाहन | ॐ भूर्भुवः स्वः गणपतये नमः, आवाहयामि, स्थापयामि |
| 5 | गौरी आवाहन (दाहिनी ओर) | ॐ भूर्भुवः स्वः गौर्यै नमः, आवाहयामि, स्थापयामि |
| 6 | जल, स्नान | ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, स्नानं समर्पयामि |
| 7 | मौली, जनेऊ | …वस्त्रं यज्ञोपवीतं समर्पयामि |
| 8 | रोली, अक्षत, फूल, दूर्वा, सिंदूर | …गन्धाक्षतपुष्पदूर्वाङ्कुरान् समर्पयामि |
| 9 | धूप, दीप | …धूपं दीपं दर्शयामि |
| 10 | नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा | …नैवेद्यं ताम्बूलं दक्षिणां समर्पयामि |
| 11 | आरती, प्रदक्षिणा, नमस्कार | …आरार्तिकं समर्पयामि, नमस्करोमि |
| 12 | समर्पण | अनया पूजया गणेशाम्बिके प्रीयेताम्, न मम |
गौरी गणेश पूजन के बाद क्या होता है
किसी बड़े अनुष्ठान, विवाह या कथा में गौरी गणेश पूजन के बाद यह क्रम चलता है:
| क्रम | पूजा |
|---|---|
| 1 | गौरी गणेश पूजन |
| 2 | कलश स्थापन और वरुण पूजन |
| 3 | पुण्याहवाचन |
| 4 | षोडश मातृका पूजन और सप्त घृत मातृका पूजन |
| 5 | नवग्रह मंडल पूजन |
| 6 | मुख्य देवता की पूजा (जैसे लक्ष्मी, दुर्गा, सत्यनारायण, शिव) |
घर की रोज़ की पूजा में इतना विस्तार ज़रूरी नहीं। रोज़ के लिए हमारी दैनिक पूजा विधि या पंचदेव पूजन विधि देखें।
गौरी गणेश पूजन के नियम
| नियम | क्या करें |
|---|---|
| गौरी का स्थान | गणेश जी की दाहिनी ओर |
| गणेश जी को | दूर्वा और लाल फूल विशेष प्रिय, तुलसी न चढ़ाएँ |
| जो सामग्री न हो | “मनसा परिकल्प्य समर्पयामि” कहकर मन से अर्पित करें |
| मंत्रों का क्रम | पहले वेद मंत्र, फिर पुराण का श्लोक, फिर नाम मंत्र |
| हर स्नान के बाद | शुद्ध जल और अंत में आचमन |
| परिक्रमा | गणेश जी की तीन |
| विसर्जन | सुपारी में आवाहित गौरी गणेश का विसर्जन करें, स्थायी मूर्ति का नहीं |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गौरी गणेश पूजन कब किया जाता है?
विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत, नवरात्र, शिवरात्रि, दीपावली, सत्यनारायण कथा, रुद्राभिषेक और किसी भी अनुष्ठान की शुरुआत में, मुख्य पूजा से पहले।
गौरी गणेश किससे बनाते हैं?
मूर्ति न हो तो दो साबुत सुपारियों पर मौली लपेटकर अक्षत पर रखें, एक गणेश जी के रूप में और दूसरी उनकी दाहिनी ओर गौरी जी के रूप में।
गौरी जी को गणेश जी के किस ओर रखें?
नित्यकर्म पूजाप्रकाश के अनुसार गौरी जी का आवाहन गणेश जी की दाहिनी ओर किया जाता है।
गौरी गणेश पूजन का मुख्य मंत्र क्या है?
गणेश आवाहन का वैदिक मंत्र “ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे…” (यजुर्वेद 23.19), गौरी आवाहन का “ॐ अम्बे अम्बिकेऽम्बालिके…” (यजुर्वेद 23.18), और हर उपचार का नाम मंत्र “ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः”।
क्या बिना पंडित के गौरी गणेश पूजन कर सकते हैं?
हाँ। इस पेज की विधि से कोई भी कर सकता है। वैदिक मंत्र कठिन लगें तो पौराणिक श्लोक या केवल नाम मंत्र से पूजा करें, भाव सबसे ज़रूरी है।
संकल्प में संवत कौन सा बोलें?
मार्च 2026 से मार्च 2027 के बीच विक्रम संवत 2083 चल रहा है। मास, पक्ष और तिथि उस दिन के पंचांग से देखें।
पूजा में कोई सामग्री न हो तो क्या करें?
उस वस्तु के लिए “मनसा परिकल्प्य समर्पयामि” कहें, यानी मन से कल्पना करके अर्पित करें।
गौरी गणेश पूजन के बाद विसर्जन कैसे करें?
सुपारी में आवाहित गौरी गणेश का पूजा के अंत में विसर्जन करें। घर की स्थायी मूर्ति का विसर्जन नहीं किया जाता।
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आपके घर में गौरी गणेश सुपारी से बनते हैं या मूर्ति से, कमेंट में ज़रूर बताइए। हमारे वीडियो देखने के लिए SanatanSci YouTube चैनल से जुड़िए।
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