The Laws of Human Nature Summary in Hindi

The Laws of Human Nature Summary in Hindi

The Laws of Human Nature Summary in Hindi

The Laws of Human Nature Summary in Hindi

आज में Robert Greene ki book The Laws of Human Nature Book Summary in Hindi or The Laws of Human Nature in Hindi आपसे शेयर करने जा रहा हूँ, इस समरी से आप लोगों को अच्छे से समझने में पाएंगे और डिस्ट्रक्टिव टाइप के लोगों से बच पाएंगे, ये समरी आपके आत्म-विकस को बढ़ाने में भी मदद करेंगी। तो चलिए शुरू करते हैं

LAW NO 1: अपनी भावनाओं पर जीत हासिल करें।

आप जो सोचते हैं आप वह बन जाते हैं, जैसे, जब भी हमारे जीवन में कोई दुर्घटना होती है तो हम सबसे पहले अपने आस पास के लोगों पर और फिर अंत में अपने हालातों को दोष देने लगते है। हमारी सोच इतनी नेगेटिव (नकारात्मक) हो जाती है कि हम ये सोचने लगते है कि दुनिया का सब बुरा, बस मेरे ही साथ हो रहा है।

ये मौलिक तर्क हीनता ही हमारे जीवन में हमारी भावनाओं को नेगेटिव (नकारात्मक) बनाती है।

इसे दूर करने का सबसे बड़ा उपाय है, रेशनलिटी यानी तर्कसंगत। लेकिन जब भावनाएँ हमारी Thought Process (विचार प्रक्रियाओं) को लगातार प्रभावित कर रही हो तो तर्क का प्रयोग मुश्किल हो जाता है। इसीलिए आवश्यक है कि आप तर्क और भावना के बीच एक संतुलन खोजें। हम तर्क से भावनाओं को अलग नहीं कर सकते, परन्तु इनके संतुलन से आप अपने जीवन में नियंत्रण ला सकते हैं। आपका अपनी भावनाओं और अपनी सोच पर जीत हासिल करना ही आपके जीवन की सबसे बड़ी जीत बन जाता है।

उदाहरण के लिए, एक बच्चा जिसकी माँ ने उसे कभी प्रेम नहीं दिया, उसे ये लगने लगा कि वह प्यार के योग्य नहीं है। बाद में जब उसके जीवन में, एक महिला आई तो भी उसका ये डर बरकरार रहा। उसे यह लगता था कि वह प्रेम के योग्य नहीं इसीलिए वह लड़की उसे एक दिन छोड़ देगी। उसने शक के कारण ओवर रियेक्ट (overreact) करना और बार-बार झगड़े करना शुरू कर दिया। उसकी भावनाओं के कारण उसने जो हरकतें की उन्होंने उसके डर को सच में बदल दिया और उस लड़की ने उसे छोड़ दिया।

LAW NO. 3: लोगों के ढोंग से बचें।

हम सब एक्टर्स हैं। हर कोई अपने जीवन में जाने अनजाने में ही सही, पर जूठ का एक मुखोटा पहन कर रखता है। हम कहना कुछ और चाहते हैं और कह कुछ और देते हैं।

लोगों के झूट के मुखोटे के पार देखने के लिए आपको उनकी Body language पर ध्यान देना होगा। मिल्टन एरिकसन, ह्य्पोथरेपी के निर्माता ने खुद के ही जीवन से अनुभव लेकर body language को पढ़ना सीखा।

उन्होंने एक बार तो बस अपनी पेशेंट को देखते ही उसके एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के बारे में बता दिया। वह औरत अपने रिश्तों से बहुत दुखी थी और बाद में Erickson ने उसकी काफी सहायता की।

आप भी लोगों की Body Language को ध्यान से परख कर उनका मन पड़ सकते हैं। लोगों की body language पढ़ने के अनेक तरीके हैं, जिन सब के लिए ज़रूरी है आप उनके हर एक्शन पर ध्यान दे। आंखों के नीचे के खड़ों को देखकर आप ये तक बता सकते हैं कि अगले इंसान की मुस्कुराहट असली है या नकली।

