
डीमैट अकाउंट क्या है? डीमैट (Demat, यानी Dematerialised) अकाउंट एक ऐसा खाता है जिसमें शेयर, ETF, बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियाँ और म्यूचुअल फ़ंड की यूनिट इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखी जाती हैं। जैसे बैंक खाते में पैसा रहता है, वैसे ही डीमैट खाते में आपके शेयर रहते हैं। काग़ज़ के शेयर सर्टिफ़िकेट की जगह अब सब कुछ डिजिटल है।
छोटा जवाब: भारत में शेयर ख़रीदने के लिए दो खाते चाहिए: डीमैट खाता (शेयर रखने के लिए) और ट्रेडिंग खाता (ख़रीदने बेचने का ऑर्डर देने के लिए)। ये दोनों किसी SEBI में पंजीकृत ब्रोकर या डिपॉज़िटरी पार्टिसिपेंट (DP) के पास PAN, आधार और बैंक खाते से ऑनलाइन कुछ ही मिनटों में खुल जाते हैं। आपके शेयर असल में दो डिपॉज़िटरी, NSDL या CDSL में रखे जाते हैं, ब्रोकर के पास नहीं।
मुख्य बातें
- डीमैट खाता शेयरों की डिजिटल तिजोरी है, ट्रेडिंग खाता ख़रीद बिक्री का काउंटर। निवेश के लिए दोनों चाहिए।
- आपके शेयर NSDL या CDSL में आपके नाम पर रहते हैं, ब्रोकर बंद हो जाए तब भी सुरक्षित।
- ऑनलाइन खाता PAN, आधार और बैंक खाते से 15 से 20 मिनट में खुल जाता है।
- होल्डिंग ₹4 लाख तक हो तो BSDA में सालाना शुल्क शून्य।
- हर महीने का CAS और डिपॉज़िटरी के SMS ज़रूर पढ़ें, यही आपकी सुरक्षा है।
विषय सूची
डीमैट अकाउंट कैसे काम करता है: एक आसान उदाहरण
मान लीजिए रीना ने सोमवार को किसी कंपनी के 10 शेयर ₹500 के भाव पर ख़रीदे:
- रीना ने अपने ब्रोकर के ऐप (ट्रेडिंग खाता) में ख़रीदने का ऑर्डर दिया।
- ऑर्डर स्टॉक एक्सचेंज (NSE या BSE) पर किसी बेचने वाले से मिल गया।
- उसके बैंक से जुड़े ट्रेडिंग खाते से ₹5,000 और शुल्क कटे।
- भारत में T+1 सेटलमेंट है, इसलिए अगले कामकाजी दिन यानी मंगलवार को 10 शेयर उसके डीमैट खाते में आ गए।
- उसे डिपॉज़िटरी (NSDL या CDSL) से SMS और ईमेल पर पुष्टि मिली।
जब वह शेयर बेचेगी, तो शेयर उसके डीमैट खाते से निकलेंगे और पैसा ट्रेडिंग खाते के रास्ते उसके बैंक में आएगा।

डीमैट खाता और ट्रेडिंग खाता: क्या अंतर है
| बिंदु | डीमैट खाता | ट्रेडिंग खाता |
|---|---|---|
| काम | शेयर और प्रतिभूतियाँ रखना | ख़रीदने और बेचने का ऑर्डर देना |
| आसान तुलना | तिजोरी या लॉकर | दुकान का काउंटर |
| कौन रखता है | NSDL या CDSL (DP के ज़रिए) | ब्रोकर |
| पहचान | 16 अंकों का BO ID | ब्रोकर का क्लाइंट कोड |
| क्या केवल इससे शेयर ख़रीद सकते हैं | नहीं | नहीं, शेयर रखने को डीमैट चाहिए |
| किसकी ज़रूरत किसमें | लंबे समय के निवेश, IPO, बॉन्ड | इंट्राडे और F&O में भी ज़रूरी |
ध्यान दें: इंट्राडे ट्रेडिंग में शेयर उसी दिन बेच दिए जाते हैं, इसलिए वे डीमैट खाते में नहीं आते, फिर भी खाता खोलते समय डीमैट और ट्रेडिंग दोनों एक साथ खुलते हैं। ट्रेडिंग के प्रकार और उनके जोखिम समझने के लिए पढ़ें: ट्रेडिंग क्या है।
