Six Attitudes for Winners Book Summary in Hindi: नॉर्मन विंसेंट पील के विजेताओं के 6 नज़रिए

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Six Attitudes for Winners Book Summary in Hindi में आज हम नॉर्मन विंसेंट पील (Norman Vincent Peale) की छोटी पर असरदार किताब “Six Attitudes for Winners” (1989) की पूरी सीख आसान भाषा में समझेंगे। पील वही लेखक हैं जिनकी किताब “The Power of Positive Thinking” दुनिया भर में करोड़ों लोगों ने पढ़ी है। इस किताब में वे बताते हैं कि जीतने वाले लोगों के 6 ख़ास नज़रिए (Attitudes) होते हैं, और ये नज़रिए कोई भी सीख सकता है।

छोटा जवाब: विजेताओं के 6 नज़रिए हैं: (1) सकारात्मक: कोई समस्या इतनी बड़ी नहीं जो सुलझ न सके, (2) साहसी: मुझे डरने की कोई ज़रूरत नहीं, (3) उत्साही: जीवन रोमांचक है, (4) शांत: मुझे चिंता करने की ज़रूरत नहीं, (5) आत्मविश्वासी: मैं बदलकर बेहतर बन सकता हूँ, और (6) आशावान: मैं सबसे अच्छे की उम्मीद रखता हूँ।

Six Attitudes for Winners book summary in hindi
Six Attitudes for Winners book summary in hindi

6 नज़रिए एक नज़र में

नज़रियामूल वाक्यमुख्य अभ्यास
1. सकारात्मक (Positive)कोई समस्या इतनी बड़ी नहीं जो सुलझ न सकेप्रतिक्रिया नहीं, सोच; “कैसे” वाला सवाल
2. साहसी (Courageous)मुझे डरने की कोई ज़रूरत नहींएक बार में एक डर पर काम
3. उत्साही (Enthusiastic)जीवन रोमांचक हैदिन की सही शुरुआत
4. शांत (Peaceful)मुझे चिंता करने की ज़रूरत नहींअपनी नेमतों की सूची
5. आत्मविश्वासी (Confident)मैं बदलकर बेहतर बन सकता हूँसफल व्यक्ति जैसा सोचकर काम
6. आशावान (Expectant)मैं सबसे अच्छे की उम्मीद रखता हूँकल को आज से बेहतर मानना

Six Attitudes for Winners Book Summary in Hindi: 6 नज़रिए विस्तार से

1. सकारात्मक: कोई समस्या इतनी बड़ी नहीं जो सुलझाई न जा सके

एक कंपनी के दो सेल्समैन थे। पहले को एक ऐसा इलाक़ा दिया गया, जहाँ कंपनी का कारोबार बहुत मंदा था। सबका कहना था कि वहाँ कोई संभावना नहीं। वह गया, थोड़ा घूमा, और लौटकर बोला कि सच में वहाँ कुछ नहीं बिक सकता। उसने कभी सच्ची कोशिश ही नहीं की, क्योंकि उसने पहले ही मान लिया था कि मौक़ा नहीं है। नज़रिया नकारात्मक था, तो नतीजा भी नकारात्मक आया।

दूसरा सेल्समैन नया था। किसी ने उसे नहीं बताया था कि वह इलाक़ा “बुरा” है। वह काम में जुट गया और ढेर सारा माल बेच आया। हैरान होकर बोला, “अरे, यहाँ तो बहुत संभावना है!” उसका सकारात्मक नज़रिया इतना गहरा था कि अगर कोई उसे पहले बताता भी, तो वह यक़ीन न करता।

सकारात्मक नज़रिया बनाने के 3 कदम:

(क) प्रतिक्रिया न करें, सोचें: दिमाग़ जब गरम होता है, तो सोच नहीं पाता। ठंडे दिमाग़ से ही तर्क भरे, तथ्य वाले विचार आते हैं जो हल तक ले जाते हैं। इसलिए भावनाओं के आवेश में तुरंत प्रतिक्रिया मत दीजिए, पहले सोचिए।

(ख) “कैसे” सोचने वाले बनें: “कैसे” सोचने वाला व्यक्ति समस्या की चीर फाड़ में ऊर्जा बर्बाद नहीं करता। वह तुरंत पूछता है, “इसे कैसे सुलझाऊँ?” वह जानता है कि हर समस्या का कोई न कोई हल है, और हर मुश्किल में कोई ज़रूरी सबक़ छिपा है। वह “अगर मगर” में समय नहीं गँवाता।