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The Laws of Human Nature Book Summary in Hindi

LAW NO. 4: लोगों की चरित्र की ताकत को पहचानें।

चरित्र एक प्राथमिक मूल्य है जिससे ये मूल्यांकन किया जा सकता है कि सामने वाला व्यक्ति आपके साथ के लायक है या नहीं। उनका चरित्र उनके आकर्षण और बुद्धिमत्ता से अधिक मायने रखता हैं। अच्छे व्यक्तित्व वाले व्यक्ति हमेशा अच्छा चरित्र रखते हैं, जो अच्छे पालन-पोषण, बेहतर जीन्स (genes) और निरंतर सुधार से आता है। मजबूत चरित्र वाले व्यक्ति आलोचना सह सकते हैं और अनुभव से सीखते हैं। वह आसानी से हार नहीं मानते क्योंकि वह हमेशा बेहतर करना चाहते हैं। वह अपने व्यक्तिगत जीवन से शर्मिंदा नहीं होते।

वहीं दूसरी ओर कमजोर लोग: परिस्थितियों से हार मान लेते हैं। वे बहुत सुधार नहीं कर सकते क्योंकि वे आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर सकते।

लोगों को समझने के लिए आपको उनके चरित्र का मज़ाक बनाने की कोशिश करनी चाहिए। उनकी आलोचना कर और उन्हें कोई चुनौती पूर्ण काम देकर ही आप उनके चरित्र को समझ पाएंगे।

खुद को बेहतर बनाने के लिए केवल मजबूत पात्रों के साथ जुड़े क्योंकि बुद्धि और आकर्षण से कई गुना ऊपर चरित्र की ताकत है। अपने चरित्र को स्वीकार करना भी आवश्यक है। रॉबर्ट ग्रीन का कहना है कि हम सभी अपने जीन्स (genes) और पालन पोषण के बजाय भी एक मजबूत चरित्र रखते हैं। इसे स्वीकार करने से इनकार करना, इसे बेहतर बनाने से इनकार करने के समान है।

LAW NO. 6: अपने दृष्टिकोण को ऊंचा करें।

हमेशा दूर की सोच रखें। अपने दृष्टिकोण को कभी नए रुझानों का शिकार न होने दे। अपने दीर्घकालिक (farsighted) लक्ष्यों के आधार पर जो आप शुरू करते हैं उसे प्राथमिकता देते हैं, उसके साथ रहें। यही एक तरीका है खुशहाली एवं कामयाबी का।

उदहारण के तौर पर Spain के राजा King Phillip 2 जो कि पेपरवर्क के बहुत शौकीन थे, अपना अधिकतम समय व्यर्थ की उलझनों में बिता दिया करते थे। एक दिन उन्हीने turkey पर युद्ध की घोषणा कर दी। ये निर्णय बिना दूर की सोच रख कर लिया गया था, जिस का फल ये मिला कि ये युद्ध 14 साल तक चला और Spain को केवल नुकसान ही मिला।

इसलिए दोस्तों हमेशा अपने दृष्टिकोण को ऊँचा रखे और हमेशा दूर की सोच कर ही कोई निर्णय ले।

LAW NO. 8. अपना नजरिया बदलकर अपनी परिस्थितियाँ बदलें।

आप मोहरे नहीं बल्कि आप एक खिलाड़ी हैं। मन और शरीर एक हैं और ye एक दूसरे को प्रभावित करते है।

खुद को जन्म से मिली ताकत तक सीमित न देखें: सोचें कि आप बढ़ सकते हैं और सुधार कर सकते हैं। क्योंकि हम जो सोचते है हम वह बन जाते हैं।

एक positive approach (सकारात्मक दृष्टिकोण) एक बेहतर परिस्थिति को जन्म देता है।

आईये इसे एक एक्साम्पल से समझते हैं-जब Franklin Roosevelt को पोलियो हुआ तो उसकी माँ ने अपनी नकारत्मक सोच के चलगे उसे कमरे में बंद रखने का प्रयास किआ। उसे लगा कि वह अब कभी भी ठीक नहीं हो सकता। परन्तु Roosevelt की बीवी Eleanor जानती थी कि वह ठीक हो सकता है। उसने अपना नज़रिया बदला जिससे Franklin Roosevelt के जीवन और को सपनों को फिर से एक नई दिशा मिली।

