TDS का मतलब है कि आपको पैसा देने वाला, जैसे कंपनी या बैंक, उसमें से टैक्स का एक हिस्सा पहले ही काटकर सरकार को जमा कर देता है। TDS kya hai, इसका पूरा नाम Tax Deducted at Source है। यह आपका अंतिम टैक्स नहीं होता। अगर आपकी कुल आय पर टैक्स कम बनता है, तो कटा हुआ ज़्यादा पैसा ITR भरने पर वापस मिल जाता है।
मुख्य बातें
- TDS पहले से कटा हुआ टैक्स है, यह कोई नया टैक्स नहीं है।
- FD के ब्याज पर एक बैंक से साल में ₹50,000 के ऊपर 10% TDS कटता है, 60 साल से ऊपर वालों के लिए सीमा ₹1 लाख है।
- PAN नहीं दिया तो दर 20% तक हो जाती है।
- टैक्स ईयर 2026-27 से 15G और 15H की जगह एक ही फ़ॉर्म 121 आ गया है।
- कटा हुआ पैसा वापस लेने का रास्ता ITR है, बैंक या कंपनी नहीं।
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TDS Kya Hai: एक आसान उदाहरण
मान लीजिए आपकी FD पर साल में ₹70,000 का ब्याज बना। बैंक आपको पूरा ₹70,000 नहीं देगा। वह ₹7,000 का TDS काटकर सरकार को भेज देगा और आपके खाते में ₹63,000 आएँगे। वह ₹7,000 आपके PAN पर जमा हो जाते हैं।
अब साल के आख़िर में आपका टैक्स निकला। अगर आपकी कुल आय पर टैक्स शून्य है, तो ये ₹7,000 आपको वापस मिलेंगे। अगर आप 30% वाले स्लैब में हैं, तो आपको ₹14,000 और देने पड़ेंगे, क्योंकि ₹70,000 पर आपका असली टैक्स ₹21,000 बनता है।

किस पैसे पर कितना TDS कटता है
| आय | TDS की दर | किस सीमा के ऊपर |
|---|---|---|
| सैलरी | आपके स्लैब के हिसाब से | जब टैक्स बने |
| FD और RD का ब्याज | 10% | ₹50,000 साल में, एक बैंक से |
| 60+ के FD और RD का ब्याज | 10% | ₹1 लाख साल में, एक बैंक से |
| किराया (कोई व्यक्ति दे रहा हो) | 2% | ₹50,000 महीना |
| किराया (कंपनी या कारोबार दे रहा हो) | 10% | ₹50,000 महीना |
| प्रोफ़ेशनल फ़ीस | 10% | ₹50,000 साल में |
| शेयर का डिविडेंड | 10% | ₹10,000 साल में |
| घर या ज़मीन की ख़रीद | 1% | ₹50 लाख या ज़्यादा |
| PAN न देने पर | आमतौर पर 20% |
नए क़ानून में सैलरी का TDS अब धारा 392 में है, और बाक़ी लगभग सारा TDS एक धारा 393 की तालिका में आ गया है। ऊपर की तालिका आम लोगों के काम की मुख्य दरें हैं, किसी ख़ास भुगतान के लिए आयकर विभाग की TDS सूची ज़रूर मिला लीजिए।
सैलरी का TDS कैसे कटता है
कंपनी साल की शुरुआत में पूछती है कि आप नई व्यवस्था में हैं या पुरानी। फिर वह आपकी पूरे साल की सैलरी पर टैक्स निकालकर उसे 12 महीनों में बाँटती है और हर महीने उतना TDS काटती है। अगर साल के बीच सैलरी बढ़े या आप निवेश के काग़ज़ दें, तो बाक़ी महीनों की कटौती बदल जाती है।
नौकरी बदलने पर सबसे ज़्यादा गड़बड़ होती है, क्योंकि दोनों कंपनियाँ अलग-अलग ₹75,000 का डिडक्शन और स्लैब मानकर TDS काटती हैं। ऐसे में टैक्स कम कट सकता है, इसलिए नई कंपनी को पुरानी कंपनी की सैलरी और TDS की जानकारी ज़रूर दीजिए।
FD पर TDS कब कटता है
ब्याज की सीमा बैंक के हिसाब से देखी जाती है। एक ही बैंक की अलग-अलग ब्रांच में रखी FD मिलाकर गिनी जाती हैं, लेकिन दो अलग बैंकों की सीमा अलग-अलग होती है।
| स्थिति | साल का ब्याज | TDS |
|---|---|---|
| 45 साल, एक बैंक | ₹48,000 | नहीं कटेगा |