(ग) विश्वास करें कि आप कर सकते हैं: एक व्यक्ति लगातार असफल हो रहा था। फिर उसने एक किताब में पढ़ा: “सबसे अच्छे की उम्मीद रखो, और उसे पा लो।” इस वाक्य ने उसे झकझोर दिया। उसने असफलता की तस्वीर मिटाने वाले विचार खोजे और उन्हें रोज़ दोहराया, जैसे “माँगो तो मिलेगा, खोजो तो पाओगे, खटखटाओ तो दरवाज़ा खुलेगा।” धीरे धीरे उसकी सोच और नतीजे दोनों बदल गए।

व्यावहारिक तरीक़ा: बड़ी समस्या को काग़ज़ पर लिखें, उसे छोटे टुकड़ों में बाँटें, और सबसे आसान टुकड़े से शुरू करें। एक एक हिस्सा सुलझते ही पूरी समस्या छोटी लगने लगती है।

2. साहसी: मुझे डरने की कोई ज़रूरत नहीं

एलीनोर रूजवेल्ट ने एक कहा था, “हर उस अनुभव से आपको शक्ति, साहस और आत्मविश्वास मिलता है, जहॉ आप रुककर डर का सामना करते हैं और उससे निगाह मिलाते हैं।”

ज़्यादातर डर कभी सच होते ही नहीं, वे बस मन में पलते रहते हैं। और जो डर सच भी होते हैं, उनसे आँख चुराने की नहीं, सामना करने की ज़रूरत है। पील कहते हैं, हर तरह का डर क़ाबू में किया जा सकता है।

मॉरिस शेवेलियर की कहानी: फ़्रांस के मशहूर गायक और अभिनेता मॉरिस शेवेलियर करियर के बीच में एक रात मंच पर जाने से पहले बुरी तरह घबरा गए, दिमाग़ सुन्न हो गया और उन्हें लगा कि वे ख़त्म हो चुके हैं। डॉक्टर ने सलाह दी कि किसी छोटे शहर के छोटे मंच पर फिर से गाएँ। शेवेलियर ने पूछा, “क्या गारंटी है कि वहाँ फिर दिमाग़ सुन्न नहीं होगा?” डॉक्टर बोले, “कोई गारंटी नहीं, पर असफलता के डर से कोशिश छोड़ना सबसे बड़ी हार है।”

शेवेलियर ने हिम्मत की, छोटे मंच पर गाया, और अच्छा गाया। बाद में उन्होंने कहा कि उन्होंने सीखा, अगर आप डर के पूरी तरह जाने का इंतज़ार करेंगे, तो वह पल कभी नहीं आएगा। बहादुर व्यक्ति डर को स्वीकार करता है, और फिर भी आगे बढ़ता है।

डर ख़त्म करने के 3 कदम:

(क) संकल्प लें: पूरे मन से कहें, “अब मैं चिंता और डर के वश में नहीं रहूँगा। मैं इसी समय संकल्प लेता हूँ कि मेरा मन डर से आज़ाद होगा।”

(ख) एक बार में एक डर: काग़ज़ पर उन सब चीज़ों की सूची बनाएँ, जिनसे आप डरते हैं। उनमें से वह डर चुनें, जो रोज़ सबसे ज़्यादा परेशान करता है, और फ़िलहाल सिर्फ़ उसी से जूझें। सारे डरों से एक साथ लड़ना बहुत भारी पड़ेगा। एक पर जीत मिलते ही दूसरे पर जाएँ।

(ग) आस्था बढ़ाएँ: पील सलाह देते हैं कि मन को आस्था की बड़ी ख़ुराक दें। धर्मग्रंथों से ऐसे वाक्य चुनें, जो साहस और भरोसा देते हों, और उन्हें तब तक दोहराएँ जब तक वे आपकी सोच पर हावी न हो जाएँ। भारतीय पाठक गीता के “क्लैब्यं मा स्म गमः” (कायरता मत अपनाओ) या “उद्धरेदात्मनात्मानं” (अपना उद्धार ख़ुद करो) जैसे श्लोक चुन सकते हैं।

असफलता का डर: हर व्यक्ति कभी न कभी असफल होता है। असली सवाल है कि आप असफलता पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। असफलता एक बहुत अच्छी शिक्षक है: वह बताती है कि कोई काम कैसे नहीं करना है।

3. उत्साही: जीवन रोमांचक है

मन में यह बात बैठा लें कि दुनिया सुंदरता और रोमांच से भरी है। इसके प्रति संवेदनशील रहें, दुनिया से, उसकी सुंदरता से और उसके लोगों से प्रेम करें। तब आपको भरपूर उत्साह का वरदान मिलेगा।

मिस नोबडी की कहानी: एक लेक्चर के बाद एक युवती ने पील से बहुत धीमे से हाथ मिलाया और बोली, “मैं आपसे हाथ मिलाना चाहती थी, पर मुझे आपको परेशान नहीं करना चाहिए था। यहाँ इतने बड़े लोग हैं, और मैं कोई नहीं (Nobody) हूँ।”