NSDL, CDSL और DP: कौन क्या करता है
- डिपॉज़िटरी: भारत में दो डिपॉज़िटरी हैं, NSDL (नेशनल सिक्योरिटीज़ डिपॉज़िटरी लिमिटेड, 1996) और CDSL (सेंट्रल डिपॉज़िटरी सर्विसेज़ लिमिटेड, 1999)। आपके शेयर असल में इन्हीं के रिकॉर्ड में आपके नाम पर दर्ज रहते हैं। दोनों SEBI के नियमों के तहत काम करते हैं।
- डिपॉज़िटरी पार्टिसिपेंट (DP): डिपॉज़िटरी सीधे आम लोगों का खाता नहीं खोलतीं। उनके एजेंट, जिन्हें DP कहते हैं, खाता खोलते हैं। ब्रोकर, बैंक और कुछ वित्तीय संस्थाएँ DP होती हैं।
- BO ID: हर डीमैट खाते को 16 अक्षरों की एक पहचान मिलती है, जिसे बेनिफ़िशियल ओनर (BO) ID कहते हैं। CDSL में यह पूरी तरह अंकों में होती है, जबकि NSDL की ID “IN” से शुरू होती है। IPO में आवेदन और शेयर ट्रांसफ़र में यही ID लगती है।
ज़रूरी बात: आपका ब्रोकर बंद भी हो जाए, तो आपके शेयर डिपॉज़िटरी में आपके नाम पर सुरक्षित रहते हैं। आप उन्हें दूसरे DP के खाते में ट्रांसफ़र करवा सकते हैं।
डीमैट अकाउंट क्यों ज़रूरी है
SEBI के नियम के अनुसार 1 अप्रैल 2019 से लिस्टेड कंपनियों के शेयरों का ट्रांसफ़र केवल डीमैट रूप में हो सकता है (कुछ अपवादों को छोड़कर)। यानी आज शेयर बाज़ार में निवेश के लिए डीमैट खाता लगभग अनिवार्य है। इसके फ़ायदे:
- काग़ज़ के झंझट से छुटकारा: सर्टिफ़िकेट खोने, फटने, नकली होने या चोरी का डर नहीं।
- तेज़ सेटलमेंट: बेचने या ख़रीदने के अगले कामकाजी दिन शेयर या पैसा।
- सब कुछ एक जगह: शेयर, ETF, बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियाँ, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और म्यूचुअल फ़ंड यूनिट।
- कॉर्पोरेट एक्शन अपने आप: बोनस शेयर, स्टॉक स्प्लिट और राइट्स के शेयर सीधे खाते में आते हैं, जबकि डिविडेंड जुड़े बैंक खाते में आता है।
- IPO में आवेदन: UPI या ASBA से आवेदन, और अलॉटमेंट होने पर शेयर सीधे डीमैट में।
- गिरवी रखने की सुविधा: शेयरों को गिरवी (प्लेज) रखकर मार्जिन या लोन लिया जा सकता है।
डीमैट अकाउंट कैसे खोलें: ऑनलाइन 6 कदम

- SEBI में पंजीकृत ब्रोकर या DP चुनें। उसकी वेबसाइट या ऐप पर “Open Account” चुनें। ब्रोकर का पंजीकरण SEBI की वेबसाइट पर जाँचा जा सकता है।
- मोबाइल नंबर और ईमेल डालें। दोनों पर OTP आता है। अपना ही नंबर और ईमेल दें, क्योंकि सारे अलर्ट इन्हीं पर आएँगे।
- PAN और आधार से e KYC करें। ज़्यादातर ब्रोकर DigiLocker या आधार OTP से पहचान और पता अपने आप ले लेते हैं।
- बैंक खाता जोड़ें। खाता संख्या और IFSC डालें, या कैंसल चेक या बैंक स्टेटमेंट अपलोड करें। F&O ट्रेडिंग के लिए आय का प्रमाण भी माँगा जाता है।
- इन पर्सन वेरिफ़िकेशन (IPV) और ई साइन करें। एक छोटा वीडियो या सेल्फ़ी लेकर पहचान की पुष्टि होती है, फिर आधार OTP से फ़ॉर्म पर डिजिटल हस्ताक्षर।