तो दोस्तों आप भी अपनी नजरिया बदलकर आपने परिस्तितियों को बदल सकते है इसलिए आपको केवल अपने अंदर की positivity को बरकरार रखना है। अपने लिये positive चीज़ें सोचें तो आपके साथ positive ही होगा।

LAW NO. 9: अपनी Dark side का सामना करें।

हम अपनी संस्कृति के सभी आदर्शों जैसे “अच्छा होना” और सामाजिक मूल्यों को आंतरिक (internalize) रूप देते हैं, जो अक्सर हमारे समाज के सुचारू (smooth functioning) संचालन के लिए आवश्यक होते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में हमारे व्यक्तित्व का एक बडा हिस्सा एक दमित (repressive) कोने में धकेल दिया जाता है जिसे “Jung” Shadow कहते हैं।

यदि आप इस अंधेरे पक्ष को अपने व्यक्तित्व में शामिल कर इसे स्वीकार करें तो आप इसे अच्छे के लिए उपयोग करके अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

तो अब देखिए कि आप कैसे इस Shadow (छाया) को अपने भीतर बदलाव लाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

  1. छाया यानी shadow को अपने भीतर खोजें (अपने आप में विपरीत लक्षण जैसे भावनात्मक असंतुलन (emotional instability) , असुरक्षा कि खोज करें।)
  2. इससे भागने का प्रयास न करें
  3. अपने व्यक्तित्व की इस डार्क साइड को भी अपनाएँ।
  4. इसका सही इस्तेमाल करें (जैसे कि कामयाबी के ये अपनी भूख बढ़ाने को।)

The Laws of Human Nature By Robert Greene Book Summary in Hindi

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LAW NO. 11: अपनी हदों को पहचानें

दोस्तों, हम सभी को दूसरों से श्रेष्ठ महसूस करने की आवश्यकता महसूस होती है। लेकिन जितना अधिक हम सफल होते हैं, उतना ही श्रेष्ठ हम महसूस करते हैं, जिससे वास्तविकता यानी रियलिटी से आपका रिश्ता टूट जाता है। आपकी सही ग़लत की समझ खत्म हो जाती है और आपको कामयाबी से हाथ धोना पड़ता है।

इसलिए अपनी श्रेष्ठ होने की ज़रूरतों को समझो।

ऊर्जा केंद्रित कर, एक चीज पर गहराई से और पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करें। ऐसे लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें जो आपकी क्षमता को जँचता है और जहाँ तक आप पहुँच सकते हैं।

इसमे Michael Eisner का उदहारण सबसे उचित है क्योंकि वे जितनी ऊँचाई से कामयाबी की सीढ़ी चढ़ा, उतनी ही बुरी तरह गिरा भी। Disney और ABC जैसी विशाल कंपनियों को बनाने वाले इस व्यक्ति के व्यवसायिक अंत बहुत बुरा हुआ और इसका कारण यह था कि कुछ बड़ी कामयाबियों के बाद Eisner ने अपनी आंखों पर श्रेष्ठता कि पट्टी बाँध ली थी।

LAW NO. 13: उद्देश्य की भावना के साथ आगे बढ़े।

आप जैसे युवाओं को अपने सही जुनून और उद्देश्य को खोजने के लिए विभिन्न चीजों का प्रयोग करना चाहिए। हम सब जानते हैं कि अपने उद्देश्य को प्राप्त करने की सबसे बड़ी बाधा है मेहनत से होने वाले दर्द, कठिनाई और बोरियत (boredom) से भरे वह मुश्किल क्षण।

Martin Luther King Jr. का जीवन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

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LAW NO. 14: Group के डाउनवर्ड पुल का विरोध करें