पील मुस्कुराए: “आइए मिस नोबडी, थोड़ी बात करते हैं।” उसने बताया कि उसमें बहुत हीन भावना है। पील ने कहा, “मैं अभी आपसे कह रहा हूँ, आप ईश्वर की संतान हैं।” और उसे रोज़ यह याद रखने की सलाह दी।

कुछ समय बाद पील उसी इलाक़े में फिर लेक्चर देने गए। एक आकर्षक, आत्मविश्वासी युवती आई और बोली, “पहचाना? मैं वही पुरानी मिस नोबडी हूँ!” उसकी आँखों की चमक और उत्साह बता रहे थे कि उसमें कितना बदलाव आ चुका है।

उत्साही बनने के 3 कदम:

  1. दिन की सही शुरुआत करें: उठते ही दिन के लिए धन्यवाद दें और कहें, “आज एक अच्छा दिन होगा।”
  2. प्रेरक और आध्यात्मिक किताबें पढ़ें: रोज़ कुछ पन्ने, जो मन को ऊर्जा से भर दें।
  3. अपने जीवन से प्रेम करें: छोटी छोटी चीज़ों में आनंद ढूँढें, और “उत्साही होने का अभिनय” भी करें, क्योंकि अभिनय धीरे धीरे आदत बन जाता है।
Six Attitudes for Winners in hindi

4. शांत: मुझे चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं

आपके दिमाग़ में जो चलता है, शरीर उसके प्रति बहुत संवेदनशील होता है। चिंता का एक छोटा सा विचार मन में एक हल्की लकीर की तरह शुरू होता है। बार बार आने पर वह लकीर गहरी नाली बन जाती है, जिसमें बाक़ी सारे विचार बहने लगते हैं। इस तरह इंसान डरा हुआ और हमेशा चिंतित रहने वाला बन जाता है। ठीक इसका उलटा भी सच है: अगर मन को लगातार उम्मीद और भरोसे के विचार दें, तो वैसी ही गहरी नाली बनती है।

नेमतें गिनने वाली कहानी: एक आदमी ने पील को फ़ोन करके कहा, “मुझे मदद चाहिए। सब कुछ बिगड़ रहा है, और मैं चिंता से बीमार हुआ जा रहा हूँ।”

पील ने सहानुभूति से कहा, “मुझे यह सुनकर दुख हुआ कि आपकी पत्नी आपको छोड़कर चली गई।” वह चौंका: “किसने कहा? मेरी पत्नी तो मेरे साथ है और मुझसे बहुत प्रेम करती है!” पील बोले, “बहुत अच्छा, तो आपकी संपत्ति की सूची में पहली चीज़ लिखते हैं: एक प्रेम करने वाली पत्नी।”

फिर पील बोले, “बहुत बुरा हुआ कि आपके बच्चे नशे की लत में जेल में हैं।” “बिलकुल नहीं! मेरे बच्चे बहुत अच्छे हैं!” “बढ़िया, सूची में दूसरी चीज़: अच्छे बच्चे।” फिर, “अफ़सोस कि आपका मकान जल गया।” “मेरा मकान नहीं जला, और ख़र्च चलाने लायक पैसे भी हैं!”

अब वह आदमी समझ गया और बोला, “मैं कितना मूर्ख था, मैंने कभी अपनी नेमतें गिनी ही नहीं।” उसकी आधी चिंता वहीं ख़त्म हो गई।

अभ्यास: आज एक काग़ज़ पर दो कॉलम बनाएँ: “जो खोया” और “जो अब भी है”। ज़्यादातर लोगों का दूसरा कॉलम कहीं लंबा निकलता है।

Six Attitudes for Winners summary in hindi
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5. आत्मविश्वासी: मैं बदलकर बेहतर बन सकता हूँ

जब परिवार में प्रेम और आपसी सम्मान होता है, तो सबका मन स्वस्थ रहता है। जब ग़लतफ़हमी और झगड़े होते हैं, तो पूरा माहौल बीमार हो जाता है। पील कहते हैं, बदलाव की शुरुआत ख़ुद से करनी होती है।

युवक की कहानी: 18 से 19 साल का एक युवक अपनी पीढ़ी को छोड़कर बाक़ी सबके प्रति बग़ावत और तिरस्कार भरा नज़रिया रखता था। माता पिता नाराज़ थे, घर में दूरियाँ बढ़ती जा रही थीं। फिर उसने तय किया कि वह दुनिया की समस्याओं का हिस्सा बनने के बजाय उनके समाधान का हिस्सा बनेगा। अपने विचारों पर क़ायम रहते हुए उसने दूसरों की राय का सम्मान करना और परिवार में प्रेम से पेश आना शुरू किया, और धीरे धीरे घर का माहौल बदल गया।