- नॉमिनी जोड़ें और खाता चालू होने का इंतज़ार करें। ब्रोकर के अनुसार कुछ घंटों से 1 से 2 कामकाजी दिन में खाता चालू हो जाता है और आपको BO ID व लॉगिन जानकारी मिलती है।
ज़रूरी दस्तावेज़
- ☐ PAN कार्ड (अनिवार्य)
- ☐ आधार कार्ड, मोबाइल नंबर से जुड़ा हुआ (e KYC और ई साइन के लिए)
- ☐ बैंक खाते का प्रमाण: कैंसल चेक या बैंक स्टेटमेंट
- ☐ पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो और काग़ज़ पर किया गया हस्ताक्षर (स्कैन)
- ☐ आय का प्रमाण, केवल F&O या करेंसी ट्रेडिंग के लिए (सैलरी स्लिप, ITR या बैंक स्टेटमेंट)
ऑफ़लाइन तरीका: बैंक या ब्रोकर की शाखा में खाता खोलने का फ़ॉर्म भरकर, ऊपर के दस्तावेज़ों की स्व प्रमाणित कॉपी देकर भी खाता खुलता है। इसमें कुछ दिन ज़्यादा लगते हैं।
नाबालिग और NRI: 18 साल से कम उम्र के बच्चे के नाम पर अभिभावक के ज़रिए डीमैट खाता खुल सकता है, पर उसमें ट्रेडिंग पर पाबंदियाँ होती हैं। NRI के लिए अलग प्रकार के डीमैट खाते (रिपैट्रिएबल और नॉन रिपैट्रिएबल) होते हैं, इसके लिए बैंक या ब्रोकर से NRI खाते की प्रक्रिया पूछें।
डीमैट अकाउंट के शुल्क: क्या क्या लगता है
शुल्क हर ब्रोकर और DP के अलग होते हैं, इसलिए यहाँ किसी एक कंपनी का रेट न देकर यह बताया गया है कि कौन से शुल्क होते हैं और कहाँ देखें। खाता खोलने से पहले ब्रोकर की वेबसाइट पर उसका “टैरिफ शीट” या “चार्जेस” पेज ज़रूर पढ़ें।
| शुल्क | कब लगता है | ध्यान रखें |
|---|---|---|
| खाता खोलने का शुल्क | एक बार | कई ब्रोकर मुफ़्त खोलते हैं |
| सालाना रखरखाव शुल्क (AMC) | हर साल या हर तिमाही | BSDA में कम या शून्य, नीचे देखें |
| DP शुल्क | हर बार शेयर बेचने पर, हर शेयर (स्क्रिप) पर, उस दिन एक बार | कई छोटे सौदों में यह बड़ा हो जाता है |
| ब्रोकरेज | हर ख़रीद और बिक्री पर | डिलीवरी पर कुछ ब्रोकर शून्य लेते हैं |
| सरकारी शुल्क | हर सौदे पर | STT, स्टांप ड्यूटी, एक्सचेंज और SEBI शुल्क, GST |
| प्लेज, ट्रांसफ़र, फ़िज़िकल स्टेटमेंट | ज़रूरत पड़ने पर | टैरिफ शीट में देखें |
उदाहरण: छोटे निवेशक के लिए DP शुल्क क्यों मायने रखता है
मान लीजिए किसी ब्रोकर का DP शुल्क हर बिक्री पर ₹20 है (यह केवल उदाहरण का आँकड़ा है)। अगर आप ₹1,000 के शेयर बेचते हैं, तो सिर्फ़ DP शुल्क ही 2% हो गया। वहीं ₹50,000 के शेयर बेचने पर यही ₹20 केवल 0.04% है। इसलिए छोटी रक़म से बार बार बेचना महँगा पड़ता है, और यह शुल्क एक ही दिन में एक ही शेयर की कई बिक्रियों पर आम तौर पर एक बार ही लगता है।
BSDA क्या है: छोटे निवेशकों के लिए सस्ता डीमैट खाता
बेसिक सर्विसेज़ डीमैट अकाउंट (BSDA) SEBI की एक सुविधा है ताकि कम होल्डिंग वाले निवेशकों पर सालाना शुल्क का बोझ न पड़े। SEBI के 2024 के नियम के अनुसार:
| होल्डिंग की कुल क़ीमत | सालाना रखरखाव शुल्क (AMC) |
|---|---|
| ₹4 लाख तक | शून्य |
| ₹4 लाख से ₹10 लाख तक | अधिकतम ₹100 सालाना |
| ₹10 लाख से ज़्यादा | खाता सामान्य डीमैट खाता बन जाता है |
- BSDA केवल व्यक्तिगत निवेशक के लिए है, जिसका उस नाम पर (पहले धारक के रूप में) एक ही डीमैट खाता हो।
- अगर आपकी होल्डिंग इस सीमा में है, तो DP को अपने आप BSDA देना चाहिए, फिर भी ब्रोकर से पुष्टि कर लें।
- होल्डिंग की क़ीमत बढ़कर ₹10 लाख पार हो जाए, तो खाता सामान्य खाते में बदल जाता है और सामान्य AMC लगता है।

DDPI और POA: खाता खोलते समय यह फ़ॉर्म क्यों माँगा जाता है
पहले ब्रोकर “पावर ऑफ़ अटॉर्नी (POA)” लेते थे, जिससे वे आपके खाते से शेयर निकाल सकते थे। SEBI ने इसकी जगह DDPI (डीमैट डेबिट एंड प्लेज इंस्ट्रक्शन) लाया, जिसका उपयोग सीमित कामों के लिए ही हो सकता है, जैसे बेचे गए शेयर डिलीवर करना, मार्जिन के लिए प्लेज करना और म्यूचुअल फ़ंड के लेनदेन।
- DDPI देना अनिवार्य नहीं है।
- DDPI न दें, तो हर बार शेयर बेचने पर आपको e DIS / TPIN (CDSL) या OTP से ख़ुद मंज़ूरी देनी होती है।
- DDPI देने पर बिक्री आसान हो जाती है, पर यह समझकर दें कि आप ब्रोकर को किन कामों की अनुमति दे रहे हैं।
नॉमिनी जोड़ना क्यों ज़रूरी है
डीमैट खाते में नॉमिनी जोड़ने से खाताधारक की मृत्यु के बाद शेयर आसानी से परिवार को ट्रांसफ़र होते हैं, वरना उत्तराधिकार साबित करने के लिए लंबी काग़ज़ी प्रक्रिया करनी पड़ सकती है। SEBI ने नॉमिनेशन के नियमों में हाल में कई बदलाव किए हैं, जैसे एक से ज़्यादा नॉमिनी और उनका हिस्सा तय करना। कितने नॉमिनी जोड़ सकते हैं और कौन सी जानकारी चाहिए, यह अपने ब्रोकर के ऐप में नॉमिनी सेक्शन में देखें, क्योंकि नियम चरणों में लागू हो रहे हैं।
अगर आप नॉमिनी नहीं जोड़ना चाहते, तो “ऑप्ट आउट” का विकल्प भी होता है, पर परिवार के लिए नॉमिनी जोड़ना बेहतर है।
डीमैट खाते की सुरक्षा: 7 ज़रूरी आदतें
- CAS ज़रूर पढ़ें। NSDL या CDSL हर उस महीने कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) भेजती है जिसमें लेनदेन हुआ हो, वरना हर छह महीने में। इसमें आपके सभी डीमैट खाते और म्यूचुअल फ़ंड एक साथ दिखते हैं।
- डिपॉज़िटरी के SMS और ईमेल अनदेखा न करें। कोई ऐसा लेनदेन दिखे जो आपने नहीं किया, तो तुरंत ब्रोकर और डिपॉज़िटरी को बताएँ।
- टू फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें और लॉगिन पासवर्ड, TPIN या OTP किसी को न बताएँ।
- “पक्की टिप” या “हम आपका खाता चलाएँगे” वाले मैसेज और टेलीग्राम ग्रुप से दूर रहें। अपना लॉगिन किसी को न दें।
- खाता फ़्रीज़ करने की सुविधा जानें: SEBI के नियम के तहत आप शक होने पर ब्रोकर के ऐप, SMS या ईमेल से अपना ट्रेडिंग खाता ख़ुद अस्थायी रूप से फ़्रीज़ कर सकते हैं।
- मोबाइल नंबर और ईमेल अपडेट रखें, वरना अलर्ट नहीं मिलेंगे।