| 45 साल, एक बैंक | ₹70,000 | ₹7,000 |
| 65 साल, एक बैंक | ₹90,000 | नहीं कटेगा |
| 45 साल, दो बैंक, ₹40,000 और ₹40,000 | ₹80,000 | नहीं कटेगा |
ध्यान रखिए, TDS न कटने का मतलब यह नहीं कि ब्याज पर टैक्स नहीं लगेगा। ब्याज हर हाल में आपकी आय में जुड़ता है और ITR में दिखाना ज़रूरी है। FD के TDS से बचने का क़ानूनी तरीक़ा नीचे वाला फ़ॉर्म है, FD को टुकड़ों में बाँटना नहीं।
15G और 15H अब फ़ॉर्म 121 बन गए
पहले 60 साल से कम वाले 15G और 60 साल से ऊपर वाले 15H भरते थे। नए Income-tax Rules 2026 में दोनों की जगह एक ही फ़ॉर्म 121 आ गया है, जो धारा 393(6) के तहत एक घोषणा है। 2025-26 की पुरानी आय के लिए पुराने फ़ॉर्म की बात अलग हो सकती है, इसलिए अपना बैंक जो फ़ॉर्म माँगे, वही भरिए।

| कौन भर सकता है | शर्त |
|---|---|
| भारत का निवासी व्यक्ति | जिसकी पूरी आय पर आख़िर में टैक्स शून्य बनता हो |
| 60 साल से कम | ऊपर के साथ, फ़ॉर्म में दिखाई गई ब्याज जैसी आय भी छूट की बेसिक सीमा से ज़्यादा न हो |
| 60 साल और ऊपर | आय पर टैक्स शून्य बनता हो |
| कंपनी या फ़र्म | नहीं भर सकते |
भरने का तरीक़ा: अपने बैंक की नेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप या ब्रांच से इसे वित्त वर्ष की शुरुआत में, पहला ब्याज जुड़ने से पहले जमा कीजिए। हर बैंक में अलग जमा करना होता है और हर साल नया। PAN ज़रूरी है। ग़लत घोषणा करना क़ानूनी अपराध है, इसलिए अगर आपकी आय पर टैक्स बनता है, तो यह फ़ॉर्म मत भरिए।
कटा हुआ TDS कहाँ दिखता है
| काग़ज़ | पुराना नाम | क्या बताता है |
|---|---|---|
| फ़ॉर्म 130 | फ़ॉर्म 16 | कंपनी का दिया सैलरी TDS का सर्टिफ़िकेट |
| फ़ॉर्म 131 | फ़ॉर्म 16A | बैंक या दूसरे देने वालों का TDS सर्टिफ़िकेट |
| फ़ॉर्म 168 | फ़ॉर्म 26AS | आपके PAN पर जमा पूरा टैक्स |
| AIS | AIS | ब्याज, डिविडेंड और बड़े लेन-देन की पूरी जानकारी |
इन्हें देखने के लिए incometax.gov.in पर लॉगिन कीजिए और “e-File” में जाकर टैक्स स्टेटमेंट वाला विकल्प खोलिए। AIS के लिए “Services” में जाइए। पुराने सालों के लिए अब भी 16 और 26AS के नाम दिख सकते हैं।
TDS का पैसा वापस कैसे लें: 5 स्टेप

अगर TDS कटा लेकिन 26AS में नहीं दिखा
ऐसा आमतौर पर इन वजहों से होता है। बैंक या कंपनी ने अभी तिमाही का TDS रिटर्न नहीं भरा, PAN ग़लत चला गया, या रक़म दूसरे साल में दिख रही है। पहले अपने काटने वाले से बात कीजिए और कटौती का सबूत माँगिए। सही होने के बाद ही ITR भरिए, क्योंकि जो रक़म विभाग के पास नहीं दिखती, उसका रिफ़ंड अटक जाता है।
आपकी स्थिति के हिसाब से क्या करें
| आपकी स्थिति | सुझाव |
|---|---|
| रिटायर हैं, आय सिर्फ़ FD का ब्याज है और टैक्स शून्य बनता है | हर साल बैंक में फ़ॉर्म 121 दीजिए |
| टैक्स शून्य है, लेकिन TDS कट गया | ITR भरकर रिफ़ंड लीजिए |
| 30% वाले स्लैब में हैं | ब्याज का बचा टैक्स ख़ुद भरना होगा, एडवांस टैक्स भी देखिए |
| मकान मालिक को ₹50,000 से ज़्यादा किराया देते हैं | आपको 2% TDS काटकर जमा करना है, यह किराएदार की ज़िम्मेदारी है |
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
TDS और इनकम टैक्स में क्या फ़र्क़ है?