नौकरी का आनंद कैसे लें: अगर कोई अपना जीवन बदलना चाहता है, तो शायद उसे अपनी नौकरी “बदलनी” होगी। इसके दो तरीक़े हैं। पहला, नौकरी छोड़कर दूसरी पकड़ लेना। पर याद रखिए, आप जहाँ भी जाते हैं, ख़ुद को साथ ले जाते हैं। अगर आप वही रहे, तो नई नौकरी में भी वही समस्याएँ मिलेंगी। दूसरा तरीक़ा है, उसी नौकरी में ख़ुद को बदलना।

एक आदमी ने पील से कहा कि उसकी नौकरी में कोई भविष्य नहीं, वह इसे छोड़ना चाहता है। पील ने उससे एक बहुत सफल व्यक्ति, “मिस्टर स्मिथ”, का नाम लिया और पूछा, “अगर मिस्टर स्मिथ आपकी जगह होते, तो क्या करते?” उसने कहा, “पता नहीं।” पील बोले, “कुछ दिन यही सोचिए, और फिर वही कीजिए।”

कुछ दिन बाद वह बेहतर नज़रिए के साथ लौटा: “मिस्टर स्मिथ जैसा काम करने के लिए मुझे उनके जैसा मिलनसार और सकारात्मक बनना होगा।” उसने वही करना शुरू किया, और वही नौकरी उसके लिए नए मौक़ों से भर गई।

6. आशावान: मैं सबसे अच्छे की उम्मीद रखता हूँ

पील का सबसे प्रसिद्ध सूत्र है: “सबसे अच्छे की उम्मीद रखो, और उसे पा लो” (Expect the best and get it)। विजेता मानते हैं कि आने वाला कल आज से बेहतर होगा, और इसी उम्मीद से वे आज और अच्छा करते हैं।

आशावान नज़रिए के लिए:

  • सुबह उठते ही ख़ुद से कहें: “आज कुछ अच्छा होने वाला है।”
  • किसी भी काम से पहले सबसे अच्छे नतीजे की तस्वीर मन में देखें, फिर पूरी तैयारी से काम करें।
  • बीते कल की असफलता को आने वाले कल का अनुमान न बनने दें।
  • सबसे अच्छे में विश्वास करें, सबसे अच्छा सोचें, सबसे अच्छे का लक्ष्य रखें, और उससे कम पर संतुष्ट न हों।

6 हफ़्ते का “विजेता नज़रिया” प्लान

हफ़्तानज़रियारोज़ का अभ्यास
1सकारात्मकहर समस्या पर पहले “कैसे?” पूछें, उसे टुकड़ों में बाँटें
2साहसीडर की सूची, सबसे बड़े डर पर रोज़ एक छोटा कदम
3उत्साहीसुबह का धन्यवाद, 10 पन्ने प्रेरक पढ़ाई
4शांतरोज़ रात 3 नेमतें लिखें
5आत्मविश्वासी“मेरी जगह कोई सफल व्यक्ति क्या करता?” और वही करना
6आशावानहर काम से पहले सबसे अच्छे नतीजे की तस्वीर

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Six Attitudes for Winners किताब के लेखक कौन हैं?

इसके लेखक अमेरिकी लेखक और वक्ता नॉर्मन विंसेंट पील (Norman Vincent Peale) हैं, जो “The Power of Positive Thinking” के लिए मशहूर हैं। यह किताब 1989 में छपी।

विजेताओं के 6 नज़रिए कौन से हैं?

सकारात्मक, साहसी, उत्साही, शांत, आत्मविश्वासी और आशावान।

डर पर क़ाबू कैसे पाएँ?

डर से मुक्त होने का संकल्प लें, अपने सारे डरों की सूची बनाकर एक बार में एक डर पर काम करें, और आस्था बढ़ाने वाले वाक्य रोज़ दोहराएँ।

चिंता कम करने का पील का तरीक़ा क्या है?

अपनी नेमतें गिनना: जो खोया उसकी जगह जो अब भी है उसकी सूची बनाना। इससे मन को पता चलता है कि हालात उतने बुरे नहीं, जितने लग रहे थे।

“Expect the best and get it” का क्या मतलब है?

सबसे अच्छे नतीजे की उम्मीद रखते हुए पूरी तैयारी से काम करना। उम्मीद हमारी मेहनत, व्यवहार और फ़ैसलों को बेहतर बनाती है।

यह किताब किसके लिए है?

जो लोग डर, चिंता, कम आत्म विश्वास या उत्साह की कमी से जूझ रहे हैं, और जो छोटी, आसान किताब से सकारात्मक सोच की शुरुआत करना चाहते हैं।

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