- SEBI पंजीकरण जाँचें। केवल SEBI में पंजीकृत ब्रोकर और निवेश सलाहकार से ही काम करें।
शिकायत कहाँ करें: पहले ब्रोकर या DP से शिकायत करें। हल न मिले तो SEBI SCORES पर ऑनलाइन शिकायत करें, और उसके बाद भी विवाद रहे तो SMART ODR पोर्टल पर ऑनलाइन सुलह का रास्ता है।
ब्रोकर चुनने की चेकलिस्ट
हम किसी ब्रोकर की रैंकिंग नहीं देते, क्योंकि शुल्क और ऑफ़र बार बार बदलते हैं। इसकी जगह यह चेकलिस्ट इस्तेमाल करें:
- ☐ ब्रोकर SEBI में पंजीकृत है और DP के रूप में NSDL या CDSL से जुड़ा है।
- ☐ खाता खोलने, AMC, DP शुल्क और ब्रोकरेज का पूरा टैरिफ शीट पढ़ा।
- ☐ आपकी होल्डिंग छोटी है तो BSDA मिलेगा या नहीं, यह पूछा।
- ☐ ऐप आसान है और बाज़ार के व्यस्त समय में भी ठीक चलता है (रिव्यू पढ़ें)।
- ☐ ग्राहक सहायता फ़ोन और चैट पर हिंदी में मिलती है या नहीं।
- ☐ आप लंबे समय के निवेशक हैं या ट्रेडर, उसके हिसाब से शुल्क मिलाएँ। निवेशक के लिए AMC और DP शुल्क ज़्यादा मायने रखते हैं, ट्रेडर के लिए ब्रोकरेज।
- ☐ ज़बरदस्ती कोई अतिरिक्त प्लान या सलाह सेवा तो नहीं जोड़ी गई।
आपके लिए कौन सा खाता सही: एक आसान फ़ैसला
| आपकी स्थिति | सुझाव |
|---|---|
| शुरुआत कर रहे हैं, होल्डिंग ₹4 लाख से कम रहेगी | BSDA वाला खाता, कम AMC वाला DP |
| हर महीने SIP जैसे शेयर या ETF ख़रीदते हैं, बहुत कम बेचते हैं | कम AMC और साफ़ DP शुल्क वाला ब्रोकर |
| बार बार ख़रीदते बेचते हैं | ब्रोकरेज और DP शुल्क दोनों की तुलना करें |
| बैंक के साथ सब कुछ एक जगह चाहिए | बैंक का 3 इन 1 खाता (बचत, डीमैट, ट्रेडिंग), पर शुल्क अक्सर ज़्यादा |
डीमैट खाता बंद या ट्रांसफ़र कैसे करें
- दूसरे ब्रोकर में शेयर ले जाना: नए DP में खाता खोलें, फिर पुराने DP के ऐप में या डिपॉज़िटरी की ऑनलाइन सुविधा (CDSL easiest, NSDL SPEED e) से या DIS स्लिप देकर शेयर ट्रांसफ़र करें। ट्रांसफ़र पर पुराना DP शुल्क ले सकता है।
- खाता बंद करना: पहले सारे शेयर बेचें या दूसरे खाते में ट्रांसफ़र करें, कोई बकाया न हो, फिर ब्रोकर के ऐप में या क्लोज़र फ़ॉर्म देकर खाता बंद करें।
- कई खाते हों तो: जो खाता इस्तेमाल नहीं हो रहा, उसे बंद कर दें, ताकि बेवजह AMC न लगे और धोखाधड़ी का जोखिम भी कम हो।
डीमैट खाते से जुड़ी 6 आम ग़लतियाँ
- केवल “फ़्री खाता” देखकर ब्रोकर चुनना, और बाद में AMC व DP शुल्क से परेशान होना।
- किसी और का मोबाइल नंबर या ईमेल खाते में देना।
- नॉमिनी न जोड़ना।
- CAS और डिपॉज़िटरी के अलर्ट न पढ़ना।
- बिना ज़रूरत के DDPI या दूसरी अनुमति देना, बिना समझे।
- बिना जानकारी के इंट्राडे या F&O शुरू करना। SEBI की स्टडी के अनुसार ज़्यादातर छोटे F&O ट्रेडर नुकसान में रहते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डीमैट अकाउंट क्या है, आसान भाषा में?