इनकम टैक्स पूरे साल की आय पर बनने वाला टैक्स है, और TDS उसी का पहले से कटा हुआ हिस्सा है।
15g 15h kya hai?
ये वे फ़ॉर्म थे जिनसे आप बैंक से कहते थे कि आपकी आय पर टैक्स नहीं बनता, इसलिए TDS मत काटिए। अब इनकी जगह फ़ॉर्म 121 आ गया है।
क्या हर बैंक में अलग फ़ॉर्म 121 देना होगा?
हाँ, जिन-जिन बैंकों में FD है, हर एक में अलग देना होता है और हर वित्त वर्ष में नया।
TDS कटने के बाद रिफ़ंड कितने दिन में मिलता है?
ITR के प्रोसेस होने के बाद रिफ़ंड आता है। कई मामलों में कुछ हफ़्ते लगते हैं, और टैक्स व बैंक के आँकड़े न मिलने पर देर हो सकती है।
अगर PAN बैंक को नहीं दिया तो क्या होगा?
TDS आमतौर पर 10% की जगह 20% कटता है, इसलिए PAN ज़रूर जमा कीजिए।
क्या सेविंग अकाउंट के ब्याज पर TDS कटता है?
नहीं, बैंक सेविंग खाते के ब्याज पर आमतौर पर TDS नहीं काटते, लेकिन इस ब्याज को ITR में दिखाना ज़रूरी है।
क्या मकान मालिक को किराए पर TDS कटवाना ज़रूरी है?
अगर किराया ₹50,000 महीने से ज़्यादा है, तो किराएदार को 2% TDS काटकर जमा करना होता है।
form 121 kya hai?
यह टैक्स ईयर 2026-27 से 15G और 15H की जगह आया फ़ॉर्म है। जिनकी आय पर टैक्स शून्य बनता है, वे इसे बैंक में देकर ब्याज पर TDS कटने से रोक सकते हैं।
टीडीएस कब कटता है?
जब देने वाला तय सीमा से ज़्यादा भुगतान करता है, जैसे एक बैंक से साल में ₹50,000 से ज़्यादा ब्याज (60+ के लिए ₹1 लाख), या सैलरी पर टैक्स बनने लगे।
tds refund status कैसे देखें?
incometax.gov.in पर लॉगिन करके “Income Tax Returns” में “View Filed Returns” खोलिए। वहाँ रिफ़ंड का हाल दिखता है।
स्रोत (7 नवंबर 2026 को जाँचे गए)
- आयकर विभाग: फ़ॉर्म 121
- Outlook Money: फ़ॉर्म 121 ने ली 15G/15H की जगह
- Ujjivan बैंक: FD और RD के ब्याज पर TDS
- Income-tax Act, 2025: सैलरी TDS की धारा 392, बाक़ी TDS की धारा 393
यह लेख जानकारी के लिए है, टैक्स सलाह नहीं। फ़ॉर्म की ताज़ा शर्तें आयकर विभाग की साइट या अपने बैंक से मिला लीजिए।
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