हम मनुष्य समूह यानी ग्रुप से आकर्षित होते हैं, हम समूह की ऊर्जा में खुद को खोना पसंद करते हैं। हम इसमें फिट होने की आवश्यकता महसूस करते है। हम खुद को यह बताना चाहते हैं कि हम स्वतंत्र हैं, लेकिन असल में ऐसा नहीं हैं: आसपास के लोग हम पर दबाव डालते हैं। इस सत्य को नकारने से बेहतर है इसका लाभ उठाना।

अपने group को एक positive दिशा में ले जाओ। उद्देश्य की सामूहिक भावना, लगातार उत्पादक (productive) भावनाओं को जन्म देती है। अपनी टीम का नेता बनकर खुद को एवं अपने group को toxicity और ऐसे अन्य नकारात्मक विचारों से बच कर उसमे अच्छे विचारों को प्रवाहित करें।

उदाहरण के तौर पर जब कभी भी आप पड़ने का प्रयत्न करते हैं तो आपका ग्रुप आपको घुमने या अन्य लालच देकर उसमें बाधा डाल सकते हैं। आपको अपने दृढ़ संकल्प के माध्यम से ऐसे हालातों से बचना होगा।

LAW NO. 15: उन्हें खुद को फॉलो करना सिखाएँ।

उन्होंने ये ठान लिया था कि वह अपने काम के बल बूते पर अपना नाम बनाएगी। उन्होंने इंग्लैंड को केवल Economic मंदी से ही नहीं निकाला परन्तु उसे एक बेहतर दिशा भी दी। Elizabeth हर काम खुद करने में विश्वास रखती थी। उन्होंने अपने जीवन के अनेक घण्टे प्रजा को समर्पित कर दिए, जिससे प्रजा का प्रेम उनके लिए बढ़ता ही रहा।

हमें भी इससे सीख लेकर ये समझना चाहिए कि लोगों का एक लीडर की तरफ प्रेम सिर्फ़ उसके leader होने के कारण नहीं परन्तु उसके विशाल व्यक्तित्व के कारण भी होना चाहिए।

असल में लोग एक लीडर से प्रेम भी करते है और नफ़रत भी करते है, आपको बस एक ऐसी मिसाल बनना है जिसे वह फॉलो करें।

LAW NO. 16: Law of Aggression

समाज हमें हमारे गुस्से को छुपाना बचपन से ही सीखा देता है। लेकिन हम जितने भी कोशिश कर के देख ले, हम सब में aggression होता ही होता है इसलिए इसे छुपाने से बेहतर है कि हम इसका सही इस्तेमाल करे। क्यूँकि अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो कोई और जो अपने ग़ुस्से को सम्भालना जनता है आप पर हावी हो जयेगा।

अपने हाव भाव पर ध्यान दीजिए जो आप पर हमेशा हावी हो जाते है। इसे John D. Rockefeller के उदहारण से समझ कर देखते है। जिसकी success story को इतिहास में सबसे उल्लेखनीय कहानियों में से एक माना जाता है।

बहुत ही कम समय (कुछ बीस वर्ष) , वह समाज के निचले हिस्से से अमेरिका में सबसे बड़े निगम के संस्थापक और मालिक बनें और उसके तुरंत बाद दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति के रूप में उभरे।

देखा जाए तो न ही वे बहुत intelligent थे और न ही बहुत किस्मत वाले। पर वे हर परिस्थिति और प्रतिद्वंद्वी पर हावी रहते थे और हर opportunity का भरपूर इस्तेमाल करते थे। इस तरह की ऊर्जा को हम aggressive energy कहेंगे।

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S.K. Choudhary

नमस्कार दोस्तों, हमारे इस ब्लॉग में आपका स्वागत है, मेरा नाम है S.K. Choudhary (ऐस. के. चौधरी) और मैं एक ब्लॉगर और यूटूबर हूँ। में एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ और मेरा highest एजुकेशन MBA Finance है। मुझे पढ़ने और पढ़ाने का शोख है इसलिए में पार्ट टाइम मैं ब्लॉग लिखता हूँ और यूट्यूब के लिए बुक समरी और मोटिवेशनल वीडियो बनता हूँ।

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