डीमैट अकाउंट एक डिजिटल तिजोरी है जिसमें आपके शेयर, ETF, बॉन्ड और म्यूचुअल फ़ंड यूनिट इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे जाते हैं। ये असल में NSDL या CDSL में आपके नाम पर दर्ज रहते हैं।
डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट में क्या अंतर है?
डीमैट खाता शेयर रखने के लिए है और ट्रेडिंग खाता शेयर ख़रीदने बेचने का ऑर्डर देने के लिए। शेयर बाज़ार में निवेश के लिए दोनों की ज़रूरत होती है और ये आम तौर पर एक साथ खुलते हैं।
डीमैट अकाउंट खोलने के लिए कौन से दस्तावेज़ चाहिए?
PAN कार्ड, मोबाइल से जुड़ा आधार, बैंक खाते का प्रमाण (कैंसल चेक या स्टेटमेंट), फ़ोटो और हस्ताक्षर। F&O ट्रेडिंग के लिए आय का प्रमाण भी चाहिए।
क्या डीमैट अकाउंट मुफ़्त में खुलता है?
कई ब्रोकर खाता खोलने का शुल्क नहीं लेते, पर सालाना AMC, शेयर बेचने पर DP शुल्क और ब्रोकरेज लग सकते हैं। होल्डिंग ₹4 लाख तक हो तो BSDA खाते में AMC शून्य होता है।
BSDA खाता क्या है?
बेसिक सर्विसेज़ डीमैट अकाउंट SEBI की सुविधा है। ₹4 लाख तक की होल्डिंग पर कोई AMC नहीं और ₹4 से 10 लाख तक अधिकतम ₹100 सालाना। यह उस व्यक्ति को मिलता है जिसके नाम पर एक ही डीमैट खाता हो।
एक व्यक्ति कितने डीमैट खाते खोल सकता है?
एक व्यक्ति अलग अलग DP के पास एक से ज़्यादा डीमैट खाते खोल सकता है, पर हर खाते का अलग AMC लगेगा और BSDA की सुविधा तब नहीं मिलती।
ब्रोकर बंद हो जाए तो मेरे शेयरों का क्या होगा?
आपके शेयर डिपॉज़िटरी (NSDL या CDSL) में आपके नाम पर रहते हैं, ब्रोकर के पास नहीं। आप उन्हें दूसरे DP के डीमैट खाते में ट्रांसफ़र करवा सकते हैं।
ख़रीदे गए शेयर डीमैट खाते में कब आते हैं?
भारत में T+1 सेटलमेंट है, यानी ख़रीद के अगले कामकाजी दिन शेयर आपके डीमैट खाते में आ जाते हैं।
क्या डीमैट खाते में पैसा रखा जाता है?
नहीं। डीमैट खाते में केवल प्रतिभूतियाँ रहती हैं। पैसा आपके बैंक खाते या ब्रोकर के ट्रेडिंग खाते में रहता है।
स्रोत (15 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए)
- SEBI: निवेशकों के लिए जानकारी और परिपत्र
- NSDL: डीमैट खाता और CAS की जानकारी
- CDSL: निवेशक सेवाएँ, easiest और e DIS
- SEBI SCORES शिकायत पोर्टल
- SMART ODR पोर्टल
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- फ़ंडामेंटल एनालिसिस क्या है
- म्यूचुअल फ़ंड की पूरी जानकारी
ज़रूरी सूचना: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। शेयर बाज़ार में निवेश जोखिम के अधीन है। शुल्क, नियम और प्रक्रियाएँ ब्रोकर और समय के अनुसार बदलती हैं, इसलिए खाता खोलने या निवेश से पहले SEBI, NSDL, CDSL और अपने ब्रोकर की आधिकारिक जानकारी ज़रूर पढ़ें।
नोट: इस लेख में Amazon के affiliate लिंक हैं। इनसे ख़रीदारी करने पर Storyshala को छोटा कमीशन मिलता है, आपके लिए क़ीमत नहीं बदलती।





